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#✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 - भौमभावफल के अनुसार, मंगल की स्थिति व्यक्ति के  महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर से इसे समझते हैंः माध्यम *सप्तम भाव में मंगल* "अनुद्धारभूतेन पाणिग्रहेण प्रयाणेन वाणिज्यतो नो নিবৃনি:[ स्पर्धिनां मेदिनीजः प्रहारार्दनैः सप्तमे मुहुर्भगदः दम्पतिघ्नः। ।' अर्थः सप्तम भाव में मंगल होने से व्यक्ति के दाम्पत्य जीवन में परेशानियाँ आती हैं, और वह अपने शत्रुओं के साथ  संघर्ष ्में रहता है। वह विवाह के लिए या व्यापार के कारण विदेश में यात्रा करता है, लेकिन फिर भी घर नहीं आ पाता। *अष्टम भाव में मंगल* "शुभास्तस्य किं खेचराः कुर्युरन्ये विधानेषपि चंदष्टमे भूमिसूनुः| किं न शत्रूयते सत्कृतोडपि प्रयत्ने कृते " भूयते सखा चोपसर्गः/ ।" अर्थः अष्टम भाव में मंगल होने से व्यक्ति के भाग्य में स्थित शुभ ग्रह भी कुछ नहीं कर सकते, और उसका मित्र अन्य भी शत्रु बन जाता है। वह जो भी कार्य करता है, उसमें विघ्न आता है। भौमभावफल के अनुसार, मंगल की स्थिति व्यक्ति के  महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर से इसे समझते हैंः माध्यम *सप्तम भाव में मंगल* "अनुद्धारभूतेन पाणिग्रहेण प्रयाणेन वाणिज्यतो नो নিবৃনি:[ स्पर्धिनां मेदिनीजः प्रहारार्दनैः सप्तमे मुहुर्भगदः दम्पतिघ्नः। ।' अर्थः सप्तम भाव में मंगल होने से व्यक्ति के दाम्पत्य जीवन में परेशानियाँ आती हैं, और वह अपने शत्रुओं के साथ  संघर्ष ्में रहता है। वह विवाह के लिए या व्यापार के कारण विदेश में यात्रा करता है, लेकिन फिर भी घर नहीं आ पाता। *अष्टम भाव में मंगल* "शुभास्तस्य किं खेचराः कुर्युरन्ये विधानेषपि चंदष्टमे भूमिसूनुः| किं न शत्रूयते सत्कृतोडपि प्रयत्ने कृते " भूयते सखा चोपसर्गः/ ।" अर्थः अष्टम भाव में मंगल होने से व्यक्ति के भाग्य में स्थित शुभ ग्रह भी कुछ नहीं कर सकते, और उसका मित्र अन्य भी शत्रु बन जाता है। वह जो भी कार्य करता है, उसमें विघ्न आता है। - ShareChat