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*🌹सम्यक दृष्टि🌹* 🙏🙏🙏 *एक राजा था, बहुत प्रभावशाली, बुद्धि और वैभव से संपन्न। आस-पास के राजा भी समय-समय पर उससे परामर्श लिया करते थे। एक दिन राजा अपनी शैया पर लेेटे-लेटे सोचने लगा, मैं कितना भाग्यशाली हूं। कितना विशाल है मेरा परिवार, कितना समृद्ध है मेरा अंत:पुर, कितनी मजबूत है मेरी सेना, कितना बड़ा है मेरा राजकोष। ओह! मेरे खजाने के सामने कुबेर के खजाने की क्या बिसात? मेरे राजनिवास की शोभा को देखकर अप्सराएं भी ईर्ष्या करती होंगी। मेरा हर वचन आदेश होता है। राजा कवि हृदय था और संस्कृृत का विद्वान था।* *अपने भावों को उसने शब्दों में पिरोना शुरू किया। तीन चरण बन गए, चौथी लाइन पूरी नहीं हो रही थी। जब तक पूरा श्लोक नहीं बन जाता, तब तक कोई भी रचनाकार उसे बार-बार दोहराता है। राजा भी अपनी वे तीन लाइनें बार-बार गुनगुना रहा था* - *चेतोहरा: युवतय: स्वजनाऽनुकूला: सद्बान्धवा: प्रणयगर्भगिरश्च भृत्या: गर्जन्ति दन्तिनिवहास्विरलास्तुरंगा:* *-मेरी चित्ताकर्षक रानियां हैं, अनुकूल स्वजन वर्ग है, श्रेष्ठ कुटुंबी जन हैं। कर्मकार विनम्र और आज्ञापालक हैं, हाथी, घोड़ों के रूप में विशाल सेना है.* *लेकिन बार-बार गुनगुनाने पर भी चौथा-चरण बन नहीं रहा था। संयोग की बात है कि उसी रात एक चोर राजमहल में चोरी करने के लिए आया था। मौका पाकर वह राजा के शयनकक्ष में घुस गया और पलंग के नीचे दुबक कर कर बैठ गया। चोर भी संस्कृत भाषा का विज्ञ और आशु कवि था। समस्यापूर्ति का उसे अभ्यास था। राजा द्वारा गुनगुनाए जाते श्लोक के तीन चरण चोर ने सुन लिए। राजा के दिमाग में चौथी लाइन नहीं बन रही है , यह भी वह जान गया लेकिन तीन लाइनें सुन कर उस चोर का कवि मन भी उसे पूरा करने के लिए मचलने लगा। वह भूल गया कि वह चोर है और राजा के कक्ष में चोरी करने घुसा है। अगली बार राजा ने जैसे ही वे तीन लाइनें पूरी कीं , चोर के मुंह से चौथी लाइन निकल पड़ी ,* *सम्मीलने नयनयोर्नहि किंचिदस्ति॥* . *राज्य , वैभव आदि सब तभी तक है , जब तक आंख खुली है। आंख बंद होने के बाद कुछ नहीं है। अत : किस पर गर्व कर रहे हो ?* *चोर की इस एक पंक्ति ने राजा की आंखें खोल दीं। उसे सम्यक् दृष्टि मिल गई। वह चारों ओर विस्फारित नेत्रों से देखने लगा - ऐसी ज्ञान की बात किसने कही ? कैसे कही ?* *उसने आवाज दी , पलंग के नीचे जो भी है , वह मेरे सामने उपस्थित हो। चोर सामने आ कर खड़ा हुआ। फिर हाथ जोड़ कर राजा से बोला ,* *हे राजन ! मैं आया तो चोरी करने था , पर आप के द्वारा पढ़ा जा रहा श्लोक सुनकर यह भूल गया कि मैं चोर हूं। मेरा काव्य प्रेम उमड़ पड़ा और मैं चौथे चरण की पूर्ति करने का दुस्साहस कर बैठा। हे राजन ! मैं अपराधी हूं। मुझे क्षमा कर दें। राजा ने कहा , तुम अपने जीवन में चाहे जो कुछ भी करते हो , इस क्षण तो तुम मेरे गुरु हो। तुमने मुझे जीवन के यथार्थ का परिचय कराया है। आंख बंद होने के बाद कुछ भी नहीं रहता - यह कह कर तुमने मेरा सत्य से साक्षात्कार करवा दिया। गुरु होने के कारण तुम मुझसे जो चाहो मांग सकते हो। चोर की समझ में कुछ नहीं आया लेकिन राजा ने आगे कहा -- आज मेरे ज्ञान की आंखें खुल गईं। इसलिए शुभस्य शीघ्रम् - इस सूक्त को आत्मसात करते हुए मैं शीघ्र ही संन्यास लेना चाहता हूं। राज्य अब तृण के समान प्रतीत हो रहा है। तुम यदि मेरा राज्य चाहो तो मैं उसे सहर्ष देने के लिए तैयार हूं।* *चोर बोला , राजन ! आपको जैसे इस वाक्य से बोध पाठ मिला है , वैसे ही मेरा मन भी बदल गया है। मैं भी संन्यास स्वीकार करना चाहता हूं। राजा और चोर दोनों संन्यासी बन गए।* *एक ही पंक्ति ने दोनों को स्पंदित कर दिया। यह है सम्यक द्रष्टि का परिणाम। जब तक राजा की दृष्टि सम्यक् नहीं थी , वह धन - वैभव , भोग - विलास को ही सब कुछ समझ रहा था। ज्यों ही आंखों से रंगीन चश्मा उतरा , दृष्टि सम्यक् बनी कि पदार्थ पदार्थ हो गया और आत्मा-आत्मा...।* *मंगलमय प्रभात* *स्नेह वंदन* *प्रणाम* #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👌 आत्मविश्वास #👫 हमारी ज़िन्दगी #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
🏠घर-परिवार - 25 hangit  ThTaa Ignn 2024 SYSTEM FOR ISDOM ;'_~ ८Y स्वभाव' क्या है मूल आनंद' मनुष्य का मूल स्वभाव है। स्वयं की पहचान होते ही स्पष्ट हो जाता है कि आनंद तो सदा से भीतर ही था, बस! नकली मैं॰ (अहंकार) के मिटने की देरी थी। 25 hangit  ThTaa Ignn 2024 SYSTEM FOR ISDOM ;'_~ ८Y स्वभाव' क्या है मूल आनंद' मनुष्य का मूल स्वभाव है। स्वयं की पहचान होते ही स्पष्ट हो जाता है कि आनंद तो सदा से भीतर ही था, बस! नकली मैं॰ (अहंकार) के मिटने की देरी थी। - ShareChat
श्री महादेवाय नमः 🌿 हे भोलेनाथ! मैं समर्पित भाव से तीनों जन्मों के पाप के संहार के लिए अति कोमल तीन पत्तों से युक्त बिल्व पत्र आपको समर्पित करता हूं .. मेरी पूजा स्वीकार कीजिए ॐ नमः शिवाय जय माता पार्वती 🚩🚩🌿🌹🪻🌹🌿🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ सोमवार #🛕बाबा केदारनाथ📿
🌞 Good Morning🌞 - @ शुभ सोमवार हर हर महादेव 30 @Anitakapoor62 @ शुभ सोमवार हर हर महादेव 30 @Anitakapoor62 - ShareChat
*🌹ज़िदगी इक किराये का घर है🌹*.. 🙏🙏🙏 मैं कल अपनी पुरानी सोसाइटी, जहां पहले मैं रहता था, में गया था। वहां मैं जब भी जाता हूं, मेरी कोशिश होती है कि अधिक से अधिक लोगों से मेल मुलाकात हो जाए। जब अपनी पुरानी सोसाइटी में पहुंच कर गार्ड से बात कर रहा था कि तभी मोटरसाइकिल पर एक आदमी आया और उसने मुझे झुक कर प्रणाम किया। “भैया, प्रणाम।” मैंने पहचानने की कोशिश की। बहुत पहचाना-पहचाना तो लग रहा था। पर नाम याद नहीं आ रहा था। उसी ने कहा-"भैया पहचाने नहीं? हम बाबू हैं, बाबू। उधर वाली आंटीजी के घर काम करते थे।" मैंने पहचान लिया। अरे ये तो बाबू है। सी ब्लॉक वाली आंटीजी का नौकर। “अरे बाबू, तुम तो बहुत तंदुरुस्त हो गए