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दोहा रैदास #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - alat रैदास जन्मे कउ हरस का, मरने कउ का सोक। बाजीगर के खेल कूं, समझत नाहीं लोक।। भावार्थः रैदास कहते हैं कि जन्म के समय कैसा हर्ष और मृत्यु पर कैसा दुःख! यह तो ईश्वर की लीला है। संसार इसे नहीं समझ पाता। जिस प्रकार लोग बाज़ीगर के तमाशे को देखकर हर्षित और दुःखी होते हैं, उसी प्रकार ईश्वर भी संसार में जन्म - मृत्यु की लीला दिखाता है। अतः ईश्वर के इस विधान पर हर्षित अथवा नहीं दुःखी चाहिए। గెHI रैदास Motivational Videos Appl Want alat रैदास जन्मे कउ हरस का, मरने कउ का सोक। बाजीगर के खेल कूं, समझत नाहीं लोक।। भावार्थः रैदास कहते हैं कि जन्म के समय कैसा हर्ष और मृत्यु पर कैसा दुःख! यह तो ईश्वर की लीला है। संसार इसे नहीं समझ पाता। जिस प्रकार लोग बाज़ीगर के तमाशे को देखकर हर्षित और दुःखी होते हैं, उसी प्रकार ईश्वर भी संसार में जन्म - मृत्यु की लीला दिखाता है। अतः ईश्वर के इस विधान पर हर्षित अथवा नहीं दुःखी चाहिए। గెHI रैदास Motivational Videos Appl Want - ShareChat