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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - सलीम कौसर गज़ल तू॰ सूरज   है   तेरी देखा Ta तरफ़ जा সকনা लेकिन   देखने वालों को रोका   नहीं UT सकता अब जो लहर है पल भर बाद नहीं होगी यानी इक दरिया में बार उतरा   नहीं दूसरी सकता UT अब भी वक़्त है अपनी रविश तब्दील करो  वर्ना जो कुछ   होने वाला   है सोचा   नहीं जा सकता ওম ক্ষী যলী ৭ আান ম ওম সিলন ম স্ত্রব ক্ষী মকনা ; पर   रोका   नहीं रोका जा सकता ज किसी को चाहत और किसी को नफ़रत मारती है कोई भी हो उसे मरते तो देखा नहीं जा सकता तिरे  हुस्न की  हैरत तरफ़   दुानिया एक तरफ़ एक और  दुनिया में देर तलक ठहरा   नहीं जा सकता Moiivational Vicleos Appl Want सलीम कौसर गज़ल तू॰ सूरज   है   तेरी देखा Ta तरफ़ जा সকনা लेकिन   देखने वालों को रोका   नहीं UT सकता अब जो लहर है पल भर बाद नहीं होगी यानी इक दरिया में बार उतरा   नहीं दूसरी सकता UT अब भी वक़्त है अपनी रविश तब्दील करो  वर्ना जो कुछ   होने वाला   है सोचा   नहीं जा सकता ওম ক্ষী যলী ৭ আান ম ওম সিলন ম স্ত্রব ক্ষী মকনা ; पर   रोका   नहीं रोका जा सकता ज किसी को चाहत और किसी को नफ़रत मारती है कोई भी हो उसे मरते तो देखा नहीं जा सकता तिरे  हुस्न की  हैरत तरफ़   दुानिया एक तरफ़ एक और  दुनिया में देर तलक ठहरा   नहीं जा सकता Moiivational Vicleos Appl Want - ShareChat