🌹हृदय परिवर्तन🌹
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चिड़ियाघर में अपने तीन वर्ष के बच्चे के साथ एक ग्राम्य, सादगीभरी नवयुवती घूम रही थी। वह बच्चे को कभी गोद में लेकर, तो कभी उसकी उँगली थामे, विभिन्न जानवर दिखा रही थी।
पास ही खड़े पाँच-सात आवारा कॉलेज के लड़के उस साधारण परंतु सुंदर युवती को देखकर फब्तियाँ कस रहे थे और उसका पीछा कर रहे थे।
वे फिल्मी गीत गा-गा कर जोर-जोर से ठहाका लगाते हुए उसे चिढ़ा रहे थे, किंतु युवती ने उनकी बातों पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया और अपने बच्चे के आनंद में मग्न रही।
जब वह शेर के बाड़े के पास पहुँची, तभी उनमें से एक लड़का अतिउत्साह में ग्रिल पर चढ़ गया और अनियंत्रित होकर बाड़े के भीतर गिर पड़ा।
शेर धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ने लगा। चारों ओर अफरा-तफरी मच गई; उसके साथी भयभीत होकर केवल चिल्ला रहे थे। तभी उस ग्रामीण युवती ने बिना किसी हिचक के अपनी साड़ी उतारकर बाड़े में लटका दी।
गिरा हुआ लड़का साड़ी को मजबूती से पकड़कर ऊपर चढ़ आया और लोगों की सहायता से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
गार्ड ने सहमे हुए युवक से कहा—“पहले तुम्हारी माँ ने तुम्हें जन्म दिया था, आज इस युवती ने तुम्हें दुबारा जन्म दिया है।”
केवल ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी वह अर्धवस्त्रा युवती उन सबको उसी क्षण माँ-सी प्रतीत होने लगी; जिन आँखों में उपहास था, वहाँ अब लज्जा और कृतज्ञता थी। यही क्षण था—हृदय परिवर्तन का।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि स्त्री का सम्मान करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है; उसका उपहास नहीं, आदर होना चाहिए। साहस, करुणा और मानवीयता किसी भी बाहरी रूप या गाँव-शहर के भेद पर निर्भर नहीं होती। दूसरों की अस्मिता का अपमान करने वाले क्षणभर में ही परिस्थितियों के सामने असहाय हो सकते हैं, जबकि जिसे वे तुच्छ समझते हैं वही संकट में उनके प्राणों की रक्षक बन सकती है। अतः हमें अपने आचरण में शालीनता, संवेदनशीलता और स्त्री-सम्मान को सदैव प्रथम स्थान देना चाहिए—यही सच्चा हृदय परिवर्तन है।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #🙏गीता ज्ञान🛕 #😠कभी गुस्सा कभी प्यार🥰 #🏠घर-परिवार #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #✍️ जीवन में बदलाव
विघ्नहर्ता, बुद्धि और सफलता
के दाता श्री गणेश जी की दिव्य ऊर्जा आपके जीवन से सभी विघ्न दूर करे और आपको बुद्धि, समृद्धि और नई शुरुआत का आशीर्वाद दे।
।।ॐ_गं_गणपतये_नमः।।
🚩🚩🙏🙏🌹🌹 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ बुधवार #श्री गणेश
🌹क्षमा🌹
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एक सेठ जी ने अपने छोटे भाई को तीन लाख रूपये व्यापार के लिये दिये। उसका व्यापार बहुत अच्छा जम गया, लेकिन उसने रूपये बड़े भाई को वापस नहीं लौटाये।
आखिर दोनों में झगड़ा हो गया, झगड़ा भी इस सीमा तक बढ़ गया कि दोनों का एक दूसरे के यहाँ आना जाना बिल्कुल बंद हो गया। घृणा व द्वेष का आंतरिक संबंध अत्यंत गहरा हो गया। सेठ जी, हर समय हर संबंधी के सामने अपने छोटे भाई की निंदा-निरादर व आलोचना करने लगे।
सेठ जी अच्छे साधक भी थे, लेकिन इस कारण उनकी साधना लड़खड़ाने लगी। भजन पूजन के समय भी उन्हें छोटे भाई का चिंतन होने लगा। मानसिक व्यथा का प्रभाव तन पर भी पड़ने लगा। बेचैनी बढ़ गयी। समाधान नहीं मिल रहा था। आखिर वे एक संत के पास गये और अपनी व्यथा सुनायी।
आज की कहानी
संतश्री ने कहाः- 'बेटा ! तू चिंता मत कर। ईश्वरकृपा से सब ठीक हो जायेगा। तुम कुछ फल व मिठाइयाँ लेकर छोटे भाई के यहाँ जाना और मिलते ही उससे केवल इतना कहना, 'अनुज ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे "क्षमा" कर दो।'
सेठ जी ने कहाः- "महाराज ! मैंने ही उनकी मदद की है और "क्षमा" भी मैं ही माँगू !"