हो। आंटी कैसी हैं?” बाबू हंसा-“आंटी तो गईं। “गईं ? कहां गईं ? उनका बेटा विदेश में था, वहीं चली गईं क्या? ठीक ही किया, उन्होंने। यहां अकेले रहने का क्या मतलब था ?” अब बाबू थोड़ा गंभीर हुआ। उसने हंसना रोक कर कहा-“भैया, आंटीजी भगवान जी के पास चली गईं।” “भगवान जी के पास? ओह! कब ?” बाबू ने धीरे से कहा-“दो महीने हो गए।” “क्या हुआ था आंटी को ?” “कुछ नहीं। बुढ़ापा ही बीमारी थी। उनका बेटा भी बहुत दिनों से नहीं आया था। उसे याद करती थीं। पर अपना घर छोड़ कर वहां नहीं गईं। कहती थीं कि यहां से चली जाऊंगी तो कोई मकान पर कब्जा कर लेगा। बहुत मेहनत से ये मकान बना है।” “हां, वो तो पता ही है। तुमने खूब सेवा की। अब तो वो चली गईं। अब तुम क्या करोगे ?” अब बाबू फिर हंसा,"मैं क्या करुंगा भैया ? पहले अकेला था। अब गांव से फैमिली को ले आया हूं। दोनों बच्चे और पत्नी अब यहीं रहते हैं।” “यहीं मतलब उसी मकान में ?" “जी भैया। आंटी के जाने के बाद उनका बेटा आया था। एक हफ्ता रुक कर चले गए। मुझसे कह गए हैं कि घर देखते रहना। चार कमरे का इतना बड़ा फ्लैट है। मैं अकेला कैसे देखता? भैया ने कहा कि तुम यहीं रह कर घर की देखभाल करते रहो। वो वहां से पैसे भी भेजने लगे हैं। और सबसे बड़ी बात ये है कि मेरे बच्चों को यहीं स्कूल में एडमिशन मिल गया है। अब आराम से हूं। कुछ-कुछ काम बाहर भी कर लेता हूं। भैया सारा सामान भी छोड़ गए हैं। कह रहे थे कि दूर देश ले जाने में कोई फायदा नहीं।” मैं हैरान था। बाबू पहले साइकिल से चलता था। आंटी थीं तो उनकी देखभाल करता था। पर अब जब आंटी चली गईं तो वो चार कमरे के मकान में आराम से रह रहा है।आंटी अपने बेटे के पास नहीं गईं कि कहीं कोई मकान पर कब्जा न कर ले। बेटा मकान नौकर को दे गया है, ये सोच कर कि वो रहेगा तो मकान बचा रहेगा। मुझे पता है, मकान बहुत मेहनत से बनते हैं। पर ऐसी मेहनत किस काम की, जिसके आप सिर्फ पहरेदार बन कर रह जाएं? मकान के लिए आंटी बेटे के पास नहीं गईं। मकान के लिए बेटा मां को पास नहीं बुला पाया। सच कहें तो हम लोग मकान के पहरेदार ही हैं। जिसने मकान बनाया वो अब दुनिया में ही नहीं है। जो हैं, उसके बारे में तो बाबू भी जानता है कि वो अब यहां कभी नहीं आएंगे। मैंने बाबू से पूछा कि,"तुमने भैया को बता दिया कि तुम्हारी फैमिली भी यहां आ गई है?" “इसमें बताने वाली क्या बात है भैया? वो अब कौन यहां आने वाले हैं? और मैं अकेला यहां क्या करता? जब आएंगे तो देखेंगे। पर जब मां थीं तो आए नहीं, उनके बाद क्या आना? मकान की चिंता है, तो वो मैं कहीं लेकर जा नहीं रहा। मैं तो देखभाल ही कर रहा हूं।” बाबू फिर हंसा। बाबू से मैंने हाथ मिलाया। मैं समझ रहा था कि बाबू अब नौकर नहीं रहा। वो मकान मालिक हो गया है। हंसते-हंसते मैंने बाबू से कहा “भाई, जिसने ये बात कही है कि मूर्ख आदमी मकान बनवाता है, बुद्धिमान आदमी उसमें रहता है, उसे ज़िंदगी का कितना गहरा तज़ुर्बा रहा होगा। बाबू ने धीरे से कहा,“साहब, सब किस्मत की बात है।” मैं वहां से चल पड़ा था ये सोचते हुए कि सचमुच सब किस्मत की ही बात है। लौटते हुए मेरे कानों में बाबू की हंसी गूंज रही थी...