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#☝आज का ज्ञान अपनी अपनी समझ ------ एक राजाने सोचा की श्रीमदभागवत कथा को सुनकर राजा परीक्षित का उध्दार हुआ था । यदि मै भी कथा को सुनु तो मेरा भी उध्दार हो जायगा। राजाने कथा सुनाने के लिये एक पण्डित जी को राजी किया। पण्डितजी ने राजाको कथा सुनाई सातवे दिन कथा की पुर्णाहुति हो गयी। राजाने पण्डितजी से आज्ञा लेकर प्रश्न किया की आप मुझे एक बात बताओ कथा सुनाने मे न तो आपने कोई कमी की और न ही सुननेमे मैने कोई कसर छोडी फिर भी मेरा मन अशान्त क्यो है मेरा कल्याण क्यो नही हुआ? पण्डित जी बोले यह मेरी समझसे बाहर की बात है। मेरे गुरुजी ही इस प्रश्नका उत्तर दे सकते है। राजाको लेकर पण्डितजी अपने गुरुजीके पास पहुचे और अपना प्रश्न पूछा। गुरुजीने राजा से कहाँ राजन थोडी देरके लिये आप मुझे राजा मान लो और मेरी आज्ञाका पालन करो।राजा बोले जैसी आपकी आज्ञा।फिर गुरु सैनिकोँ से बोले राजा को और पण्डित जीको खम्भेसे बाँध दो।जब सैनिको ने दोनोँको बाँध दिया| तब गुरु जी पण्डितजीसे बोले की आप राजा के बन्धन खोल दो| तब पण्डित जी बोले मै खुद बधाँ हुँ मैँ राजाको कैसे छुडाऊ। फिर गुरुजीने राजासे कहा की आपही पण्डितजीके बन्धनोँको खोल दो। राजाने भी अपनी असमर्थता जताते हुये कहाँ कि जब मैँ स्वयं बधाँ हुआ हुँ फिर पण्डितजी को कैसे छुडाऊ। गुरुजी बोले कि राजन मैने आपके प्रश्नका उत्तर दे दिया। जो मनुष्य स्वयं संसारके बन्धनो मे अच्छी तरह बँधा हुआ है वह किसी और को कैसे मुक्त करा सकता है। ---:: ॐ :: ---
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