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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - मायनोंकी तलाश इन पंक्तियों का अर्थ जानते हैं? जी जीवन को देखने की एक सकारात्मक दृष्टि देते तुलसीदास जी की ये पंक्तियां रामचरितमानस हैं। वे कहते हैं कि जो ग्रीष्म की चिलचिलाती धूप के उत्तरकांड में आती हैं- जो अति आतप दुःख पाता है, उसे ही तो वृक्षों की घनी ब्याकुल होई। तरु छाया सुख जानइ सोई।। से बहुत " जौं नहिं होत मोह अति मोही। मिलतेउँ तात शीतल छाया का सुख मिलता है। इन अर्थों में मोह भी शुभ है, जो हमें प्रभु से मिलवाता है ॰ कवन बिधि तोही।। ' इनका अर्थ है- जो वास्तव में धूप से जीवन के न केवल गुण, बल्कि दोष भी हमारे लिए अत्यंत व्याकुल होता है, वही वृक्ष की छाया का उपयोगी हैं॰ बशर्ते हॅम उनकी सहायता से अपने सुख जानता है। हे तात ! यदि मुझे अत्यंत मोह न मिनट रीड तुलसीदास  होता तो मैं आपसे किस प्रकार मिलता ? बोध को जाग्रत कर सकें।  ಗ1 मायनोंकी तलाश इन पंक्तियों का अर्थ जानते हैं? जी जीवन को देखने की एक सकारात्मक दृष्टि देते तुलसीदास जी की ये पंक्तियां रामचरितमानस हैं। वे कहते हैं कि जो ग्रीष्म की चिलचिलाती धूप के उत्तरकांड में आती हैं- जो अति आतप दुःख पाता है, उसे ही तो वृक्षों की घनी ब्याकुल होई। तरु छाया सुख जानइ सोई।। से बहुत " जौं नहिं होत मोह अति मोही। मिलतेउँ तात शीतल छाया का सुख मिलता है। इन अर्थों में मोह भी शुभ है, जो हमें प्रभु से मिलवाता है ॰ कवन बिधि तोही।। ' इनका अर्थ है- जो वास्तव में धूप से जीवन के न केवल गुण, बल्कि दोष भी हमारे लिए अत्यंत व्याकुल होता है, वही वृक्ष की छाया का उपयोगी हैं॰ बशर्ते हॅम उनकी सहायता से अपने सुख जानता है। हे तात ! यदि मुझे अत्यंत मोह न मिनट रीड तुलसीदास  होता तो मैं आपसे किस प्रकार मिलता ? बोध को जाग्रत कर सकें।  ಗ1 - ShareChat