ShareChat
click to see wallet page
search
#जय श्री राम श्री राम और राममन्त्र तात्पर्य,,,,, वास्तव में राम अनादि ब्रह्म ही हैं। अनेका नेक संतों ने निर्गुण राम को अपने आराध्य रूप में प्रतिष्ठित किया है। राम नाम के इस अत्यंत प्रभावी एवं विलक्षण दिव्य बीज मंत्र को सगुणोपासक मनुष्यों में प्रतिष्ठित करने के लिए दशरथी राम का पृथ्वी पर अवतरण हुआ है।कबीरदास जी ने कहा है –आत्मा और राम एक है-' *आतम राम अवर नहिं दूजा।*'राम नाम कबीर का बीज मंत्र है। राम नाम को उन्होंने अजपा जाप कहा है। राम शब्द का अर्थ है* *रमंति इति रामः*'जो रोम-रोम में रहता है, जो समूचे ब्रह्मांड में रमण करता हैवही राम हैं।इसी तरह कहा गया है – *'रमन्ते योगिनो यस्मिन स रामः'*अर्थात् योगीजन जिसमें रमण करते हैं वही राम हैं।इसी तरह ब्रह्मवैवर्त पुराणमें कहा गया है –' राम शब्दो *विश्ववचनो, मश्वापीश्वर वाचकः*'अर्थात् ‘रा’ शब्द परिपूर्णता का बोधक है और ‘म’ परमेश्वर वाचक है। *चाहे निर्गुण ब्रह्म हो या दाशरथि राम हो,* विशिष्टतथ्य यह है कि राम शब्द एक महामंत्र है। राम मन्त्र का अर्थ* ' राम ' स्वतः मूलतःअपने आप में पूर्ण मन्त्र है।'र', 'अ' और 'म', इन तीनों अक्षरों के योग से 'राम' मंत्र बनता है।यही राम रसायन है।'र' अग्निवाचक है।'अ' बीज मंत्र है।'म' का अर्थ है ज्ञान।यह मंत्र पापों को जलाता है,किंतु पुण्य को सुरक्षित रखता है और ज्ञान प्रदान करता है। हम चाहते हैं कि पुण्य सुरक्षित रहें, सिर्फ पापों का नाश हो।
जय श्री राम - ShareChat