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#जनसेवक_रत्न_संतरामपालजी काशी के ब्राह्मणों ने करौंत स्थापित कर यह भ्रम फैलाया कि इससे स्वर्ग मिल सकता है। यह एक पाखंड था, जो अज्ञानता के कारण लोगों ने सच मान लिया। गरीबदास जी ने स्पष्ट कहा कि भक्ति के बिना मोक्ष संभव नहीं है। काशी में मरने या करौंत से गर्दन कटाने से मोक्ष नहीं मिलता। केवल सत्य साधना से ही जीव का उद्धार होता है।
जनसेवक_रत्न_संतरामपालजी - मोक्षनहींपाया कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दै दान। काशी करौत ले मरै, तौ भी नरक निदान।। जो व्यक्ति गाय दान करते हैं यानि धर्म करते हैं।वे यदि तिलभर माँस मछली या अन्य किसी जीव का खाएगा तो उसका वहः गऊ दान का धर्म समाप्त हा जाएगा | चाहे वह काशी में करौंत से गला भी कटा ले तो भी वह नरक में गिरेगा | -जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज मोक्षनहींपाया कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दै दान। काशी करौत ले मरै, तौ भी नरक निदान।। जो व्यक्ति गाय दान करते हैं यानि धर्म करते हैं।वे यदि तिलभर माँस मछली या अन्य किसी जीव का खाएगा तो उसका वहः गऊ दान का धर्म समाप्त हा जाएगा | चाहे वह काशी में करौंत से गला भी कटा ले तो भी वह नरक में गिरेगा | -जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज - ShareChat