दयानन्द सरस्वती जयंती
महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती ) यह दिन है कि हिंदू साधु और प्रसिद्ध विद्वान, स्वामी दयानंद की याद में राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। उन्हें जानवरों, बलिदान, जाति व्यवस्था, बाल विवाह, महिलाओं के खिलाफ भेदभाव जैसी सामाजिक बुराई का विरोध करने वाले पहले व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है। इनका जन्म फाल्गुन माह के कृष्ण दशमी में हुआ था। वे जाति से एक ब्राह्मण थे और इन्होने शब्द ब्राह्मण को अपने कर्मो से परिभाषित किया. ब्राह्मण वही होता हैं जो ज्ञान का उपासक हो और अज्ञानी को ज्ञान देने वाला दानी. स्वामी जी ने जीवन भर वेदों और उपनिषदों का पाठ किया और संसार के लोगो को उस ज्ञान से लाभान्वित किया. इन्होने मूर्ति पूजा को व्यर्थ बताया. निराकार ओमकार में भगवान का अस्तित्व है, यह कहकर इन्होने वैदिक धर्म को सर्वश्रेष्ठ बताया.वर्ष 1875 में स्वामी दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की. 1857 की क्रांति में भी स्वामी जी ने अपना अमूल्य योगदान दिया. अंग्रेजी हुकूमत से जमकर लौहा लिया और उनके खिलाफ एक षड्यंत्र के चलते 30 अक्टूबर 1883 को उनकी मृत्यु हो गई।
स्वामी दयानंद सरस्वती वैदिक धर्म में विश्वास रखते थे. उन्होंने राष्ट्र में व्याप्त कुरीतियों एवम अन्धविश्वासो का सदैव विरोध किया. उन्होंने समाज को नयी दिशा एवम वैदिक ज्ञान का महत्व समझाया. इन्होने कर्म और कर्मो के फल को ही जीवन का मूल सिधांत बताया. यह एक महान विचारक थे, इन्होने अपने विचारों से समाज को धार्मिक आडम्बर से दूर करने का प्रयास किया. यह एक महान देशभक्त थे, जिन्होंने स्वराज्य का संदेश दिया, जिसे बाद में बाल गंगाधर तिलक ने अपनाया और स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार हैं का नारा दिया. देश के कई महान सपूत स्वामी दयानंद सरस्वती जी के विचारों से प्रेरित थे और उनके दिखाये मार्ग पर चलकर ही उन सपूतों ने देश को आजादी दिलाई। #शत शत नमन


