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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #💔दर्द भरी कहानियां #✍प्रेमचंद की कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📚कविता-कहानी संग्रह
✍मेरे पसंदीदा लेखक - साथ तोहरा चलीं कहाँ तकले अपनहीं के छली कहाँ तकले मन के बाती जरा चुकल बानी रोज तिल-तिल गलीं कहाँ तकले बदल गइल बा सोच के साँचा ओह में हम ढलीं कहाँ तकले आग लागल बा एह जमाना के हमहूँ आखिर जलीं कहाँ तकले सह ना पावस ऊ कबो हमरा के उनका नजरी खलीं कहाँ तकले बात कहला बिना रहाला ना बंद मुँह हम क लीं कहाँ तकले साथ तोहरा चलीं कहाँ तकले अपनहीं के छली कहाँ तकले मन के बाती जरा चुकल बानी रोज तिल-तिल गलीं कहाँ तकले बदल गइल बा सोच के साँचा ओह में हम ढलीं कहाँ तकले आग लागल बा एह जमाना के हमहूँ आखिर जलीं कहाँ तकले सह ना पावस ऊ कबो हमरा के उनका नजरी खलीं कहाँ तकले बात कहला बिना रहाला ना बंद मुँह हम क लीं कहाँ तकले - ShareChat