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शेर मिर्जा गालिब #✒ शायरी
✒ शायरी - न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता, मुझ को होने ने, न होता ভ্ুনীযা मैं तो क्या होता? भावार्थः में कुछ नहीं था, तब 4[ जब सिर्फ ईश्वर (खुदा) थे, और अगर कुछ न होता तो भी खुदा ही होते। मेरे अस्तित्व ने मुझे बर्बाद कर दिया है, अगर मैं पैदा नहीं हुआ होता तो क्या नुकसान हा जाता? मिर्ज़ा गालिब Motivational Videos App Want . न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता, मुझ को होने ने, न होता ভ্ুনীযা मैं तो क्या होता? भावार्थः में कुछ नहीं था, तब 4[ जब सिर्फ ईश्वर (खुदा) थे, और अगर कुछ न होता तो भी खुदा ही होते। मेरे अस्तित्व ने मुझे बर्बाद कर दिया है, अगर मैं पैदा नहीं हुआ होता तो क्या नुकसान हा जाता? मिर्ज़ा गालिब Motivational Videos App Want . - ShareChat