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।। ॐ ।। एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय। अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा॥ अर्जुन ! ऐसा समझ कि सम्पूर्ण भूत 'एतद्योनीनि' -इन महाप्रकृतियों से, परा और अपरा प्रकृतियों से ही उत्पन्न होनेवाले हैं। यही दोनों एकमात्र योनि हैं। मैं सम्पूर्ण जगत् की उत्पत्ति तथा प्रलय रूप हूँ अर्थात् मूल कारण हूँ। जगत् की उत्पत्ति मुझसे है और (प्रलय) विलय भी मुझमें है। जब तक प्रकृति विद्यमान है, तब तक मैं ही उसकी उत्पत्ति हूँ और जब कोई महापुरुष प्रकृति का पार पा लेता है, तब मैं ही महाप्रलय भी हूँ, जो अनुभव में आता है। #यथार्थ गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #❤️जीवन की सीख
यथार्थ गीता - 3 भगवान और सदूगुरू || 3 | | सर्वाणीत्युपधारय।  एतद्योनीनि  মুনানি योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा।। अर्जुन ! ऐसा समझ कि सम्पूर्ण भूत ' एतद्योनीनि' -इन महाप्रकृतियों से, परा और अपरा प्रकृतियों से ही होनेवाले हैं। यही दोनों एकमात्र योनि हैं। मैं उत्पन्न जगत् की उत्पत्ति तथा प्रलय रूप हूँ अर्थात् सम्पूर्ण  है और मूल कारण हूँ ।जगत् की उत्पत्ति मुझसे (प्रलय ) विलय भी मुझमें है। जब तक प्रकृति विद्यमान है, तब तक मैं ही उसकी उत्पत्ति हूँ और जब कोई महापुरुष प्रकृति का पार पा लेता है, तब मैं ही भी हूँ, जो अनुभव में आता है। महाप्रलय पूज्य स्वामी  श्री परमानन्द जी महाराज जी ) ( परमहंस ९ यथार्थ गीता " के प्रणेता स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज 3 भगवान और सदूगुरू || 3 | | सर्वाणीत्युपधारय।  एतद्योनीनि  মুনানি योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा।। अर्जुन ! ऐसा समझ कि सम्पूर्ण भूत ' एतद्योनीनि' -इन महाप्रकृतियों से, परा और अपरा प्रकृतियों से ही होनेवाले हैं। यही दोनों एकमात्र योनि हैं। मैं उत्पन्न जगत् की उत्पत्ति तथा प्रलय रूप हूँ अर्थात् सम्पूर्ण  है और मूल कारण हूँ ।जगत् की उत्पत्ति मुझसे (प्रलय ) विलय भी मुझमें है। जब तक प्रकृति विद्यमान है, तब तक मैं ही उसकी उत्पत्ति हूँ और जब कोई महापुरुष प्रकृति का पार पा लेता है, तब मैं ही भी हूँ, जो अनुभव में आता है। महाप्रलय पूज्य स्वामी  श्री परमानन्द जी महाराज जी ) ( परमहंस ९ यथार्थ गीता " के प्रणेता स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज - ShareChat