🌹प्रेम🌹
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एक बार एक पुत्र अपने पिता से रूठ कर घर छोड़ कर दूर चला गया और फिर इधर उधर यूँही भटकता रहा। दिन बीते, महीने बीते और साल बीत गए |
एक दिन वह बीमार पड़ गया | अपनी झोपडी में अकेले पड़ उसे अपने पिता के प्रेम की याद आई कि कैसे उसके पिता उसके बीमार होने पर उसकी सेवा किया करते थे । उसे बीमारी में इतना प्रेम मिलता था कि वो स्वयं ही शीघ्र अति शीघ्र ठीक हो जाता था | उसे फिर एहसास हुआ कि उसने घर छोड़ कर बहुत बड़ी गलती की है, वो रात के अँधेरे में ही घर की और हो लिया।
जब घर के नजदीक गया तो उसने देखा आधी रात के बाद भी दरवाज़ा खुला हुआ है | अनहोनी के डर से वो तुरंत भाग कर अंदर गया तो उसने पाया की आंगन में उसके पिता लेटे हुए हैं | उसे देखते ही उन्होंने उसका बांहे फैला कर स्वागत किया | पुत्र की आँखों में आंसू आ गए |
उसने पिता से पूछा "ये घर का दरवाज़ा खुला है, क्या आपको आभास था कि मैं आऊंगा?" पिता ने उत्तर दिया "अरे पगले ये दरवाजा उस दिन से बंद ही नहीं हुआ जिस दिन से तू गया है, मैं सोचता था कि पता नहीं तू कब आ जाये और कंही ऐसा न हो कि दरवाज़ा बंद देख कर तू वापिस लौट जाये |"
ठीक यही स्थिति उस परमपिता परमात्मा की है | उसने भी प्रेमवश अपने भक्तो के लिए द्वार खुले रख छोड़े हैं कि पता नहीं कब भटकी हुई कोई संतान उसकी और लौट आए।i
हमें भी आवश्यकता है सिर्फ इतनी कि उसके प्रेम को समझे और उसकी और बढ़ चलें।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #🏠घर-परिवार
जब मिले किसी से तो याद
रखिए वो इंसान है भगवान
नहीं उसमें खूबियां भी होंगी
और खामियां भी....
जय श्री लक्ष्मी नारायण
🚩🚩🌻🌻🪷🌻🌻🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇
🌹परिधान🌹
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लड़की ने अपने पिता से पूंछा - पापा मैं मम्मी के बार बार रोकने और टोकने से परेशान हूं कहती है आज के फैशन की हवा में मत बहो.... उचित परिधान धारा करो... आज भी राजस्थान में घूंघट प्रथा है.... आदी.... पापा आप ही बताओ ये मम्मी भी ना ज़ब मैं पूछती हूं अब हम 21 वी सदी में है हमें पुरानी रूढ़ि और परम्परा को छोड़कर नये युग के अनुसार चलना होगा तो मेरे सवाल का कोई जवाब ही नहीं देती उलटा डॉटती रहती है
पिता का बड़ा खूबसूरत जबाब मिला - बेटा हमारी जो परम्परायें बनाई गयी थी उसके पीछे बहोत ही मार्मिक बातें छुपी रहती थी हमें परदे में ही रहना चाहिए
लड़की बोली- ऐसा क्यों पापा ?
पापा- क्योंकि पर्दा करना बहुत जरूरी है क्योंकि तुमने श्री कृष्ण की गोपियों के कपड़े चुराने बाली कहानी तो सुनी होगी जब गोपियां तालाब में निर्वस्त्र होकर नहाती थी तो भगवान श्री कृष्ण गोपियों के कपड़े उठा ले जाते थे और उनको परेशान करते थे वो ऐसा इसलिए करते थे क्योंकि वो नही चाहते थे कि कोई भी स्त्री बिना कपड़ों के नहाये,,
क्योंकि गोपियों को इंसान के अलावा जीव जंतु पशु पक्षी मछली व अन्य जानवर भी देखते थे,, जिसका ज्ञान गोपियों को नही था,, इसलिए वो बिना कपड़ों के नहाने के लिए मना करते थे व स्त्री को पर्दे में रहने की शिक्षा देते थे, लेकिन कुछ लोगो ने इसका उल्टा अर्थ निकाल लिया,,
लड़की बोली - पापा अगर में पर्दा करूँगी तो खूबसूरत कैसे दिखूंगी ?