संतश्री ने उत्तर दियाः- "परिवार में ऐसा कोई भी संघर्ष नहीं हो सकता, जिसमें दोनों पक्षों की गलती न हो। चाहे एक पक्ष की भूल एक प्रतिशत हो दूसरे पक्ष की निन्यानवे प्रतिशत, पर भूल दोनों तरफ से होगी।"
सेठ जी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था। उसने कहाः- "महाराज ! मुझसे क्या भूल हुई ?"
"बेटा ! तुमने मन ही मन अपने छोटे भाई को बुरा समझा– यही है तुम्हारी पहली भूल।
तुमने उसकी निंदा, आलोचना व तिरस्कार किया– यह है तुम्हारी दूसरी भूल।
क्रोध पूर्ण आँखों से उसके दोषों को देखा– यह है तुम्हारी तीसरी भूल।
अपने कानों से उसकी निंदा सुनी– यह है तुम्हारी चौथी भूल।
तुम्हारे हृदय में छोटे भाई के प्रति क्रोध व घृणा है– यह है तुम्हारी आखिरी भूल।
अपनी इन भूलों से तुमने अपने छोटे भाई को दुःख दिया है। तुम्हारा दिया दुःख ही कई गुना हो तुम्हारे पास लौटा है। जाओ, अपनी भूलों के लिए "क्षमा" माँगों। नहीं तो तुम न चैन से जी सकोगे, न चैन से मर सकोगे। क्षमा माँगना बहुत बड़ी साधना है। ओर तुम तो एक बहुत अच्छे साधक हो।"
सेठ जी की आँखें खुल गयीं। संतश्री को प्रणाम करके वे छोटे भाई के घर पहुँचे। सब लोग भोजन की तैयारी में थे। उन्होंने दरवाजा खटखटाया। दरवाजा उनके भतीजे ने खोला। सामने ताऊ जी को देखकर वह अवाक् सा रह गया और खुशी से झूमकर जोर-जोर से चिल्लाने लगाः "मम्मी ! पापा !! देखो कौन आये ! ताऊ जी आये हैं, ताऊ जी आये हैं....।"
माता-पिता ने दरवाजे की तरफ देखा। सोचा, 'कहीं हम सपना तो नहीं देख रहे !' छोटा भाई हर्ष से पुलकित हो उठा, 'अहा ! पन्द्रह वर्ष के बाद आज बड़े भैया घर पर आये हैं।' प्रेम से गला रूँध गया, कुछ बोल न सका। सेठ जी ने फल व मिठाइयाँ टेबल पर रखीं और दोनों हाथ जोड़कर छोटे भाई को कहाः- "भाई ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे क्षमा करो ।"
"क्षमा" शब्द निकलते ही उनके हृदय का प्रेम अश्रु बनकर बहने लगा। छोटा भाई उनके चरणों में गिर गया और अपनी भूल के लिए रो-रोकर क्षमा याचना करने लगा। बड़े भाई के प्रेमाश्रु छोटे भाई की पीठ पर और छोटी भाई के पश्चाताप व प्रेममिश्रित अश्रु बड़े भाई के चरणों में गिरने लगे।
क्षमा व प्रेम का अथाह सागर फूट पड़ा। सब शांत, चुप, सबकी आँखों से अविरल अश्रुधारा बहने लगी। छोटा भाई उठ कर गया और रूपये लाकर बडे भाई के सामने रख दिये। बडे भाई ने कहा "भाई! आज मैं इन कौड़ियों को लेने के लिए नहीं आया हूँ। मैं अपनी भूल मिटाने, अपनी साधना को सजीव बनाने और द्वेष का नाश करके प्रेम की गंगा बहाने आया हूँ ।
मेरा आना सफल हो गया, मेरा दुःख मिट गया। अब मुझे आनंद का एहसास हो रहा है।"
छोटे भाई ने कहाः- "भैया ! जब तक आप ये रूपये नहीं लेंगे तब तक मेरे हृदय की तपन नहीं मिटेगी। कृपा करके आप ये रूपये ले लें।
