विश्व किडनी दिवस
हर साल मार्च के दूसरे गुरुवार के दिन विश्व किडनी दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य दुनिया में लगातार बढ़ रही किडनी की बीमारियों के मामले को रोकना है. इसके लिए विश्व किडनी दिवस पर कई प्रकार के जागरुकता अभियान का आगाज किया जाता है। विश्व किडनी दिवस का उद्देश्य दुनिया में लगातार बढ़ रही किडनी की बीमारियों के मामलों को रोकना है. इसके लिए विश्व किडनी दिवस पर कई प्रकार के जागरुकता अभियान का आगाज किया जाता है. जिससे लोगों और दूर-दराज के क्षेत्र में रह रहे लोगों को किडनी की बीमारी के बारे में जागरूक किया जाता है। दुनिया भर में इसकी शुरुआत साल 2006 में हुई थी. इसे इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (ISN) और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ किडनी फाउंडेशन ने मिलकर 66 देशों में शुरू किया था। आमतौर पर हमारे देश में ज्यादातर लोग शराब पीने के आदी हो जाते हैं. जिससे कि हमारे शरीर में इसका सबसे ज्यादा बूरा असर किडनी पर पड़ता है. वहीं, मांस का अधिक सेवन करने से भी किडनी में शिकायत आती है. इसके अलावा पानी कम मात्रा और नमक की ज्यादा मात्रा का सेवन भी किडनी के लिए नुकसानदायक होता है. इनके अलावा दर्दनाशक दवाओं का अधिक सेवन और धूम्रपान करने से भी किडनी पर बूरा असर पड़ता है। किडनी के दिक्कत होने की दशा में पैरों और आंखों के नीचे सूजन देखी जा सकती है. इसके अलावा किसी काम को करने या फिर चलने पर जल्दी थकान और सांस फूलने की शिकायत आम बात होती है. किडनी के खराब होने की स्थिति में रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ सकता है. किडनी की बीमारी होने पर मनुष्य में भूख नहीं लगने और हाजमा ठीक नहीं होने की शिकायत देखी गई है. वहीं, खून की कमी से शरीर पीला पड़ने लगता है। । विश्व किडनी दिवस
हर साल मार्च के दूसरे गुरुवार के दिन विश्व किडनी दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य दुनिया में लगातार बढ़ रही किडनी की बीमारियों के मामले को रोकना है. इसके लिए विश्व किडनी दिवस पर कई प्रकार के जागरुकता अभियान का आगाज किया जाता है। विश्व किडनी दिवस का उद्देश्य दुनिया में लगातार बढ़ रही किडनी की बीमारियों के मामलों को रोकना है. इसके लिए विश्व किडनी दिवस पर कई प्रकार के जागरुकता अभियान का आगाज किया जाता है. जिससे लोगों और दूर-दराज के क्षेत्र में रह रहे लोगों को किडनी की बीमारी के बारे में जागरूक किया जाता है। दुनिया भर में इसकी शुरुआत साल 2006 में हुई थी. इसे इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (ISN) और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ किडनी फाउंडेशन ने मिलकर 66 देशों में शुरू किया था। आमतौर पर हमारे देश में ज्यादातर लोग शराब पीने के आदी हो जाते हैं. जिससे कि हमारे शरीर में इसका सबसे ज्यादा बूरा असर किडनी पर पड़ता है. वहीं, मांस का अधिक सेवन करने से भी किडनी में शिकायत आती है. इसके अलावा पानी कम मात्रा और नमक की ज्यादा मात्रा का सेवन भी किडनी के लिए नुकसानदायक होता है. इनके अलावा दर्दनाशक दवाओं का अधिक सेवन और धूम्रपान करने से भी किडनी पर बूरा असर पड़ता है। किडनी के दिक्कत होने की दशा में पैरों और आंखों के नीचे सूजन देखी जा सकती है. इसके अलावा किसी काम को करने या फिर चलने पर जल्दी थकान और सांस फूलने की शिकायत आम बात होती है. किडनी के खराब होने की स्थिति में रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ सकता है. किडनी की बीमारी होने पर मनुष्य में भूख नहीं लगने और हाजमा ठीक नहीं होने की शिकायत देखी गई है. वहीं, खून की कमी से शरीर पीला पड़ने लगता है। । #जागरूकता दिवस


