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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - सबकचाला पाढ सोना पत्थर एक बराबर रोने-पीटने लगा। उसके रोने सोना नदारद पाकर एक गांव में एक जमींदार रहता था। वह जितना की आवाज सुनकर एक राहगीर ने उससे कारण  कंजूस भी। अपने धन को अमीर था, उतना ही जाना। फिर उसने पूछा- तुम अपना सोना गड्ढे में रखने का उसने एक अजीब तरीका सुरक्षित रखते ही क्यों थे? कंजूस ने कहा- उसे हमेशा निकाला था। वह सोना खरीदता और उसे अपने सहेजकर रखने के लिए। राहगीर ने कहा- तब  खोदकर डाल देता। रोज खेत जाना में गड्ढा  खेत 3` कुछ पत्थरों को गड्ढे में डालकर कल्पना और गड्ढे को खोदकर सोने के सिककों की गिनती  करो कि यही तुम्हारा सोना है क्योंकि ये पत्थर करना उसकी दिनचर्या का हिस्सा था। चोर ने उसे गड्ढे में से सोना किसी काम के नहीं हैं और वो सोना भी तुम्हारे एक दिन एक भी तुम्हारे किसी काम का नहीं था। निकालकर गिनते हुए देख लिया। मौका मिलते मौरल ऑफ द स्टोरी : जिस धन का कोई उपयोग  ही वह गड्ढे से सोना निकालकर भाग गया। मिनट रीड अगले दिन जब कंजूस खेत में पहुंचा तो सारा नहो, उसका कोई मोल नहीं। सबकचाला पाढ सोना पत्थर एक बराबर रोने-पीटने लगा। उसके रोने सोना नदारद पाकर एक गांव में एक जमींदार रहता था। वह जितना की आवाज सुनकर एक राहगीर ने उससे कारण  कंजूस भी। अपने धन को अमीर था, उतना ही जाना। फिर उसने पूछा- तुम अपना सोना गड्ढे में रखने का उसने एक अजीब तरीका सुरक्षित रखते ही क्यों थे? कंजूस ने कहा- उसे हमेशा निकाला था। वह सोना खरीदता और उसे अपने सहेजकर रखने के लिए। राहगीर ने कहा- तब  खोदकर डाल देता। रोज खेत जाना में गड्ढा  खेत 3` कुछ पत्थरों को गड्ढे में डालकर कल्पना और गड्ढे को खोदकर सोने के सिककों की गिनती  करो कि यही तुम्हारा सोना है क्योंकि ये पत्थर करना उसकी दिनचर्या का हिस्सा था। चोर ने उसे गड्ढे में से सोना किसी काम के नहीं हैं और वो सोना भी तुम्हारे एक दिन एक भी तुम्हारे किसी काम का नहीं था। निकालकर गिनते हुए देख लिया। मौका मिलते मौरल ऑफ द स्टोरी : जिस धन का कोई उपयोग  ही वह गड्ढे से सोना निकालकर भाग गया। मिनट रीड अगले दिन जब कंजूस खेत में पहुंचा तो सारा नहो, उसका कोई मोल नहीं। - ShareChat