“मैं मकान लेकर कहीं जाऊंगा थोड़े ही?मैं तो देखभाल ही कर रहा हूं।” मैं सोच रहा था, मकान लेकर कौन जाता है ? सब देखभाल ही तो करते हैं। आज यह किस्सा पढ़कर लगा कि हम सभी क्या कर रहे है .... जिन्दगी के चार दिन है मिल जुल कर हँसतें हँसाते गुजार ले ...क्या पता कब बुलावा आ जाए.... क्योकि इस धरा का, इस धरा पर, सब यहीं धरा रह जायेगा.... यही जीवन की सच्चाई हैं ... मंगलमय प्रभात प्रणाम #👍 डर के आगे जीत👌 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🙏 प्रेरणादायक विचार #👌 आत्मविश्वास
👍 डर के आगे जीत👌 - haopte Thಫo अकंप मन, निरोगी शरीर, लचीली बुद्धि ये तीनों बेहोशी तोड़कर, नए विचार लाने में हमारी सहायता करते हैं और हमें अपने मूल लक्ष्य तक पहुँचाते हैं। haopte Thಫo अकंप मन, निरोगी शरीर, लचीली बुद्धि ये तीनों बेहोशी तोड़कर, नए विचार लाने में हमारी सहायता करते हैं और हमें अपने मूल लक्ष्य तक पहुँचाते हैं। - ShareChat
मुझे नहीं पता पाप और पुण्य क्या होते हैं.. बस इतना पता है जिस कार्य से किसी का दिल दुखे वो पाप और किसी के चेहरे पर खुशी आए वो पुण्य .. ॐ श्री सूर्य देवाय नमः 🚩🚩🌹🌹🌻🌹🌹🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव
🌸 जय श्री कृष्ण😇 - ShareChat
*🌹शुक्राना🌹* 🙏🙏🙏 एक पक्षी था जो रेगिस्तान में रहता था, बहुत बीमार, कोई पंख नहीं, खाने-पीने के लिए कुछ नहीं, रहने के लिए कोई आश्रय नहीं था। एक दिन एक कबूतर उधर से गुजर रहा था, उस बीमार और दुःखी पक्षी ने कबूतर को रोका और पूछा- "तुम कहाँ जा रहे हो? उसने उत्तर दिया- "मैं स्वर्ग जा रहा हूँ" बीमार पक्षी ने कहा- "कृपया मेरे लिए पता करें, मेरी पीड़ा कब तक समाप्त हो जाएगी?" कबूतर ने कहा-"निश्चित ही मैं पता करूँगा।" कबूतर ने इतना कह कर बीमार पक्षी से विदा ली। कबूतर स्वर्ग पहुंचा और प्रवेश द्वार पर देवदूत को बीमार पक्षी का संदेश दिया। देवदूत ने कहा- "पक्षी के जीवन में अगले सात वर्ष तक इसी तरह कष्ट लिखा हुआ है उसे ऐसे ही सात वर्ष तक कष्ट भोगना पड़ेगा, तब तक उसके जीवन में कोई खुशी नहीं है। कबूतर ने कहा- "जब बीमार पक्षी यह सुनेगा तो वह निराश हो जाएगा क्या आप इसके लिए कोई उपाय बता सकते हैं। देवदूत ने उत्तर दिया-"उससे कहो कि इस वाक्य को हमेशा बोलता रहे... "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्रगुजर हुँ "। वापसी पर जब वह बीमार पक्षी कबूतर से फिर मिला तो कबूतर ने उस स्वर्गदूत का संदेश दिया सात-आठ दिनों के बाद कबूतर जब फिर उधर से गुजर रहा था, तब उसने देखा कि पक्षी बहुत खुश था उसके शरीर पर पंख उग आए थे। उस रेगिस्तानी इलाके में एक छोटा सा पौधा लगा हुआ था, वहां पानी का एक छोटा सा तालाब भी बना हुआ था पक्षी खुश होकर नाच रहा था कबूतर चकित था देवदूत