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शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
शिव कुमार कुशवाहा
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#सत्य कथन
सत्य कथन ] 1 ज्यादा ले लूँ किसी रोज़ बस एक करवट सोते वक़्त, पूछ लेती है बेटा, मा आज भी आकर 1 तबियत तो ठीक है। सत्य कथन ] 1 ज्यादा ले लूँ किसी रोज़ बस एक करवट सोते वक़्त, पूछ लेती है बेटा, मा आज भी आकर 1 तबियत तो ठीक है।
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  • Ganeshi Uma Patwal - Author on ShareChat
    Ganeshi Uma Patwal
    #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #अच्छा व्यवहार #सत्य कथन
    मीठे शब्द और अच्छा व्यवहार ही, इंसान को बादशुह 378! बना सिर्फ़ पैसों से आदमी धनवान नहीं होता, धनवान ्असुली वह है जिसके पासु, अच्छी सोच, व्यवहार और शांत स्वभाव है। मधुर मीठे शब्द और अच्छा व्यवहार ही, इंसान को बादशुह 378! बना सिर्फ़ पैसों से आदमी धनवान नहीं होता, धनवान ्असुली वह है जिसके पासु, अच्छी सोच, व्यवहार और शांत स्वभाव है। मधुर
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #सत्य कथन
    २६ जनवरी १९५० को हिन्दुओं से कहा गया कि ~८ Greneral_৪ী, तूम Sc ೩, तुम ST ೩ = ப q OBc हिन्दू थे पिछड़ा ಕ ೩; सब 31R085T ಕf ೩, तुम  आदिवासी  हो मुसलमानों   से कहा गया तुम सिर्फ अल्पसंख्यक हो जबकि उनमें भी॰ शिया . अहमदिया , मुन्नी , हदीशी बरेलवी 73 अल পনান . सिद्द्दभकी  जैंसी जातियां थी मुगल মিভ্রসান নcা 15 1947 अगस्त [೯೯೯ २६  जनवरी   १९५० बटा Jayran 5096 " २६ जनवरी १९५० को हिन्दुओं से कहा गया कि ~८ Greneral_৪ী, तूम Sc ೩, तुम ST ೩ = ப q OBc हिन्दू थे पिछड़ा ಕ ೩; सब 31R085T ಕf ೩, तुम  आदिवासी  हो मुसलमानों   से कहा गया तुम सिर्फ अल्पसंख्यक हो जबकि उनमें भी॰ शिया . अहमदिया , मुन्नी , हदीशी बरेलवी 73 अल পনান . सिद्द्दभकी  जैंसी जातियां थी मुगल মিভ্রসান নcা 15 1947 अगस्त [೯೯೯ २६  जनवरी   १९५० बटा Jayran 5096
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #सत्य कथन
    बात करने से ही बाात बनती हपर बात न करने से अक्सर बा्तें बन जाती है । सत्य कथन !l बात करने से ही बाात बनती हपर बात न करने से अक्सर बा्तें बन जाती है । सत्य कथन !l
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #सत्य कथन
    माता पिता सत्य कथन क आशिर्वाद भगुवान से भी माता पिताबड़े होते है , क्यँकि भर्गवान सुख और दुख दोनों देते हैं. परंतु माता पिता सिफॅ सुख ही देते हैं (ು  माता पिता सत्य कथन क आशिर्वाद भगुवान से भी माता पिताबड़े होते है , क्यँकि भर्गवान सुख और दुख दोनों देते हैं. परंतु माता पिता सिफॅ सुख ही देते हैं (ು
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