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*🌹सदव्यवहार का जादू🌹। 🙏🙏🙏🙏 *किसी गाँव में एक चोर रहता था।* *एक बार उसे कई दिनों तक चोरी करने का अवसर ही नहीं मिला, जिससे उसके घर में खाने के लाले पड़ गये।* *अब मरता क्या न करता, वह रात्रि के लगभग बारह बजे गाँव के बाहर बनी एक साधु की कुटिया में घुस गया।* *वह जानता था कि साधु बड़े त्यागी हैं, अपने पास कुछ नहीं रखते फिर भी सोचा, 'खाने पीने को ही कुछ मिल जायेगा। तो एक दो दिन का गुजारा चल जायेगा।'* *जब चोर कुटिया में प्रवेश कर रहे थे, संयोगवश उसी समय साधु बाबा ध्यान से उठकर लघुशंका के निमित्त बाहर निकले।* *चोर से उनका सामना हो गया। साधु उसे देखकर पहचान गये क्योंकि पहले कई बार देखा था, पर साधु यह नहीं जानते थे कि वह चोर है।* *उन्हें आश्चर्य हुआ कि यह आधी रात को यहाँ क्यों आया !* *साधु ने बड़े प्रेम से पूछाः "कहो बालक ! आधी रात को कैसे कष्ट किया ? कुछ काम है क्या ?"* *चोर बोलाः "महाराज ! मैं दिन भर का भूखा हूँ।"* *साधुः "ठीक है, आओ बैठो। मैंने शाम को धूनी में कुछ शकरकंद डाले थे, वे भुन गये होंगे, निकाल देता हूँ। तुम्हारा पेट भर जायेगा।* *शाम को आ गये होते तो जो था हम दोनों मिलकर खा लेते। पेट का क्या है बेटा ! अगर मन में संतोष हो तो जितना मिले उसमें ही मनुष्य खुश रह सकता है। 'यथा लाभ संतोष' यही तो है।"* *साधु ने दीपक जलाया। चोर को बैठने के लिए आसन दिया, पानी दिया और एक पत्ते पर भुने हुए शकरकंद रख दिये।* *फिर पास में बैठकर उसे इस तरह खिलाया, जैसे कोई माँ अपने बच्चे को खिलाती है।* *साधु बाबा के सद्व्यवहार से चोर निहाल हो गया, सोचने लगा, 'एक मैं हूँ और एक ये बाबा हैं।* *मैं चोरी करने आया और ये इतने प्यार से खिला रहे हैं ! मनुष्य ये भी हैं और मैं भी हूँ।* *यह भी सच कहा हैः* *आदमी-आदमी में अंतर, कोई हीरा कोई कंकर। मैं तो इनके सामने कंकर से भी बदतर हूँ।'* *मनुष्य में बुरी के साथ भली वृत्तियाँ भी रहती हैं, जो समय पाकर जाग उठती हैं।* *जैसे उचित खाद-पानी पाकर बीज पनप जाता है, वैसे ही संत का संग पाकर मनुष्य की सदवृत्तियाँ लहलहा उठती हैं।* *चोर के मन के सारे कुसंस्कार हवा हो गये। उसे संत के दर्शन, सान्निध्य और अमृतवर्षा दृष्टि का लाभ मिला।* *एक घड़ी आधी घड़ी, आधी में पुनि आध।* *तुलसी संगत साध की, हरे कोटि अपराध।।* *उन ब्रह्मनिष्ठ साधुपुरुष के आधे घंटे के समागम से चोर के कितने ही मलिन संस्कार नष्ट हो गये।* *साधु के सामने अपना अपराध कबूल करने को उसका मन उतावला हो उठा।* *फिर उसे लगा कि 'साधु बाबा को पता चलेगा कि मैं चोरी की नियत से आया था तो उनकी नजर में मेरी क्या इज्जत रह जायेगी !* *क्या सोचेंगे बाबा कि कैसा पतित प्राणी है, जो मुझ संत के यहाँ चोरी करने आया !'* *लेकिन फिर सोचा, 'साधु मन में चाहे जो समझें, मैं तो इनके सामने अपना अपराध स्वीकार करके प्रायश्चित करूँगा।* *इतने दयालू महापुरुष हैं, ये मेरा अपराध अवश्य क्षमा कर देंगे।' संत के सामने प्रायश्चित करने से सारे पाप जलकर राख हो जाते हैं।