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#🙏 माँ वैष्णो देवी
🙏 माँ वैष्णो देवी - सुभाषितम् यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः | यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः। | (0/%0 भावार्थ जहाँ स्त्रियों (नारियों) का सम्मान और पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं (खुश रहते हैं); और जहाँ उनका सम्मान नहीं होता, वहाँ सभी कार्य (धर्म , यज्ञ, अनुष्ठान आदि) निष्फल हो TA 3" सुभाषितम् यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः | यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः। | (0/%0 भावार्थ जहाँ स्त्रियों (नारियों) का सम्मान और पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं (खुश रहते हैं); और जहाँ उनका सम्मान नहीं होता, वहाँ सभी कार्य (धर्म , यज्ञ, अनुष्ठान आदि) निष्फल हो TA 3" - ShareChat
#😇 चाणक्य नीति
😇 चाणक्य नीति - सुभाषितम् परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्। वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम् भावार्थ पीठ पीछे काम बिगाड़नेवाले तथा सामने प्रिय बोलने वाले मित्र को मुंह पर दूध रखे हुए विष के घड़े के समान त्याग देना चाहिए सुभाषितम् परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्। वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम् भावार्थ पीठ पीछे काम बिगाड़नेवाले तथा सामने प्रिय बोलने वाले मित्र को मुंह पर दूध रखे हुए विष के घड़े के समान त्याग देना चाहिए - ShareChat
#😇 चाणक्य नीति
😇 चाणक्य नीति - सुभाषितम् सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्याडभ्यासेन रक्ष्यते | मृज्यया रक्ष्यते रूपं कुलं ాభuుగ || বৃনীন 9৫/)%0 भावार्थ धर्म की रक्षा सत्य से, विद्या ( ज्ञान) की रक्षा अभ्यास से, रूप (शारीरिक सौंदर्य व्यक्तित्व) की रक्षा स्वच्छता से, और कुल (वंश | परिवार) की रक्षा अच्छे आचरण से होती है सुभाषितम् सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्याडभ्यासेन रक्ष्यते | मृज्यया रक्ष्यते रूपं कुलं ాభuుగ || বৃনীন 9৫/)%0 भावार्थ धर्म की रक्षा सत्य से, विद्या ( ज्ञान) की रक्षा अभ्यास से, रूप (शारीरिक सौंदर्य व्यक्तित्व) की रक्षा स्वच्छता से, और कुल (वंश | परिवार) की रक्षा अच्छे आचरण से होती है - ShareChat
#😇 चाणक्य नीति
😇 चाणक्य नीति - 1|$ खृथा चित्त तृथाा @jचJ थुथाा ढाचिस्त्ृथा द्वियुा॰ [ चित्तै बाचि क्वियायया च्च स्नाष्टूनामैकरपृत्ा ७१ हिंदी अनुवादः जैसा मन होता है, वैसी वाणी होती है, और जैसी वाणी होती है, वैसे कर्म होते हैं। सज्जनों के मन, वाणी और कर्म एक समान होते हैं। 1|$ खृथा चित्त तृथाा @jचJ थुथाा ढाचिस्त्ृथा द्वियुा॰ [ चित्तै बाचि क्वियायया च्च स्नाष्टूनामैकरपृत्ा ७१ हिंदी अनुवादः जैसा मन होता है, वैसी वाणी होती है, और जैसी वाणी होती है, वैसे कर्म होते हैं। सज्जनों के मन, वाणी और कर्म एक समान होते हैं। - ShareChat
#😇 चाणक्य नीति
