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।। ॐ ।। तं विद्याद्दुःखसंयोगवियोगं योगसञ्जितम्। स निश्चयेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्णचेतसा ।। #यथार्थ गीता #❤️जीवन की सीख #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 जो संसार के संयोग और वियोग से रहित है, उसी का नाम योग है। जो आत्यन्तिक सुख है, उसके मिलन का नाम योग है। जिसे परमतत्त्व परमात्मा कहते हैं, उसके मिलन का नाम योग है। वह योग न उकताये हुए चित्त से निश्चयपूर्वक करना कर्त्तव्य है। धैर्यपूर्वक लगा रहनेवाला ही योग में सफल होता है।
यथार्थ गीता - 3 || farg ःखसंयोगवियोगं योगसञ्जितम्। स निश्चयेन योक्तव्यो योगोडनिर्विण्णचेतसा। जो संसार के संयोग और वियोग से रहित है, उसी का नाम योग है।जो आत्यन्तिक सुख है, उसके मिलन का नाम योग है। जिसे परमतत्त्व परमात्मा कहते हैं, उसके मिलन का नाम योग है। वह योग न उकताये हुए चित्त से निश्चयपूर्वक करना कर्त्तव्य है। धैर्यपूर्वक लगा रहनेवाला ही योग में सफल होता है। गुरु कृपा हिकेवलमू। 3 || farg ःखसंयोगवियोगं योगसञ्जितम्। स निश्चयेन योक्तव्यो योगोडनिर्विण्णचेतसा। जो संसार के संयोग और वियोग से रहित है, उसी का नाम योग है।जो आत्यन्तिक सुख है, उसके मिलन का नाम योग है। जिसे परमतत्त्व परमात्मा कहते हैं, उसके मिलन का नाम योग है। वह योग न उकताये हुए चित्त से निश्चयपूर्वक करना कर्त्तव्य है। धैर्यपूर्वक लगा रहनेवाला ही योग में सफल होता है। गुरु कृपा हिकेवलमू। - ShareChat