* *उसका भोजन पूरा होने के बाद साधु ने कहाः "बेटा ! अब इतनी रात में तुम कहाँ जाओगे, मेरे पास एक चटाई है, इसे ले लो और आराम से यहाँ सो जाओ। सुबह चले जाना।"* *नेकी की मार से चोर दबा जा रहा था। वह साधु के पैरों पर गिर पड़ा और फूट-फूट कर रोने लगा।* *साधु समझ न सके कि यह क्या हुआ ! साधु ने उसे प्रेमपूर्वक उठाया, प्रेम से सिर पर हाथ फेरते हुए पूछाः "बेटा ! क्या हुआ ?"* *रोते-रोते चोर का गला रूँध गया। उसने बड़ी कठिनाई से अपने को सँभालकर कहाः* *"महाराज ! मैं बड़ा अपराधी हूँ।"* *साधु बोलेः "बेटा ! भगवान तो सबके अपराध क्षमा करने वाले हैं। उनकी शरण में जाने से वे बड़े-से-बड़े अपराध क्षमा कर देते हैं। तू उन्हीं की शरण में जा।"* *चोरः "महाराज ! मेरे जैसे पापी का उद्धार नहीं हो सकता।"* *साधुः "अरे पगले ! भगवान ने कहा हैः यदि कोई अतिशय दुराचारी भी अनन्य भाव से मेरा भक्त होकर मुझको भजता है तो वह साधु ही मानने योग्य है।"* *"नहीं महाराज ! मैंने बड़ी चोरियाँ की हैं। आज भी मैं भूख से व्याकुल होकर आपके यहाँ चोरी करने आया था लेकिन आपके सदव्यवहार ने तो मेरा जीवन ही पलट दिया।* *आज मैं आपके सामने कसम खाता हूँ कि आगे कभी चोरी नहीं करूँगा, किसी जीव को नहीं सताऊँगा।* *आप मुझे अपनी शरण में लेकर अपना शिष्य बना लीजिये।"* *साधु के प्यार के जादू ने चोर को साधु बना दिया।* *उसने अपना पूरा जीवन उन साधु के चरणों में सदा के समर्पित करके अमूल्य वी मानव जीवन को अमूल्य-से-अमूल्य परमात्मा को पाने के रास्ते लगा दिया।* *महापुरुषों की सीख है कि "आप सबसे आत्मवत् व्यवहार करें क्योंकि सुखी जीवन के लिए विशुद्ध निःस्वार्थ प्रेम ही असली खुराक है।* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #🏠घर-परिवार #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👫 हमारी ज़िन्दगी #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👌 आत्मविश्वास
🏠घर-परिवार - 319171  L@ப a रूपांतरण का द्वार जीवन में असफलता को सीढ़ी समझकर देखेंगे तो जितनी बड़ी असफलता , उतना बड़ा रूपांतरण और जितना बड़ा रूपांतरण , उतनी ज्यादा स्थाई सफलता का सीधा चक्र शुरू होगा। 319171  L@ப a रूपांतरण का द्वार जीवन में असफलता को सीढ़ी समझकर देखेंगे तो जितनी बड़ी असफलता , उतना बड़ा रूपांतरण और जितना बड़ा रूपांतरण , उतनी ज्यादा स्थाई सफलता का सीधा चक्र शुरू होगा। - ShareChat
“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” 🚩🌺🌷💐🌸🌹 “सच्ची श्रद्धा और सकारात्मक सोच जीवन को उज्ज्वल बना देती है।” 🙏🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ शुक्रवार #🙏 माँ वैष्णो देवी
🌞 Good Morning🌞 - ShareChat
