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prabha dansenap - Author on ShareChat
prabha dansenap
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#गीता का ज्ञान #सुविचार #राधे श्याम #श्री कृष्ण के गीता ज्ञान
ডিং ত্িন মন যমান লী कि ईश्वर की के बिना कुछ इच्छा भी नहीं होता, 3k 44- ওমী   নিন डर,  चिंता असर खो देती है। भरोसा अपना रखो , सब ठीक होगा। ডিং ত্িন মন যমান লী कि ईश्वर की के बिना कुछ इच्छा भी नहीं होता, 3k 44- ওমী   নিন डर,  चिंता असर खो देती है। भरोसा अपना रखो , सब ठीक होगा।
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  • VINOD KUMAR - Author on ShareChat
    VINOD KUMAR
    #श्री कृष्ण के गीता ज्ञान #गीता ज्ञान #गीता का ज्ञान #🌺 कृष्ण ज्ञान 🙏 गीता वचन 🌺 भक्ति 💕 राधा कृष्ण 🙏🙏 हरि बोल 🙏🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕
    श्रीमदभगवदगीता जिँदगी में जो कुछ भी होता है, अच्छे के लिए होता है। बुरा वक्त इसलिए आता 8 ताकि हम अच्छे वक्त की किमत जान सकें लोग इसालिए वदल जाते हैं ताकि हम उनके असली चेहरे पहचान सकें कि वो क्या थे, और हम उन्हें क्या समझ रहे थे. ل हर अनुभव एक शिक्षा है , हर बदलाव एक संकेत है, और हर क्षण भगवान की योजना 8 का हिस्सा श्रीमदभगवदगीता जिँदगी में जो कुछ भी होता है, अच्छे के लिए होता है। बुरा वक्त इसलिए आता 8 ताकि हम अच्छे वक्त की किमत जान सकें लोग इसालिए वदल जाते हैं ताकि हम उनके असली चेहरे पहचान सकें कि वो क्या थे, और हम उन्हें क्या समझ रहे थे. ل हर अनुभव एक शिक्षा है , हर बदलाव एक संकेत है, और हर क्षण भगवान की योजना 8 का हिस्सा
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  • VINOD KUMAR - Author on ShareChat
    VINOD KUMAR
    #🌺 कृष्ण ज्ञान 🙏 गीता वचन 🌺 भक्ति 💕 राधा कृष्ण 🙏🙏 हरि बोल 🙏🙏 #श्री कृष्ण के गीता ज्ञान #🙏गीता ज्ञान🛕 #गीता का ज्ञान #गीता ज्ञान
    अध्याय में शोक के बारे में विस्तार गीता के दूसरे से बताया गया है। भगवान कृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि शोक करना व्यर्थ है क्योंकि आत्मा न तो जन्म लेता है और न ही मरता है। श्लोक २.२२ में कहा गया हैः विहाय "वासांसि जीर्णानि यथा नवानि गृह्नाति नरोडपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णा न्यन्यानि संयाति नवानि देही।।" कपड़ों को छोड़कर अर्थः जैसे कोई मनुष्य पुराने नए कपड़ पहनता है, वैसे ही आत्मा शरीर पुराने को छोड़कर नया शरीर धारण करता है। अध्याय में शोक के बारे में विस्तार गीता के दूसरे से बताया गया है। भगवान कृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि शोक करना व्यर्थ है क्योंकि आत्मा न तो जन्म लेता है और न ही मरता है। श्लोक २.२२ में कहा गया हैः विहाय "वासांसि जीर्णानि यथा नवानि गृह्नाति नरोडपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णा न्यन्यानि संयाति नवानि देही।।" कपड़ों को छोड़कर अर्थः जैसे कोई मनुष्य पुराने नए कपड़ पहनता है, वैसे ही आत्मा शरीर पुराने को छोड़कर नया शरीर धारण करता है।
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  • VINOD KUMAR - Author on ShareChat
    VINOD KUMAR
    #गीता ज्ञान #गीता का ज्ञान #🌺 कृष्ण ज्ञान 🙏 गीता वचन 🌺 भक्ति 💕 राधा कृष्ण 🙏🙏 हरि बोल 🙏🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕 #श्री कृष्ण के गीता ज्ञान
    गीता में धर्म का ज्ञान मोह रोग के द्वारा बताया गया है। एक श्लोक हैः "मोह एव ग्रहस्तस्य कारणं बन्धविमोक्षयोः Il (गीता ३.२७) अर्थः मोह ही बंधन और मुक्ति का कारण है। जब हम मोह से ग्रसित होते हैं, तो हम धर्म को भूल जाते हैं और अधर्म की ओर बढ़ते हैं। गीता में धर्म का ज्ञान मोह रोग के द्वारा बताया गया है। एक श्लोक हैः "मोह एव ग्रहस्तस्य कारणं बन्धविमोक्षयोः Il (गीता ३.२७) अर्थः मोह ही बंधन और मुक्ति का कारण है। जब हम मोह से ग्रसित होते हैं, तो हम धर्म को भूल जाते हैं और अधर्म की ओर बढ़ते हैं।
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