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#जय श्री कृष्ण हरि यश गावत चली ब्रज सुंदरि नदी यमुनाके तीर लोचन लोल बांह जोटी कर श्रवणन झलकत बीर बेनी शिथिल चारु कांधै पर कटि पट अंबरलाल हाथन लियें फूलनकी डलियां उर मुक्ता मणिमाल जलप्रवेश कर मज्जनलागी प्रथम हेम के मास जेसे प्रीतम होय नंदसुत ब्रत ठान्यो यह आस तब ते चीर हरे नंदनदंन चढे कदंब की डारि परमानंद प्रभु वर देवेंको उद्यम कियोहै मुरारि... .
जय श्री कृष्ण - वैष्णवजन वैष्णवजन - ShareChat