*🌹नया नज़रिया🌹* 🙏🙏🙏 राजस्थान के एक छोटे से कस्बे में एक बालक के मन में नई-नई बातों को जानने की जिज्ञासा थी। उस बालक के मोहल्ले में एक गुरुजी रहते थे। एक दिन बालक उनके पास गया और बोला, 'मैं कामयाब बनना चाहता हूं, कृपया बताएं कि कामयाबी का रास्ता क्या है?' हंसते हुए गुरुजी बोले, 'बेटा, मैं तुम्हें कामयाबी का रास्ता बताऊंगा, पहले तुम मेरी गाय को सामने वाले खूंटे से बांध दो, कह कर उन्होंने गाय की रस्सी बालक को दे दी। वह गाय किसी के काबू में नहीं आती थी। अतः जैसे ही बालक ने रस्सी थामी कि वह छलांग लगा, हाथ से छूट गई। फिर काफी मशक्कत के बाद बालक ने चतुराई से काम लेते हुए तेजी से भाग कर गाय को पैरों में रस्सी का फंदा बनाकर बराबर पासा फेंका और गाय को पकड़ लिया। पैर में फंदा जकड़ने से गाय एक कदम भी नहीं भाग पाई और बालक उसे खूंटे से बांधने में कामयाब हुआ। यह देख गुरुजी नीत बोले, 'शाबाश,बेटे यही है कामयाबी का रास्ता। जड़ पकड़ने से पूरा पेड़ काबू में आ जाता है। अगर हम किसी समस्या की जड़ पकड़ लें, तो उसका हल आसानी से निकाल सकते हैं। बालक ने इसी सूत्र को आत्मसात कर लिया और जीवन में आगे बढ़ता गया। शिक्षा:- हमें किसी भी समस्या का हल तब तक नहीं मिलता जब तक हम उसकी जड़ को नहीं पकड़ लेते। अत: हर समस्या का समाधान उसकी जड़ काबू में आने पर ही होता है। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🙏 प्रेरणादायक विचार #👍 डर के आगे जीत👌 #👌 आत्मविश्वास #❤️जीवन की सीख
👍मोटिवेशनल कोट्स✌ - 25 hangit  ThடTe Gyan 2024   SYSTEM FOR WISDOM ओपन सीक्रेट लिए मनुष्य देह में अनुभव तो सभी के खुला है पर उसकी गहराई को वही महसूस कर सकता है, जिसने स्वयं को खोजा हो और के प्रकृति रहस्यों से साक्षात्कार किया हो। 25 hangit  ThடTe Gyan 2024   SYSTEM FOR WISDOM ओपन सीक्रेट लिए मनुष्य देह में अनुभव तो सभी के खुला है पर उसकी गहराई को वही महसूस कर सकता है, जिसने स्वयं को खोजा हो और के प्रकृति रहस्यों से साक्षात्कार किया हो। - ShareChat
॥ श्री हरि की कृपा सदैव बनी रहे ॥ 🪷🌸🌼🌷🪻🌻💐🌹 भगवान विष्णु की दिव्य कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो। 🙏🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु😇
🌸 जय श्री कृष्ण😇 - ShareChat
🌹जब सब खत्म लगे तभी शुरू होता है असली साहस🌹 🙏🙏🙏 एक समय की बात है, एक पराक्रमी राजा अपने न्याय और दया के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। एक दिन उसकी सेवा से प्रसन्न होकर एक संत ने उसे एक ताबीज भेंट किया। ताबीज देते हुए संत ने गंभीर स्वर में कहा, “राजन, इसे अपने गले में धारण करो। लेकिन इसे खोलना तभी, जब जीवन में ऐसा समय आए जब तुम्हें लगे कि अब सब समाप्त हो गया है, कोई आशा शेष नहीं है।” राजा ने उस ताबीज को आदरपूर्वक स्वीकार किया और हमेशा अपने पास रखने लगा। समय बीतता गया और राजा अपने कार्यों में व्यस्त हो गया। एक दिन वह अपने सैनिकों के साथ शिकार पर निकला। जंगल बहुत घना और खतरनाक था। शिकार का पीछा करते-करते राजा अपने साथियों से बिछड़ गया और अनजाने में दुश्मन राज्य की सीमा में प्रवेश कर गया। सांझ ढलने लगी थी, अंधेरा बढ़ रहा था और तभी उसे घोड़ों की टापों की आवाज सुनाई दी। दुश्मन सैनिक उसकी ओर बढ़ रहे थे। घबराकर राजा ने अपने घोड़े को तेजी से दौड़ाया, परंतु थकान और भूख-प्यास के कारण उसकी गति धीमी पड़ने लगी। भागते-भागते उसे पेड़ों के बीच एक छोटी सी गुफा दिखाई दी। उसने तुरंत वहां शरण ली और खुद को छिपा