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#satnam waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #satnam shri waheguru ji
satnam waheguru ji - भ्रुखिआ भ्रुख न उतरी जै बना पुरीआ -6 भासा सहस सिआणपा लख होहि त इक न चलै नालिािकिव सचिआरा होईऐ किव कूड़ै तुटै पालिपहुकमि रजाई चलणा नानक लिखिआ नालिI अर्थः यदि कोई व्यक्ति दुनिया के सारे पदार्थों तीनों लोकों की धन संपदा की ' पोटलियाँ ' भी बाँध ले, तो भी उसके मन ' ிஏா भूख शांत नहीं होती। मनुष्य सोचता है कि संग्रह से शांति मिलेगी , मीठा पर वासना की भूख अनंत है; वह पदार्थों से कभी नहीं भरती। मनुष्य के पास   हजारों लाखों चालकियाँ या तर्क हों, तो भी अंत में परमात्मा की दरगाह में या मृत्यु के समय उनमें से एक भी काम लगे नहीं आती  क्योकिं सांसारिक चतुराई सत्य के मार्ग पर बाधा हैं, सहायक नहीं। तर्क से ईश्वर को नहीं जीता जा सकता। फिर प्रश्न उठता है कि हम 'सच्चिआरा' सत्य स्वरूप या पवित्र कैसे बनें? तेरा और हमारे भीतर जो 'कूड़' झूठ, अज्ञान , अहंकार की दीवार पालि खडी है, वह कैसे टूटे। गुरु साहिब उत्तर देते हैंउस अकाल पुरख के 'हुकम' ईश्वरीय विधान और उसकी 'रज़ा' मर्जी  में चलना ही एकमात्र रास्ता है। और यह हुकम कहीं बाहर नहीं , बल्कि मनुष्य भाणा के साथ ही लिखा हुआ है उसके भीतर ही मौजूद है। मनुष्य को अपनी स्वनबुद्धिको त्यागकर परमात्मा के विधान को स्वीकार कर लेना ही सत्य की दीवार को गिराने का एकमात्र तरीका है। भ्रुखिआ भ्रुख न उतरी जै बना पुरीआ -6 भासा सहस सिआणपा लख होहि त इक न चलै नालिािकिव सचिआरा होईऐ किव कूड़ै तुटै पालिपहुकमि रजाई चलणा नानक लिखिआ नालिI अर्थः यदि कोई व्यक्ति दुनिया के सारे पदार्थों तीनों लोकों की धन संपदा की ' पोटलियाँ ' भी बाँध ले, तो भी उसके मन ' ிஏா भूख शांत नहीं होती। मनुष्य सोचता है कि संग्रह से शांति मिलेगी , मीठा पर वासना की भूख अनंत है; वह पदार्थों से कभी नहीं भरती। मनुष्य के पास   हजारों लाखों चालकियाँ या तर्क हों, तो भी अंत में परमात्मा की दरगाह में या मृत्यु के समय उनमें से एक भी काम लगे नहीं आती  क्योकिं सांसारिक चतुराई सत्य के मार्ग पर बाधा हैं, सहायक नहीं। तर्क से ईश्वर को नहीं जीता जा सकता। फिर प्रश्न उठता है कि हम 'सच्चिआरा' सत्य स्वरूप या पवित्र कैसे बनें? तेरा और हमारे भीतर जो 'कूड़' झूठ, अज्ञान , अहंकार की दीवार पालि खडी है, वह कैसे टूटे। गुरु साहिब उत्तर देते हैंउस अकाल पुरख के 'हुकम' ईश्वरीय विधान और उसकी 'रज़ा' मर्जी  में चलना ही एकमात्र रास्ता है। और यह हुकम कहीं बाहर नहीं , बल्कि मनुष्य भाणा के साथ ही लिखा हुआ है उसके भीतर ही मौजूद है। मनुष्य को अपनी स्वनबुद्धिको त्यागकर परमात्मा के विधान को स्वीकार कर लेना ही सत्य की दीवार को गिराने का एकमात्र तरीका है। - ShareChat