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*🌹दंड और पुरस्कार🌹* 🙏🙏🙏 *भगवान परशुराम की प्रतिज्ञा थी कि वह केवल ब्राह्मण बालकों को ही धनुर्विद्या देंगे, अन्य किसी वर्ण को नहीं। ऐसा उन्हें क्षत्रियों के अभिमान को देखकर करना पड़ा ।* *विद्या अभिलाषी कर्ण ने निश्चय किया, मुझे भले ही छल करना पड़े, परंतु परशुराम जैसे समर्थ गुरु से ही विद्या सीखनी चाहिए।* *कर्ण ब्राह्मण बालक का वेश धारण कर ऋषि आश्रम पहुंचे और समितपाणि विद्या सीखने के लिए ऋषि चरणों में निवेदन किया।* *बालक की तेजस्विता और पात्रता परख कर परशुराम ने उसे आश्रम में रख लिया और धनुर्विद्या का अभ्यास करने लगे ।* *गुरुदेव जितना बताते कर्ण इसका अभ्यास पूरी लगन से करता था।* *शिष्य का प्रमुख लक्षण ज्ञान प्राप्ति की प्रबल जिज्ञासा है । यदि वह अपने मुख्य विषय से नहीं भटके तो वह विद्या का सच्चा पात्र है। इसलिए प्राचीन काल में विद्यार्थी आजीविका गृहस्थ और अन्य सभी लौकिक उत्तरदायित्व से मुक्त रखे जाते थे।* *कर्ण ने जितने दिन विद्या सीखी,अभ्यास और गुरु सेवा के अतिरिक्त और कुछ जाना ही नहीं कि, संसार में सुख नाम की भी कोई वस्तु होती है।* *एक दिन प्रातः कालीन अभ्यास समाप्त हुआ तो नियम अनुसार भगवान परशुराम मध्यान संध्या के स्नान के लिए सरोवर की ओर चल पड़े। कर्ण गुरुदेव के पीछे वस्त्र और उबटन लेकर चलता था। उनके स्नान के उपरांत स्वयं स्नान करके और त्यागे हुए वस्त्र धोकर आश्रम लौटता था। यह क्रम प्रतिदिन का था। गुरुदेव बालक की निष्ठा की सदैव परीक्षा लेते रहते थे।* *आज उन्होंने उसकी विद्या की परीक्षा लेने की सोची। मार्ग में सेमल का वृक्ष था,शीत के दिन थे, सेमल पूरी तरह फूलों से भरा था, जो अनुपम और अवर्णनीय था। गुरु ने प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष कान तक खींच कर सरसंधान किया तथा सेमल वृक्ष के सभी फूल एक ही बाँण में आधे आधे काटकर पृथ्वी में पाट दिए और फिर सरोवर की ओर आगे बढ़ गए।* *कर्ण वहां पहुंचा तो यह दृश्य देखकर आश्चर्यचकित रह गया। गुरुदेव के सिवाय यह और कोई नहीं कर सकता। श्रद्धा और भक्ति भावना से उसकी भावना एवं उम्र पड़ी ।यही नहीं उसने गुरुदेव की विद्या की व्यवहारिक प्रशंसा भी उन्हीं के समान करने का निश्चय किया। पर वह धनुष चलाता कैसे? एक हाथ में तो उसके उबटन पात्र था।* *उसने उबटन पात्र पृथ्वी पर नहीं रखा, वरन आकाश की ओर उछाला और जितनी देर कटोरा आकाश में रहा, कर्ण ने उतनी देर में सरसंधान कर आधे कटे फूलों को पूरी तरह काटकर धरती में पाट दिया।* *भगवान परशुराम ने अपनी दिव्य दृष्टि से यह सब देखा तो वह कर्ण की विद्या और श्रद्धा पर अत्यंत प्रसन्न हुए।* *उसी दिन मध्यान के समय परशुराम कर्ण की जांघ पर सर रख सो रहे थे कि, उनके शरीर से ब्रह्म कीट निकला। उसे नीचे पृथ्वी पर जाना था। ब्रह्मकीट कहते हैं सीधा ही चलता है। पर मार्ग में कर्ण का पैर बाधक था। इसलिए वह जांघ को बीच से छेदता हुआ पार निकल गया। गुरुदेव जग ना जाए, इसलिए पीड़ा सह ली, पर पांव टस से मस न हुआ।