#महाभारत
🧘कृपाचार्य — एक अमर साक्षी की मौन पीड़ा🧘
🛐महाभारत के विराट और हृदय विदारक इतिहास में जहाँ भीष्म की प्रतिज्ञा गूँजती है, अर्जुन का गांडीव चमकता है और श्रीकृष्ण का गीता उपदेश अमर हो जाता है—वहीं एक मौन छाया भी है।
वह छाया है — कृपाचार्य। न वे सर्वाधिक प्रशंसित थे, न वे सर्वाधिक निंदित। वे केवल साक्षी थे — एक ऐसे युग के, जो स्वयं अपने ही हाथों नष्ट हो गया।🛐
🧍जन्म से ही विरक्त, नियति से बँधे कृपाचार्य का जन्म साधारण नहीं था। वे महर्षि शरद्वान के पुत्र थे, जिन्हें राजा शंतनु ने आश्रय दिया। राजमहल में पले-बढ़े, पर मन में सदैव ऋषित्व की गंभीरता थी। वे कुरुवंश के राजगुरु बने।
उन्होंने कौरवों और पांडवों — दोनों को धनुर्विद्या और शस्त्रविद्या का ज्ञान दिया। सोचिए उस गुरु का हृदय कैसा रहा होगा, जो जानता था कि उसके शिष्य एक दिन एक-दूसरे का रक्त बहाएँगे।
गुरु, जो किसी एक का नहीं था
कृपाचार्य ने अर्जुन की एकाग्रता देखी, भीम की शक्ति को दिशा दी,
दुर्योधन की महत्वाकांक्षा को भी प्रशिक्षित किया। उनके लिए सभी शिष्य थे। पर जब अधर्म और अहंकार की ज्वाला बढ़ी, तो वे राजधर्म से बँध गए।🧍
👩❤️👩उन्होंने कौरवों की ओर से युद्ध किया। क्या वे अधर्म के पक्षधर थे? नहीं। वे केवल अपने कर्तव्य से बँधे थे। और कभी-कभी कर्तव्य भी मनुष्य को भीतर से तोड़ देता है।👩❤️👩
🌍कुरुक्षेत्र — जहाँ शिष्य शत्रु बने। जब कुरुक्षेत्र में शंखनाद हुआ, कृपाचार्य ने भी शस्त्र उठाया। उन्होंने देखा—भीष्म पितामह का पतन। द्रोणाचार्य का छलपूर्वक वध। कर्ण का सूर्यास्त।
अपने ही शिष्यों का एक-दूसरे के हाथों अंत। हर दिन युद्धभूमि में रक्त बहता था, और हर रात एक गुरु का हृदय रोता था। वे जीवित रहे। और कभी-कभी जीवित रह जाना ही सबसे बड़ा दंड होता है।
तीन बचे हुए योद्धाओं में एक
महायुद्ध के पश्चात कौरव पक्ष से केवल तीन योद्धा जीवित बचे—
अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्य।🌍
⁉️पर क्या यह विजय थी? नहीं।
यह केवल शेष रह गई शून्यता थी। बाद में उन्होंने पांडवों के वंशज परीक्षित को शिक्षा दी।⁉️
🎇कल्पना कीजिए—जिस गुरु ने पांडवों के विरुद्ध युद्ध किया, वही उनके वंश का आचार्य बना। समय ने मानो उन्हें यह सिखाया कि युद्ध किसी का स्थायी नहीं होता।🎇
⁉️अमरता — वरदान या अभिशाप?⁉️
🕉️कहा जाता है कि कृपाचार्य चिरंजीवी हैं। पर क्या अमर रहना सुख है, जब स्मृतियाँ ही घाव बन जाएँ? उन्होंने देखा— भाई-भाई का वध, धर्म का भ्रम, राज्य का पतन। वे इतिहास के अमर साक्षी हैं —पर उनके हृदय की पीड़ा भी अमर है।🕉️
🍀मौन में छिपा हुआ करुण राग
कृपाचार्य की कथा में न अत्यधिक वीर रस है, न स्पष्ट खलनायक का अंधकार। उनकी कथा करुणा की है। एक गुरु की, जो अपने ही शिक्षित शिष्यों को मरते देखता रहा। एक योद्धा की, जो कर्तव्य और अंतर्मन के बीच झूलता रहा।
एक अमर की, जो युगों से इतिहास का भार उठाए चल रहा है। यदि कभी कुरुक्षेत्र की मिट्टी को हाथ में लेकर आप आँखें बंद करें, तो शायद आपको तलवारों की टकराहट नहीं— बल्कि कृपाचार्य की मौन आह सुनाई दे।


