*🌹सबसे कीमती उपहार🌹* 🙏🙏🙏
*राजा महेन्द्रनाथ हर वर्ष अपने राज्य में एक प्रतियोगिता का आयोजन करते थे, जिसमें हजारों की संख्या में प्रतियोगी भाग लिया करते थे और विजेता को पुरुस्कार से सम्मानित किया जाता है।*
*एक दिन राजा ने सोचा कि प्रजा की सेवा को बढ़ाने के लिए उन्हें एक राजपुरूष की आवश्यकता है जो बुद्धिमान हो और समाज के कार्य में अपना योगदान दे सके। उन्होंने राजपुरूष की नियुक्ति के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित करने का निर्णय लिया।*
*दूर-दूर से इस बार लाखों की संख्या में प्रतियोगी आये हुए थे।*
*राजा ने इस प्रतियोगिता के लिए एक बड़ा-सा उद्यान बनवाया था, जिसमें राज-दरबार की सभी कीमती वस्तुएं थीं, हर प्रकार की सामग्री उपस्थित थी, लेकिन किसी भी वस्तु के सामने उसका मूल्य निश्चित नहीं किया गया था।*
*राजा ने प्रतियोगिता आरम्भ करने से पहले एक घोषणा की, जिसके अनुसार जो भी व्यक्ति इस उद्यान से सबसे कीमती वस्तु लेकर राजा के सामने उपस्थित होगा उसे ही राजपुरूष के लिए स्वीकार किया जाएगा। प्रतियोगिता आरम्भ हुई।*
*सभी उद्यान में सबसे अमूल्य वस्तु तलाशने में लग गए, कई हीरे-जवाहरात लाते, कई सोने-चांदी, कई लोग पुस्तकें, तो कोई भगवान की मूर्ति, और जो बहुत गरीब थे वे रोटी, क्योंकि उनके लिए वही सबसे अमूल्य वस्तु थी।*
*सब अपनी क्षमता के अनुसार मूल्य को सबसे ऊपर आंकते हुए राजा के सामने उसे प्रस्तुत करने में लगे हुए थे। तभी एक नौजवान राजा के सामने खाली हाथ उपस्थित हुआ।*
*राजा ने सबसे प्रश्न करने के उपरान्त उस नौजवान से प्रश्न किया- अरे! नौजवान, क्या तुम्हें उस उद्यान में कोई भी वस्तु अमूल्य नजर नहीं आई? तुम खाली हाथ कैसे आये हो?*
*“राजन! मैं खाली हाथ कहाँ आया हूँ, मैं तो सबसे अमूल्य धन उस उद्यान से लाया हूँ।”* – *‘नौजवान बोला।*
*“तुम क्या लाये हो?”- राजा ने पूछा।*
*“मैं संतोष लेकर आया हूँ महाराज!”- नौजवान ने कहा।*
*क्या, “संतोष”, इनके द्वारा लाये गए इन अमूल्य वस्तुओं से भी मूलयवान है?- राजा ने पुनः प्रश्न किया।*
*जी हाँ राजन! इस उद्यान में अनेकों अमूल्य वस्तुएं हैं पर वे सभी मनुष्य को क्षण भर के लिए सुख की अनुभूति प्रदान कर सकती हैं। इन वस्तुओं को प्राप्त कर लेने के बाद मनुष्य कुछ और ज्यादा पाने की इच्छा मन में उत्पन्न कर लेता है अर्थात इन सबको प्राप्त करने के बाद इंसान को ख़ुशी तो होगी लेकिन वह क्षण भर के लिए ही होगी। लेकिन जिसके पास संतोष का धन है, संतोष के हीरे-जवाहरात हैं वही मनुष्य अपनी असल जिंदगी में सच्चे सुख की अनुभूति और अपने सभी भौतिक इच्छाओं पर नियंत्रण कर सकेगा।” – नौजवान ने शांत स्वर में उत्तर देते हुए कहा।*
*नौजवान को लाखों लोगों में चुना गया और उसे राजपुरूष के लिए सम्मानित किया गया....*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #👫 हमारी ज़िन्दगी #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #☝ मेरे विचार #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
*ॐ नमो भगवते वासुदेवाय*
🙏🌹💐🌷🌸🌺🪷
*हे प्रभु!*
जो पूर्व जन्म के कर्मानुसार आज मुझे दिया है, वही पर्याप्त है*॥
🙏*जय हो महाप्रभुजी*🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु😇
*🌹प्रोफेसर की सीख🌹*
🙏🙏🙏
*प्रोफ़ेसर साहब बड़े दिनों बाद आज शाम को घर लौटते वक़्त अपने दोस्त नवीन से मिलने उसकी दुकान पर गए।*
*इतने दिनों बाद मिल रहे दोस्तों का उत्साह देखने लायक था…दोनों ने एक दुसरे को गले लगाया और बैठ कर गप्पें मारने लगे।*
*चाय-वाय पीने के कुछ देर बाद प्रोफ़ेसर बोले, “यार एक बात बता, पहले मैं जब भी आता था तो तेरी दुकान में ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी और हम बड़ी मुश्किल से बात कर पाते थे। लेकिन आज बस इक्का-दुक्का ग्राहक ही दिख रहे हैं और तेरा स्टाफ भी पहले से कम हो गया है…”*
*दोस्त मजाकिया लहजे में बोला, “अरे कुछ नहीं, हम इस मार्केट के पुराने खिलाड़ी हैं…आज धंधा ढीला है…कल फिर जोर पकड़ लेगा!”*
*इस पर प्रोफ़ेसर साहब कुछ गंभीर होते हुए बोले, “देख भाई, चीजों को इतना हलके में मत ले…मैं देख रहा हूँ कि इसी रोड पर कपड़े की तीन-चार और दुकाने खुल गयी हैं, कम्पटीशन बहुत बढ़ गया है…और ऊपर से…”*
*प्रोफ़ेसर साहब अपनी बात पूरी करते उससे पहले ही, दोस्त उनकी बात काटते हुए बोला, “अरे ये दुकाने आती-जाती रहती हैं, इनसे कुछ फरक नहीं पड़ता।”*
*प्रोफ़ेसर साहब कॉलेज टाइम से ही अपने दोस्त को जानते थे और वो समझ गए कि ऐसे समझाने पर वो उनकी बात नहीं समझेगा।*
*इसके बाद उन्होंने अगले रविवार, बंदी के दिन; दोस्त को चाय पे बुलाया।*
*दोस्त, तय समय पर उनके घर पहुँच गया।*
*कुछ गपशप के बाद प्रोफ़ेसर साहब उसे अपने घर में बनी एक प्राइवेट लैब में ले गए और बोले, “देख यार! आज मैं तुझे एक बड़ा ही इंटरस्टिंग एक्सपेरिमेंट दिखता हूँ..”*
*प्रोफ़ेसर साहब ने एक जार में गरम पानी लिया और उसमे एक मेंढक डाल दिया। पानी से सम्पर्क में आते ही मेंढक खतरा भांप गया और कूद कर बाहर भाग गया।*
*इसके बाद प्रोफ़ेसर साहब ने जार से गरम पानी फेंक कर उसमे ठंडा पानी भर दिया, और एक बार फिर मेंढक को उसमे डाल दिया। इस बार मेंढक आराम से उसमे तैरने लगा।*
*तभी प्रोफ़ेसर साहब ने एक अजीब सा काम किया, उन्होंने जार उठा कर एक गैस बर्नर पर रख दिया और बड़ी ही धीमी आंच पर पानी गरम करने लगे।*
*कुछ ही देर में पानी गरम होने लगा। मेंढक को ये बात कुछ अजीब लगी पर उसने खुद को इस तापमान के हिसाब से एडजस्ट कर लिया…इस बीच बर्नर जलता रहा और पानी और भी गरम होता गया….पर हर बार मेढक पानी के टेम्परेचर के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर लेता और आराम से पड़ा रहता….लेकिन उसकी भी सहने की एक क्षमता थी! जब पानी काफी गरम हो गया और खौलने को आया तब मेंढक को अपनी जान पर मंडराते खतरे का आभास हुआ…और उसने पूरी ताकत से बाहर छलांग लगाने की कोशिष की….पर बार-बार खुद को बदलते तापमान में ढालने में उसकी काफी उर्जा लग चुकी थी और अब खुद को बचाने के लिए न ही उसके पास शक्ति थी और न ही समय…देखते-देखते पानी उबलने लगा और मेंढक की मौत हो गयी।*
*एक्सपेरिमेंट देखने के बाद दोस्त बोला-*
*यार तूने तो मेंढक की जान ही ले ली…खैर, ये सब तू मुझे क्यों दिखा रहा है?*
*प्रोफ़ेसर बोले, “ मेंढक की जान मैंने नहीं ली…उसने खुद अपनी जान ली है। अगर वो बिगड़ते हुए माहौल में बार-बार खुद को एडजस्ट नहीं करता बल्कि उससे बचने का कुछ उपाय सोचता तो वो आसानी से अपनी जान बचा सकता था। और ये सब मैं तुझे इसलिए दिखा रहा हूँ क्योंकि कहीं न कहीं तू भी इस मेढक की तरह व्यवहार कर रहा है।*
*तेरा अच्छा-ख़ासा बिजनेस है पर तू चेंज हो रही मार्केट कंडीशनस की तरफ ध्यान नहीं दे रहा, और बस ये सोच कर एडजस्ट करता जा रहा है कि आगे सब अपने आप ठीक हो जाएगा…पर याद रख अगर तू आज ही हो रहे बदलाव के ऐकौर्डिंग खुद को नहीं चेंज करेगा तो हो सकता है इस मेंढक की तरह कल को संभलने के लिए तेरे पास ना एनर्जी हो और ना ही समय!”*
*प्रोफ़ेसर की सीख ने दोस्त की आँखें खोल दीं, उसने प्रोफ़ेसर साहब को गले लगा लिया और वादा किया कि एक बार फिर वो मार्केट लीडर बन कर दिखायेगा।
*शिक्षा*
*दोस्तों, प्रोफ़ेसर साहब के उस दोस्त की तरह बहुत से लोग अपने आस-पास हो रहे बदलाव की तरफ ध्यान नहीं देते। लोग जिन skills के कारण नोकरी के लिए चुने जाते हैं बस उसी पर अटके रहते हैं खुद को update नहीं करते…और जब company में layoffs होते हैं तो उन्हें ही सबसे पहले निकाला जाता है…लोग जिस ढर्रे पर 10 साल पहले व्यवसाय कर रहे होते हैं बस उसी को पकड़कर बैठे रहते हैं और देखते-देखते नए खिलाड़ी सारा बाजार कवर कर लेते हैं!*
*यदि आप भी खुद को ऐसे लोगों से सम्बंधित कर पा रहे हैं तो संभल जाइए और इस कहानी से सीख लेते हुए मजबूत बनिए और आस-पास हो रहे बदलावों के प्रति सतर्क रहिये, ताकि बदलाव की बड़ी से बड़ी आंधी भी आपकी जड़ों की हिला न पाएं!*
*बिलकुल सही समय के साथ बदलाव बहुत जरूरी है, समय के साथ न बदलने का क्या नुक्सान हो सकता है इसका सबसे बड़ा Example आपके सामने Yahoo ही है, ये एक समय Google से भी आगे था लेकिन समय के साथ न बदलने के कारण आज उसकी दसा आप सब के सामने है*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #☝ मेरे विचार #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
कोई कितनी भी चाले क्यों न चल ले,अंत में परिणाम उसी के हाथ में होता है,जिसकी मर्जी से यह संसार चलता है,योजना आप बनाते है,पर निर्णय सदैव श्री बप्पा का ही होता है...