* *गुरुदेव की नींद टूटी, तो वहां बहता हुआ खून देखकर वह सारी स्थिति समझ गए ।* *उन्होंने कर्ण को डांट कर पूछा -'क्यों रे तेरा वर्ण क्या है?'* *अब भला क्या छुपा था। कर्ण ने सच-सच बता दिया।* *परशुराम बहुत क्रोधित हुए और उसे श्राप देना चाहा, पर आत्मा ने कहा- बालक की श्रद्धा और सेवा भावना के बदले कृतज्ञता ना प्रकट करना भी तो पाप होगा? यदि झूठ बोलने और अपराध करने के लिए दंड आवश्यक है, तो सेवा और श्रद्धा के लिए पुरस्कार भी!* *भगवान संयत हो गए। अपने तरकश से तीन बाण निकाले और कर्ण को देकर कहा- वत्स! तुमने मेरी बड़ी सेवा की, उसके पुरस्कार स्वरूप यह तीन अमोघ बाँण देता हूं, इन्हें जिस पर चला दोगे उसे परमात्मा भी ना बचा सकेंगे। पर तुमने झूठ बोलकर मेरी प्रतिज्ञा भंग की है, इसलिए उसका दंड भी मिलना चाहिए। वह यह है कि यही कारण ही तुम्हारी भी मृत्यु का कारण हो सकते हैं।* *अंत में यही बाँण ही कर्ण की मृत्यु का कारण बने, पर उसकी शास्त्र संचालन की निपुणता की प्रशंसा भी महाभारत में सर्वत्र हुई....।* *मंगलमय प्रभात* *स्नेह वंदन* *प्रणाम* #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👌 आत्मविश्वास #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख - 2 happu Choughcr TcTaOan 999     'SDOM जाग्रति क्यों ज़रूरी है यदि आप जीवन में कोई कार्य नहीं कर पाए हैं तो उसके लिए दुःख न मनाएँ। बस! जाग्रत रहने की ज़िम्मेदारी लें, आपका जीवन सबसे सफलतम कहलाएगा | 2 happu Choughcr TcTaOan 999     'SDOM जाग्रति क्यों ज़रूरी है यदि आप जीवन में कोई कार्य नहीं कर पाए हैं तो उसके लिए दुःख न मनाएँ। बस! जाग्रत रहने की ज़िम्मेदारी लें, आपका जीवन सबसे सफलतम कहलाएगा | - ShareChat
🙏*दया करो हमपर भोलेशंकर ,दया के सागर कहलाने वाले*🙏🙏 🌺*हर हर महादेव*🌺 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ सोमवार #🙏चारधाम यात्रा🛕
🌞 Good Morning🌞 - ShareChat
🌹भगवान पर विश्वास🌹 🙏🙏🙏 सुबह से ही बड़ी बैचैनी हो रही थी। पता नहीं क्या बात थी।सौम्या को तैयार करके स्कूल भेज दिया और नहाने चली गयी। आकर पूजा की तैयारी कर के पूजा करने जाने ही वाली थी कि पतिदेव आये और बोले - यार जल्दी नास्ता बना दो। आज बॉस ने जल्दी बुलाया है। लंच वही कर लूंगा। मैंने पूछा - इतनी जल्दी ? हाँ यार, कोई जरूरी मीटिंग है कहकर वो नहाने चले गए। पता नहीं क्यों बैचैनी ज्यादा हो रही थी। बड़े ही अनमने मन से नाश्ता बनाया। ये खाकर ऑफिस के लिए निकल गए। जल्दी से सब रखकर हाथ पाँव धोये और भागी पूजाघर की तरफ। मेरे कान्हा - मेरे सबसे अच्छे दोस्त! उनसे अपने मन की हर बात कह देती हूं मैं। फिर डर नहीं लगता। जैसे उन्होंने सब संभाल लिया हो। प्रभु बड़ा डर लग रहा है। आप ही बताओ न क्या बात है? ऐसा डर तो कभी नहीं लगता। वैसे आप हो तो काहे की चिंता ? सबका भला करना प्रभु! हम सब पर कृपा बनाये रखना!! श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं! हे गिरधारी तेरी आरती गाऊं! आरती गाने