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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - खुथीळीगइड सकारात्मकता के न्यूरल नेटवर्क बनाएं डॉ. रितु पाण्डेय शर्मा, reetupost@yahoo com  उम्र के बाद ह्से बताया  गया है कि एक  निश्चित मस्तिष्क का विकास रुक जाता है। परंतु आधुनिक न्यूरोसाइंस ने इस धारणा को बदल दिया है। आज हम जानते हैं कि हमारा मस्तिष्क जीवनभर परिवर्तनशील रहता है। मस्तिष्क अनुभवों विचारों, भावनाओं और अभ्यास के अनुसार स्वयं को ढाल सकता है। इस क्षमता को न्यूरोप्लास्टिसिटी कहा जाता है। सीखना, स्मृतियां बनना, भावनात्मक परिपक्वता, आदतों का निर्माण और यहां तक कि चोट या आघात के बाद रिहैब- ये सब न्यूरोप्लास्टिसिटी के कारण ही संभव हैं। जब हम कोई नया कौशल सीखते हैं नियमित अभ्यास करते हैं या किसी विचार या कार्य को बार-्बार दोहराते हैँ چآ संबंधित न्यूरॉन्स के बीच के संबंध और मजबूत हो जाते जिस दिशा में ध्यान और अभ्यास जाता है, मस्तिष्क दिशा उस्ी में स्वयं को व्यवस्थित करने लगता है। यदि हम नकारात्मक सोचते हैं शिकायत करते हैं या भय को पालते हैं॰ तो मस्तिष्क उसी प्रकार की प्रतिक्रियाओं के लिए डिफॉल्ट पाथन्वे बना लेता है। लेकिन यदि हम कृतज्ञता, समाधान केंद्रित सोच करुणा का अभ्यास करें तो धीरे- धीरे नए न्यूरल नेटवर्क विकसित होने लगते हैं। छोटे से छोटे कार्यों को भी माइंडफुल होकर   करना, सकारात्मक आदतें विकसित करना ये सब मस्तिष्क को सक्रिय, लचीला और जीवंत बनाए रखते हैं। - १ मिनट रीड खुथीळीगइड सकारात्मकता के न्यूरल नेटवर्क बनाएं डॉ. रितु पाण्डेय शर्मा, reetupost@yahoo com  उम्र के बाद ह्से बताया  गया है कि एक  निश्चित मस्तिष्क का विकास रुक जाता है। परंतु आधुनिक न्यूरोसाइंस ने इस धारणा को बदल दिया है। आज हम जानते हैं कि हमारा मस्तिष्क जीवनभर परिवर्तनशील रहता है। मस्तिष्क अनुभवों विचारों, भावनाओं और अभ्यास के अनुसार स्वयं को ढाल सकता है। इस क्षमता को न्यूरोप्लास्टिसिटी कहा जाता है। सीखना, स्मृतियां बनना, भावनात्मक परिपक्वता, आदतों का निर्माण और यहां तक कि चोट या आघात के बाद रिहैब- ये सब न्यूरोप्लास्टिसिटी के कारण ही संभव हैं। जब हम कोई नया कौशल सीखते हैं नियमित अभ्यास करते हैं या किसी विचार या कार्य को बार-्बार दोहराते हैँ چآ संबंधित न्यूरॉन्स के बीच के संबंध और मजबूत हो जाते जिस दिशा में ध्यान और अभ्यास जाता है, मस्तिष्क दिशा उस्ी में स्वयं को व्यवस्थित करने लगता है। यदि हम नकारात्मक सोचते हैं शिकायत करते हैं या भय को पालते हैं॰ तो मस्तिष्क उसी प्रकार की प्रतिक्रियाओं के लिए डिफॉल्ट पाथन्वे बना लेता है। लेकिन यदि हम कृतज्ञता, समाधान केंद्रित सोच करुणा का अभ्यास करें तो धीरे- धीरे नए न्यूरल नेटवर्क विकसित होने लगते हैं। छोटे से छोटे कार्यों को भी माइंडफुल होकर   करना, सकारात्मक आदतें विकसित करना ये सब मस्तिष्क को सक्रिय, लचीला और जीवंत बनाए रखते हैं। - १ मिनट रीड - ShareChat