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#😇 चाणक्य नीति
😇 चाणक्य नीति - सुभाषितम् कश्चित् कस्यचिन्मित्रं, न कश्चित् कस्यचित् रिपुः| अर्थतस्तु निबध्यन्ते , मित्राणि रिपवस्तथा Il भावार्थः कोई भी जन्म से मित्र या शत्रु नहीं होता; व्यक्ति का व्यवहार और परिस्थितियाँ ही उन्हें मित्र या शत्रु बनाती हैं, क्योंकि अच्छे आचरण से मित्रता और बुरे आचरण से शत्रुता उत्पन्न 2-31 सुभाषितम् कश्चित् कस्यचिन्मित्रं, न कश्चित् कस्यचित् रिपुः| अर्थतस्तु निबध्यन्ते , मित्राणि रिपवस्तथा Il भावार्थः कोई भी जन्म से मित्र या शत्रु नहीं होता; व्यक्ति का व्यवहार और परिस्थितियाँ ही उन्हें मित्र या शत्रु बनाती हैं, क्योंकि अच्छे आचरण से मित्रता और बुरे आचरण से शत्रुता उत्पन्न 2-31 - ShareChat
#😇 चाणक्य नीति
😇 चाणक्य नीति - सुभाषितम् राष्ट्रकृतं पापं राज्ञः पापं पुरोहितः| राजा भर्ता च स्त्रीकृतं पापं शिष्य पाप गुरुस्तथा |I भावार्थः किए ' गए पापों का फल राजा राजा राष्ट्रकृतं पापंः राष्ट्र (प्रजा) द्वारा ' को मिलता है, क्योंकि चह उनका शासक है। पुरोहितःः राजा के पापों के fag' पुरोहित (या Z5: m उसक मंत्रीगण) जिम्मेदार होता है, क्योंकि वह राजा को मार्गदर्शन देता है। किए ' भर्ता च स्त्रीकृतं पापंः पत्नी द्वारा गए पापों का फल उसके पति को भोगना पड़ता है। शिष्य पाप गुरुस्तथाः शिष्य के पापों का बोझ उसके गुरु पर आता है, क्योंकि गुरु ही उसे शिक्षा देता है। सुभाषितम् राष्ट्रकृतं पापं राज्ञः पापं पुरोहितः| राजा भर्ता च स्त्रीकृतं पापं शिष्य पाप गुरुस्तथा |I भावार्थः किए ' गए पापों का फल राजा राजा राष्ट्रकृतं पापंः राष्ट्र (प्रजा) द्वारा ' को मिलता है, क्योंकि चह उनका शासक है। पुरोहितःः राजा के पापों के fag' पुरोहित (या Z5: m उसक मंत्रीगण) जिम्मेदार होता है, क्योंकि वह राजा को मार्गदर्शन देता है। किए ' भर्ता च स्त्रीकृतं पापंः पत्नी द्वारा गए पापों का फल उसके पति को भोगना पड़ता है। शिष्य पाप गुरुस्तथाः शिष्य के पापों का बोझ उसके गुरु पर आता है, क्योंकि गुरु ही उसे शिक्षा देता है। - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇
🙏गुरु महिमा😇 - शिव समान दाता नहीं विपद विदारण हार लज्जा सबकी राखिये श्रीनन्दी के असवार शिव समान दाता नहीं विपद विदारण हार लज्जा सबकी राखिये श्रीनन्दी के असवार - ShareChat
#😇 चाणक्य नीति
😇 चाणक्य नीति - पतिरेव गुरुः स्त्रीणां सर्वस्याभ्यागतो गुरुः | गुरुरग्निर्द्विजातीनां वर्णानां ब्राह्मणो गुरुः ।I ( चाणक्यनीति ५ / १) अभ्यागत अर्थात् स्त्रियोंका गुरु पति ही है, अतिथि सबका गुरु है, ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यका गुरु अग्नि है और चारों वर्णोंका गुरु ब्राह्मण है। पतिरेव गुरुः स्त्रीणां सर्वस्याभ्यागतो गुरुः | गुरुरग्निर्द्विजातीनां वर्णानां ब्राह्मणो गुरुः ।I ( चाणक्यनीति ५ / १) अभ्यागत अर्थात् स्त्रियोंका गुरु पति ही है, अतिथि सबका गुरु है, ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यका गुरु अग्नि है और चारों वर्णोंका गुरु ब्राह्मण है। - ShareChat
