#हनुमान
हनुमान जी की भक्ति का सबसे बड़ा नियम यह है कि उनकी पूजा बिना भगवान श्री राम और माता सीता के नाम के अधूरी मानी जाती है। सुबह उनकी ऐसी आराधना करने के लिए आप इन चरणों का पालन कर सकते हैं:
1. राम-नाम का संकीर्तन
हनुमान जी वहीं वास करते हैं जहाँ श्री राम का गुणगान होता है। बिस्तर से उठते ही या स्नान के बाद सबसे पहले 'श्री राम जय राम जय जय राम' मंत्र का कम से कम 11 बार जाप करें। इससे हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं क्योंकि वे राम-नाम के ऋणी हैं।
2. पंचोपचार पूजन
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें (संभव हो तो लाल या पीले रंग के)। हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं और लाल फूल अर्पित करें। उन्हें गुड़ और चने का भोग लगाना अति उत्तम माना जाता है।
3. हनुमान चालीसा और विशेष पंक्तियाँ
हनुमान चालीसा का पाठ करें, लेकिन सीता माता और राम जी की कृपा पाने के लिए इन पंक्तियों पर विशेष ध्यान दें:
> "राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा।"
> "अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता।"
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इन पंक्तियों का अर्थ ही यही है कि उनके पास राम नाम की औषधि है और उन्हें माता जानकी (सीता) से सिद्धियों का वरदान प्राप्त है।
4. 'सीता-राम' मंत्र का सम्पुट
हनुमान जी की आरती या पाठ के अंत में "सियावर रामचंद्र की जय" का उद्घोष करें। हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका उनके प्रभु की स्तुति करना है। यदि आप रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों का पाठ करते हैं, तो हनुमान जी स्वयं पहरेदार बनकर आपके घर की रक्षा करते हैं।
5. सुंदरकांड या हनुमान अष्टक
यदि समय हो, तो हनुमान अष्टक का पाठ करें। इसमें उनके द्वारा श्री राम और माता सीता के लिए किए गए कार्यों का वर्णन है। यह याद दिलाना कि उन्होंने कैसे माता सीता की सुध ली थी, आपकी भक्ति को सीधा बजरंगबली के हृदय तक पहुँचाता है।
6. सात्विकता और सेवा
दिन भर अपनी वाणी में संयम रखें और किसी का अपमान न करें। हनुमान जी 'सेवा' के प्रतीक हैं, इसलिए दिन की शुरुआत में किसी जीव (जैसे बंदर या कुत्ते) को भोजन कराना भी उनकी और श्री राम की संयुक्त कृपा दिलाने वाला होता है।