में जाने खो सी जाती हूं मैं। पूजा करने के बाद घर के काम निपटाने मे लग गयी। जैसे सब ठीक हो गया हो। बड़ा हल्का महसूस कर रही थी। थोड़ी ही देर में दरवाजे की घंटी बजी। देखा तो पड़ोस वाली आंटी अंकल बड़े परेशान से खड़े थे। आइये आइये, अंदर आइये ना - मैंने कहा। पर उन्होंने कहा आज रवि (यानि मेरे पति) मिला था। कह रहा था जरूरी काम है। सुबह 8:30 की ट्रैन पकड़ने वाला था। जी अंकल, पर बात क्या है? - मैंने घबराते हुए पूछा। आंटी अचानक ही रोने लगी बोली उस लोकल में तो बम ब्लास्ट हो गया है। कोई नहीं बचा। मेरे आसपास तो अँधेरा ही अँधेरा छा गया। मेरी क्या हालत थी, शव्दों में बयान नहीं कर पा रही हूँ। सीधे दौड़ते हुए कान्हा के पास गयी। उन्हें देखा तो लगा ऐसा नहीं हो सकता। बस वही बैठे बैठे कान्हा कान्हा करने लगी। तभी मेरा मोबाइल बजा जो आंटी ने उठाया और ख़ुशी से चिल्लायी - बेटा रवि का फ़ोन है। वो ठीक है। मैंने आँख खोलकर कान्हा जी को देखा। लगा वो मुस्कुरा रहे हैं। मैं भी मुस्कुरा दी। इनकी आवाज कानो में पड़ी तो लगा जैसे अभी अभी प्यार हो गया हो। आप बस जल्दी आ जाइए - इतना ही बोल पायी। ये घर आये तो मैं ऐसे गले लगी जैसे किसी का लिहाज ही न हो। थोड़ी देर में अंकल ने पूछा - हुआ क्या था बेटा, तुम ट्रैन में नहीं गए क्या? नहीं अंकल, बस यही मोड़ पर एक बहुत ही सुन्दर लड़का मिल गया। साथ साथ चल रहा था। मैंने पूछा - कहाँ रहते हो? पहले तो कभी नहीं देखा तुमको? कहने लगा - यहीं तो रहता हूँ। आप कहाँ रहते हो? मैंने बताया कि मैं शिवम् बिल्डिंग में रहता हूं। ऑफिस का भी बताया। उसने बताया कि वो मेरे ऑफिस के पास ही जा रहा है। लेकिन टैक्सी से। और कहने लगा - आप भी क्यों नहीं चलते मेरे साथ? मैंने कहा - नहीं, थैंक्यू। मैं ट्रैन से जाता हूं। अब वो ज़िद करने लगा। बोला मुझे अच्छा लगेगा अगर आप चलेंगे तो। वैसे भी टैक्सी जा तो रही है न उस तरफ। मैंने भी सोचा चलो ठीक है। आज टैक्सी से सही। कम से कम ट्रैन की धक्का मुक्की से तो बचूंगा। और हम लोगो ने एक टैक्सी कर ली। मुझे देखकर ये बोले - यामिनी, पता नहीं क्या जादू था उस लड़के में की बस मैं खिंचा चला जा रहा था। बहुत ही प्यारा था वो। आज जैसा मुझे पहले कभी नहीं लगा। मैं भागी कान्हा की तरफ। मेरे सबसे अच्छे मित्र ने आज मेरे पति के साथ साथ मेरा जीवन भी जो बचा लिया था। वो अभी भी मुस्कुरा रहे थे। भक्ति में शक्ति है। जिसका मन सच्चा और कर्म अच्छा हैं वही भगवान का सच्चा भक्त हैं और ऐसे लोगो पर ईश्वर की कृपा हमेशा बनी रहती हैं!! मंगलमय प्रभात प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🌸पॉजिटिव मंत्र #👌 आत्मविश्वास #👫 हमारी ज़िन्दगी #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख - )5 happy | Choughtr TcTaOan; 1999 ma OSTlok WISDOM अदृश्य चमत्कार दृश्य में जो है, उसे माँगना आसान है पर अदृश्य में जो है, अगर वह माँगना आ जाए तो जीवन चमत्कारों से भर सकता है। )5 happy | Choughtr TcTaOan; 1999 ma OSTlok WISDOM अदृश्य चमत्कार दृश्य में जो है, उसे माँगना आसान है पर अदृश्य में जो है, अगर वह माँगना आ जाए तो जीवन चमत्कारों से भर सकता है। - ShareChat
🙏ॐ सूर्याय नमः🙏 भगवान सूर्य की कृपा से आज का दिन सुख, शांति और समृद्धि से परिपूर्ण हो.... आपका दिन मंगलमय हो 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव
🌸 जय श्री कृष्ण😇 - शुभि रविवर शुभि रविवर - ShareChat
🌺*ॐ शनि देवाय नमः*🌺 *ॐ भग भवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि*॥ *तन्नो शनि: प्रचोदयात*॥ 🙏*आपका दिन मंगलमय हो*॥ #शनिदेव #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏🏻शनिदेव भजन #🌞सुप्रभात सन्देश
शनिदेव - दोनों भाई हमेशा साथ Saatann Aapki धमद्ैन भगवान शिनिदेव 1 ؟ ঝনন आपको 39 Sanatanii Aapki Aapki ! Sanatan दोनों भाई हमेशा साथ Saatann Aapki धमद्ैन भगवान शिनिदेव 1 ؟ ঝনন आपको 39 Sanatanii Aapki Aapki ! Sanatan - ShareChat
ईश्वर ने हमें धरती पर एक खाली चेक की भांति भेजा है, गुणों तथा योग्यता के आधार पर हमें स्वयं अपनी कीमत उसमें भरनी है.... ॐ श्री शनिदेवाय नमः जय हनुमान जी 🚩🚩🌹🌹🌻🌹🌹🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ शनिवार #✋भगवान भैरव🌸
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🌹विश्वास और आस्था🌹 🙏🙏🙏 वृन्दावन की महिमा तभी है अगर भगवान् श्रीकृष्ण की याद आये, हृदय द्रवित हो, अहं गल जाए बंधन छूट जाएँ। श्री चैतन्य महाप्रभु वृन्दावन आये एक पण्डा उनके साथ हो लिया। हर स्थान पर बोलता जाता कि कहाँ पर हमारे बंसीधर ने कौन सी लीला की है। एक स्थान आया पण्डा बोला, ये वो ही कदम्ब का पेड़ है जिस पर राधाकृष्ण झूला झूलते थे। यहाँ पर राधा जी का मोतियों का हार कान्हा से टूट गया वो बोली सारे मोती चुन कर इकट्ठे कर के मुझे दो। सारे मोती कान्हा ने इकट्ठे किये पर एक मोती ना मिला तो कान्हा ने बांसुरी से खोदा तो मोती ढूंढने को पर बन गयी “मोती झील”, राधा रानी जिद पर अड़ गयी मेरा एक मोती ला कर ही दो। फिर कान्हा ने एक पेड़ लगाया और कहा, "इस पर मोती जैसे फूल आयेंगे फिर तुम ले लेना ढेर सारे हार बनाना।" आज भी उस पेड़ पर मोती जैसे फूल आते हैं। ये लीलाएँ पण्डा के मुख से सुनते ही महाप्रभु की आँखों में आँसू बहने लगे, मोती झील के किनारे लोटने लगे ब्रज धूलि में। "ये मेरे आराध्य देव की खोदी मोती झील है, ये वो ही कदम्ब का पेड़ है जिस पर दोनों झूला झूलते हैं।" हृदय द्रवीभूत हो गया। ब्रजरज में लौटने लगे अपने प्यारे की कृपामयी लीलाओं के सुनने मात्र से ही। ना तो उन्होंने किसी आर्कयोलॉजिस्ट से पूछा, ना कोई तर्क किया कि क्या वाकई ये वो ही स्थान है या तुम गढ़ी हुई कहानी सुना रहे हो। कोई किन्तु परन्तु कुछ नहीं किया। भक्त ने सुना और हो गया हृदय द्रवित, गला रुंध गया, लीला में डूब गया और ब्रजरज में लौटने लगा। भगवान को तर्क करने से नहीं केवल प्रेम से, आस्था से, विश्वास से ही पाया जा सकता है। ज्ञानी जनों की दुनिया दूसरी होती है। विद्वानो की दूसरी दुनिया है और भक्तों की अलग। ब्रज का मार्ग तो प्रेम का मार्ग है, श्रद्धा का मार्ग है। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👍 डर के आगे जीत👌 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👌 आत्मविश्वास #👫 हमारी ज़िन्दगी #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