लिया। उसका दिल तेजी से धड़क रहा था, सांसें थम सी गई थीं। दुश्मन सैनिकों की आवाजें पास आती जा रही थीं। उस क्षण राजा को लगा कि अब उसका अंत निश्चित है। निराशा और भय ने उसे पूरी तरह घेर लिया। उसे अपनी हार और मृत्यु साफ दिखाई देने लगी। तभी अचानक उसका हाथ अपने गले में पड़े ताबीज पर गया। उसे संत की बात याद आई। कांपते हाथों से उसने ताबीज खोला और उसमें रखा छोटा सा कागज निकाला। जब उसने उसे पढ़ा, तो उस पर लिखा था — “यह भी कट जाएगा।” इन चार शब्दों ने जैसे उसके भीतर नई ऊर्जा भर दी। उसके मन का भय धीरे-धीरे शांत होने लगा। उसे लगा कि यह कठिन समय भी स्थायी नहीं है, यह भी बीत जाएगा। उसके भीतर एक अद्भुत शांति और विश्वास जाग उठा। वह स्थिर होकर बैठ गया और अपने मन को संभाल लिया। कुछ देर बाद घोड़ों की टापों की आवाज धीरे-धीरे दूर चली गई। दुश्मन सैनिक बिना उसे देखे आगे निकल गए। रात गहराने के बाद राजा गुफा से बाहर निकला और सावधानीपूर्वक रास्ताv तय करते हुए अपने राज्य लौट आया। इस घटना ने उसके जीवन की सोच को बदल दिया। अब वह हर कठिन परिस्थिति में घबराने के बजाय धैर्य और विश्वास बनाए रखता था। यह कहानी केवल उस राजा की नहीं, बल्कि हम सभी की है। जीवन में ऐसे पल आते हैं जब समस्याएं हमें चारों ओर से घेर लेती हैं। हमें लगता है कि अब कोई रास्ता नहीं बचा, सब खत्म हो गया है। लेकिन सच यह है कि कोई भी परिस्थिति स्थायी नहीं होती। चाहे दुख हो या सुख, हर दौर गुजर जाता है। जब भी जीवन में अंधेरा छा जाए, बस कुछ पल ठहरिए, गहरी सांस लीजिए और खुद से कहिए — “यह भी कट जाएगा।” यही विचार आपको अंदर से मजबूत बनाएगा और कठिन समय से बाहर निकलने की शक्ति देगा। याद रखिए, जो आज असंभव लगता है, वही कल आपकी सबसे बड़ी सीख बन सकता है। मंगलमय प्रभात प्रणाम #❤️जीवन की सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🌸पॉजिटिव मंत्र #🙏 प्रेरणादायक विचार
❤️जीवन की सीख - happy| thoughur  TlrTCam' जो भी हो रहा है ईश्वर की मर्जी से ही हो रहा है और ईश्वर कभी गलती नहीं करता। happy| thoughur  TlrTCam' जो भी हो रहा है ईश्वर की मर्जी से ही हो रहा है और ईश्वर कभी गलती नहीं करता। - ShareChat
ॐ गं गणपतये नमः‼️ 🌺🌿🌼🌺🌼🌺🌼 आप खुश रहें स्वस्थ रहें दीर्घायु रहें हमेशा एवं समस्त परिवार धन धान्य से संपन्न और प्रसन्न रहें🙏🏻🌹🙏🏻 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ बुधवार #श्री गणेश
🌞 Good Morning🌞 - नमन हे बुदद्धी के देवता सदबुद्धि दे सुखनशांति और समृद्धि दे नमन हे बुदद्धी के देवता सदबुद्धि दे सुखनशांति और समृद्धि दे - ShareChat
*🌹प्रेम के बोल🌹* 🙏🙏🙏 *एक गाँव में एक मजदुर रहा करता था जिसका नाम हरिराम था | उसके परिवार में कोई नहीं था | दिन भर अकेला मेहनत में लगा रहता था | दिल का बहुत ही दयालु और कर्मो का भी बहुत अच्छा था | मजदुर था इसलिए उसे उसका भोजन उसे मजदूरी के बाद ही मिलता था | आगे पीछे कोई ना था इसलिये वो इस आजीविका से संतुष्ट था |* *एक बार उसे एक छोटा सा बछड़ा मिल गया | उसने ख़ुशी से उसे पाल लिया उसने सोचा आज तक वो