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#मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख
मेरे विचार - अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सहैवावनिपालसङ्घैः ম্লন '1 भोष्मो   द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ  सहास्मदीयैरपि योधमुख्यैः I१ वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि | केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु  चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः II सन्दृश्यन्ते  धृतराष्ट्रके पुत्र राजाओंके समुदायसहित  ন মলপী आपमें प्रवेश कर रहे हैं और भोष्मपितामह, द्रोणाचार्य तथा वह कर्ण और हमारे पक्षके भी प्रधान यौद्धाओंके सहित सव-्के-्सब आपके दाढ़ोंके कारण विकराल बड़े वेगसे दौड़ते हुए प्रवेश कर मुरखोंमें भयानक रहे हैं और कई एक चूर्ण हुए सिरौंसहित आपके दाँतोंके बीचमें लगे हुए दीख रहे हैँ II २६- २७ |I यथा   नदीनां   बहवोउम्बुवेगाः বনলি | समुद्रमेवाभिमुखा ননামী नरलोकवीरा- T विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति १l जैसे नदियोंके बहुत-से जलके प्रवाह स्वाभाविक ही सम्मुख दौड़ते हैं अर्थात् 8 समुद्रके समुद्रमें प्रवैश करते हैँ॰ वैसे हौ वै नरलौकके वौर भौ प्रवेश कर रहे हैं Il २८ Il आपके प्रज्वलित मुखोंमें श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सहैवावनिपालसङ्घैः ম্লন '1 भोष्मो   द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ  सहास्मदीयैरपि योधमुख्यैः I१ वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि | केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु  चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः II सन्दृश्यन्ते  धृतराष्ट्रके पुत्र राजाओंके समुदायसहित  ন মলপী आपमें प्रवेश कर रहे हैं और भोष्मपितामह, द्रोणाचार्य तथा वह कर्ण और हमारे पक्षके भी प्रधान यौद्धाओंके सहित सव-्के-्सब आपके दाढ़ोंके कारण विकराल बड़े वेगसे दौड़ते हुए प्रवेश कर मुरखोंमें भयानक रहे हैं और कई एक चूर्ण हुए सिरौंसहित आपके दाँतोंके बीचमें लगे हुए दीख रहे हैँ II २६- २७ |I यथा   नदीनां   बहवोउम्बुवेगाः বনলি | समुद्रमेवाभिमुखा ননামী नरलोकवीरा- T विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति १l जैसे नदियोंके बहुत-से जलके प्रवाह स्वाभाविक ही सम्मुख दौड़ते हैं अर्थात् 8 समुद्रके समुद्रमें प्रवैश करते हैँ॰ वैसे हौ वै नरलौकके वौर भौ प्रवेश कर रहे हैं Il २८ Il आपके प्रज्वलित मुखोंमें श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat