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🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🚩 *"सनातन परिवार"* 🚩 *की प्रस्तुति* 🔴 *आज का प्रात: संदेश* 🔴 🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘ *इस संपूर्ण सृष्टि में यदि मनुष्य सर्वश्रेष्ठ बनकर उभरा है तो मनुष्य को गलतियों का पुतला भी कहा गया है | भूल हो जाना मनुष्य का स्वभाव है | कोई भी ऐसा मनुष्य ना हुआ होगा जिससे कि अपने जीवन में कभी कोई भूल ना हुई है | कभी - कभी मनुष्य की एक भूल उसके जीवन की दिशा और दशा परिवर्तित कर देती है | प्राचीन काल में जब मनुष्य के ऊपर सामाजिक दबाव होता था तब मनुष्य कुछ भी करने या कुछ भी बोलने से पहले सोचता था कहीं ऐसा ना हो जाए कि हमसे कुछ गलत हो जाए और हमको सामाजिक दंड का भागी बनना पड़े | मनुष्य के अंदर व्याप्त यह भय उसे गलतियां करने से रोकता था और यदि मनुष्य से कोई भूल हो भी जाती थी तो वह समाज के सामने अपनी गलती मान कर के उसका प्रायश्चित करने के लिए भी तैयार हो जाता था | जब मनुष्य प्रायश्चित करने के लिए तैयार हो जाता है तो वह अपने सबसे बड़े वैरी अपने अहं को मारता है , क्योंकि जब तक मनुष्य में अहंभाव रहेगा तब तक वह अपनी भूल कदापि स्वीकार नहीं कर सकता है , और जब तक मनुष्य भूल नहीं स्वीकार करेगा तब तक प्रायश्चित का प्रश्न ही नहीं उठ़ता है | अनेकों ऐसे उदाहरण इतिहास पढ़ने को मिलते हैं जहां मनुष्य ने अपनी भूल को मान करके समाज व सम्पूर्ण सभ्यता को भी नष्ट होने से बचाया है | जहां मनुष्य अपनी भूल को न स्वीकार करके अपनी गलत बात पर अड़ा रहता है वहाँ आपस में वैमनस्यता तो फैलती ही है और समाज में बिखराव भी आ जाता है |* *आज समाज बदला , लोग बदले हैं और बदल गई है मनुष्य की सोंच | मनुष्य को यह लगता है कि मैं जो कर रहा हूं या मैं जो कह रहा हूं वही सत्य है बाकी सब झूठ है | अपनी बात को सही साबित करने के लिए मनुष्य अनेकों तर्क कुतर्क करते हुए गलत तथ्यों को प्रस्तुत करता रहता है | आज के तथाकथित कुछ विद्वानों एवं राजनैतिक प्रवक्ताओं के व्यवहार को देखकर मुझे "आचार्य अर्जुन तिवारी" को बड़ा आश्चर्य होता है की जिसे हम विद्वान मानते हैं वह भला ऐसा वक्तव्य कैसे दे सकता है जो कि लोगों के हृदय में चुभने वाला हो | क्या यही विद्वता है ?? आज मनुष्य के ऊपर किसी प्रकार का सामाजिक बन्धन नहीं रह गया है और न ही मनुष्य किसी के दबाव को मानना चाहता है यही कारण है कि मनुष्य उचित - अनुचित कार्य व्यवहार कर रहा है | आज परिवारों के विखरने का एक सबसे बड़ा कारण यह भी है कि लोग जाने - अन्जाने या फिर क्रोध में आकर कुछ अनचाहे कृत्य कर देते हैं , ऐसे लोगों को यह आभास भी होता है कि उन्होंने गल्ती की है परंतु वे अपनी गल्ती को मानना नहीं चाहते हैं जिसका परिणाम होता है कि परिवार का विखण्डन हो जाता है | कभी - कभी मनुष्य न चाहते हुए भी परिस्थितवश अपने किसी प्रिय को अनचाहे शब्द भी कह देता है परंतु समय रहते उसका प्रायश्चित कर लेने वाला ही महान बनता है | परंतु आज ऐसा करने वाले गिनती के लोग बचे हैं शेष तो सभी अपने ही भाव में रहकर अपनी कही गयी गलत बात को ही सही सिद्ध करने पर अडिग रहते हुए समाज में विघटन का कारण बनते रहते हैं | जबकि मनुष्य को आत्ममंथन करते हुए अपनी भूल को स्वीकार करके प्रायश्चित कर लेना चाहिए इससे मनुष्य का सम्मान बढ़ जाता है |* *भूल हो जाना मानव स्वभाव है परंतु प्रत्येक मनुष्य को समय रहते हुए अपनी भूल को स्वीकार करके प्रायश्चित कर लेना चाहिए | इससे उसका सम्मान तो बढता ही रहेगा साथ ही उसकी अंतरात्मा पर भी कोई बोझ नहीं रहेगा |* 🌺💥🌺 *जय श्री हरि* 🌺💥🌺 🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 सभी भगवत्प्रेमियों को आज दिवस की *"मंगलमय कामना"*----🙏🏻🙏🏻🌹 ♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵 *सनातन धर्म से जुड़े किसी भी विषय पर चर्चा (सतसंग) करने के लिए हमारे व्हाट्सऐप समूह----* *‼ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼ से जुड़ें या सम्पर्क करें---* आचार्य अर्जुन तिवारी प्रवक्ता श्रीमद्भागवत/श्रीरामकथा संरक्षक संकटमोचन हनुमानमंदिर बड़ागाँव श्रीअयोध्याजी (उत्तर-प्रदेश) 9935328830 🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟 #❤️जीवन की सीख #👫 हमारी ज़िन्दगी
❤️जीवन की सीख - श्री कृष्ण कहते हैं विधि का विधान कोई नहीं टाल सकता..!! कमों में जो भी लिखा, वही अटल सत्य है.. श्री कृष्ण कहते हैं विधि का विधान कोई नहीं टाल सकता..!! कमों में जो भी लिखा, वही अटल सत्य है.. - ShareChat