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🌹अधूरी चिट्ठी और वो आखिरी कल🌹 🙏🙏🙏 शहर के सबसे बड़े अस्पताल के कमरा नंबर 402 में सन्नाटा पसरा था। वहां लेटे 70 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर दीनानाथ जी की नजरें दीवार पर टिकी घड़ी की सुइयों को देख रही थीं। वे सुइयां नहीं थीं, मानो उनके जीवन की शेष बची सांसें थीं जो धीरे-धीरे खिसक रही थीं। दीनानाथ जी ने पूरी उम्र 'कल' के भरोसे जी थी। जब बच्चे छोटे थे, तो उन्होंने सोचा—"कल बच्चों के साथ पार्क जाऊंगा, आज ऑफिस में काम ज्यादा है।" जब पत्नी ने साथ बैठने की जिद की, तो कहा—"कल फुर्सत से बातें करेंगे, आज थक गया हूँ।" जब बूढ़े माता-पिता ने याद किया, तो मन बनाया—"अगले महीने गांव जाऊंगा।" पर वह 'कल' कभी नहीं आया। बच्चे बड़े होकर विदेश चले गए, पत्नी का साथ बीमारी ने छीन लिया और माता-पिता यादों में सिमट गए। आज जब मृत्यु उनके सिरहाने बैठी थी, तो उन्हें अपनी सारी डिग्रियां, बैंक बैलेंस और बड़ा बंगला मिट्टी के ढेर जैसा लग रहा था। तभी नर्स अंदर आई और पूछा, "सर, क्या आप किसी को बुलाना चाहते हैं?" दीनानाथ जी की आँखों में आंसू भर आए। उन्होंने कांपते हाथों से एक कागज मांगा और एक 'अधूरी चिट्ठी' लिखनी शुरू की। उन्होंने लिखा: "मेरे प्रिय बेटे, आज जब मैं जीवन की आखिरी दहलीज पर खड़ा हूँ, तो मुझे समझ आ रहा है कि जिसे मैं अपनी 'उपलब्धियां' समझता था, वे सिर्फ दिखावा थीं। असली पूंजी तो वो हंसी थी जो मैंने काम के चक्कर में दबा दी। असली कमाई तो वो रिश्ते थे जिन्हें मैंने 'कल' पर टाल दिया। काश! मैंने 'मैं' के बजाय 'हम' को चुना होता। काश! मैंने उस दिन क्षमा मांग ली होती जब मेरा अहंकार बड़ा था और रिश्ता छोटा।" उन्होंने महसूस किया कि मृत्यु के करीब पहुंचकर इंसान की नजर धुंधली नहीं, बल्कि और भी साफ हो जाती है। उन्हें याद आया कि उनके छोटे भाई से दस साल पहले एक जमीन के टुकड़े के लिए झगड़ा हुआ था। तब उन्होंने सोचा था—"कल उसे फोन करूँगा।" पर वो फोन कभी नहीं हुआ। दीनानाथ जी ने नर्स से अपना फोन मांगा और अपने भाई का नंबर मिलाया। जैसे ही भाई ने फोन उठाया, दीनानाथ जी सिर्फ इतना कह पाए— "मुझे माफ कर देना भाई..." उधर से भाई की सिसकियां सुनाई दीं। दस साल की कड़वाहट एक पल के 'वर्तमान' में बह गई। उस शाम दीनानाथ जी चले गए, लेकिन उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। वे समझ गए थे कि जीवन को 'कल' के लिए बचाकर रखना ही सबसे बड़ी भूल है। शिक्षा... जीवन की सबसे बड़ी पूँजी प्रेम, क्षमा और वर्तमान है। जो करना है, आज और अभी करें, क्योंकि 'कल' महज एक भ्रम है जो कभी हकीकत नहीं बनता। मंगलमय प्रभात प्रणाम #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👌 आत्मविश्वास #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 डर के आगे जीत👌
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - hoppia, TIc Te Grn परिस्थितियों से लड़ना छोड़कर, जब उन्हें समझना शुरू करते हैं तभी मन का बोझ उतरने लगता है। जिससे जीवन सरल ही नहीं, सहज और सार्थक बन जाता है। hoppia, TIc Te Grn परिस्थितियों से लड़ना छोड़कर, जब उन्हें समझना शुरू करते हैं तभी मन का बोझ उतरने लगता है। जिससे जीवन सरल ही नहीं, सहज और सार्थक बन जाता है। - ShareChat