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❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - **सुकून चाहिए? तो आज की reality को बिना filter देखो - जिस life को अभी दुनिया देखने का मौका भी नहीं मिला उसे "timi ing सही नहीं है" कहकर abortion के नाम पर खत्म कर दिया जाता है लिए body और उसी समाज में हम protein, taste और چ goals जीते ्जागते जीवों को आग पर रखते हैं, मछली , बकरा, गाय मुर्गा, डरते हैं, काँपते हैं, मरते हैं और हम इसे normal बोलकर आगे बढ़ जाते हैं क्योंकि शब्द बदलने से कम लगता है लेकिन कर्म का guilt weight कम नहीं होता, logic सीधा है कि जिस मन ने किसी की जान को "necessary damage" मान लिया वो मन कभी शांत नहीं रह सकता , क्योंकि सुकून comfort money party travel या likes से नहीं आता सुकून Abhaydan से आता है-जब हमारे कारण कोई जीव safe महसूस करता है तभी हमारा मन भी safe feel करता है, ज़रा सोचो अगर हमारे सामने कसाई तलवार लेकर खडा हो और हमें पता हो कि बचने का कोई नहीं तो उस पल option peace होगी या panic, बस वही panic जब हम के लिए ಞRT ; normal बना देते हैं तो वो अंदर लौटकर anxiety restlessness और emptiness बन जाती है, इसलिए आज सब कुछ होते हुए भी लोग बेचैन हैं, नींद नहीं है, मन भारी है, मैं Veg - NonVeg की बहस नहीं कर रहा मैं सिर्फ़ आईना दिखा रहा हूँ कि जो जीवन को हल्का समझता है उसका मन भारी रहता है और जो जीवन को सुरक्षा देता है उसके अंदर शांति अपने आप उतरती है, इसलिए सुकून बाहर मत ढूँढो - सुकून वहीं है जहाँ कोई जीव हमसे डरकर नहीं जीता, यही Abhaydan है और यही वो सच है जिसे ignore करोगे तो viral content बनेगा और accept करोगे तो जीवन बदल जाएगा। **सुकून चाहिए? तो आज की reality को बिना filter देखो - जिस life को अभी दुनिया देखने का मौका भी नहीं मिला उसे "timi ing सही नहीं है" कहकर abortion के नाम पर खत्म कर दिया जाता है लिए body और उसी समाज में हम protein, taste और چ goals जीते ्जागते जीवों को आग पर रखते हैं, मछली , बकरा, गाय मुर्गा, डरते हैं, काँपते हैं, मरते हैं और हम इसे normal बोलकर आगे बढ़ जाते हैं क्योंकि शब्द बदलने से कम लगता है लेकिन कर्म का guilt weight कम नहीं होता, logic सीधा है कि जिस मन ने किसी की जान को "necessary damage" मान लिया वो मन कभी शांत नहीं रह सकता , क्योंकि सुकून comfort money party travel या likes से नहीं आता सुकून Abhaydan से आता है-जब हमारे कारण कोई जीव safe महसूस करता है तभी हमारा मन भी safe feel करता है, ज़रा सोचो अगर हमारे सामने कसाई तलवार लेकर खडा हो और हमें पता हो कि बचने का कोई नहीं तो उस पल option peace होगी या panic, बस वही panic जब हम के लिए ಞRT ; normal बना देते हैं तो वो अंदर लौटकर anxiety restlessness और emptiness बन जाती है, इसलिए आज सब कुछ होते हुए भी लोग बेचैन हैं, नींद नहीं है, मन भारी है, मैं Veg - NonVeg की बहस नहीं कर रहा मैं सिर्फ़ आईना दिखा रहा हूँ कि जो जीवन को हल्का समझता है उसका मन भारी रहता है और जो जीवन को सुरक्षा देता है उसके अंदर शांति अपने आप उतरती है, इसलिए सुकून बाहर मत ढूँढो - सुकून वहीं है जहाँ कोई जीव हमसे डरकर नहीं जीता, यही Abhaydan है और यही वो सच है जिसे ignore करोगे तो viral content बनेगा और accept करोगे तो जीवन बदल जाएगा। - ShareChat