पिता - इसका जबाब में बेटा बाद में दूंगा,,
कुछ दिन बाद पिता काम से विदेश चला गया,, और
वहाँ से उसने लड़की के लिये गिफ्ट भेजा,,
लड़की ने गिफ्ट खोला उसमे एप्पल का मोबाइल था,,
पिता का फोन आया - बेटा गिफ्ट कैसा लगा ?
लड़की - बहुत अच्छा
पिता - बेटा अब क्या करोगे
लड़की - सबसे पहले मैं इस फोन का स्क्रीनगार्ड और कबर ख़रीदूंगी
पिता - इससे क्या होगा ?
लड़की - इससे फोन सेफ रहेगा
पिता- क्या ये सब लगाना जरूरी है ?
लड़की - हां पापा बहुत जरूरी है
पिता - क्या ऐप्पल कंपनी के मालिक ने ये लगाने के लिए बोला है ?
लड़की - हा पापा बॉक्स में इंस्ट्रक्सन लिखे है कि ये जरूर लगाएं
पिता - इनको लगाने से फोन खराब तो नही दिखेगा ?
लड़की - नही पापा इसको लगाने से मेरा फोन और ज्यादा खूबसूरत दिखने लगेगा,,
पिता - बेटा जब एक मोबाइल की सेफ्टी और खूबसूरत दिखने के लिए इस्क्रीनगार्ड और कबर बहुत इम्पोर्टेन्ट है।तो बेटा तुम तो उस ईश्वर की नायाब रचना हो,, तुम्हारी सेफ्टी और खूबसूरती के लिये ही उसने पर्दा करने को कहा है,, जब इस्क्रीनगार्ड और कबर से मोबाइल खूबसूरत हो जाता है उसी प्रकार पर्दा करने से तुम भी और ज्यादा खूबसूरत दिखोगी और सब तुम्हारी इज्ज़त भी करेंगे,,
,,शरीर खुला रखने से नही ढकने से खूबसूरती आती है,,
और ये केवल तुम पर नही हर इंसान पर लागू होता है वो चाहे स्त्री हो या पुरुष,,
अगर हम लोग भी निर्वस्त्र होकर घूमने लगे तो जानवरों और हममें कोई फर्क नही, और न ही हमे खुद को बुद्दिजीवी कहने का अधिकार है,,
बेटी की आखों के ख़ुशी के आंसू थे
आज पिता ने अपनी बेटी को जिंदगी की एक महत्वपूर्ण शिक्षा दी थी...
मंगलमय प्रभात
प्रणाम
#👌 आत्मविश्वास #🌸पॉजिटिव मंत्र #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👫 हमारी ज़िन्दगी #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
जय श्री गणेश जी!
💐🌷🌸🌺🪷🌹
🙏विघ्नहर्ता आपकी हर
बाधा दूर करें सुख, शांति
और समृद्धि का आशीर्वाद बना रहे..🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #श्री गणेश #🙏🏻 गणपति भजन 🌺
🌹प्यारा सुकून🌹
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शहर की बहुत बड़ी दुकान थी, जिसके ब्रेड पकौड़े और समोसे बड़े मशहूर थे। मैं पहले भी उनके स्वाद के बारे में सुन चुका था, मगर कल जब एक खास दोस्त ने कहा—“भाई मोहन, क्या स्वादिष्ट समोसे थे… और इतने बढ़िया, मुलायम ब्रेड पकौड़े! वाह, मज़ा ही आ गया…”तो आज मैंने भी वहीं जाकर उन लज़ीज़ समोसों और ब्रेड पकौड़ों का मज़ा लेने की ठान ली।
आज की कहानी
ऑफिस से निकला तो सात बज चुके थे। सोचा—आज घर जाने से पहले उसी दुकान पर कुछ खा लिया जाए। जैसे ही दुकान के बाहर गाड़ी खड़ी कर अंदर जाने लगा, तभी किसी नन्हे से हाथ के स्पर्श ने मेरा ध्यान खींच लिया। देखा तो पाँच–छह साल की एक छोटी-सी बच्ची खड़ी थी।
उसने मासूमियत से पूछा—“अंकल… क्या आप भी यहाँ समोसा और पकौड़ा खाने आए हैं?”
