जय श्री सीताराम 🌹 जय हिन्दू राष्ट्र 🌹 🙏
☀️ सुन्दर काण्ड ☀️ दोहा २१☀️ पृष्ठ २२☀️
कह लंकेस कवन तैं कीसा। केहि के बल घालेहि बन खीसा॥
की धौं श्रवन सुनेहि नहिं मोही ।
देखउँ अति असंक सठ तोही ॥१॥
लंकापति रावणने कहा- रे वानर ! तू कौन है? किसके बलपर तूने वन को उजाड़ कर नष्ट कर डाला? क्या तूने कभी मुझे (मेरा नाम और यश) कानों से नहीं सुना? रे शठ ! मैं तुझे अत्यन्त निःशङ्क देख रहा हूँ ॥१॥
मारे निसिचर केहिंअपराधा।कहु सठ तोहि न प्रानकइ बाधा॥
सुनु रावन ब्रह्मांड निकाया ।
पाइ जासु बल बिरचति माया ॥२॥
तूने किस अपराध से राक्षसों को मारा? रे मूर्ख ! बता, क्या तुझे प्राण जाने का भय नहीं है? [हनुमान्जी ने कहा- हे रावण ! सुन; जिनका बल पा कर माया सम्पूर्ण ब्रह्माण्डों के समूहों की रचना करती है ॥२॥
जाकें बल बिरंचि हरि ईसा। पालत सृजत हरत दससीसा॥
जा बल सीस धरत सहसानन ।
अंडकोस समेत गिरि कानन ॥३॥
जिनके बल से हे दशशीश! ब्रह्मा, विष्णु, महेश (क्रमशः) सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करते हैं; जिनके बल से सहस्र- मुख (फणों) वाले शेषजी पर्वत और वन सहित समस्त ब्रह्माण्ड को सिर पर धारण करते हैं; ॥३॥
धरइ जो बिबिधदेह सुरत्राता।तुम्ह से सठन्ह सिखावनु दाता॥
हर कोदंड कठिन जेहिं भंजा ।
तेहि समेत नृप दल मद गंजा ॥४॥
जो देवताओं की रक्षा के लिये नाना प्रकार की देह धारण करते हैं और जो तुम्हारे-जैसे मूर्खा को शिक्षा देनेवाले हैं; जिन्होंने शिवजी के कठोर धनुष को तोड़ डाला और उसी के साथ राजाओं के समूह का गर्व चूर्ण कर दिया ॥४॥
खर दूषन त्रिसिरा अरु बाली ।
बधे सकल अतुलित बल साली ॥५॥
जिन्होंने खर, दूषण, त्रिशिरा और बालि को मार डाला, जो सब-के-सब अतुलनीय बलवान् थेः ॥५॥
दो०- जाके बल लवलेस तें जितेहु चराचर झारि ।
तासु दूत मैं जा करि हरि आनेहु प्रिय नारि ॥२१॥
जिनके लेशमात्र बल से तुमने समस्त चराचर जगत् को जीत लिया और जिनकी प्रिय पत्नी को तुम [चोरी से] हर लाये हो, मैं उन्हींका दूत हूँ ॥२१॥
#सीताराम भजन