#😇 चाणक्य नीति
😇 चाणक्य नीति - अन्नदानं महादानं विद्यादानमतः परम् अन्नदान महादान है, पर उससे भी श्रेष्ठ विद्यादान है। अन्न क्षणिक तृप्ति देता है, पर विद्या जीवन भर साथ देता है। ODI VIOU 8080 अन्नदानं महादानं विद्यादानमतः परम् अन्नदान महादान है, पर उससे भी श्रेष्ठ विद्यादान है। अन्न क्षणिक तृप्ति देता है, पर विद्या जीवन भर साथ देता है। ODI VIOU 8080 - ShareChat
#🙏 माँ वैष्णो देवी
🙏 माँ वैष्णो देवी - कोडपि कोशोड्यं विद्यते तव भारति। अपूर्वः व्ययतो वृद्धिमायाति क्षयमायाति संचयात्।। अथः माँ सरस्वूती का ज्ञान रूपी खजाना अद्भुत है क्योंकि यह बाँट्ने से बढ़ता है और बचाकर रखने से घटता है। कोडपि कोशोड्यं विद्यते तव भारति। अपूर्वः व्ययतो वृद्धिमायाति क्षयमायाति संचयात्।। अथः माँ सरस्वूती का ज्ञान रूपी खजाना अद्भुत है क्योंकि यह बाँट्ने से बढ़ता है और बचाकर रखने से घटता है। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - क्या फर्क पडता है हमारे पास कितने " लाख कितने ಫೆತ, कितने घर और कितनी  गाड़ियां हैं बस दो ही रोटी है जीना तो खाना तो बस एक ही जिंदगी है फर्क सिर्फ इस बात से s71 है कितने पल हमने से बिताये और कितने लोग हमारी खुशी वजह 7 खुशी से जीए . @ क्या फर्क पडता है हमारे पास कितने " लाख कितने ಫೆತ, कितने घर और कितनी  गाड़ियां हैं बस दो ही रोटी है जीना तो खाना तो बस एक ही जिंदगी है फर्क सिर्फ इस बात से s71 है कितने पल हमने से बिताये और कितने लोग हमारी खुशी वजह 7 खुशी से जीए . @ - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - इंसान तिजोरियां भरने में उम्र बिता देता है, पर भूल जाता है कि कफ़न में कोई जेब 761 होती और सब यहीं रह जाएगा | इंसान तिजोरियां भरने में उम्र बिता देता है, पर भूल जाता है कि कफ़न में कोई जेब 761 होती और सब यहीं रह जाएगा | - ShareChat
#😇 चाणक्य नीति
😇 चाणक्य नीति - सुभाषितम् एकः पापानि ক্তুতন फलं भुङ्क्ते महाजनः | भोक्तारो विप्रमुच्यन्ते कर्ता दोषेण लिप्यते ।l भावार्थः मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है। सुभाषितम् एकः पापानि ক্তুতন फलं भुङ्क्ते महाजनः | भोक्तारो विप्रमुच्यन्ते कर्ता दोषेण लिप्यते ।l भावार्थः मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - @uouSav I। प्रेम ईश्वरस्य महत्तम पारितोषिकमस्ति || " प्रेम भगवान का सबसे बड़़ा उपहार है। ' @uouSav I। प्रेम ईश्वरस्य महत्तम पारितोषिकमस्ति || " प्रेम भगवान का सबसे बड़़ा उपहार है। ' - ShareChat