ने कहा था कि अगले सात वर्षों तक पक्षी के लिए कोई खुशी नहीं होगी इस सवाल को ध्यान में रखते हुए कबूतर स्वर्ग के द्वार पर यू देवदूत से मिलने पहुंच गया। कबूतर ने देवदूत से अपने मन में उठते हुए सवालों का समाधान पूछा तो देवदूत ने उत्तर दिया- "हाँ..!! यह सच है कि पक्षी की जिन्दगी में सात साल तक कोई खुशी नहीं लिखी थी लेकिन क्योंकि पक्षी हर स्थिति में "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्रिया ।" बोल रहा था और भगवान का नामस्मरण कर रहा था, इस कारण उसका जीवन बदल गया जब पक्षी गर्म रेत पर गिर गया तो उसने कहा- "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है।"जब यह उड़ नहीं सकता था तो उसने कहा-"इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है।" जब उसे प्यास लगी और आसपास पानी नहीं था, तो उसने कहा- "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है।" जो भी स्थिति हो, पक्षी दोहराता रहा- "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है।" और इसलिए सात साल सात दिनों में समाप्त हो गए जब मैंने यह कहानी सुनी तो मैंने अपने जीवन को महसूस करने सोचने स्वीका करने और देखने के तरीके में एक जबरदस्त बदलाव महसूस किया.. मैंने अपने जीवन में इस को अपना लिया "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है। "इसने मुझे मेरे विचार को, मेरे जीवन में शिफ्ट करने में मदद की, जो मेरे पास नहीं है। प्रेरणास्पद कथाएं हेतु जुड़े अगर मेरा सिर दर्द करता है, तो मुझे लगता है कि मेरा बाकी शरीर पूरी तरह से ठीक और स्वस्थ है और मैं कहता हूं- "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है" और मुझे लगता है कि सिरदर्द मुझे बिल्कुल परेशान नहीं करता। उसी तरह मैंने अपने रिश्तों (चाहे परिवार, दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी) के वित्त, सामाजिक जीवन, व्यवसाय और हर उस चीज का उपयोग करना शुरू कर दिया, जिसके साथ मैं संबंधित हो सकता हूं। जिसके साथ भी मैं संपर्क में आया, मैंने इस कहानी को सबके साथ साझा किया और इस कहानी से उनके व्यवहार में भी एक बड़ा बदलाव आया! इस भगवान के शुक्राने का मेरे जीवन पर वास्तव में गहरा प्रभाव पड़ा, मुझे लगने लगा कि मैं कितना धन्य हूँ, मैं कितना खुश हूँ, जीवन कितना अच्छा है। इस संदेश को साझा करने का उद्देश्य हम सभी को इस बारे में अवगत कराना है कि-- ATTITUDE OF GRATITUDE ( कृतज्ञता का मनोभाव होना चाहिए) कितना शक्तिशाली है यह हमारे जीवन को नया रूप दे सकता है इसलिए आभारी रहें और अपने दृष्टिकोण में बदलाव देखें। हमेशा हर-चीज और हर-पल अपने मालिक,अपने गुरुदेव का कृतज्ञ होना चाहिए। मंगलमय प्रभात प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास
😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख - haopt  Taoa W 0 7010 WISDOM डर और संकोच से 38 निरंतर अभ्यास और क्रिया ही एक मात्र उपाय है, जिनसे डर और संकोच से मुक्त होकर आत्मविश्वास प्राप्त किया जा सकता है। haopt  Taoa W 0 7010 WISDOM डर और संकोच से 38 निरंतर अभ्यास और क्रिया ही एक मात्र उपाय है, जिनसे डर और संकोच से मुक्त होकर आत्मविश्वास प्राप्त किया जा सकता है। - ShareChat
वक्त भी सिखाता है और टीचर भी बस फर्क इतना है कि टीचर सिखाकर इम्तिहान लेता है और वक्त इम्तियाज लेकर सिखाता है ॐ नमः शिवाय श्री शनिदेवाय नमः जय हनुमान जी महाराज 🚩🚩🌹🌹🪻🌹🌹🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ शनिवार #शनिदेव
🌞 Good Morning🌞 - सुप्रभात शुभ शनिवार राम राम जी HANUMAN सुप्रभात शुभ शनिवार राम राम जी HANUMAN - ShareChat
बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌼🌼🌼🌼 🙏हमेशा शांत मन, निर्मल विचार और खुशहाल जीवन की ओर बढ़ते रहें।🙏🙏 🌿🌻🪻🌹🌷💐🌼 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏 नमो बुद्धाय 🙏 #🧘‍♂️मेडिटेशन मंत्र #🙏बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं 🌸 #✨ बुद्ध के स्टेटस 📝
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - की हार्दिक पूर्णिमा ؟7 शुभकामनाएं "तुम बाहरजो ढूंढ रहे हो, वह भीतर ही प्रतीक्षा कर रहा है।" - गौतम बुद्ध की हार्दिक पूर्णिमा ؟7 शुभकामनाएं "तुम बाहरजो ढूंढ रहे हो, वह भीतर ही प्रतीक्षा कर रहा है।" - गौतम बुद्ध - ShareChat
ॐ विष्णुप्रियायै नमो नमः 🙏🙏🙏 परिस्थितियां हमें भीतर से मजबूत बना देती है,,, जीवन का सत्य यही है,,, ये बदलती रहती हैं,,,और मन भी स्थायी नहीं है,,,इसलिए जब मन भारी हो,,,,तो उसे दबाने के बजाय उसे स्वीकार करें,,,! क्योंकि हर पीड़ा अपने साथ एक गहरी समझ लेकर आती है,,,जो समय के साथ मन को स्थिर और शांत बना देती है,,,! ॐ विश्वजनन्यै नमो नमः 🪷🌸💐🌷🌹🌻🌼🪻 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ शुक्रवार #🙏माँ लक्ष्मी महामंत्र🌺
🌸 जय श्री कृष्ण😇 - शुभ शुक्रवार श्रीं ह्वलीं श्रीं लक्ष्मी 30 वासुदेवाय नमः सुंदर सुमंगल सुप्रभात शुभ शुक्रवार श्रीं ह्वलीं श्रीं लक्ष्मी 30 वासुदेवाय नमः सुंदर सुमंगल सुप्रभात - ShareChat
*🌹सबसे कीमती उपहार🌹* 🙏🙏🙏 *राजा महेन्द्रनाथ हर वर्ष अपने राज्य में एक प्रतियोगिता का आयोजन करते थे, जिसमें हजारों की संख्या में प्रतियोगी भाग लिया करते थे और विजेता को पुरुस्कार से सम्मानित किया जाता है।* *एक दिन राजा ने सोचा कि प्रजा की सेवा को बढ़ाने के लिए उन्हें एक राजपुरूष की आवश्यकता है जो बुद्धिमान हो और समाज के कार्य में अपना योगदान दे सके। उन्होंने राजपुरूष की नियुक्ति के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित करने का निर्णय लिया।* *दूर-दूर से इस बार लाखों की संख्या में प्रतियोगी आये हुए थे।* *राजा ने इस प्रतियोगिता के लिए एक बड़ा-सा उद्यान बनवाया था, जिसमें राज-दरबार की सभी कीमती वस्तुएं थीं, हर प्रकार की सामग्री उपस्थित थी, लेकिन किसी भी वस्तु के सामने उसका मूल्य निश्चित नहीं किया गया था।