*💐परमात्मा तक जाने का सूत्र💐*
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(सहज मार्ग)
*एक सम्राट अपने वजीर से नाराज हो गया। और उसने वजीर को एक बहुत ऊंचे मीनार पर कैद करवा दिया। उस मीनार से कूदने के सिवाय और कोई बचने का उपाय न था। लेकिन कूदना मरना था। मीनार बड़ी ऊंची थी। उससे कूदे तो मरे। कोई हथकड़ियां नहीं डाली थीं। वजीर को हथकड़ियां डालने की जरूरत न थी। वह मीनार के ऊपर कैद था। सीढ़ियों पर सख्त पहरा था। सीढ़ियों से आ नहीं सकता था। हर सीढ़ी पर सैनिक था। द्वारों पर कई द्वार थे, द्वारों पर ताले पड़े थे। मगर उसे खुला छोड़ दिया था मीनार पर।*
*जब सब रो रहे थे, प्रियजन उसे विदा दे रहे थे, उसकी पत्नी ने कहा, हम इतने रो रहे हैं और तुम इतने शांत हो। बात क्या है?*
*उसने कहा, फिक्र न कर। अगर तू एक रेशम का पतला धागा भी मुझ तक पहुंचा देगी तो बस, मैं निकल आऊंगा।*
*वह तो चला गया वजीर, कैद हो गया। पत्नी और मुश्किल में पड़ गई कि रेशम का धागा! पहले तो पहुंचाना कैसे? सैकड़ों फीट ऊंची मीनार थी, उस पर रेशम का धागा पहुंचाना कैसे? और फिर यह भी सोच—सोच परेशान थी कि रेशम का धागा पहुंच भी जाये समझो किसी तरह, तो रेशम के धागे से कोई भागा है? बहुत सोच—विचार में पड़ गई, कुछ उपाय न सूझा तो वह गांव में के बुद्धिमानों की खोज करने लगी।*
*एक फकीर ने कहा कि इसमें कुछ खास मामला नहीं है। भृंग नाम का एक कीड़ा होता है, उसको तू पकड़ ला। उसकी मूंछ पर शहद लगा दे। और भृंग की पूंछ में पतला धागा बांध दे रेशम का। उसने कहा, फिर क्या होगा? उसने कहा, भृंग को मीनार पर छोड़ दे। अपनी मूंछ पर शहद की गंध पाकर वह आगे बढ़ता जायेगा। वह मिलनेवाली तो है नहीं गंध, वह मिलती रहेगी। शहद मिलेगा तो नहीं, उसकी मूंछ पर है। तो वह हटता जायेगा.. हटता जायेगा। और भृंग सीधा जाता है। वह रुकता नहीं जब तक वह खोज न ले, जहां से सुगंध आ रही है। जब तक वह खोज न ले, रुकता नहीं। तू फिक्र मत कर। वह ऊपर पहुंच जायेगा। और तेरे पति को पता है। जब एक दफा रेशम का पतला धागा पहुंच जाये तो फिर पतले धागे में थोड़ा मोटा धागा बांधना, फिर उसमें और थोड़ा मोटा बांधना। फिर पति तेरा खींचने लगेगा। फिर रस्सी बांध देना, फिर मोटे रस्से बांध देना, फिर रास्ता खुल गया।*
*पत्नी को बात समझ में आ गई। यह गणित बहुत सीधा है। भृंग कीड़े को पकड़ लिया, उसकी मूंछ पर मधु लगा दिया, पूंछ में पतले से पतला धागा बांध दिया। क्योंकि इतने दूर तक भृंग को जाना है, इतना लंबा धागा खींचना है तो पतले से पतला धागा था। और भृंग चल पड़ा एकदम। उसको तो गंध मिलने लगी मधु की तो वह तो पागल होकर भागने लगा। वह रुका ही नहीं। वह ऊपर पहुंच गया। और जब पति ने देखा कि भृंग कीड़ा चढ़कर आ गया है ऊपर और उसकी मूंछों पर लगे हैं मधु के बिंदु, खुश हो गया। धागे को पकड़ लिया, बस। थोड़ी ही देर में धागे से मोटी रस्सी, मोटी से और मोटी रस्सी, और मोटी रस्सी, रस्सा. निकल भागा।*_
_*यही सूत्र है परमात्मा तक जाने का। तुम्हारे भीतर जो अभी छोटा—सा रेशम का धागा जैसा है, बड़ा महीन है, पकड़ में भी नहीं आता, वह जो तुम्हारे भीतर होश है, बस उस होश को पकड़ लो। वह जो तुम्हारे भीतर चैतन्य है उसको पकड़ लो। ध्यान कुछ और नहीं, इस होश के धागे को पकड़ लेने का नाम है। फिर इसको पकड़कर तुम चल पड़ो। जिस दशा से यह आ रहा है उसी दिशा में मुक्ति है। उसी दिशा में परमात्मा है।
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
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हे देवी!
