##जैन_धर्म_की_सच्चाई मारीचि जी के जीव ने प्रथम तीर्थकंर ऋषभदेव जी से दीक्षा लेकर साधना की। उसके परिणामस्वरूप मारीचि जी के जीव ने गधा, कुत्ता आदि का जीवन भोगा और स्वर्ग-नरक में भटका। फिर महावीर जैन बना। जिसका प्रमाण पुस्तक ‘‘आओ जैन धर्म को जानें‘‘ के पृष्ठ 294-296 में है। महावीर जी ने तो किसी से दीक्षा भी नहीं ली थी। उन्होंने तो मनमाना आचरण करके साधना की। तो विचार करें, उनका क्या हुआ होगा?