अकेला था अब वो इस बछड़े को अपने बेटे के जैसे पालेगा | हरिराम का दिन उसके बछड़े से ही शुरू होता और उसी पर ख़त्म होता वो रात दिन उसकी सेवा करता और उसी से अपने मन की बात करता | कुछ समय बाद बछड़ा बैल बन गया | उसकी जो सेवा हरिराम ने की थी उससे वो बहुत ही सुंदर और बलशाली बन गया था |* *गाँव के सभी लोग हरिराम के बैल की ही बाते किया करते थे | किसानों के गाँव में बैल की भरमार थी पर हरिराम का बैल उन सबसे अलग था | दूर-दूर से लोग उसे देखने आते थे |हर कोई हरिराम के बैल के बारे में बाते कर रहा था |* *हरिराम भी अपने बैल से एक बेटे की तरह ही प्यार करता था भले खुद भूखा सो जाये लेकिन उसे हमेशा भर पेट खिलाता था एक दिन हरिराम के स्वप्न में शिव का नंदी बैल आया उसने उससे कहा कि हरिराम तुम एक निस्वार्थ सेवक हो तुमने खुद की तकलीफ को छोड़ कर अपने बैल की सेवा की हैं इसलिये मैं तुम्हारे बैल को बोलने की शक्ति दे रहा हूँ |* *इतना सुनते ही हरिराम जाग गया और अपने बैल के पास गया | उसने बैल को सहलाया और मुस्कुराया कि भला एक बैल बोल कैसे सकता हैं तभी अचानक आवाज आई बाबा आपने मेरा ध्यान एक पुत्र की तरह रखा हैं मैं आपका आभारी हूँ और आपके लिए कुछ करना चाहता हूँ यह सुनकर हरिराम घबरा गया उसने खुद को संभाला और तुरंत ही बैल को गले लगाया |* *उसी समय से वह अपने बैल को नंदी कहकर पुकारने लगा | दिन भर काम करके आता और नंदी से बाते करता |* *गरीबी की मार बहुत थी नंदी को तो हरिराम भर पेट देता था लेकिन खुद भूखा सो जाता था यह बात नंदी को अच्छी नहीं लगी उसने हरिराम से कहा कि वो नगर के सेठ के पास जाये और शर्त रखे कि उसका बैल नंदी सो गाड़ी खीँच सकता हैं और शर्त के रूप में सेठ से हजार मुहरे ले लेना |  हरिराम ने कहा नंदी तू पागल हो गया हैं भला कोई बैल इतना भार वहन कर भी सकता हैं मैं अपने जीवन से खुश हूँ मुझे यह नहीं करना लेकिन नंदी के बार-बार आग्रह करने पर हरिराम को उसकी बात माननी पड़ी |* * *एक दिन डरते-डरते हरिराम सेठ दीनदयाल के घर पहुँचा | दीनदयाल ने उससे आने का कारण पूछा तब हरिराम ने शर्त के बारे में कहा |* *सेठ जोर जोर से हँसने लगा बोला हरिराम बैल के साथ रहकर क्या तुम्हारी मति भी बैल जैसी हो गई हैं अगर शर्त हार गये तो हजार मुहर के लिये तुम्हे अपनी झोपड़ी तक बैचनी पड़ेगी |यह सुनकर हरिराम और अधिक डर गया लेकिन मुँह से निकली बात पर मुकर भी नहीं सकता था|* *शर्त का दिन तय किया गया और सेठ दीनदयाल ने पुरे गाँव में ढोल पिटवाकर इस प्रतियोगिता के बारे गाँव वालो को खबर दी और सभी को यह अद्भुत नजारा देखने बुलाया | सभी खबर सुनने के बाद हरिराम का मजाक उड़ाने लगे और कहने लगे कि यह शर्त तो हरिराम ही हारेगा | यह सब सुन सुनकर हरिराम को और अधिक दर लगने लगा और उससे नंदी से घृणा होने लगी वो उसे कौसने लगा बार बार उसे दोष देता और कहता कि कहाँ मैंने इस बैल को पाल लिया मेरी अच्छी भली कट रही थी इसके कारण सर की छत से भी जाऊँगा और लोगो की थू थू होगी वो अलग | अब हरिराम को नंदी बिलकुल भी रास नहीं आ रहा था |* *वह दिन आ गया जिस दिन