ॐ श्री गणेशायः नमः
🪷🌸🌺💐🌷🌹🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ बुधवार #श्री गणेश
*🌹लोहा खा गया घुन🌹*
🙏🙏🙏
एक बार की बात है दो व्यक्ति थे, जिनका नाम था मामा और फूफा। मामा और फूफा दोनों व्यापार करते थे और दोनों व्यापार में सहभागी थे। मामा ने फूफा से कहा फूफा क्यों ना हम कोई ऐसी वस्तु खरीद लें जो जल्दी खराब ना हो और उसकी कीमत भी बढती रहे; फिर हम उसे कुछ वर्षो बाद बेचें जिससे उसके मूलधन से ज्यादा दाम मिले।
फूफा ने कहा ठीक है मामा, तुम्हारी बात तो सही है, पर हम खरीदें क्या?
उन्होंने आपस में राय-मशवरा किया और लोहा खरीदने का निर्णय लिया। दोनों ने बराबर रूपये मिला कर लोहा खरीदा। फूफा ने मामा से कहा कि लोहा वह कहीं सूरक्षित स्थान पर रख दे। मामा ने लोहा अपने पास एक पुरानी कोठरी में रख लिया। कुछ दिन तो लोहा जस का तस रखा रहा पर धीरे-धीरे मामा के मन में लालच आ गया और मामा फूफा को बिना बताये लोहा बेचने लगा। काफी दिनों बाद फूफा मामा के पास गया और बोला मामा आज लोहे का भाव काफी बढ़ गया है, जल्दी से वह लोहा निकालो, हम इसे बेच-कर आते हैं।
इस पर मामा बोला फूफा लोहा तो अब कबाड़ घर में नहीं है, क्योंकि लोहे को तो घुन खा गये हैं।
फूफा समझ गया की मामा ने उसके साथ धोखा किया है और उसे बिना बताये सारा का सारा लोहा बेच दिया है। फूफा को क्रोध तो बहुत आया पर वह बिना कुछ कहे-सुने वहां से चला गया!
इस घटना के कुछ दिनों बाद फूफा मामा के पास आया और बोला मामा मैं एक बारात में जा रहा हूँ, बड़ा अच्छा इंतजाम है! अकेला हूँ चाहो तो अपने लड़के को साथ भेज दो, उसकी भी मौज हो जायेगी और कल सुबह तक हम वापस भी आ जायेंगे।
मामा बोला क्यों नहीं, बेशक तुम मेरे लड़के को अपने साथ लेकर जाओ और हां इसे बारात में अच्छी तरह खाना-वाना खिला देना।
फूफा बोला यह भी भला कोई कहने की बात है मामा, तुम निश्चिंत रहो। इस तरह दो दिन बीत गए। मामा का लड़का अभी तक घर वापस नहीं आया। मामा को बहुत चिंता हो गयी की अभी तक उसका लड़का घर वापस क्यों नहीं आया है? वह अपने लड़के के बारे में जानने के लिए फूफा के पास गया और बोला फूफा मेरा लड़का कहाँ है? वह अभी तक घर वापस क्यों नहीं आया है?
फूफा ने कहा क्या बताऊँ मामा, रास्ते में एक चील तुम्हारे लड़के को उठा कर ले गयी।
व्हाट्सएप प्रेरणास्पद कथाएं
मामा बोला ये कैसे हो सकता है? भला कोई चील 12 साल के लड़के को उठा कर ले जा सकती है? सीधी तरह मेरा लड़का मुझे वापस करों, नहीं तो मैं राजा भीम के पास जाऊंगा।फूफा बोला ठीक है मामा, चलो राजा जी के पास चले, अब वही न्याय करेंगे।
मामला वहां के राजा भीम के सामने पेश हुआ। राजा भीम ने सारी बात सुनी और आश्चर्यचकित होते हुए फूफा से कहा देखो फूफा तुम झूठ बोल रहे हो, भला कोई चील 12 वर्ष के लड़के को उठा कर अपने पंजो से आसमान में ले जा सकती है
इस पर फूफा ने उत्तर दिया,
कथा कहूँ कथावली, सुनो राजा भीम।
लोहा को घुन खाय, तो लड़का ले गया चील।
इस पर राजा भीम सब समझ गये और उन्होंने मामा को आज्ञा दी की वह फूफा का लोहा वापस कर दे और फूफा को कहा कि वह लड़के को मामा के पास वापस पहुंचा दे।
शिक्षा
लालच के कारण अच्छे अच्छे रिश्ते भी टूट जाते है, क्योकि लालच मनुष्य को बुरा बना देता है, इसलिए कभी भी किसी के साथ लालच में आकर धोखा नही देना चाहिए।
मंगलमय प्रभात
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“संकट में जो साथ दे, वही सच्चा सहारा है,
जय बजरंगबली 🙏🚩”
जब भी जीवन में अंधेरा लगे,
हनुमान जी का नाम रोशनी बन जाता है,विश्वास रखिए, हर परेशानी दूर हो जाएगी..