🙏आप ही सिद्धि, बुद्धि, भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। मंत्रों का साक्षात स्वरूप धारण करने वाली हे....🙏🙏 महालक्ष्मी!
आपको सदा मेरा नमस्कार है।
!जय लक्ष्मी मां!
🌷🌺💐🌹🌻🌼🪻 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #शुभ शुक्रवार #🙏 माँ वैष्णो देवी
🌹एक अनोखा पात्र🌹
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*एक साधु ने एक सम्राट के द्वार पर दस्तक दी सुबह का समय था। और सम्राट बगीचे में घूमने निकला था। संयोग की बात है साधु को सामने ही सम्राट मिल गया।*
*साधु ने अपना पात्र उस के सामने कर दिया। सम्राट ने कहा क्या चाहते हो? साधु ने कहा कुछ भी दे दो “शर्त यही है,” कि मेरा पात्र पूरा भर जाए। मैं थक गया हूँ, यह पात्र कभी भरता ही नहीं। सम्राट हंसने लगा, और कहा तुम पागल मालुम होते हो। साधु ने कहा पागल न होते तो, साधु ही क्यों होते सम्राट । यह छोटा सा पात्र भरता ही नहीं? फिर सम्राट ने अपने वजीर से कहा लाओ इसे सोने की मोहरों से भर दो। और इस साधु का मुंह सदा के लिए बंद कर दो। साधु ने कहा मैं फिर याद दिला दूं कि भरने की कोशिश अगर आप करते हैं। तो शर्त यह है कि जब तक पात्र भरेगा नहीं मैं पीछे नहीं हटाऊंगा। सम्राट ने घमण्ड से कहा- तू घबरा मत ! इसे हम सोने से भर देंगे, हीरे जवाहरातों से भर देंगे। लेकिन जल्द ही सम्राट को अपनी भूल समझ में आ गई जब सोने की मोहरें डाली गईं और वह गुम हो गईं, हीरे डाले गये और वह भी खो गये। लेकिन सम्राट भी जिद्दी था, और फिर वह साधु से हार माने। यह भी तो उसे जचता नही था, इसलिए अपनी राजधानी में सूचना पहुंचाई। सूचना सुन कर हजारों लोग इकट्ठे हो गए, सम्राट अपना ख़जाना खाली करता चला गया। उस ने कहा आज दांव पर लग जाना हैं, सब डूबा दूंगा, मगर उस का पात्र भर कर ही रहूंगा। शाम हो गई सूरज ढलने लगा, सम्राट के कभी ना खाली होने वाले खजाने खाली हो गए, लेकिन पात्र नहीं भरा सो नहीं भरा, वह गिर पड़ा साधु के चरणों में और कहा मुझे क्षमा कर दो। मेरी अकड़ निकाल दी आप ने, अच्छा किया। मैं तो सोचता था कि मेरे पास अक्षय खजाना है, लेकिन यह आप के छोटे से पात्र को भी न भर पाया। बस अब एक ही प्रार्थना है, मैं तो हार गया मुझे क्षमा कर दें। मैंने व्यर्थ ही आप को वचन दिया था आप का पात्र भरने का। मग़र जाने से पहले एक छोटी सी बात मुझे बताते जाओ। मेरे मन में बार बार यही प्रश्न उठेगा, कि यह पात्र क्या है। किस जादू से बना है, साधु हंसने लगा। उस ने कहा किसी जादू से नहीं ‘इसे आदमी के ह्रदय से बनाया गया है। ना आदमी का ह्रदय भरता है, और ना ही यह पात्र भरता है। इस जिंदगी में कोई और चीज तुम्हे छका नहीं सकेगी। तुम्हारा पात्र खाली का खाली रहेगा, कितना ही धन डालो इस में सब इस में खो जाएगा। यह पात्र खाली का खाली ही रहेगा, भरे नहीं भरता, ना कभी भरेगा, यह तो केवल परमात्मा से ही भरेगा। क्योंकि अनंत है हमारी प्यास, अनन्त है हमारा परमात्मा और अनंत को सिर्फ अनंत ही भर सकता है, और कोई नहीं।*
*शिक्षा :-*
*इसलिए हमें किसी भी प्रकार का घमंड नहीं करना चाहिए। बस मालिक के आगे यही विनती करनी चाहिए कि मालिक जो तूने दिया है, उस के लिए तेरा शुक्र है। और उस का उपयोग मालिक के उन दुखी दीन बंधुओं के लिए करना चाहिए। अपना दिल बड़ा रखते हुए सब की मदद करें। तभी हम उस परमात्मा की खुशी हासिल कर पाएंगे। हर एक की सुनो, और हर एक से सीखो क्योंकि हर कोई, सब कुछ नही जानता। लेकिन हर एक कुछ ना कुछ जरुर जानता हैं! स्वभाव रखना है तो उस दीपक की तरह रखिये। जो सम्राट के महल में भी उतनी ही रोशनी देता है। जितनी की किसी गरीब की झोपड़ी में….।*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #❤️जीवन की सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #☝ मेरे विचार
