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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - न मसीहा बन, न फरिश्ता बन। निभाया जा सके जिसे इज्जत से ऐसा रिश्ता बन। देखकर सबको हैरानी हो और हर कोई बनना चाहे तुझ जैसा ही। सिमटती इस 4 दुनिया बेमिसाल किस्सा बन। न रोना वाजिब है और न अश्क बहाना मुनासिब है। किसी के बहते आंसुओं को मुस्कुराहटों मे बदल देने का बेहतरीन हिस्सा बन। न मसीहा बन, न फरिश्ता बन। निभाया जा सके जिसे इज्जत से ऐसा रिश्ता बन। देखकर सबको हैरानी हो और हर कोई बनना चाहे तुझ जैसा ही। सिमटती इस 4 दुनिया बेमिसाल किस्सा बन। न रोना वाजिब है और न अश्क बहाना मुनासिब है। किसी के बहते आंसुओं को मुस्कुराहटों मे बदल देने का बेहतरीन हिस्सा बन। - ShareChat