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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - पितुरप्यधिका माता गर्भधारणपोषणात् ( লীকত্ত त्रिषु  अतो हि नास्ति मातृसमो गुरुः ।I गर्भ को धारण करने और पालनपोषण करने के कारण माता का स्थान पिता से भी बढकर है। इसलिए तीनों लोकों में माता के समान कोई गुरु नहीं अर्थात् माता परमगुरु है। पितुरप्यधिका माता गर्भधारणपोषणात् ( লীকত্ত त्रिषु  अतो हि नास्ति मातृसमो गुरुः ।I गर्भ को धारण करने और पालनपोषण करने के कारण माता का स्थान पिता से भी बढकर है। इसलिए तीनों लोकों में माता के समान कोई गुरु नहीं अर्थात् माता परमगुरु है। - ShareChat