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#सच्चा_सतगुरु_कौन गरीब, काशी करोंत लेत हैं, आन कटावें शीश। बन-बन भटका खात हैं, पावत ना जगदीश ।। शास्त्र विरूद्ध साधक नकली-स्वार्थी गुरूओं द्वारा भ्रमित होकर कोई जंगल में जाता है। कोई काशी शहर में करौंत से सिर कटवाने में मुक्ति मानता है। इस प्रकार की व्यर्थ साधना जो शास्त्रोक्त नहीं है, करने से कोई लाभ नहीं होता।
सच्चा_सतगुरु_कौन - मोक्षनहींपाया कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दै दान। काशी करौत ले मरै, तौ भी नरक निदान।। जो व्यक्ति गाय दान करते हैं यानि धर्म करते हैं।वे यदि तिलभर माँस मछली या अन्य किसी जीव का खाएगा तो उसका वहः गऊ दान का धर्म समाप्त हा जाएगा | चाहे वह काशी में करौंत से गला भी कटा ले तो भी वह नरक में गिरेगा | -जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज मोक्षनहींपाया कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दै दान। काशी करौत ले मरै, तौ भी नरक निदान।। जो व्यक्ति गाय दान करते हैं यानि धर्म करते हैं।वे यदि तिलभर माँस मछली या अन्य किसी जीव का खाएगा तो उसका वहः गऊ दान का धर्म समाप्त हा जाएगा | चाहे वह काशी में करौंत से गला भी कटा ले तो भी वह नरक में गिरेगा | -जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज - ShareChat