प्रतियोगिता होनी थी | सौ माल से भरी गाड़ियों के आगे नंदी को जोता गया और गाड़ी पर खुद हरिराम बैठा | सभी गाँव वाले यह नजारा देख हँस रहे थे और हरिराम को बुरा भला कह रहे थे | हरिराम ने नंदी से कहा देख तेरे कारण मुझे कितना सुनना पड़ रहा हैं मैंने तुझे बेटे जैसे पाला था और तूने मुझे सड़क पर लाने का काम किया | हरिराम के ऐसे घृणित शब्दों के कारण नंदी को गुस्सा आगया और उसने ठान ली कि वो एक कदम भी आगे नहीं बढ़ायेगा और इस तरह हरिराम शर्त हार गया सभी ने उसका मजाक उड़ाया और उसे अपनी झोपड़ी सेठ को देनी पड़ी | *अब हरिराम नंदी के साथ मंदिर के बाहर पड़ा हुआ था और नंदी के सामने रो रोकर उसे कोस रहा था उसकी बाते सुन नंदी को सहा नहीं गया और उसने कहा बाबा हरिराम यह सब तुम्हारे कारण हुआ | यह सुन हरिराम चौंक गया उसने गुस्से में पूछा कि क्या किया मैंने ? तुमने भांग खा रखी हैं क्या ? तब नंदी ने कहा कि तुम्हारे प्रेम के बोल के कारण ही भगवान ने मुझे बोलने की शक्ति दी | और मैंने तुम्हारे लिये यह सब करने की सोची लेकिन तुम उल्टा मुझे ही कोसने लगे और मुझे बुरा भला कहने लगे तब मैंने ठानी मैं तुम्हारे लिये कुछ नहीं करूँगा लेकिन अब मैं तुमसे फिर से कहता हूँ कि मैं सो गाड़ियाँ खींच सकता* *हूँ तुम जाकर फिर से शर्त लगाओ और इस बार अपनी झोपड़ी और एक हजार मुहरे की शर्त लगाना |* *हरिराम वही करता हैं और फिर से शर्त के अनुसार सो गाड़ियाँ तैयार कर उस पर नंदी को जोता जाता हैं और फिर से उस पर हरिराम बैठता हैं और प्यार से सहलाकर उसे गाड़ियाँ खीचने कहता हैं और इस बार नंदी यह कर दिखाता हैं जिसे देख सब स्तब्ध रह जाते हैं और हरिराम शर्त जीत जाता हैं | सेठ दीनदयाल उसे उसकी झोपड़ी और हजार मुहरे देता हैं |* *प्रेरणास्पद कथाएं पढ़ने के लिए मेरे साथ जुड़े रहे इस व्हाट्सएप ग्रुपमें* *शिक्षा* *जीवन में प्रेम से ही किसी को जीता जा सकता हैं | कहते हैं प्रेम के सामने ईश्वर भी झुक जाता हैं इसलिये सभी को प्रेम के बोल ही बोलना चाहिये।* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #❤️जीवन की सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #🙏 प्रेरणादायक विचार #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास
❤️जीवन की सीख - happy| Choughcr  Thic 101 (an  1 ப সড়িল সাম ক্রংলা महत्वपूर्ण है लेकिन उससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है मंज़िल तक ক লিবে ন্ী মন যাপ্সা| पहुँचने आनंद भी लेते चलें। इसलिए यात्रा का happy| Choughcr  Thic 101 (an  1 ப সড়িল সাম ক্রংলা महत्वपूर्ण है लेकिन उससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है मंज़िल तक ক লিবে ন্ী মন যাপ্সা| पहुँचने आनंद भी लेते चलें। इसलिए यात्रा का - ShareChat
ॐ हनुमते नमः! 🌷💐🌹🌸 ज्येष्ठ माह के प्रथम मंगलवार 'बड़ा मंगल' की श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं! संकटमोचक महाबली श्री हनुमान जी से प्रार्थना है कि सबको बल, बुद्धि, विद्या तथा आरोग्यता प्रदान करें। 🙏🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ मंगलवार #जय हनुमान