सेठ जी ने छोटे भाई से रूपये लिये और अपने इच्छानुसार अनुज बधू , भतीजे व भतीजी में बाँट दिये । सब कार में बैठे, घर पहुँचे।
पन्द्रह वर्ष बाद उस अर्धरात्रि में जब पूरे परिवार, का मिलन हुआ तो ऐसा लग रहा था कि मानो साक्षात् प्रेम ही शरीर धारण किये वहाँ पहुँच गया हो।
सारा परिवार प्रेम के अथाह सागर में मस्त हो रहा था। "क्षमा" माँगने के बाद उस सेठ जी के दुःख, चिंता, तनाव, भय, निराशारूपी मानसिक रोग जड़ से ही मिट गये और साधना सजीव हो उठी।
हमें भी अपने दिल में "क्षमा" रखनी चाहिए अपने सामने छोटा हो या बडा अपनी गलती हो या ना हो क्षमा मांग लेने से सब झगडे समाप्त हो जाते है।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #👌 आत्मविश्वास #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👍 डर के आगे जीत👌 #🌸पॉजिटिव मंत्र
🙏 जय श्री हनुमान 🙏
अनंत रूप, असीम शक्ति और
अपार भक्ति का प्रतीक
जहाँ हनुमान हैं, वहाँ भय
नहीं… सिर्फ़ विश्वास और
विजय है ,
पवनपुत्र की कृपा हम सब पर बनी रहे🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ मंगलवार #जय बजरंगबली
🌹दिव्य मिलन🌹
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यह कथा भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन की महिमा को प्रकट करती है। यह केवल पति-पत्नी के प्रेम की कहानी नहीं, बल्कि तप, धैर्य, समर्पण और सत्य की विजय की कथा भी है।
एक बार पर्वतराज हिमालय के गृह में पार्वती का जन्म हुआ। पूर्वजन्म में वे सती थीं, जिन्होंने पिता दक्ष के यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए थे। सती का प्रेम शिव से अविच्छिन्न था, इसलिए वे जन्मों के पार फिर से शिव को पाने आई थीं। बचपन से ही पार्वती के हृदय में शिव के प्रति अगाध भक्ति थी। वे फूल तोड़ते समय, आरती करते समय और खेलते समय भी शिव का नाम जपती रहतीं। हिमालय व मेनका उनकी भक्ति देखकर चकित थे।
उधर शिव कैलाश पर समाधिस्थ थे – वीतराग, संसार से विरक्त, पर करुणामय। देवताओं पर अत्याचार बढ़ने लगे, तारकासुर जैसे दैत्य अभिमान में चूर थे। देवताओं को वरदान मिला था कि उनका वध केवल शिव-पुत्र ही कर सकता है। पर शिव तो योग में लीन थे, गृहस्थी से दूर। तब देवताओं ने पार्वती से प्रार्थना की कि वे शिव का हृदय जीतें और संसार का कल्याण करें।
पार्वती ने संकल्प लिया – “मैं शिव को तप से ही प्राप्त करूँगी।” घने वन में जाकर कठोर तपस्या आरंभ हुई। धूप-वर्षा, सर्दी-गर्मी, सभी कष्टों को सहते हुए वे केवल शिव के ध्यान में लीन रहीं। पहले उन्होंने पत्तों पर निर्वाह किया, फिर केवल जल पर, और अंत में निष्प्राण-सी होकर केवल नाम-स्मरण पर। उनकी तपस्या से त्रिलोक कम्पित हो उठा।
