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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - नमो काल काले।I नमसतसतु दिआलेIl नमसर्त अबरने ।। <2@$> नमसतं अमरने।। RI गुरु गोविंद सिंह जी ने ईश्वर को केवल एक शांत सत्ता के रूप में नहीं , बल्कि एक गतिशील और सामर्थ्यवान शक्ति के भिखारी लिए ' रूप में परिभाषित किया है जो अन्याय के काल' है g और शरणागत के दयालु' है उनकी कोमलता को जिओ दर्शाया है। ईश्वर केवल दंड देने वाला या संहारक नहीं है,बल्कि वह अत्यंत कृपालु और क्षमाशील है।वह जितना 46TST शक्तिशाली है, उतना ही दया का सागर भी है। मनुष्य अक्सर ईश्वर को किसी विशेष रंग,या जातिगत पहचान में वाले बांधने की कोशिश करता है। जब की ईश्वर का कोई भौतिक शरीर या सामाजिक वर्ग नहीं है। जब ईश्वर का कोई @IqT वर्ण नहीं है, तो उसके बनाए इंसानों में श्रेष्ठता या नीचता का भेद व्यर्थ है। परमात्मा जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त है। परमात्मा एक ऐसी सत्ता है जो अत्यंत शक्तिशाली काल का काल होने के बावजूद परम दयालु है, और वह किसी मृत्यु में नहीं बंधा है। भी मानवीय सीमा रंग, जाति, नमो काल काले।I नमसतसतु दिआलेIl नमसर्त अबरने ।। <2@$> नमसतं अमरने।। RI गुरु गोविंद सिंह जी ने ईश्वर को केवल एक शांत सत्ता के रूप में नहीं , बल्कि एक गतिशील और सामर्थ्यवान शक्ति के भिखारी लिए ' रूप में परिभाषित किया है जो अन्याय के काल' है g और शरणागत के दयालु' है उनकी कोमलता को जिओ दर्शाया है। ईश्वर केवल दंड देने वाला या संहारक नहीं है,बल्कि वह अत्यंत कृपालु और क्षमाशील है।वह जितना 46TST शक्तिशाली है, उतना ही दया का सागर भी है। मनुष्य अक्सर ईश्वर को किसी विशेष रंग,या जातिगत पहचान में वाले बांधने की कोशिश करता है। जब की ईश्वर का कोई भौतिक शरीर या सामाजिक वर्ग नहीं है। जब ईश्वर का कोई @IqT वर्ण नहीं है, तो उसके बनाए इंसानों में श्रेष्ठता या नीचता का भेद व्यर्थ है। परमात्मा जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त है। परमात्मा एक ऐसी सत्ता है जो अत्यंत शक्तिशाली काल का काल होने के बावजूद परम दयालु है, और वह किसी मृत्यु में नहीं बंधा है। भी मानवीय सीमा रंग, जाति, - ShareChat