जय हनुमान जी
🌸🌺💐🌷🌹 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ मंगलवार #जय हनुमान
*🌹भाग्य🌹*
🙏🙏🙏
*एक सेठ जी थे -जिनके पास काफी दौलत थी.!सेठ जी ने अपनी बेटी की शादी एक बड़े घर में की थी. परन्तु बेटी के भाग्य में सुख न होने के कारण उसका पति जुआरी, शराबी निकल गया. जिससे सब धन समाप्त हो गया*.
*बेटी की यह हालत देखकर सेठानी जी रोज सेठ जी से कहती कि आप दुनिया की मदद करते हो, मगर अपनी बेटी परेशानी में होते हुए उसकी मदद क्यों नहीं करते हो?
*सेठ जी कहते कि "जब उनका भाग्य उदय होगा तो अपने आप सब मदद करने को तैयार हो जायेंगे..."
*एक दिन सेठ जी घर से बाहर गये थे कि,तभी उनका दामाद घर आ गया.सास ने दामाद का आदर-सत्कार किया और बेटी की मदद करने का विचार उसके मन में आया कि क्यों न मोतीचूर के लड्डूओं में अर्शफिया रख दी जाये...*
*यह सोचकर सास ने लड्डूओ के बीच में अर्शफिया दबा कर रख दी और दामाद को टीका लगा कर विदा करते समय पांच किलों शुद्ध देशी घी के लड्डू, जिनमे अर्शफिया थी, दिये...*
*दामाद लड्डू लेकर घर से चला, दामाद ने सोचा कि इतना वजन कौन लेकर जाये क्यों न यहीं मिठाई की दुकान पर बेच दिये जायें और दामाद ने वह लड्डुयों का पैकेट मिठाई वाले को बेच दिया और पैसे जेब में डालकर चला गया*.
*उधर सेठ जी बाहर से आये तो उन्होंने सोचा घर के लिये मिठाई की दुकान से मोतीचूर के लड्डू लेता चलू और सेठ जी ने दुकानदार से लड्डू मांगे...मिठाई वाले ने वही लड्डू का पैकेट सेठ जी को वापिस बेच दिया*.
*सेठ जी लड्डू लेकर घर आये.. सेठानी ने जब लड्डूओ का वही पैकेट देखा तो सेठानी ने लड्डू फोडकर देखे, अर्शफिया देख कर अपना माथा पीट लिया*.