* *राजा ने प्रतियोगिता आरम्भ करने से पहले एक घोषणा की, जिसके अनुसार जो भी व्यक्ति इस उद्यान से सबसे कीमती वस्तु लेकर राजा के सामने उपस्थित होगा उसे ही राजपुरूष के लिए स्वीकार किया जाएगा। प्रतियोगिता आरम्भ हुई।* *सभी उद्यान में सबसे अमूल्य वस्तु तलाशने में लग गए, कई हीरे-जवाहरात लाते, कई सोने-चांदी, कई लोग पुस्तकें, तो कोई भगवान की मूर्ति, और जो बहुत गरीब थे वे रोटी, क्योंकि उनके लिए वही सबसे अमूल्य वस्तु थी।* *सब अपनी क्षमता के अनुसार मूल्य को सबसे ऊपर आंकते हुए राजा के सामने उसे प्रस्तुत करने में लगे हुए थे। तभी एक नौजवान राजा के सामने खाली हाथ उपस्थित हुआ।* *राजा ने सबसे प्रश्न करने के उपरान्त उस नौजवान से प्रश्न किया- अरे! नौजवान, क्या तुम्हें उस उद्यान में कोई भी वस्तु अमूल्य नजर नहीं आई? तुम खाली हाथ कैसे आये हो?* *“राजन! मैं खाली हाथ कहाँ आया हूँ, मैं तो सबसे अमूल्य धन उस उद्यान से लाया हूँ।”* – *‘नौजवान बोला।* *“तुम क्या लाये हो?”- राजा ने पूछा।* *“मैं संतोष लेकर आया हूँ महाराज!”- नौजवान ने कहा।* *क्या, “संतोष”, इनके द्वारा लाये गए इन अमूल्य वस्तुओं से भी मूलयवान है?- राजा ने पुनः प्रश्न किया।* *जी हाँ राजन! इस उद्यान में अनेकों अमूल्य वस्तुएं हैं पर वे सभी मनुष्य को क्षण भर के लिए सुख की अनुभूति प्रदान कर सकती हैं। इन वस्तुओं को प्राप्त कर लेने के बाद मनुष्य कुछ और ज्यादा पाने की इच्छा मन में उत्पन्न कर लेता है अर्थात इन सबको प्राप्त करने के बाद इंसान को ख़ुशी तो होगी लेकिन वह क्षण भर के लिए ही होगी। लेकिन जिसके पास संतोष का धन है, संतोष के हीरे-जवाहरात हैं वही मनुष्य अपनी असल जिंदगी में सच्चे सुख की अनुभूति और अपने सभी भौतिक इच्छाओं पर नियंत्रण कर सकेगा।” – नौजवान ने शांत स्वर में उत्तर देते हुए कहा।* *नौजवान को लाखों लोगों में चुना गया और उसे राजपुरूष के लिए सम्मानित किया गया....* *मंगलमय प्रभात* *स्नेह वंदन* *प्रणाम* #👫 हमारी ज़िन्दगी #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #☝ मेरे विचार #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
👫 हमारी ज़िन्दगी - 2 happy| Choughes ThTaa a 202 { Sao सर्वोतम प्रार्थना क्या है मेरे जीवन में वे ही लोग आएँ, जो प्रसाद के साथ अमृत भी लाएँ। ' अर्थात जो केवल ही नहीं बल्कि समझदारी और सच्चा प्यार भी दर्शाएँ। खुशी 2 happy| Choughes ThTaa a 202 { Sao सर्वोतम प्रार्थना क्या है मेरे जीवन में वे ही लोग आएँ, जो प्रसाद के साथ अमृत भी लाएँ। ' अर्थात जो केवल ही नहीं बल्कि समझदारी और सच्चा प्यार भी दर्शाएँ। खुशी - ShareChat
*ॐ नमो भगवते वासुदेवाय* 🙏🌹💐🌷🌸🌺🪷 *हे प्रभु!* जो पूर्व जन्म के कर्मानुसार आज मुझे दिया है, वही पर्याप्त है*॥ 🙏*जय हो महाप्रभुजी*🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु😇
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