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#😇 चाणक्य नीति
😇 चाणक्य नीति - पतिरेव गुरुः स्त्रीणां सर्वस्याभ्यागतो गुरुः | गुरुरग्निर्द्विजातीनां वर्णानां ब्राह्मणो गुरुः ।I ( चाणक्यनीति ५ / १) अभ्यागत अर्थात् स्त्रियोंका गुरु पति ही है, अतिथि सबका गुरु है, ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यका गुरु अग्नि है और चारों वर्णोंका गुरु ब्राह्मण है। पतिरेव गुरुः स्त्रीणां सर्वस्याभ्यागतो गुरुः | गुरुरग्निर्द्विजातीनां वर्णानां ब्राह्मणो गुरुः ।I ( चाणक्यनीति ५ / १) अभ्यागत अर्थात् स्त्रियोंका गुरु पति ही है, अतिथि सबका गुरु है, ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यका गुरु अग्नि है और चारों वर्णोंका गुरु ब्राह्मण है। - ShareChat