🌸 जय श्री कृष्ण😇 - ५ मई बड़ा मंगलवार भगवान राम और हनुमान जी का प्रथम मिलन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में ज्येष्ठ माह के मंगलवार के दिन ही हनुमान जी की भगवान श्री राम से पहली मुलाकात हुई थी। यह मिलन ऋष्यमूक पर्वत पर हुआ था जिसके बाद हनुमान जी ने अपना पूरा जीवन राम जी की सेवा में समर्पित कर दिया। इसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मिलन की याद में ज्येष्ठ के मंगलवारको " बड़ा' माना जाता है। ५ मई बड़ा मंगलवार भगवान राम और हनुमान जी का प्रथम मिलन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में ज्येष्ठ माह के मंगलवार के दिन ही हनुमान जी की भगवान श्री राम से पहली मुलाकात हुई थी। यह मिलन ऋष्यमूक पर्वत पर हुआ था जिसके बाद हनुमान जी ने अपना पूरा जीवन राम जी की सेवा में समर्पित कर दिया। इसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मिलन की याद में ज्येष्ठ के मंगलवारको " बड़ा' माना जाता है। - ShareChat
*🌹सम्यक दृष्टि🌹* 🙏🙏🙏 *एक राजा था, बहुत प्रभावशाली, बुद्धि और वैभव से संपन्न। आस-पास के राजा भी समय-समय पर उससे परामर्श लिया करते थे। एक दिन राजा अपनी शैया पर लेेटे-लेटे सोचने लगा, मैं कितना भाग्यशाली हूं। कितना विशाल है मेरा परिवार, कितना समृद्ध है मेरा अंत:पुर, कितनी मजबूत है मेरी सेना, कितना बड़ा है मेरा राजकोष। ओह! मेरे खजाने के सामने कुबेर के खजाने की क्या बिसात? मेरे राजनिवास की शोभा को देखकर अप्सराएं भी ईर्ष्या करती होंगी। मेरा हर वचन आदेश होता है। राजा कवि हृदय था और संस्कृृत का विद्वान था।* *अपने भावों को उसने शब्दों में पिरोना शुरू किया। तीन चरण बन गए, चौथी लाइन पूरी नहीं हो रही थी। जब तक पूरा श्लोक नहीं बन जाता, तब तक कोई भी रचनाकार उसे बार-बार दोहराता है। राजा भी अपनी वे तीन लाइनें बार-बार गुनगुना रहा था* - *चेतोहरा: युवतय: स्वजनाऽनुकूला: सद्बान्धवा: प्रणयगर्भगिरश्च भृत्या: गर्जन्ति दन्तिनिवहास्विरलास्तुरंगा:* *-मेरी चित्ताकर्षक रानियां हैं, अनुकूल स्वजन वर्ग है, श्रेष्ठ कुटुंबी जन हैं। कर्मकार विनम्र और आज्ञापालक हैं, हाथी, घोड़ों के रूप में विशाल सेना है.* *लेकिन बार-बार गुनगुनाने पर भी चौथा-चरण बन नहीं रहा था। संयोग की बात है कि उसी रात एक चोर राजमहल में चोरी करने के लिए आया था। मौका पाकर वह राजा के शयनकक्ष में घुस गया और पलंग के नीचे दुबक कर कर बैठ गया। चोर भी संस्कृत भाषा का विज्ञ और आशु कवि था। समस्यापूर्ति का उसे अभ्यास था। राजा द्वारा गुनगुनाए जाते श्लोक के तीन चरण चोर ने सुन लिए। राजा के दिमाग में चौथी लाइन नहीं बन रही है , यह भी वह जान गया लेकिन तीन लाइनें सुन कर उस चोर का कवि मन भी उसे पूरा करने के लिए मचलने लगा। वह भूल गया कि वह चोर है और राजा के कक्ष में चोरी करने घुसा है। अगली बार राजा ने जैसे ही वे तीन लाइनें पूरी कीं , चोर के मुंह से चौथी लाइन निकल पड़ी ,* *सम्मीलने नयनयोर्नहि किंचिदस्ति॥