सुप्रभात
तद्विकार स्त्रुटेत्तच्च
ह्यशक्यं लोह त्रोटनम्।
मानवं निर्बलं चित्तं
पराजेतुं च शक्नुयात्।।
*भावार्थ :- लोहे को तोड़ना असंभव है, लेकिन उसकी बीमारी (जंग) ही लोहे को तोड़ डालती है। इस प्रकार एक व्यक्ति को हराया नहीं जा सकता है, लेकिन उसके कमजोर विचार, दोष व दुर्गुण ही उसकी हार का कारण बनते हैं।* #📒 मेरी डायरी #🙏सुविचार📿 #👫 हमारी ज़िन्दगी #☝अनमोल ज्ञान #☝ मेरे विचार