सुप्रभात
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खाना खाते समय अपनी जीभ काट लेना इस बात का सही उदाहरण है,कि सालों का अनुभव होने के बावजूद इंसान गलती कर सकता है। किसी का कभी व्यर्थ अपमान मत करिए ,आप शक्तिशाली हैं ये अच्छी बात है,मगर समय आपसे भी अधिक शक्तिशाली है ये कभी नहीं भूलना चाहिए।
जय श्री नारायण हरि
🌷💐🌹🌸🌺🪻🌼🌻💮🪷 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ गुरुवार #श्री हरि
*🌹संघर्ष ओर चुनोतियां🌹*
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एक बार एक किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया !
कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए,कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये!
हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जाये!
एक दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा,देखिये प्रभु,आप परमात्मा हैं,लेकिन लगता है आपको खेती-बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है,
एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये , जैसा मै चाहू वैसा मौसम हो,फिर आप देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा!
परमात्मा मुस्कुराये और कहा ठीक है,जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा!
किसान ने गेहूं की फ़सल बोई,जब धूप चाही,तब धूप मिली,जब पानी तब पानी !तेज धूप, ओले, बाढ़,आंधी तो उसने आने ही नहीं दी,समय के साथ फसल बढ़ी और किसान की ख़ुशी भी,क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई थी !
किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को, की फ़सल कैसे करते हैं,बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान करते रहे.
फ़सल काटने का समय भी आया,किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया,लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा,एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया!
गेहूं की एक भी बाली के अन्दर गेहूं नहीं था,सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी,बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा,प्रभु ये क्या हुआ ?
तब परमात्मा बोले -
"ये तो होना ही था,तुमने पौधों को संघर्ष का ज़रा सा भी मौका नहीं दिया,ना तेज धूप में उनको तपने दिया,ना आंधी ओलों से जूझने दिया,उनको किसी प्रकार की चुनौती का अहसास जरा भी नहीं होने दिया"
इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए,जब आंधी आती है,तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं तब पोधा अपने बल से ही खड़ा रहता है, वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता है वोही उसे शक्ति देता है,उर्जा देता है,उसकी जीवटता को उभारता है.सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने , हथौड़ी से पिटने,गलने जैसी चुनोतियो से गुजरना पड़ता है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है,उसे अनमोल बनाती है !
उसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो,चुनौती ना हो तो आदमी खोखला ही रह जाता है,उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता !
ये चुनोतियाँ ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं,उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं,
अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनौतियो स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे.
