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#❤️जीवन की सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ 🌸 नाम की महिमा – श्रद्धा की सच्ची कहानी 🌸 वृंदावन की एक सरल हृदय गोपी प्रतिदिन दूध और दही बेचने के लिए मथुरा जाया करती थी। एक दिन व्रज में एक संत पधारे। गोपी भी उनकी कथा सुनने पहुँची। संत कथा में समझा रहे थे— “भगवान के नाम की महिमा अपार है। उनका नाम बड़े से बड़े संकट को दूर कर देता है। यह नाम ही तो इस जन्म-मरण रूपी भवसागर से पार लगाने वाली नौका है। यदि जीवन सफल करना है, तो भगवान का नाम कभी मत छोड़ना।” कथा समाप्त हुई, पर संत के शब्द गोपी के हृदय में बस गए। अगले दिन जब वह दूध-दही लेकर मथुरा की ओर चली, तो मार्ग में यमुना जी आईं। उसे संत की बात याद आई— “जब भगवान का नाम भवसागर से पार लगा सकता है, तो क्या यह साधारण सी नदी पार नहीं करा सकता?” भोली-भाली गोपी ने मन में दृढ़ विश्वास के साथ प्रभु का नाम लिया और यमुना जी में कदम रख दिया। आश्चर्य! उसे लगा जैसे वह जल पर नहीं, ठोस भूमि पर चल रही हो। देखते ही देखते वह नदी पार कर गई। अब उसके मन में आनंद और विश्वास दोनों बढ़ गए। उसने सोचा— “संत ने तो अद्भुत उपाय बताया! अब नाविक को रोज पैसे भी नहीं देने पड़ेंगे।” कुछ दिन बाद गोपी ने सोचा— “संत ने मेरा इतना भला किया है, उन्हें घर भोजन पर अवश्य बुलाना चाहिए।” अगले दिन उसने संत को निमंत्रण दिया, और संत तैयार हो गए। दोनों यमुना किनारे पहुँचे। संत नाविक को पुकारने लगे। गोपी ने आश्चर्य से पूछा— “बाबा! नाविक को क्यों बुला रहे हैं? हम तो ऐसे ही पार चलेंगे।” संत बोले— “अरे गोपी! यह कैसी बात? नदी ऐसे कैसे पार होगी?” गोपी ने सरल भाव से कहा— “बाबा! आपने ही तो बताया था कि भगवान के नाम का आश्रय लेकर भवसागर पार हो सकता है। मैंने वही किया… और मुझे नाव की आवश्यकता ही नहीं पड़ी।” संत को विश्वास न हुआ। बोले— “तू पहले चल, मैं पीछे-पीछे आता हूँ।” गोपी ने फिर श्रद्धा से नाम स्मरण किया और सहज भाव से नदी पार कर गई। पर जैसे ही संत ने कदम रखा, वे सीधे जल में गिर पड़े। गोपी तुरंत लौट आई, संत का हाथ पकड़ा और नाम का स्मरण करते हुए आगे बढ़ी। इस बार संत भी ऐसे चलने लगे जैसे भूमि पर चल रहे हों। संत भाव-विह्वल होकर गोपी के चरणों में गिर पड़े— “धन्य हो गोपी! नाम का सच्चा आश्रय तो तुमने लिया है। मैंने केवल उसकी महिमा कही, पर पूर्ण विश्वास नहीं किया।” 🌺 संदेश: हम सब भगवान का नाम तो लेते हैं, परंतु उसमें अटल श्रद्धा और पूर्ण विश्वास नहीं रखते। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम इतने पापों को मिटा सकता है, जितने पाप मनुष्य जीवन भर में भी नहीं कर सकता। जब हम नाम जपते समय वही भाव रखें— जैसे एक छोटा बालक अपनी माँ को पुकारता है— तब नाम अपना पूर्ण प्रभाव दिखाता है। ✨ कलियुग में केवल नाम ही आधार है— “कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहि पारा।” 📿 हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे 📿 हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे जय श्री राधे कृष्ण 🙏
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