मैंने कहा—“हाँ… मगर तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो?”
वो बोली—“यहाँ बहुत अच्छे मिलते हैं, लेकिन आप मत जाइए उन्हें खाने…”
मैं उसकी बात सुनकर हैरान हो गया। कारण पूछा तो उसकी आँखों में नमी उतर आई। बोली—“अंकल… ये दुकान वाले भैया हमें और मेरे छोटे भाई को हर रात बचे हुए समोसे और पकौड़े दे देते हैं। उसी से हमारा पूरे दिन का खाली पेट भर जाता है। आज भी बहुत कम पकौड़े बचे हैं… कल तो सब खत्म हो गए थे, इसीलिए हमें कुछ मिला ही नहीं। मैं तो भूखी रह लेती हूँ, मगर मेरा छोटू… वो रोता है…”इतना कहकर वह फूट-फूटकर रो पड़ी।
मैंने उसे चुप कराया और कहा—
“पर मैं तो ज़रूर समोसे और पकौड़े लूँगा…”यह कहकर मैं अंदर जाने लगा। यह देखकर वह और घबरा गई।
कुछ देर बाद जब मैं बाहर आया, तो दुकानदार भी मेरे साथ था। मैंने जो समोसे और पकौड़े लिए थे, वे दोनों बहन-भाई को पकड़ा दिए और कहा—
“अब से तुम्हें रात का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। मैंने इन भैया से बात कर ली है। अब से ये तुम्हें रोज़ समय पर समोसे और पकौड़े दे दिया करेंगे।”
यह कहते हुए मेरी आँखें भीग गईं और मैं बाहर आ गया।
दोस्तों, मैंने वो ब्रेड पकौड़े और समोसे तो नहीं खाए, मगर उनका स्वाद सचमुच मेरे मन में बस गया। क्योंकि मैंने दुकानदार से हर महीने कुछ रुपये देने का वादा किया था, जिसके बदले वह बिना किसी को बताए उन दोनों बहन-भाई को रोज़ उनके मनपसंद स्वादिष्ट समोसे और पकौड़े देता रहेगा।
मेरे पिताजी कहते हैं—कुछ काम ऐसे होने चाहिए, जिन्हें करने से आपको और आपके मन को सच्चा सुकून मिले।
शिक्षा...
सच्चा सुख भोग में नहीं, बल्कि किसी भूखे चेहरे पर मुस्कान लाने में है। जब हम अपने हिस्से की खुशियाँ दूसरों के साथ बाँटते हैं, तब जीवन का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। इंसानियत, करुणा और संवेदना—यही वह धन है जो खर्च करने से घटता नहीं, बल्कि बढ़ता है।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🌸पॉजिटिव मंत्र #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
ॐ हं हनुमते नमः
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हनुमानजी हमें सिखाते हैं कि सच्ची भक्ति में अपार शक्ति छिपी होती है। उनका आत्मविश्वास और विनम्रता हमें प्रेरित करते हैं कि हम भी अपने जीवन में दृढ़ रहें..
जय श्री राम जय हनुमान
🌷💐🌹🌸🌺🪷🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ मंगलवार #जय श्री हनुमान
🌹कर्म का फल🌹
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अगला भाग ,2
......इतने में ज्योतिषी जी आ गये। घर में प्रवेश करते ही ब्राह्मणी ने अनेक दुर्वचन कहकर उनका तिरस्कार किया। परंतु ज्योतिषीजी चुप रहे और अपनी स्त्री को कुछ भी नहीं कहा। कुछ देर बाद वे अपनी गद्दी पर आ बैठे। ब्राह्मण को देखकर ज्योतिषी ने उनसे कहाः "कहिये, ब्राह्मण देवता! कैसे आना हुआ?"
