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चौपाई राम चरित्र मानस #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - "चौपाई" धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी।I बृद्ध रोगबस जड़ धनहीना | अंध बधिर क्रोधी अति दीना।l भावार्थः धैर्य, धर्म, मित्र और स्त्री- इन चारो की सही परख (परीक्षा) विपत्ति के समय ही होती है। वृद्ध, रोगी , मूर्ख, निर्धन, अंधा, बहरा, क्रोधी और अत्यन्त दीन- ऐसे भी पति का अपमान करने से स्त्री यमपुर में भाँति भाँति के दुःख पाती है। शरीर, वचन और मन से पति के चरणों में प्रेम करना ही स्त्री का एकमात्र धर्म है। (रामचरितमानस) Motivational Videos App Want . "चौपाई" धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी।I बृद्ध रोगबस जड़ धनहीना | अंध बधिर क्रोधी अति दीना।l भावार्थः धैर्य, धर्म, मित्र और स्त्री- इन चारो की सही परख (परीक्षा) विपत्ति के समय ही होती है। वृद्ध, रोगी , मूर्ख, निर्धन, अंधा, बहरा, क्रोधी और अत्यन्त दीन- ऐसे भी पति का अपमान करने से स्त्री यमपुर में भाँति भाँति के दुःख पाती है। शरीर, वचन और मन से पति के चरणों में प्रेम करना ही स्त्री का एकमात्र धर्म है। (रामचरितमानस) Motivational Videos App Want . - ShareChat