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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - इकलौता ऐसा देश है. HKa जहाँ दारू पीने वालों को सजा दी जाती है, और दारू बनाने वालों को लाइसेंस | इकलौता ऐसा देश है. HKa जहाँ दारू पीने वालों को सजा दी जाती है, और दारू बनाने वालों को लाइसेंस | - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - प्रीत करो तो ऐसी करो जैसी करे कपास| जीते जी या तन ढके मरे न छोड़े साथ II सच्चा प्रेम जीवन -भर मान - सम्मान की रक्षा करता है और मृत्यु के बाद भी साथ नहीं यह समर्पण , रक्षा छोड़ता ( कफन बनकर ) और निरंतरता का संदेश देता है, जो स्वार्थ रहित होकर सुख-दुःख दोनों में अटूट साथ निभाता है। प्रीत करो तो ऐसी करो जैसी करे कपास| जीते जी या तन ढके मरे न छोड़े साथ II सच्चा प्रेम जीवन -भर मान - सम्मान की रक्षा करता है और मृत्यु के बाद भी साथ नहीं यह समर्पण , रक्षा छोड़ता ( कफन बनकर ) और निरंतरता का संदेश देता है, जो स्वार्थ रहित होकर सुख-दुःख दोनों में अटूट साथ निभाता है। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - सुभाषितम् नदीतीरे च ये वृक्षाः ব্রূামিনী परगेहेषु मंत्रिहीनाश्च राजानः शीघ्रं नश्यन्त्यसंशयम् ।l दृढौ कै किनारे पर स्थित वृक्ष दूलरै कै घररथें रहनै वाली स्त्री और मन्त्रियों सै विहीन राज्जा॰० (ये)शीघ्र हीं नृष्ट हौ जाते हैं॰॰॰ इसर्में सन्दैह नहीं करा चााहिए [ सुभाषितम् नदीतीरे च ये वृक्षाः ব্রূামিনী परगेहेषु मंत्रिहीनाश्च राजानः शीघ्रं नश्यन्त्यसंशयम् ।l दृढौ कै किनारे पर स्थित वृक्ष दूलरै कै घररथें रहनै वाली स्त्री और मन्त्रियों सै विहीन राज्जा॰० (ये)शीघ्र हीं नृष्ट हौ जाते हैं॰॰॰ इसर्में सन्दैह नहीं करा चााहिए [ - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - Mature होना अच्छा है लेकिन इतना भी नहीं कि तुम्हारी भावनाएँ ही गायब हा जाएँ। थोड़ा सा बचपना, थोड़ी सी ज़िद, थोड़ा सा खुलकर हँसना 4 यही तो ज़िंदा होने का सबूत है। Mature होना अच्छा है लेकिन इतना भी नहीं कि तुम्हारी भावनाएँ ही गायब हा जाएँ। थोड़ा सा बचपना, थोड़ी सी ज़िद, थोड़ा सा खुलकर हँसना 4 यही तो ज़िंदा होने का सबूत है। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - पितुरप्यधिका माता गर्भधारणपोषणात् ( লীকত্ত त्रिषु  अतो हि नास्ति मातृसमो गुरुः ।I गर्भ को धारण करने और पालनपोषण करने के कारण माता का स्थान पिता से भी बढकर है। इसलिए तीनों लोकों में माता के समान कोई गुरु नहीं अर्थात् माता परमगुरु है। पितुरप्यधिका माता गर्भधारणपोषणात् ( লীকত্ত त्रिषु  अतो हि नास्ति मातृसमो गुरुः ।I गर्भ को धारण करने और पालनपोषण करने के कारण माता का स्थान पिता से भी बढकर है। इसलिए तीनों लोकों में माता के समान कोई गुरु नहीं अर्थात् माता परमगुरु है। - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख #🙏कर्म क्या है❓