👍 डर के आगे जीत👌 - happy| thoughcs . The Te] Gvan  ईश्वर की भाषा शब्दों की नहीं  सुकून' की होती है। जब आप उस सुकून को महसूस करते हैं भटका हुआ मन शांत होने लगता है। happy| thoughcs . The Te] Gvan  ईश्वर की भाषा शब्दों की नहीं  सुकून' की होती है। जब आप उस सुकून को महसूस करते हैं भटका हुआ मन शांत होने लगता है। - ShareChat
🌹ईमानदारी की अनदेखी कीमत🌹 🙏🙏🙏 काम की तलाश में कई दिनों तक भटकने के बाद थका-हारा और निराश युवक जब घर लौटने ही वाला था, तभी पीछे से एक कमजोर-सी आवाज़ आई—“ऐ भाई! कोई मजदूर मिलेगा क्या?” उसने मुड़कर देखा तो एक झुकी कमर वाला वृद्ध तीन गठरियाँ उठाए खड़ा था। युवक ने सहानुभूति से कहा कि वह मजदूरी कर लेगा, क्योंकि उसे रामगढ़ ही जाना है। वृद्ध ने बताया कि वह दो गठरियाँ खुद उठाएगा, लेकिन तीसरी गठरी भारी है, उसे पहुँचा देने पर दो रुपये देगा। युवक ने बिना देर किए मदद स्वीकार कर ली और इसे अपना फर्ज बताया। जैसे ही उसने गठरी उठाई, वजन से चौंक गया। पूछने पर वृद्ध ने धीरे से कहा कि उसमें एक-एक रुपये के सिक्के हैं। युवक के मन में क्षणभर विचार आया, पर उसने स्वयं को समझाया कि उसे ईमानदारी से कमाई करनी है, चोरी से नही, रास्ते में एक नदी आई। युवक सहज ही पानी में उतर गया, पर वृद्ध डर से रुक गया। उसने विनती की कि एक और गठरी उठा ले और मजदूरी बढ़ा देगा, साथ ही आशंका जताई कि कहीं वह भाग न जाए क्योंकि इसमें चाँदी के सिक्के हैं। युवक ने साफ कहा कि वह बेईमान नहीं है। नदी पार करने के बाद पहाड़ी आई। यहाँ वृद्ध ने तीसरी गठरी भी सौंपने से पहले डर जताया कि इसमें सोने के सिक्के हैं और अगर वह भाग गया तो पकड़ नहीं पाएगा। युवक ने अपनी ईमानदारी का बखान करते हुए बताया कि उसने पहले सेठ की नौकरी केवल इसलिए छोड़ी थी क्योंकि वह गलत काम करवाना चाहता था। वृद्ध ने भरोसा कर लिया और युवक तीनों गठरियाँ लेकर आगे बढ़ गया। पहाड़ी पार करते-करते उसके मन में लालच ने घर कर लिया—“अगर मैं भाग जाऊँ तो बूढ़ा क्या कर लेगा? एक झटके में अमीर बन जाऊँगा, पत्नी खुश हो जाएगी, इज्ज़त मिलेगी।” लालच जीत गया और वह भाग निकला। घर पहुँचकर जैसे ही उसने गठरियाँ खोलीं, उसके होश उड़ गए—अंदर सिक्कों की जगह मिट्टी के ढेले थे। तभी एक कागज़ मिला, जिस पर लिखा था कि यह नाटक राज्य के खजाने की सुरक्षा के लिए ईमानदार मंत्री खोजने हेतु किया गया था और परीक्षा लेने वाला वृद्ध स्वयं महाराजा था। अगर वह लालच में न पड़ता, तो मंत्रीपद और सम्मान उसका होता। यह पढ़कर वह पछतावे में डूब गया, क्योंकि एक पल के लालच ने उसका उज्ज्वल भविष्य छीन लिया। शिक्षा : ईमानदारी का मूल्य तुरंत नहीं, पर उसका फल जीवन भर मिलता है। लालच के क्षणिक आकर्षण में सिद्धांत छोड़ देना सबसे बड़ा नुकसान है, क्योंकि जीवन कब और कैसे हमारी परीक्षा ले ले—कोई नहीं जानता। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👍 डर के आगे जीत👌 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👌 आत्मविश्वास #🌸पॉजिटिव मंत्र #👍 सफलता के मंत्र ✔️