कामदेव को देवताओं ने शिव का तप भंग करने भेजा। उसने वसंत की मधुर बयार बहाई, पुष्पवृष्टि की, मनोहर संगीत गूँजा – और उसने अपना बाण छोड़ दिया। किंतु शिव की आँखें खुलीं तो उनका तीसरा नेत्र प्रज्वलित हो उठा। कामदेव भस्म हो गया। पर यही घटना पार्वती के अटूट संकल्प की परीक्षा बन गई। शिव ने जाना कि जिसने इस विकट परिस्थितियों में भी तप नहीं छोड़ा, उसका प्रेम केवल सांसारिक नहीं हो सकता।
शिव ने ब्राह्मण वेश धारण कर पार्वती की परीक्षा ली। वे बोले – “शिव औघड़ हैं, भस्म रमण करते हैं, गले में सर्प धारण करते हैं, ऐसे तपस्वी से विवाह क्यों?” पार्वती मुस्कुराईं और उत्तर दिया – “मेरे लिए शिव ही सत्य हैं। वे भले संसार को कठिन प्रतीत हों, पर वे करुणा और ज्ञान के सागर हैं। मैं उन्हें ही पति रूप में स्वीकार करती हूँ।” शिव का हृदय प्रसन्न हो उठा। उन्होंने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया और वरदान दिया – “तुम ही शाश्वत शक्ति हो, तुम बिना मैं शून्य हूँ।”
हिमालय में उत्सव का वातावरण छा गया। देव-ऋषि, गंधर्व, अप्सराएँ सभी एकत्र हुए। भव्य विवाह हुआ – शिव-शक्ति का मिलन, तप और प्रेम का संगम। आगे चलकर उन्हीं के गृह से स्कंद और गणेश का अवतार हुआ, और शिव-पार्वती लोककल्याण के पथप्रदर्शक बने।
यह कथा सिखाती है कि सच्चा प्रेम अधिकार से नहीं, तप-त्याग और धैर्य से प्राप्त होता है। जब दृढ़ निश्चय, संयम और समर्पण साथ हों, तब स्वयं दिव्यता भी मार्ग खोल देती है। शिव-पार्वती का मिलन हमें बताता है कि शिव बिना शक्ति अधूरे हैं और शक्ति बिना शिव – इसलिए जीवन में संतुलन, श्रद्धा और प्रेम ही परम सत्य है।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏 प्रेरणादायक विचार #👌 आत्मविश्वास
हे महादेव!
संसार के समस्त रोगों की
आप ही एकमात्र औषधि हैं,
सभी को स्वस्थ और दीर्घायु
जीवन प्रदान करने की कृपा
करें ....
हर हर महादेव 🌿
🚩🚩🌹🌿🪻🌿🌹🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ सोमवार #🛕बाबा केदारनाथ📿
🌹राधा की मौन आरती🌹
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बरसाने के शांत वन में संध्या उतर रही थी, आकाश के रंग धीरे-धीरे केसरिया से नीले में ढल रहे थे, मंद पवन के साथ गोकुल की ओर से आती बाँसुरी की एक क्षीण-सी धुन वातावरण को भक्तिमय बना रही थी, उसी वन में राधा जी एक शिला पर बैठी थीं, दृष्टि किसी एक दिशा में स्थिर थी, मानो आँखें नहीं बल्कि उनका हृदय देख रहा हो।
सखियों ने कई बार उन्हें पुकारा, पर राधा जैसे किसी और ही लोक में थीं, अंततः एक सखी ने कोमल स्वर में पूछा—“राधे, तुम रोज़ उसी दिशा में क्यों निहारती रहती हो?”