ब्राह्मण ने कहा- आया तो था अपने बारे में पूछने के लिए परंतु पहले आप अपना हाल बताइये कि आपकी पत्नी अपनी जुबान से आपका इतना तिरस्कार क्यों करती है? जो किसी से भी नहीं सहा जाता और आप सहन कर लेते हैं, इसका क्या कारण है? ज्योतिषी जी ने कहा- यह मेरी पत्नी नहीं, मेरा कर्म है। दुनिया में जिसको भी देखते हो अर्थात् भाई, पुत्र, शिष्य, पिता, गुरु, सम्बंधी- जो कुछ भी है, सब अपना कर्म ही है । यह पत्नी नहीं, मेरा किया हुआ पूर्व का कर्म ही है और यह भोगे बिना कटेगा नहीं।।
अपना किया हुआ जो भी कुछ शुभ-अशुभ कर्म है, वह अवश्य ही भोगना पड़ता है। बिना भोगे तो सैंकड़ों-करोड़ों कल्पों के गुजरने पर भी कर्म नहीं टल सकता।' इसलिए मैं अपने कर्म खुशी से भोग रहा हूँ और अपनी स्त्री की ताड़ना भी नहीं करता, ताकि आगे इस कर्म का फल न भोगना पड़े। महाराज! आपने क्या कर्म किया था?।।
ज्योतिषी जी ने कहा- सुनिये, पूर्वजन्म में मैं कौआ था और मेरी पत्नी गधी थी। इसकी पीठ पर फोड़ा था, फोड़े की पीड़ा से यह बड़ी दुःखी और कमजोर भी हो गयी थी। फोड़े में कीड़े पड़ गये जिन्हें खाने के लिये मैं इसके फोड़े में चोंच मारता और कीड़ों को खाता था। इससे जब दर्द के कारण यह कूदती थी आखिर त्रस्त होकर यह गाँव से दस-बारह मील दूर जंगल में चली गयी। वहाँ भी इसे देखते ही मैं इसकी पीठ पर जोर से चोंच मारी तो मेरी चोंच इसकी हड्डी में चुभ गयी। इस पर इसने अनेक प्रयास किये, फिर भी चोंच न छूटी।।
मैंने भी चोंच निकालने का बड़ा प्रयत्न किया मगर न निकली। फिर यह गंगाजी मे प्रवेश कर गयी ऐसा सोंचकर कि पानी के भय से ही यह दुष्ट मुझे छोड़ देगा। परंतु वहाँ भी मैं अपनी चोंच निकाल न पाया। आखिर में यह बड़े प्रवाह में प्रवेश कर गयी। गंगा का प्रवाह तेज होने के कारण हम दोनों बह गये और बीच में ही मर गये। तब गंगा जी के प्रभाव से यह तो ब्राह्मणी बनी और मैं बड़ा भारी ज्योतिषी बना। अब वही मेरी पत्नी बनी है।।
जो कुछ दिनों और अपने मुख से गाली निकालकर मुझे दुःख देगी, लेकिन मैंने चोंच इसको दर्द पहुंचाने के लिये नहीं मारी थी। अतः इसकी समझ भी ठीक होगी और मैं भी अपने पूर्वकर्मों का फल समझकर सहन करता रहूँगा। इसका दोष नहीं मानता क्योंकि यह किये हुए कर्मों का ही फल है। इसलिए मैं शांत रहता हूँ और प्रतिक्षा में हूँ कि कभी तो इसका स्वभाव अच्छा होगा। अब अपना प्रश्न पूछो?।।
ब्राह्मण ने अपना सब समाचार सुनाया और पूछाः- अधर्मी पापी राजा ने मुझ निरपराध का हाथ क्यों कटवाया? ज्योतिषी जी ने कहा- राजा ने आपका हाथ नहीं कटवाया, आपके कर्म ने ही आपका हाथ कटवाया है। ब्राह्मण ने पूछ किस प्रकार का कौन सा कर्म? ज्योतिषी जी ने कहा- पूर्वजन्म में आप एक तपस्वी थे और राजकन्या गौ थी तथा राजकुमार कसाई था। वह कसाई जब गौ को मारने लगा, तब गौ बेचारी जान बचाकर आपके सामने से जंगल में भाग गयी। पीछे से कसाई आया और आप से पूछा कि "इधर कोई गाय तो नहीं गई है?"
