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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार का दैनिक दिव्य सन्देश 90134[ 902 संकल्प शक्ति सबसे बड़ी शक्ति शिष्य ने पूछा :भगवान क्या इस चट्टान पर किसी का एक बार भगवान बुद्ध के शासन संभव ह कहाः पत्थर से कई गुना शक्ति लोहे में होती है॰ इसलिए लोहा पत्थर को बद्धने पूकाड़े लहेसे कर देता है। বকা से भी कोई वस्तु श्रेष्ठ है ? शिष्य ने पूँछाः कहाः क्यों नहीं, अग्नि लोहे के अहम को गलाकर तरल बना देती है। बुद्धने इस पर शिष्य ने कहाः अग्नि की विकराल लपटों के संमुख किसी की क्या चल सकती होगीः कहाः केवल जल ही है जो अग्नि की उष्णता को शीतल कर देता है। बद्धने फिर पूछाः जल से टकराने की ताकत किस में होगीः प्रतिवर्ष बाढ़ तथा शिष्यने মনক্রী মীত্বর ম্লানবিলী হীম ম अतिवृष्टि से जने और होे वत्स , इस संसार में एक से एक शक्तिशाली बुद्धने समझायाः ऐसा क्यों 561 वायु का प्रवाह जलधारा की दिशा बदल देता है। संसार का प्रत्येक प्राणीः वायु के महत्त्व को जानता है॰ इसके बिना उसके जीवन का महत्त्व ही क्या हैः जब वायु ही जीवन है फिर इससे अधिक महृत्त्वपूर्ण वस्तु के का प्रश्न ही नहीं उठता। 6 अब भगवान बुद्ध को हसी आ गयी कहाः मनृष्य की संकल्प शक्ति द्वारा उन्होने वायु भी वश मेँ हो जाती है॰ मानव की सबसे बड़ी शक्ति, संकल्प शक्ति ही है। सोर्सः ऑनलाइन शेयर ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार का दैनिक दिव्य सन्देश 90134[ 902 संकल्प शक्ति सबसे बड़ी शक्ति शिष्य ने पूछा :भगवान क्या इस चट्टान पर किसी का एक बार भगवान बुद्ध के शासन संभव ह कहाः पत्थर से कई गुना शक्ति लोहे में होती है॰ इसलिए लोहा पत्थर को बद्धने पूकाड़े लहेसे कर देता है। বকা से भी कोई वस्तु श्रेष्ठ है ? शिष्य ने पूँछाः कहाः क्यों नहीं, अग्नि लोहे के अहम को गलाकर तरल बना देती है। बुद्धने इस पर शिष्य ने कहाः अग्नि की विकराल लपटों के संमुख किसी की क्या चल सकती होगीः कहाः केवल जल ही है जो अग्नि की उष्णता को शीतल कर देता है। बद्धने फिर पूछाः जल से टकराने की ताकत किस में होगीः प्रतिवर्ष बाढ़ तथा शिष्यने মনক্রী মীত্বর ম্লানবিলী হীম ম अतिवृष्टि से जने और होे वत्स , इस संसार में एक से एक शक्तिशाली बुद्धने समझायाः ऐसा क्यों 561 वायु का प्रवाह जलधारा की दिशा बदल देता है। संसार का प्रत्येक प्राणीः वायु के महत्त्व को जानता है॰ इसके बिना उसके जीवन का महत्त्व ही क्या हैः जब वायु ही जीवन है फिर इससे अधिक महृत्त्वपूर्ण वस्तु के का प्रश्न ही नहीं उठता। 6 अब भगवान बुद्ध को हसी आ गयी कहाः मनृष्य की संकल्प शक्ति द्वारा उन्होने वायु भी वश मेँ हो जाती है॰ मानव की सबसे बड़ी शक्ति, संकल्प शक्ति ही है। सोर्सः ऑनलाइन शेयर - ShareChat