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गणगौर गणगौर मुख्य रूप से राजस्थान का पर्व है। जो हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया को आता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और गुजरात के कुछ इलाकों में भी ये त्योहार मनाया जाता है। गणगौर को गौरी तृतीया भी कहते हैं। महिलाएं अपने पति से बिना बताए यानि गुप्त रूप छुपा कर रखती और गणगौर माता यानी माता पार्वती की पूजा करके अपने पति की लंबी उम्र के लिए कामना करती हैं। हर वर्ष यह तिथि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया पर पड़ती है। गणगौर पूजा के साथ अक्सर मत्स्य जयंती भी मनाई जाती है। जानकार बताते हैं कि, गणगौर का मतलब गण शिव और गौर माता पार्वती से है। भारत विविधताओं का देश है और यहां कई ऐसे अनोखे त्यौहार और पर्व मनाए जाते हैं जो अपने आप में ही बहुत विशेष होते हैं। ऐसा ही एक पर्व है जो महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है जिसे भारत के उत्तरी प्रांतों में ज्यादातर मनाया जाता है। गणगौर शब्द भगवान शिव और पार्वती के नाम से बना है। गण यानि भगवान शिव और गौर यानि पार्वती। इसलिए शिव-पार्वती की पूजा के रूप में इस त्यौहार को मनाया जाता है। कहा जाता है कि चैत्र शुक्ला तृतीया को राजा हिमाचल की पुत्री गौरी का विवाह भगवान शंकर के साथ हुआ था उसी की याद में यह त्योहार मनाया जाता है। कामदेव मदन की पत्नी रति ने भगवान शंकर की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न कर लिया तथा उन्हीं के तीसरे नेत्र से भष्म हुए अपने पति को पुन: जीवन देने की प्रार्थना की। रति की प्रार्थना से प्रसन्न हो भगवान शिव ने कामदेव को पुन: जीवित कर दिया तथा विष्णुलोक जाने का वरदान दिया। उसी की स्मृति में प्रतिवर्ष गणगौर का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान विवाह के समस्त रस्मो रिवाज किए जाते हैं। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - २१ मार्च २०२६ शुक्रवार आया रे आया, गणगौर का त्यौहार है आया, संग में खुशियां और प्यार है लाया! गणगौर की हार्दिक शुभकामनायें . Appl Motivational Videos Want २१ मार्च २०२६ शुक्रवार आया रे आया, गणगौर का त्यौहार है आया, संग में खुशियां और प्यार है लाया! गणगौर की हार्दिक शुभकामनायें . Appl Motivational Videos Want - ShareChat