आपने जिस तरफ गौ गयी थी, उस तरफ अपने हाथ से इशारा किया तो उस कसाई ने जाकर गौ को मार डाला। इतने में जंगल से शेर आया और गौ एवं कसाई दोनों को खा गया। कसाई को राजकुमार और गौ को राजकन्या का जन्म मिला एवं पूर्वजन्म के किये हुए उस कर्म ने एक रात्रि के लिए उन दोनों को इकट्ठा किया। क्योंकि कसाई ने गौ को गड़ासे से मारा था, इसी कारण राजकन्या के हाथों अनायास ही तलवार गिरने से राजकुमार का सिर कट गया और वह मर गया।।
इस तरह अपना फल देकर कर्म निवृत्त हो गया। तुमने जो हाथ का इशारा रूप कर्म किया था, उस पापकर्म ने तुम्हारा हाथ कटवा दिया है। इसमें तुम्हारा ही दोष है किसी अन्य का नहीं, ऐसा निश्चय कर सुखपूर्वक रहो। कितना सहज है ज्ञान संयुक्त जीवन! यदि हम इस कर्म सिद्धान्त को मान और जान लें तो पूर्वकृत घोर से घोर कर्म का फल भोगते हुए भी हम दुःखी नहीं होंगे। बल्कि अपने चित्त की समता बनाये रखने में सफल होंगे...।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👫 हमारी ज़िन्दगी #🌸पॉजिटिव मंत्र #👍 सफलता के मंत्र ✔️
महादेव कहते हैं!:...
🙏“विश्वास रखो, जब
समय तुम्हारे साथ नहीं होता,
तब मैं तुम्हारे साथ होता हूँ।”🙏🙏
।।ॐ नमः शिवाय।।
🌹💐🌷🌸🌺🪷 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ सोमवार #🛕बाबा केदारनाथ📿
कर्म का फल🌹
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मित्रों, भागवत में लिखा है-
नाभुक्तं क्षीयते कर्म जन्म कोटिशतैरपि।
अवश्यमेव भुक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम्।।
अर्थात:- अपने किए कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है, फिर चाहे आज या फिर कल।
आइये जानते हैं इसका सम्पूर्ण अर्थ इस कहानी के माध्यम से
एक बड़ा ही धर्मात्मा, न्यायप्रिय और भगवद्भक्त राजा था। उसने ठाकुरजी का मंदिर बनवाया और एक ब्राह्मण को उसका पुजारी नियुक्त किया। वह ब्राह्मण भी बड़ा सदाचारी, धर्मात्मा और संतोषी था। वह राजा से कभी कोई याचना नहीं करता था, राजा भी उसके स्वभाव पर बहुत प्रसन्न था।।
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उसे राजा के मंदिर में पूजा करते हुए बीस वर्ष गुजर गये। उसने कभी भी राजा से किसी प्रकार का कोई प्रश्न नहीं किया। राजा के यहाँ एक लड़का पैदा हुआ। राजा ने उसे पढ़ा लिखाकर विद्वान बनाया और बड़ा होने पर उसकी शादी एक सुंदर राजकन्या के साथ करा दी। शादी करके जिस दिन राजकन्या को अपने राजमहल में लाये उस रात्रि में राजकुमारी को नींद न आयी। वह इधर-उधर घूमने लगी जब अपने पति के पलंग के पास आयी तो क्या देखती है कि हीरे जवाहरात जड़ित मूठेवाली एक तलवार पड़ी है।।