😇 चाणक्य नीति - सुभाषितम् तैलाद् रक्षेत् जलाद् रक्षेत् रक्षेत् शिथिलबन्धनात्। मुर्खहस्ते न दातव्यम् एवं वदति पुस्तकम् ।। HTaref एक पुस्तक कहता है कि मेरी तेल से रक्षा करो (तेल पुस्तक में दाग छोड़ देता है) , मेरी जल से रक्षा करो (पानी पुस्तक को नष्ट कर देता है) , मेरी शिथिल बंधन से रक्षा करो (ठीक से बंधे न होने पर पुस्तक के पृष्ठ बिखर जाते हैं) और मुझे कभी किसी मूर्ख के हाथों में मत सौंपो। सुभाषितम् तैलाद् रक्षेत् जलाद् रक्षेत् रक्षेत् शिथिलबन्धनात्। मुर्खहस्ते न दातव्यम् एवं वदति पुस्तकम् ।। HTaref एक पुस्तक कहता है कि मेरी तेल से रक्षा करो (तेल पुस्तक में दाग छोड़ देता है) , मेरी जल से रक्षा करो (पानी पुस्तक को नष्ट कर देता है) , मेरी शिथिल बंधन से रक्षा करो (ठीक से बंधे न होने पर पुस्तक के पृष्ठ बिखर जाते हैं) और मुझे कभी किसी मूर्ख के हाथों में मत सौंपो। - ShareChat
#😇 चाणक्य नीति
😇 चाणक्य नीति - सुभाषितम् अग्निशेषमृणशेषं   शत्रुशेषं तथैव  | पुनः पुनः प्रवर्धेत तस्माच्शेषं न कारयेत् I भावार्थ आग, कर्ज (ऋण) और शत्रु - इनमें से किसी को भी सा भी बचा नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि ये बार- থরীভা' बार बढ़कर विनाशकारी हो सकते हैं इसलिए इन्हें पूरी तरह समाप्त कर देना चाहिए. इसका अर्थ है किकिसी भी खतरे के अंश को पनपने का मौका नहीं देना चाहिए। सुभाषितम् अग्निशेषमृणशेषं   शत्रुशेषं तथैव  | पुनः पुनः प्रवर्धेत तस्माच्शेषं न कारयेत् I भावार्थ आग, कर्ज (ऋण) और शत्रु - इनमें से किसी को भी सा भी बचा नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि ये बार- থরীভা' बार बढ़कर विनाशकारी हो सकते हैं इसलिए इन्हें पूरी तरह समाप्त कर देना चाहिए. इसका अर्थ है किकिसी भी खतरे के अंश को पनपने का मौका नहीं देना चाहिए। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - सुभाषितम् नागुणी गुणितं वेत्ति गुणिषु मत्सरी ঘুতী 1 गुणरागी च सरलो विरलो जनः II गुणी च भावार्थ गुणहीन व्यक्ति गुणवान को नहीं पहचान सकता गुणवान व्यक्ति अन्य गुणवान व्यक्तियों से जलता है स्वयं गुणवान व्यक्ति के d होकर अन्य गुणों गुणी अनुराग रखने वाले सरल व्यक्ति बहुत कम होते हैं सुभाषितम् नागुणी गुणितं वेत्ति गुणिषु मत्सरी ঘুতী 1 गुणरागी च सरलो विरलो जनः II गुणी च भावार्थ गुणहीन व्यक्ति गुणवान को नहीं पहचान सकता गुणवान व्यक्ति अन्य गुणवान व्यक्तियों से जलता है स्वयं गुणवान व्यक्ति के d होकर अन्य गुणों गुणी अनुराग रखने वाले सरल व्यक्ति बहुत कम होते हैं - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - हमारी जिंदगी तो बस पतंग की जैसी है। जब तक उड़ रही है तो उड़ रही है पता नहीं कब यह कट जाए और अस्तित्व मिट जाए इसीलिए हरपल का आनंद लीजिए और जिएं खुलकर जिंदगी को हमारी जिंदगी तो बस पतंग की जैसी है। जब तक उड़ रही है तो उड़ रही है पता नहीं कब यह कट जाए और अस्तित्व मिट जाए इसीलिए हरपल का आनंद लीजिए और जिएं खुलकर जिंदगी को - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - सुभाषितम् यथा धेनु सहस्रेषु वत्सो गच्छति मातरम्। कर्म कर्तारमनुगच्छति II কূন तथा यच्च भावार्थः जैसे हजारों गायों में भी बछरा अपनी ही मां के पास जाता है उसी तरह किया हुआ कर्म कर्ता के पीछे पीछे जाता है। सुभाषितम् यथा धेनु सहस्रेषु वत्सो गच्छति मातरम्। कर्म कर्तारमनुगच्छति II কূন तथा यच्च भावार्थः जैसे हजारों गायों में भी बछरा अपनी ही मां के पास जाता है उसी तरह किया हुआ कर्म कर्ता के पीछे पीछे जाता है। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - जिस इंसान को कभी अपनी गलती पर. ೦ पछतावा न हो तो समझ लीजिए, गलती उसकी नहीं है आपकी है,जो आप उसको पहचान नहीं पाए..!! जिस इंसान को कभी अपनी गलती पर. ೦ पछतावा न हो तो समझ लीजिए, गलती उसकी नहीं है आपकी है,जो आप उसको पहचान नहीं पाए..!! - ShareChat