अगर जिंदगी में प्रखर बनना है,प्रतिभाशाली बनना है ,तो संघर्ष और चुनोतियाँ का सामना तो करना ही पड़ेगा
बिना संघर्ष और चुनौतियों के हम कभी अपनी मंजिल को नही पा सकते यह भी एक परीक्षा है जीवन की जिसके बिना हमें उसी तरह ज्ञान नही होता
जिस तरह एक बच्चा परीक्षा दिए बिना अगली कक्षा में नही जा पाते,संघर्ष और जीवन की चुनौतियों का सामना तो इस धरा पर आकर श्री राम और श्री कृष्ण जी ने भी किया ।
मंगलमय प्रभात
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हे गणपतिजी !
आपही ब्रह्म, विष्णु और महेश है , आप सभी सिद्धियों के स्वामी हैं, मैं प्रेम भाव से आपको प्रणाम करता हूँ॥
*सादर*🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #शुभ बुधवार #श्री गणेश
*🌹स्नेह के आँसू🌹*
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कोरोना जैसे महामारी के विकट समय में एक बहन की सच्ची कहानि
सब्जी वाले ने तीसरी मंजिल की घंटी का बटन दबाया। ऊपर बालकनी का दरवाजा खोलकर बाहर आई महिला ने नीचे देखा।
"बीबी जी ! सब्जी ले लो ।" बताओ क्या- क्या तोलना है। कई दिनों से आपने सब्जी नहीं खरीदी मुझसे, कोई और देकर जा रहा है क्या ? सब्जी वाले ने कहा।
"रुको भैया! मैं नीचे आती हूँ।"
महिला नीचे उतर कर आई और सब्जी वाले के पास आकर बोली - "भैया ! तुम हमारे घर की घंटी मत बजाया करो। हमें सब्जी की जरूरत नहीं है।"
"कैसी बात कर रही हैं बीबी जी ! सब्जी खाना तो सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है। किसी और से लेती हो क्या सब्जी ?" सब्जीवाले ने कहा।
"नहीं भैया ! उनके पास अब कोई काम नहीं है। किसी तरह से हम लोग अपने आप को जिंदा रखे हुए हैं। जब सब ठीक हो जाएगा, घर में कुछ पैसे आएंगे, तो तुमसे ही सब्जी लिया करूंगी। मैं किसी और से सब्जी नहीं खरीदती हूँ। तुम घंटी बजाते हो तो उन्हें बहुत बुरा लगता है ! उन्हें अपनी मजबूरी पर गुस्सा आने लगता है। इसलिए भैया अब तुम हमारी घंटी मत बजाया करो।" ईतना कहकर महिला अपने घर में वापिस जाने लगी।
"बहन जी ! तनिक रुक जाओ। हम इतने बरस से आपको सब्जी दे रहे हैं । जब तुम्हारे अच्छे दिन थे, तब तुमने हमसे खूब सब्जी और फल लिए थे। अब अगर थोड़ी-सी परेशानी आ गई है, तो क्या हम तुमको ऐसे ही छोड़ देंगे ?
सब्जी वाले हैं ! कोई नेता जी तो है नहीं कि वादा करके छोड़ दें। रुके रहो दो मिनिट।"
और सब्जी वाले ने एक थैली के अंदर टमाटर , आलू, प्याज, घीया, कद्दू और करेले डालने के बाद धनिया और मिर्च भी उसमें डाल दिया ।
महिला हैरान थी... उसने तुरंत कहा – "भैया ! तुम मुझे उधार सब्जी दे रहे हो, कम से कम तोल तो लेते और मुझे पैसे भी बता दो।
मैं तुम्हारा हिसाब लिख लूंगी। जब सब ठीक हो जाएगा तो तुम्हें तुम्हारे पैसे वापस कर दूंगी।" महिला ने कहा।
"वाह ! ये क्या बात हुई भला ? तोला तो इसलिए नहीं है कि कोई मामा अपने भांजी -भाँजे से पैसे नहीं लेता हैं और बहिन ! मैं कोई अहसान भी नहीं कर रहा हूँ । ये सब तो यहीं से कमाया है, इसमें तुम्हारा हिस्सा भी है। गुड़िया के लिए ये आम रख रहा हूँ, और भाँजे के लिए मौसमी । बच्चों का खूब ख्याल रखना, ये बीमारी बहुत बुरी है और आखिरी बात भी सुन लो ! "घंटी तो मैं जब भी आऊँगा, जरूर बजाऊँगा।" ईतना कहकर सब्जी वाले ने मुस्कुराते हुए दोनों थैलियाँ महिला के हाथ में थमा दीं। महिला की आँखें मजबूरी की जगह स्नेह के आंसुओं से भरी हुईं थीं।
सेवा का दिखावा करने के बजाय कहीं और न जाकर अपने आसपास के लोगों की सेवा यदि प्रत्येक व्यक्ति कर ले तो यह मुश्किल घड़ी भी आसानी से गुजर जाएगी और आत्मा आनंद अमृत से तृप्त होगी।
केवल अपना ही नहीं... अपने परिजनों और आस-पड़ोस का भी ध्यान रखें !
