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#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी #💔दर्द भरी कहानियां
✍️ अनसुनी शायरी - मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए 351 # मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए 351 # - ShareChat