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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - =_ 3 dbproyci 200 HoT सारी दुनिया होली रंगों के साथ आपसी प्रेम और भाईचारे का जश्न मनाती है॰ वहीं तरफ खखालसे का होला महल्ला' वीरता, दूसरी अनुशासन और रूहानियत का प्रतीक है।गुरु गोविंद सिंह जी ने में एक होली के कोमल त्यौहार को 'होला महल्ला' के रूप নযা लगे और वीर रस से भरपूर रूप दिया।ॅ इसका उद्देश्य सिखों को केवल रंगों तक सीमित न रखकर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना था। होला' अरबी शब्द 'हलूल' से आया है जिसका अर्थ है आक्रमण करना%, और मिहल्ला उस स्थान को कहते हैं आज भी निहंग सिंह अपनी पारंपरिक वेशभूषा तेरा जहाँ सेना ठहरी हो। में किलों पर प्रतीकात्मक चढ़़ाई करते हैं॰ जो यह याद दिलाता है कि एक आध्यात्मिक व्यक्ति को भीतर से शांत और बाहर से शूरवीर होना चाहिए -४! होली की कोमलता जब खालसे की वीरता से मिलती है॰ तो वह 'होला महल्ला' बन जाती है।" वाहेगुरु जी का भाणा राज करेगा खालसा, आकी रहे हादसा वाहेगुरु जी की फतेह जी ख्वार होइ सभ मिलैंगे, बचै शरन जो होइ।। न कोइ। शरन गुरु गोबिंद सिंह जी आप जी दे चरण दी चाहिडि जी है..!! =_ 3 dbproyci 200 HoT सारी दुनिया होली रंगों के साथ आपसी प्रेम और भाईचारे का जश्न मनाती है॰ वहीं तरफ खखालसे का होला महल्ला' वीरता, दूसरी अनुशासन और रूहानियत का प्रतीक है।गुरु गोविंद सिंह जी ने में एक होली के कोमल त्यौहार को 'होला महल्ला' के रूप নযা लगे और वीर रस से भरपूर रूप दिया।ॅ इसका उद्देश्य सिखों को केवल रंगों तक सीमित न रखकर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना था। होला' अरबी शब्द 'हलूल' से आया है जिसका अर्थ है आक्रमण करना%, और मिहल्ला उस स्थान को कहते हैं आज भी निहंग सिंह अपनी पारंपरिक वेशभूषा तेरा जहाँ सेना ठहरी हो। में किलों पर प्रतीकात्मक चढ़़ाई करते हैं॰ जो यह याद दिलाता है कि एक आध्यात्मिक व्यक्ति को भीतर से शांत और बाहर से शूरवीर होना चाहिए -४! होली की कोमलता जब खालसे की वीरता से मिलती है॰ तो वह 'होला महल्ला' बन जाती है।" वाहेगुरु जी का भाणा राज करेगा खालसा, आकी रहे हादसा वाहेगुरु जी की फतेह जी ख्वार होइ सभ मिलैंगे, बचै शरन जो होइ।। न कोइ। शरन गुरु गोबिंद सिंह जी आप जी दे चरण दी चाहिडि जी है..!! - ShareChat