राधा ने हल्की मुस्कान के साथ उत्तर दिया—“क्योंकि वहाँ से अब स्वर नहीं, स्मृति आती है, और स्मृति में कृष्ण स्वयं उतर आते हैं, हर बाँसुरी के स्वर के साथ उनके चरणों की धूल मेरे हृदय में बस जाती है।” सखी ने सरल भाव से कहा—“पर आज तो श्याम आए ही नहीं।” यह सुनकर राधा ने आँखें मूँद लीं, उनके चेहरे पर अद्भुत शांति फैल गई और वे बोलीं—“जब प्रेम शुद्ध हो जाता है, तब मिलन के लिए देह की आवश्यकता नहीं रहती, भाव ही सब कुछ हो जाता है, मैं जिस भाव में उन्हें स्मरण करती हूँ, वे उसी भाव में प्रकट हो जाते हैं—कभी हवा की छुअन बनकर, कभी धूप की किरण बनकर, कभी मन की कंपन बनकर और कभी इस गहन मौन में।”
उसी क्षण पवन ने एक पुष्प को हौले से उड़ाया और वह सीधे राधा के चरणों में आकर ठहर गया, सखियाँ विस्मय से एक-दूसरे को देखने लगीं, पर राधा न झुकीं, न चकित हुईं, वे बस मुस्कुरा उठीं और बोलीं—“देखो सखियों, आज कृष्ण ने शब्दों की नहीं, मौन की आरती भेजी है।”
उस क्षण सखियों को अनुभव हुआ कि भक्ति केवल मंदिरों में घण्टे बजाने से नहीं होती, प्रेम केवल मिलन में नहीं बसता और ईश्वर केवल साकार रूप में नहीं आते।
राधा का प्रेम किसी अपेक्षा से बंधा नहीं था, उसमें शिकायत नहीं, अधिकार नहीं, बस समर्पण था, और वही समर्पण कृष्ण को हर पल उनके पास ले आता था, राधा के लिए कृष्ण कोई दूर बसे देव नहीं थे, वे उनकी हर साँस, हर अनुभूति, हर मौन में बसे थे।
इस कथा की शिक्षा यही है कि जब हृदय निष्कपट प्रेम और सच्ची भक्ति से भर जाता है, तब भगवान को बुलाने के लिए शब्दों, कर्मकाण्डों या दिखावे की आवश्यकता नहीं रहती, वे स्वयं हमारे जीवन में उतर आते हैं—कभी किसी घटना के रूप में, कभी किसी अनुभूति के रूप में और कभी उस मौन शांति के रूप में जो भीतर से हमें पूर्ण कर देती है, ठीक वैसे ही जैसे राधा के हृदय में कृष्ण सदा विद्यमान रहे; सच्ची भक्ति वही है जहाँ अपेक्षा नहीं, और सच्चा प्रेम वही है जहाँ दूरी भी मिलन बन जाए।
मंगलमय प्रभात
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🙏🏻ॐ_सूर्याय_नम:🙏🏻
पूरे जगत को प्रकाशित करने
वाले,सूर्यदेव मेरे अपनों के
जीवन में सदैव प्रकाश बनाये
रखना!
🌻ऊं भास्करायनमः🌻
🌹🙏🏻🌹🙏🌹 #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव
*🌹विश्वास में शक्ति🌹*
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*किसी गांव में राम नाम का एक नवयुवक रहता था। वह बहुत मेहनती था, पर हमेशा अपने मन में एक शंका लिए रहता कि वो अपने कार्यक्षेत्र में सफल होगा या नहीं!*
*कभी-कभी वो इसी चिंता के कारण आवेश में आ जाता और दूसरों पर क्रोधित भी हो उठता।*
*एक दिन उसके गांव में एक प्रसिद्ध महात्मा जी का आगमन हुआ।*
*खबर मिलते ही राम, महात्मा जी से मिलने पहुंचा और बोला,*
*“महात्मा जी मैं कड़ी मेहनत करता हूँ, सफलता पाने के लिए हर-एक प्रयत्न करता हूँ; पर फिर भी मुझे सफलता नहीं मिलती। कृपया आप ही कुछ उपाय बताएँ।”*
*महात्मा जी ने मुस्कुराते हुए कहा- बेटा, तुम्हारी समस्या का समाधान इस चमत्कारी ताबीज में है, मैंने इसके अन्दर कुछ मन्त्र लिखकर डालें हैं जो तुम्हारी हर बाधा दूर कर देंगे। लेकिन इसे सिद्ध करने के लिए तुम्हे एक रात शमशान में अकेले गुजारनी होगी।”*
*शमशान का नाम सुनते ही राम का चेहरा पीला पड़ गया,*