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👫 हमारी ज़िन्दगी #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #❤️जीवन की सीख #🏠घर-परिवार
🙏हनुमानजी का अनमोल जीवन संदेश🙏
*"जीवन में कभी किसी को तुच्छ मत समझिये, क्योंकि समय की शक्ति राजा को रंक और रंक को राजा बना सकती है।"*
जय हनुमान जी
🌷💐🌹🌻🌼🌸🪻 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ मंगलवार #जय हनुमान
🌹राधे राधे🌹
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एक बार एक सिद्ध संत श्री मोहन देव जी वृंदावन आए ! उन्होंने बोहोत सी सिद्धियाँ प्राप्त कर रखी थी ! वृंदावन में वो एक श्याम को यमुना जी की किनारे बैठे थे वहीं एक व्रध संत बैठे थे जो राधा राधा राधा बस निरंतर यही जप कर रहे थे !
मोहनदेव जी बोले "बाबा बस नाम ही रटते रहते हो या कुछ पाया भी है ?"
संत बोले "बाबा हमें तो कुछ पाना नही ! जो पाना था वो यही नाम है सो मिल गया ! आप क्या पाने की बात कर रहे है ?"
मोहनदेव जी तो शायद इसी मौक़े का इंतज़ार कर रहे थे की अवसर मिले अपनी सिद्धी दिखाने का वो तपाक से बोले " देखो मैंने क्या पाया है ?"
वो उठे कुछ बुदबुदाए और यमुना जी के जल पर ऐसे चलने लगे जैसे भूमि पर चल रहे हो ! पूरी नादिया पार करी और वापस आकर बोले
"देखा बाबा कैसा चमत्कार ! ये पाया हमने !"
व्रध वृंदावन के संत ने पास खड़े एक मल्लाह को बुलाया और पूछा "क्यूँ भाई नादिया पार जाने का क्या लोगे ?"
वो बोला "बाबा आपसे कुछ नही ले सकता !"
बाबा पूनः बोले "भाई हमें जाना नही किंतु साधारणतः क्या लेते हो ?"
मल्लाह बोले "बाबा चाराना !"
बाबा मोहनदेव जी से बोले "भाई जो काम चाराने में हो सकता है उसे सिद्ध करने के लिए तुमने जीवन गंवा दिया !"
"मिथ्या अभिमान और मुफ़्त की नौटंकी दिखाने के अलावा क्या हाथ लगा ? भाई जो जीवन चला गया और हरी ना मिले तो ।।।। "बाबा की आँखों से आंसुओं की धारा बह चली और गला रुंध गया और एक शब्द न निकला !
यही सार है भाई जीवन में सब मिल जाए पर जो हरी न मिले तो धिक्कार है खुद पर ! न जाने ये जीवन दुबारा मिलेगा या नही और हम इसको यूँ ही व्यर्थ कर दें ! मूर्ख न बन ऐ बंदे सब कर न कर पर उनका नाम ना रुकने पाए उनकी याद न जाने पाए !
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #❤️जीवन की सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
🙏 हर हर महादेव 🙏
महादेव केवल देव नहीं, आस्था और विश्वास का नाम हैं।
जिस पर भोले बाबा की कृपा हो जाए, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। 🙏
जय भोलेनाथ
🌷💐🌹🌻🌼🌺🪻 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #शुभ सोमवार #भोलेनाथ













