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भजन अब्दुल समद #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - भजन ' हम को मिलत नहीं मोहन ्नगरी हम को मिलत नहीं মীকন-নযাঠী कैसी करूँ अब कहो मोरी মতানী बीती जात मोरी मैहल सगरी पिया मिलन के होत शगुन हैं कागा बोले निसदिन नगरी मस्त सखि जीवें जल बिन मछर बग खबर लो पीतम हमरी (अब्दुल समद) Want . Motivational Videos App भजन ' हम को मिलत नहीं मोहन ्नगरी हम को मिलत नहीं মীকন-নযাঠী कैसी करूँ अब कहो मोरी মতানী बीती जात मोरी मैहल सगरी पिया मिलन के होत शगुन हैं कागा बोले निसदिन नगरी मस्त सखि जीवें जल बिन मछर बग खबर लो पीतम हमरी (अब्दुल समद) Want . Motivational Videos App - ShareChat