*“लल्ल..ल…लेकिन मैं रात भर अकेले कैसे रहूँगा…”, राम कांपते हुए बोला।*
*“घबराओ मत यह कोई मामूली ताबीज नहीं है, यह हर संकट से तुम्हे बचाएगा।”, महात्मा जी ने समझाया।*
*राम ने पूरी रात शमशान में बिताई और सुबह होती ही महात्मा जी के पास जा पहुंचा,*
*“हे महात्मन! आप महान हैं, सचमुच ये ताबीज दिव्य है, वर्ना मेरे जैसा डरपोक व्यक्ति रात बिताना तो दूर, शमशान के करीब भी नहीं जा सकता था। निश्चय ही अब मैं सफलता प्राप्त कर सकता हूँ।”*
*इस घटना के बाद राम बिलकुल बदल गया, अब वह जो भी करता उसे विश्वास होता कि ताबीज की शक्ति के कारण वह उसमें सफल होगा, और धीरे-धीरे यही हुआ भी…वह गाँव के सबसे सफल लोगों में गिना जाने लगा।*
*इस वाकये के करीब १ साल बाद फिर वही महात्मा गाँव में पधारे।*
*राम तुरंत उनके दर्शन को गया और उनके दिए चमत्कारी ताबीज का गुणगान करने लगा।
*तब महात्मा जी बोले,- बेटे! जरा अपनी ताबीज निकालकर देना। उन्होंने ताबीज हाथ में लिया, और उसे खोला।*
*उसे खोलते ही राम के होश उड़ गए जब उसने देखा कि ताबीज के अंदर कोई मन्त्र-वंत्र नहीं लिखा हुआ था…वह तो धातु का एक टुकड़ा मात्र था!*
*राम बोला, “ये क्या महात्मा जी, ये तो एक मामूली ताबीज है, फिर इसने मुझे सफलता कैसे दिलाई?”*
*महात्मा जी ने समझाते हुए कहा*-
*"सही कहा तुमने, तुम्हें सफलता इस ताबीज ने नहीं बल्कि तुम्हारे विश्वास की शक्ति ने दिलाई है। पुत्र, हम इंसानों को भगवान ने एक विशेष शक्ति देकर यहाँ भेजा है। वो है, विश्वास की शक्ति। तुम अपने कार्यक्षेत्र में इसलिए सफल नहीं हो पा रहे थे क्योंकि तुम्हें खुद पर यकीन नहीं था…खुद पर विश्वास नहीं था। लेकिन जब इस ताबीज की वजह से तुम्हारे अन्दर वो विश्वास पैदा हो गया तो तुम सफल होते चले गए ! इसलिए जाओ किसी ताबीज पर यकीन करने की बजाय अपने कर्म पर, अपनी सोच पर और अपने लिए निर्णय पर विश्वास करना सीखो, इस बात को समझो कि जो हो रहा है वो अच्छे के लिए हो रहा है और निश्चय ही तुम सफलता के शीर्ष पर पहुँच जाओगे। “*
*मंगलमय प्रभात*
*प्रणाम* #🌸पॉजिटिव मंत्र #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👌 आत्मविश्वास
*हे,शनिदेव जी !
शरीर में शक्ति,मन में साहस
और भुजाओं में पर्याप्त बल
प्रदान कीजिए*
*सुप्रभातम्*
🚩🚩🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ शनिवार #🙏जय श्री शनिदेव महाराज 🙏🌺🌸












![🌸पॉजिटिव मंत्र - happu Choughcr The Te] ৬van होश और विवेक के साथ लिए गए निर्णयों से कार्यों की गुणवत्ता है। साथ ही समय का सदुपयोग और बढ़ती निर्माण होता है। गुणों का 7 happu Choughcr The Te] ৬van होश और विवेक के साथ लिए गए निर्णयों से कार्यों की गुणवत्ता है। साथ ही समय का सदुपयोग और बढ़ती निर्माण होता है। गुणों का 7 - ShareChat 🌸पॉजिटिव मंत्र - happu Choughcr The Te] ৬van होश और विवेक के साथ लिए गए निर्णयों से कार्यों की गुणवत्ता है। साथ ही समय का सदुपयोग और बढ़ती निर्माण होता है। गुणों का 7 happu Choughcr The Te] ৬van होश और विवेक के साथ लिए गए निर्णयों से कार्यों की गुणवत्ता है। साथ ही समय का सदुपयोग और बढ़ती निर्माण होता है। गुणों का 7 - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_987755_3524b9cb_1770444986302_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=302_sc.jpg)
