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#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
✡️ज्योतिष समाधान 🌟 - चमत्कारचिन्तामणि यहाँ कुछ ओर श्लोकों का अर्थ समझते हेः #ಫ1ಫ 1:* विधुर्गोंकुलीराजंगः सन्वपुस्थो  थनाध्यक्षलावण्यमानन्दपूर्णम् विधत्तेडधनं क्षीणदेहं दरिद्रं जडं श्रोत्रहीनं नरं शेपलग्ने I। १ I।  में चन्द्रमा वृष, कर्क और अर्थः जिस मनुष्य के जन्मलग्न मेष इन राशियों का होकर पडे़े तो वह मनुष्य द्रव्यवान् एवं आनन्द, लावण्य , सुन्दरता से पूर्ण होता है और इनसे अन्य राशि में हो तो वह दरिद्र, जड़, कष से शरीरवाला कारनों से  सुननेवाला होता है। করস *श्लोक २ *  हिमांशौ वसुस्थानगे धान्यलाभः शरीरेडतिसौख्यं विलासोड़ङ्गनानाम् | कुटुम्बे रतिर्जायते तस्य तुच्छं वशं दर्शने याति देवांगनाउपि I। २ Il अर्थः जिस मनुष्य के धनस्थान में चन्द्रमा हो, उसको थान्य लाभ, अत्यन्त शारीरिक सुख, अंगनाओं (स्त्रि्यो) का विलास , स्वल्प आसक्ति इत्यादि फल होते हैं और  कुटुम्च र्मे  उसके दर्शन से देवांगना भी मोहित हो जार्ये फिर ओर स्त्रिर्यों की क्या बात है। *পলীব্ধ 3:* विधी विक्रमे विक्रमेणीति वित्तं तपस्वी भवेद्भामिनीरज्जितोडपि | किञ्चितयेत्साहजं तस्य शर्म प्रतापोज्ज्वलो धर्मिणो वैजयन्त्या II 3 Il अर्थः जिस मनुष्य के तृतीय स्थान रमें चन्द्रमा हो, वह अपने उद्यम से धन संचय करनेवाला और रूपवती आदि स्त्रिर्यों का लुभाया हुआ भी अपने धर्म से न डिगनेवाला तपस्वी होता है। वह धर्मात्मा उज्ज्वल यशवाला तथा सहोदर भ्राताओं के सुख से परिपूर्ण होता है। किसी विशिष्ट ग्रह या भाव के बारे र्मे जानना क्या आप 41675? चमत्कारचिन्तामणि यहाँ कुछ ओर श्लोकों का अर्थ समझते हेः #ಫ1ಫ 1:* विधुर्गोंकुलीराजंगः सन्वपुस्थो  थनाध्यक्षलावण्यमानन्दपूर्णम् विधत्तेडधनं क्षीणदेहं दरिद्रं जडं श्रोत्रहीनं नरं शेपलग्ने I। १ I।  में चन्द्रमा वृष, कर्क और अर्थः जिस मनुष्य के जन्मलग्न मेष इन राशियों का होकर पडे़े तो वह मनुष्य द्रव्यवान् एवं आनन्द, लावण्य , सुन्दरता से पूर्ण होता है और इनसे अन्य राशि में हो तो वह दरिद्र, जड़, कष से शरीरवाला कारनों से  सुननेवाला होता है। করস *श्लोक २ *  हिमांशौ वसुस्थानगे धान्यलाभः शरीरेडतिसौख्यं विलासोड़ङ्गनानाम् | कुटुम्बे रतिर्जायते तस्य तुच्छं वशं दर्शने याति देवांगनाउपि I। २ Il अर्थः जिस मनुष्य के धनस्थान में चन्द्रमा हो, उसको थान्य लाभ, अत्यन्त शारीरिक सुख, अंगनाओं (स्त्रि्यो) का विलास , स्वल्प आसक्ति इत्यादि फल होते हैं और  कुटुम्च र्मे  उसके दर्शन से देवांगना भी मोहित हो जार्ये फिर ओर स्त्रिर्यों की क्या बात है। *পলীব্ধ 3:* विधी विक्रमे विक्रमेणीति वित्तं तपस्वी भवेद्भामिनीरज्जितोडपि | किञ्चितयेत्साहजं तस्य शर्म प्रतापोज्ज्वलो धर्मिणो वैजयन्त्या II 3 Il अर्थः जिस मनुष्य के तृतीय स्थान रमें चन्द्रमा हो, वह अपने उद्यम से धन संचय करनेवाला और रूपवती आदि स्त्रिर्यों का लुभाया हुआ भी अपने धर्म से न डिगनेवाला तपस्वी होता है। वह धर्मात्मा उज्ज्वल यशवाला तथा सहोदर भ्राताओं के सुख से परिपूर्ण होता है। किसी विशिष्ट ग्रह या भाव के बारे र्मे जानना क्या आप 41675? - ShareChat