* . *राज्य , वैभव आदि सब तभी तक है , जब तक आंख खुली है। आंख बंद होने के बाद कुछ नहीं है। अत : किस पर गर्व कर रहे हो ?* *चोर की इस एक पंक्ति ने राजा की आंखें खोल दीं। उसे सम्यक् दृष्टि मिल गई। वह चारों ओर विस्फारित नेत्रों से देखने लगा - ऐसी ज्ञान की बात किसने कही ? कैसे कही ?* *उसने आवाज दी , पलंग के नीचे जो भी है , वह मेरे सामने उपस्थित हो। चोर सामने आ कर खड़ा हुआ। फिर हाथ जोड़ कर राजा से बोला ,* *हे राजन ! मैं आया तो चोरी करने था , पर आप के द्वारा पढ़ा जा रहा श्लोक सुनकर यह भूल गया कि मैं चोर हूं। मेरा काव्य प्रेम उमड़ पड़ा और मैं चौथे चरण की पूर्ति करने का दुस्साहस कर बैठा। हे राजन ! मैं अपराधी हूं। मुझे क्षमा कर दें। राजा ने कहा , तुम अपने जीवन में चाहे जो कुछ भी करते हो , इस क्षण तो तुम मेरे गुरु हो। तुमने मुझे जीवन के यथार्थ का परिचय कराया है। आंख बंद होने के बाद कुछ भी नहीं रहता - यह कह कर तुमने मेरा सत्य से साक्षात्कार करवा दिया। गुरु होने के कारण तुम मुझसे जो चाहो मांग सकते हो। चोर की समझ में कुछ नहीं आया लेकिन राजा ने आगे कहा -- आज मेरे ज्ञान की आंखें खुल गईं। इसलिए शुभस्य शीघ्रम् - इस सूक्त को आत्मसात करते हुए मैं शीघ्र ही संन्यास लेना चाहता हूं। राज्य अब तृण के समान प्रतीत हो रहा है। तुम यदि मेरा राज्य चाहो तो मैं उसे सहर्ष देने के लिए तैयार हूं।* *चोर बोला , राजन ! आपको जैसे इस वाक्य से बोध पाठ मिला है , वैसे ही मेरा मन भी बदल गया है। मैं भी संन्यास स्वीकार करना चाहता हूं। राजा और चोर दोनों संन्यासी बन गए।* *एक ही पंक्ति ने दोनों को स्पंदित कर दिया। यह है सम्यक द्रष्टि का परिणाम। जब तक राजा की दृष्टि सम्यक् नहीं थी , वह धन - वैभव , भोग - विलास को ही सब कुछ समझ रहा था। ज्यों ही आंखों से रंगीन चश्मा उतरा , दृष्टि सम्यक् बनी कि पदार्थ पदार्थ हो गया और आत्मा-आत्मा...।* *मंगलमय प्रभात* *स्नेह वंदन* *प्रणाम* #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👌 आत्मविश्वास #👫 हमारी ज़िन्दगी #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
🏠घर-परिवार - 25 hangit  ThTaa Ignn 2024 SYSTEM FOR ISDOM ;'_~ ८Y स्वभाव' क्या है मूल आनंद' मनुष्य का मूल स्वभाव है। स्वयं की पहचान होते ही स्पष्ट हो जाता है कि आनंद तो सदा से भीतर ही था, बस! नकली मैं॰ (अहंकार) के मिटने की देरी थी। 25 hangit  ThTaa Ignn 2024 SYSTEM FOR ISDOM ;'_~ ८Y स्वभाव' क्या है मूल आनंद' मनुष्य का मूल स्वभाव है। स्वयं की पहचान होते ही स्पष्ट हो जाता है कि आनंद तो सदा से भीतर ही था, बस! नकली मैं॰ (अहंकार) के मिटने की देरी थी। - ShareChat
श्री महादेवाय नमः 🌿 हे भोलेनाथ! मैं समर्पित भाव से तीनों जन्मों के पाप के संहार के लिए अति कोमल तीन पत्तों से युक्त बिल्व पत्र आपको समर्पित करता हूं .. मेरी पूजा स्वीकार कीजिए ॐ नमः शिवाय जय माता पार्वती 🚩🚩🌿🌹🪻🌹🌿🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ सोमवार #🛕बाबा केदारनाथ📿
🌞 Good Morning🌞 - @ शुभ सोमवार हर हर महादेव 30 @Anitakapoor62 @ शुभ सोमवार हर हर महादेव 30 @Anitakapoor62 - ShareChat