👍 डर के आगे जीत👌 - happ4 Choughtr' ThடTப Grams हर बात में 'सही या गलत' की आदत इंसान को कमज़ोर बना देती है। पूछने आत्मनिर्भर बनने के लिए की राय से ज़्यादा, दूसरों अपने विवेक पर भरोसा करें। happ4 Choughtr' ThடTப Grams हर बात में 'सही या गलत' की आदत इंसान को कमज़ोर बना देती है। पूछने आत्मनिर्भर बनने के लिए की राय से ज़्यादा, दूसरों अपने विवेक पर भरोसा करें। - ShareChat
*दरिद्रता सभी दुखों की जड़ है इसलिए हे महालक्ष्मी! कृपा कीजिए*॥ 🙏*सतत् शरणागत*🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ शुक्रवार #🙏 माँ वैष्णो देवी
🌞 Good Morning🌞 - शुभ शुक्रवार सुप्रभात शुभ शुक्रवार सुप्रभात - ShareChat
🌹प्रेम🌹 🙏🙏🙏 एक बार एक पुत्र अपने पिता से रूठ कर घर छोड़ कर दूर चला गया और फिर इधर उधर यूँही भटकता रहा। दिन बीते, महीने बीते और साल बीत गए | एक दिन वह बीमार पड़ गया | अपनी झोपडी में अकेले पड़ उसे अपने पिता के प्रेम की याद आई कि कैसे उसके पिता उसके बीमार होने पर उसकी सेवा किया करते थे । उसे बीमारी में इतना प्रेम मिलता था कि वो स्वयं ही शीघ्र अति शीघ्र ठीक हो जाता था | उसे फिर एहसास हुआ कि उसने घर छोड़ कर बहुत बड़ी गलती की है, वो रात के अँधेरे में ही घर की और हो लिया। जब घर के नजदीक गया तो उसने देखा आधी रात के बाद भी दरवाज़ा खुला हुआ है | अनहोनी के डर से वो तुरंत भाग कर अंदर गया तो उसने पाया की आंगन में उसके पिता लेटे हुए हैं | उसे देखते ही उन्होंने उसका बांहे फैला कर स्वागत किया | पुत्र की आँखों में आंसू आ गए | उसने पिता से पूछा "ये घर का दरवाज़ा खुला है, क्या आपको आभास था कि मैं आऊंगा?" पिता ने उत्तर दिया "अरे पगले ये दरवाजा उस दिन से बंद ही नहीं हुआ जिस दिन से तू गया है, मैं सोचता था कि पता नहीं तू कब आ जाये और कंही ऐसा न हो कि दरवाज़ा बंद देख कर तू वापिस लौट जाये |" ठीक यही स्थिति उस परमपिता परमात्मा की है | उसने भी प्रेमवश अपने भक्तो के लिए द्वार खुले रख छोड़े हैं कि पता नहीं कब भटकी हुई कोई संतान उसकी और लौट आए।i हमें भी आवश्यकता है सिर्फ इतनी कि उसके प्रेम को समझे और उसकी और बढ़ चलें। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #🏠घर-परिवार
👍मोटिवेशनल कोट्स✌ - happia, Tle Tej ৬Tan  जब भी मन चीज़ों को सही और गलत में बाँटने लगे तो मन को कराने के लिए कहें-  नॉट एप्लिकेबल | इससे नकारात्मकता का असर तुरंत खत्म हा जाएगा। happia, Tle Tej ৬Tan  जब भी मन चीज़ों को सही और गलत में बाँटने लगे तो मन को कराने के लिए कहें-  नॉट एप्लिकेबल | इससे नकारात्मकता का असर तुरंत खत्म हा जाएगा। - ShareChat