जो शहर-ए-मुस्तफा जाते नहीं हैं
सुकून-ए-दिल कभी पाते नहीं हैं
बसा ले गुंबद-ए-ख़ज़रा नज़र में
ये मौक़े बार-बार आते नहीं है
अकरम तिलहरी
جو شہرِ مصطفی جاتے نہیں ہیں
سکونِ دل کبھی پاتے نہیں ہیں
بسا لے گنبدِ خضرا نظر میں
یہ موقعے بار بار آتے نہیں ہیں
اکرم تلہری
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