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - मैं कभी हिसाब नहीं रखता हूं, कि कितना पाया कितना गंवाया.. ! बस मेरी एक ही चाहत है कि मुझे वहां से दर्द न मिले जहां हमने अपना सब कुछ लुटाया हैं..!! मैं कभी हिसाब नहीं रखता हूं, कि कितना पाया कितना गंवाया.. ! बस मेरी एक ही चाहत है कि मुझे वहां से दर्द न मिले जहां हमने अपना सब कुछ लुटाया हैं..!! - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️जीवन की सीख - अयि शृणु' निधाय मम पाणितलेड्द्य कान्ते ! हस्तं संसार मार्गम् अखिलं सह याव नित्यम्। एकं हि लक्ष्यमिह नौ भविता हि लोके , प्रीत्या तथा मधुरतामुपयातु कालः|। हे मेरी रूपवती प्रिये! आज अपना यह कोमल हाथ हमेशा के लिए मेरे हाथों  में साँप दो, ताकि हम ज़िंदगी के इस पूरे सफर में हमेशा एक-दूसरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। आज से इस दुनिया में हम दोंनों का रास्ता और मंजिल एक ही होगी , और मुझे विश्वास है कि हमारे इस प्यार से... हमारा आने वाला हर एक पल हमेशा के लिए मीठा (मथुर ) हो जाएगा। अयि शृणु' निधाय मम पाणितलेड्द्य कान्ते ! हस्तं संसार मार्गम् अखिलं सह याव नित्यम्। एकं हि लक्ष्यमिह नौ भविता हि लोके , प्रीत्या तथा मधुरतामुपयातु कालः|। हे मेरी रूपवती प्रिये! आज अपना यह कोमल हाथ हमेशा के लिए मेरे हाथों  में साँप दो, ताकि हम ज़िंदगी के इस पूरे सफर में हमेशा एक-दूसरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। आज से इस दुनिया में हम दोंनों का रास्ता और मंजिल एक ही होगी , और मुझे विश्वास है कि हमारे इस प्यार से... हमारा आने वाला हर एक पल हमेशा के लिए मीठा (मथुर ) हो जाएगा। - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - पितुरप्यधिका माता गर्भधारणपोषणात् ( লীকত্ত त्रिषु  अतो हि नास्ति मातृसमो गुरुः ।I गर्भ को धारण करने और पालनपोषण करने के कारण माता का स्थान पिता से भी बढकर है। इसलिए तीनों लोकों में माता के समान कोई गुरु नहीं अर्थात् माता परमगुरु है। पितुरप्यधिका माता गर्भधारणपोषणात् ( লীকত্ত त्रिषु  अतो हि नास्ति मातृसमो गुरुः ।I गर्भ को धारण करने और पालनपोषण करने के कारण माता का स्थान पिता से भी बढकर है। इसलिए तीनों लोकों में माता के समान कोई गुरु नहीं अर्थात् माता परमगुरु है। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - कभी हार मानने की T आदत ही एक 5a दिन ds} facila  कभी हार मानने की T आदत ही एक 5a दिन ds} facila - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - परिश्रान्तौ बाहू स्खलति करतोउरित्रयुगलम् जडीभूतौ पादौ पदमपि न यातुं प्रभवतः। इयं मध्येधारं मम समुपयाता लघुतरी  तरेद्वा मज्जेद्वा त्वयि निहितभाराः खलु वयम्।।३।I  भाषार्थः चूर- चूर हो गयी हैं और हाथ से पतवार " प्रभो! मेरी दोनों भुजाएँ थककर  खिसक रही हैं, पाँव ऐसे जकड़ गये हैं कि पग-भर भी आगे नहीं बढ् सकते। यह मेरी छोटी-सी नैया मझधार में आ पड़ी है, अब यह किनारे लगे या डूब जाय; मैंने तो सब भार तुझ पर छोड दिया है।।३II  परिश्रान्तौ बाहू स्खलति करतोउरित्रयुगलम् जडीभूतौ पादौ पदमपि न यातुं प्रभवतः। इयं मध्येधारं मम समुपयाता लघुतरी  तरेद्वा मज्जेद्वा त्वयि निहितभाराः खलु वयम्।।३।I  भाषार्थः चूर- चूर हो गयी हैं और हाथ से पतवार " प्रभो! मेरी दोनों भुजाएँ थककर  खिसक रही हैं, पाँव ऐसे जकड़ गये हैं कि पग-भर भी आगे नहीं बढ् सकते। यह मेरी छोटी-सी नैया मझधार में आ पड़ी है, अब यह किनारे लगे या डूब जाय; मैंने तो सब भार तुझ पर छोड दिया है।।३II - ShareChat