शीर्षक: 🌿 "अब जटा #जय श्री कृष्ण क्या सुलझाते हो प्रभु, अब तो जीवन ही सुलझा दो..." एक अद्भुत भक्त कथा 🌿
वृंदावन के एक बाबा की यह कथा आपकी आँखों में आँसू ला देगी।
एक बाबा थे, जो दिन-रात युगल सरकार (श्री राधा-कृष्ण) की उपासना में लीन रहते थे। एक दिन कुञ्जवन के रास्ते में उनकी जटा एक वटवृक्ष में बुरी तरह उलझ गई।
बाबा ने प्रयास किया, पर जटा सुलझी नहीं। संतों की हठ भी अद्भुत होती है! बाबा वहीं आसन जमाकर बैठ गए और ठान लिया—"जिसने यह जटा उलझाई है, वही सुलझाने आएगा, अन्यथा मैं यहीं प्राण त्याग दूँगा।"
तीन दिन बीत गए। बाबा भूखे-प्यासे बैठे रहे।
तीसरे दिन एक 5-7 वर्ष का सांवला-सलोना ग्वाल आया और बड़े दुलार से बोला—"बाबा! तुम्हारी जटा उलझ गयी, लाओ मैं सुलझा दूँ?"
जैसे ही बालक बढ़ा, बाबा बोले—"रुक जा! हाथ मत लगाना। जिसने उलझाई है, वही सुलझाएगा। तू जा यहाँ से।"
बालक ने बहुत समझाया, पर बाबा नहीं माने। अंततः उस ग्वाल के रूप से साक्षात् मुरलीधर भगवान बांके बिहारी प्रकट हो गए।
🌸 ठाकुरजी बोले: "महात्मन! लो मैं आ गया। अब जटा सुलझा दूँ?"
बाबा ने फिर रोका—"ठहरो! पहले बताओ तुम कौन से कृष्ण हो? द्वारिकाधीश हो, मथुराधीश हो, या यशोदानंदन हो?"
भगवान ने पूछा—"तुम्हें कौन सा चाहिए?"
बाबा बोले—"मैं तो नित्य निकुञ्ज बिहारी का उपासक हूँ।"
ठाकुरजी बोले—"मैं वही तो हूँ।"
बाबा ने फिर टोका—"नहीं! मेरे नित्य निकुञ्ज बिहारी तो मेरी स्वामिनी श्रीराधारानी के बिना एक पल भी नहीं रहते। तुम तो अकेले हो।"
⚡ इतना कहते ही बिजली सी चमकी और ठाकुरजी के वाम भाग में साक्षात् वृषभानु नंदिनी श्री राधिकारानी प्रकट हो गईं।
युगल सरकार का यह अद्भुत दर्शन पाकर बाबा का धैर्य टूट गया। वे फूट-फूट कर रोने लगे और चरणों में गिर पड़े।
जब युगल सरकार उनकी जटा सुलझाने आगे बढ़े, तो बाबा ने जो कहा, वह भक्ति की पराकाष्ठा थी:
😭 "प्रभु! अब जटा क्या सुलझाते हो... अब तो जीवन ही सुलझा दो।"
इतनी प्रार्थना करते ही बाबा का शरीर शांत हो गया और प्रिया-प्रियतम ने उन्हें अपनी नित्य लीला में स्थान दे दिया।
ऐसी अनन्य निष्ठा को कोटि-कोटि नमन। 🙏
।। जय जय श्री राधे ।।