जब उस राजकन्या ने देखने के लिए वह तलवार म्यान में से बाहर निकाली, तब तीक्ष्ण धारवाली और बिजली के समान प्रकाशवाली तलवार देखकर वह डर गयी एवं डर के मारे उसके हाथ से तलवार गिर पड़ी और राजकुमार की गर्दन पर जा लगी। राजकुमार का सिर कट गया और वह मर गया। राजकन्या पति के मरने का बहुत शोक करने लगी।।
उस राजकन्या ने परमेश्वर से प्रार्थना की कि 'हे प्रभु ! मुझसे अचानक यह पाप कैसे हो गया? पति की मृत्यु मेरे ही हाथों हो गयी। आप तो जानते ही हैं। परंतु सभा में मैं सत्य नहीं कह सकूँगी। क्योंकि इससे मेरे माता-पिता और सास-ससुर सभी को कलंक लगेगा। साथ ही इस बात पर कोई विश्वास भी नहीं करेगा।।'
प्रातःकाल में जब पुजारी कुएँ पर स्नान करने आया तो राजकन्या ने उसको देखकर विलाप करना शुरु किया और इस प्रकार कहने लगीः "मेरे पति को कोई मार गया।" लोग इकट्ठे हो गये और राजा साहब आकर पूछने लगेः "किसने मारा है?" कन्या ने कहा - "मैं जानती तो नहीं कि कौन था। परंतु उसे ठाकुरजी के मंदिर में जाते देखा था" राजा समेत सब लोग ठाकुरजी के मंदिर में आये तो ब्राह्मण को पूजा करते हुए देखा।।
फिर क्या था, पुजारी को पकड़ लिया गया और पूछा गया, कि "आपने राजकुमार को क्यों मारा?" ब्राह्मण ने कहाः "मैंने राजकुमार को नहीं मारा। मैंने तो उनका राजमहल भी नहीं देखा है। इसमें ईश्वर साक्षी हैं। बिना देखे किसी पर अपराध का दोष लगाना ठीक नहीं।" ब्राह्मण की तो कोई बात ही नहीं सुनता था। कोई कुछ कहता था तो कोई कुछ.... राजा के दिल में बार-बार विचार आता था कि यह ब्राह्मण निर्दोष है परंतु बहुतों के कहने पर राजा विचार करने लगा।।
बहुत देर विचार करने के बाद राजा ने ब्राह्मण से कहाः- "मैं तुम्हें प्राणदण्ड तो नहीं दे सकता, लेकिन जिस हाथ से तुमने मेरे पुत्र को तलवार से मारा है, तेरा वह हाथ काटने का आदेश देता हूँ।" ऐसा कहकर राजा ने उसका हाथ कटवा दिया। इस पर ब्राह्मण बड़ा दुःखी हुआ और राजा को अधर्मी जान उस देश को छोड़कर विदेश में चला गया। वहाँ वह खोज करने लगा कि कोई विद्वान ज्योतिषी मिले तो बिना किसी अपराध हाथ कटने का कारण उससे पूछूँ।।
किसी ने उसे बताया कि काशी में एक विद्वान ज्योतिषी रहते हैं। तब वह उनके घर पर पहुँचा। ज्योतिषी कहीं बाहर गये थे, उसने उनकी धर्मपत्नी से पूछाः "माताजी! आपके पति ज्योतिषीजी महाराज कहाँ गये हैं?" तब उस स्त्री ने अपने मुख से अयोग्य, असह्य दुर्वचन कहे, जिनको सुनकर वह ब्राह्मण हैरान हुआ और मन ही मन कहने लगा कि "मैं तो अपना हाथ कटने का कारण पूछने आया था, परंतु अब इनका ही हाल पहले पूछूँगा।।"
अगला भाग 2
दूसरे दिन
मंगलमय प्रभात
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हे! सूर्यदेव,
🙏हर अंधकार को दूर कर
नई ऊर्जा और नई उम्मीद भर दें।
आपका दिन मंगलमय और प्रकाशमय हो।🙏🙏
जय सूर्य नारायण देव
🌷💐🌹🌸🌺🪷🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव













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