*सेठानी ने सेठ जी को दामाद के आने से लेकर जाने तक और लड्डुओं में अर्शफिया छिपाने की बात कह डाली...*
*सेठ जी बोले कि भाग्यवान मैंनें पहले ही समझाया था कि अभी उनका भाग्य नहीं जागा देखा मोहरें ना तो दामाद के भाग्य में थी और न ही मिठाई वाले के भाग्य में...*
*इसलिये कहते हैं कि भाग्य से
ज्यादा और...समय से पहले न किसी को कुछ मिला है और न मिलेगा! इसीलिये ईश्वर जितना दे उसी में संतोष करे....।*
*मंगलमय प्रभात*
*प्रणाम* #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🏠घर-परिवार #☝ मेरे विचार #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
🙏भोलेनाथ की असीम कृपा से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हों हर मनोकामना पूर्ण हो और जीवन में शक्ति व शांति आवे।🙏🙏
ॐ नमः शिवाय
हर हर महादेव
🌺💐🌷🌹 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ सोमवार #🛕बाबा केदारनाथ📿
*🌹मन की पवित्रता🌹*
🙏🙏🙏
*एक राजा को अपने लिए सेवक की आवश्यकता थी। उसके मंत्री ने दो दिनों के बाद एक योग्य व्यक्ति को राजा के सामने पेश किया।*
*राजा ने उसे अपना सेवक बना तो लिया पर बाद में मंत्री से कहा, ‘‘वैसे तो यह आदमी ठीक है पर इसका रंग-रूप अच्छा नहीं है।’’ मंत्री को यह बात अजीब लगी पर वह चुप रहा।*
*एक बार गर्मी के मौसम में राजा ने उस सेवक को पानी लाने के लिए कहा। सेवक सोने के पात्र में पानी लेकर आया।*
*राजा ने जब पानी पिया तो पानी पीने में थोड़ा गर्म लगा। राजा ने कुल्ला करके फेंक दिया। वह बोला, ‘‘इतना गर्म पानी, वह भी गर्मी के इस मौसम में, तुम्हें इतनी भी समझ नहीं।’’*
*मंत्री यह सब देख रहा था। मंत्री ने उस सेवक को मिट्टी के पात्र में पानी लाने को कहा। राजा ने यह पानी पीकर तृप्ति का अनुभव किया।*
*इस पर मंत्री ने कहा, ‘‘महाराज, बाहर को नहीं, भीतर को देखें। सोने का पात्र सुंदर, मूल्यवान और अच्छा है, लेकिन शीतलता प्रदान करने का गुण इसमें नहीं है।*
*मिट्टी का पात्र अत्यंत साधारण है लेकिन इसमें ठंडा बना देने की क्षमता है। कोरे रंग-रूप को न देखकर गुण को देखें।’’ उस दिन से राजा का नजरिया बदल गया।*
*सम्मान, प्रतिष्ठा, यश, श्रद्धा पाने का अधिकार चरित्र को मिलता है, चेहरे को नहीं। भगवान महावीर ने कहा है कि मनुष्य गुणों से उत्तम बनता है न कि ऊंचे आसन पर बैठने से या पदवी से। जैसे ऊंचे महल के शिखर पर बैठ कर भी कौवा, कौवा ही रहता है; गरुड़ नहीं बन जाता।*
*उसी तरह अमिट सौंदर्य निखरता है मन की पवित्रता से, क्योंकि सौंदर्य रंग-रूप, नाक-नक्श, चाल-ढाल, रहन-सहन, सोच-शैली की प्रस्तुति मात्र नहीं होता। यह व्यक्ति के मन, विचार, चिंतन और कर्म का आइना है।*
*कई लोग बाहर से सुंदर दिखते हैं मगर भीतर से बहुत कुरूप होते हैं। जबकि ऐसे भी लोग हैं जो बाहर से सुंदर नहीं होते मगर उनके भीतर भावों की पवित्रता इतनी ज्यादा होती है कि उनका व्यक्तित्व चुंबकीय बन जाता है। सुंदर होने और दिखने में बहुत बड़ा अंतर है।*
*प्रेरणास्पद कथाएं पढ़ने के लिए इस व्हाट्सएप से जुड़े रहे और दुसरो को भी जोड़े*
*शिक्षा:-*
*आपका चरित्र ही आपका सबसे बड़ा गुण है।*
*मंगलमय प्रभात*
*प्रणाम* #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
।। जय श्री सूर्यदेव जी ।।
🙏🙏🙏
जीवन के आधार, ऊर्जा के असीमित स्रोत और नव-प्रकाश के प्रतीक, भगवान सूर्य नारायण के चरणों में कोटि-कोटि नमन।
"ॐ सूर्याय नमः"
🌺💐🌸🌷🌹 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव













