*🌹शिक्षा और दीक्षा🌹*
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सन्तोष जी के यहाँ पहला लड़का हुआ तो पत्नी ने कहा, "बच्चे को गुरुकुल में शिक्षा दिलवाते हैं, मैं सोच रही हूँ कि गुरुकुल में शिiक्षा देकर उसे धर्म ज्ञाता पंडित योगी बनाऊंगी।"
सन्तोष जी ने पत्नी से कहा, "पाण्डित्य पूर्ण योगी बना कर इसे भूखा मारना है क्या !! मैं इसे बड़ा अफसर बनाऊंगा ताकि दुनिया में एक कामयाबी वाला इंसान बने।।"
संतोष जी सरकारी बैंक में मैनेजर के पद पर थे ! पत्नी धार्मिक थी और इच्छा थी कि बेटा पाण्डित्य पूर्ण योगी बने, लेकिन सन्तोष जी नहीं माने।
दूसरा लड़का हुआ पत्नी ने जिद की, सन्तोष जी इस बार भी ना माने, तीसरा लड़का हुआ पत्नी ने फिर जिद की, लेकिन सन्तोष जी एक ही रट लगाते रहे, "कहां से खाएगा, कैसे गुजारा करेगा, और नही माने।
चौथा लड़का हुआ, इस बार पत्नी की जिद के आगे सन्तोष जी हार गए , और अंततः उन्होंने गुरुकुल में शिक्षा दीक्षा दिलवाने के लिए वहाँ भेज ही दिया ।
अब धीरे धीरे समय का चक्र घूमा, अब वो दिन आ गया जब बच्चे अपने पैरों पर मजबूती से खड़े हो गए, पहले तीनों लड़कों ने मेहनत करके सरकारी नौकरियां हासिल कर ली, पहला डॉक्टर, दूसरा बैंक मैनेजर, तीसरा एक गवर्नमेंट कंपनी में उच्च पद पर जॉब करने लगा।
एक दिन की बात है सन्तोष जी पत्नी से बोले, "अरे भाग्यवान ! देखा, मेरे तीनों होनहार बेटे सरकारी पदों पर हो गए न, अच्छी कमाई भी कर रहे है, तीनों की जिंदगी तो अब सेट हो गयी, कोई चिंता नही रहेगी अब इन तीनों को। लेकिन अफसोस मेरा सबसे छोटा बेटा गुरुकुल का आचार्य बन कर घर घर यज्ञ करवा रहा है, प्रवचन कर रहा है ! जितना वह छ: महीने में कमाएगा उतना मेरा एक बेटा एक महीने में कमा लेगा, अरे भाग्यवान ! तुमने अपनी मर्जी करवा कर बड़ी गलती की, तुम्हें भी आज इस पर पश्चाताप होता होगा , मुझे मालूम है, लेकिन तुम बोलती नही हो"।।
प्रेरणास्पद कथाएं : जुड़े रहे।
पत्नी ने कहा, "हम में से कोई एक गलत है, और ये आज दूध का दूध पानी का पानी हो जाना चाहिए, चलो अब हम परीक्षा ले लेते हैं चारों की, कौन गलत है कौन सही पता चल जाएगा ।।"
दूसरे दिन शाम के वक्त पत्नी ने बाल बिखराकर, अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर और चेहरे पर एक दो नाखून के निशान मारकर आंगन मे बैठ गई और पतिदेव को अंदर कमरे मे छिपा दिया ..!!
बड़ा बेटा आया पूछा, "मम्मी क्या हुआ ?" माँ ने जवाब दिया, "तुम्हारे पापा ने मारा है !" पहला बेटा :- "बुड्ढा, सठिया गया है क्या ? कहां है ? बुलाओ तो जरा।।" माँ ने कहा, "नहीं हैं, बाहर गए हैं !" पहला बेटा - "आए तो मुझे बुला लेना, मैं कमरे मे हूँ, मेरा खाना निकाल दो मुझे भूख लगी है !" ये कहकर कमरे मे चला गया।
दूसरा बेटा आया, पूछा तो माँ ने वही जवाब दिया, दूसरा बेटा : "क्या पगला गए है इस बुढ़ापे में , उनसे कहना चुपचाप अपनी बची खुची ज़िंदगी गुजार ले, आए तो मुझे बुला लेना और मैं खाना खाकर आया हूँ। सोना है मुझे, अगर आये तो मुझे अभी मत जगाना, सुबह खबर लेता हूँ उनकी ।।", ये कह कर वो भी अपने कमरे मे चला गया ।
क्रमशः
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #🏠घर-परिवार #☝ मेरे विचार #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
#🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ शुक्रवार #🙏 माँ वैष्णो देवी
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*🌹सुंदर व्यक्ति🌹*
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*एक बार एक सेठ ने पंडित जी को निमंत्रण किया पर पंडित जी का एकादशी का व्रत था तो पंडित जी नहीं जा सके पर पंडित जी ने अपने दो शिष्यो को सेठ के यहाँ भोजन के लिए भेज दिया..।*
*पर जब दोनों शिष्य वापस लौटे तो उनमे एक शिष्य दुखी और दूसरा प्रसन्न था!*
*पंडित जी को देखकर आश्चर्य हुआ और पूछा बेटा क्यो दुखी हो -- क्या सेठ नेभोजन मे अंतर कर दिया ?*
*"नहीं गुरु जी"*
*क्या सेठ ने आसन मे अंतर कर दिया ?*
*"नहीं गुरु जी"*
*क्या सेठ ने दच्छिना मे अंतर कर दिया ?*
*"नहीं गुरु जी , बराबर दच्छिना दी 2 रुपये मुझे और 2 रुपये दूसरे को"*
*अब तो गुरु जी को और भी आश्चर्य हुआ और पूछा फिर क्या कारण है ? जो तुम दुखी हो ?*
*तब दुखी चेला बोला गुरु जी मै तो सोचता था सेठ बहुत बड़ा आदमी है कम से कम 10 रुपये दच्छिना देगा पर उसने 2 रुपये दिये इसलिए मै दुखी हूं !!*
*अब दूसरे से पूछा तुम क्यो प्रसन्न हो ?*
*तो दूसरा बोला गुरु जी मे जानता था सेठ बहुत कंजूस है आठ आने से ज्यादा दच्छिना नहीं देगा पर उसने 2 रुपए दे दिये तो मैं प्रसन्न हूं ...!*
*बस यही हमारे मन का हाल है संसार मे घटनाए समान रूप से घटती है पर कोई उनही घटनाओ से सुख प्राप्त करता है कोई दुखी होता है ,पर असल मे न दुख है न सुख ये हमारे मन की स्थिति पर निर्भर है!*
*इसलिए मन प्रभु चरणों मे लगाओ , क्योकि - कामना पूरी न हो तो दुख और कामना पूरी हो जाये तो सुख पर यदि कोई कामना ही न हो तो आनंद ... जिस शरीर को लोग सुन्दर समझते हैं।मौत के बाद वही शरीर सुन्दर क्यों नहीं लगता ? उसे घर में न रखकर जला क्यों दिया जाता है ? जिस शरीर को सुन्दर मानते हैं। जरा उसकी चमड़ी तो उतार कर देखो।तब हकीकत दिखेगी कि भीतर क्या है ? भीतर तो बस रक्त, रोग, मल और कचरा भरा पड़ा है ! फिर यह शरीर सुन्दर कैसे हुआ.?
*शरीर में कोई सुन्दरता नहीं है ! सुन्दर होते हैं व्यक्ति के कर्म, उसके विचार, उसकी वाणी,उसका व्यवहार,उसके संस्कार, और उसका चरित्र ! जिसके जीवन में यह सब है। वही इंसान दुनिया का सबसे सुंदर शख्स है..!!*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #🏠घर-परिवार #☝ मेरे विचार #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
ॐ नमः भगवते वासुदेवाय
🪷🌸🌺🌷💐🌹🙏
“जहाँ भगवान विष्णु का आशीर्वाद और माता लक्ष्मी की कृपा होती है, वहाँ सुख, शांति और #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु😇 समृद्धि अपने आप आ जाती है 🙏🙏
हरि ॐ नारायण
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*🌹माया का बंदी🌹*
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*एक बार एक शिकारी जंगल में बंदर पकड़ने के लिए गया।बंदर को पकड़ना सरल तो नहीं होता।। उसने युक्ति लगाई।एक सुराही (सँकरे मुँह वाला घड़ा) लिए और उसमें भिगोया हुआ चना रख दिया और उस घड़े को आधे से ज्यादा जमीन मे मजबूती से गाड़ दिया। और वापस आ गया।*
*कुछ देर बाद एक बंदरों का झुंड आया।। वैसे बंदर बहुत ही चालक होते हैं। एक बंदर घड़े के पास गया,और झाँककर देखा,उसे काफी मात्रा मे उसके मन पसंद चनें दिखाई दिये। उसने घड़े मे हाँथ डाला और मुट्ठी में चने भर लिए।।*
*लेकिन जैसे ही हाँथ बाहर निकालना चाहा, मुट्ठी बन्द होने के कारण उसका हाँथ सुराही में,फँस गया। हाँथ खींचने की बहुत कोशिश का पर हाँथ नहीं निकाल पाने के कारण चीखने चिल्लाने लगा।।*
*उसको संकट मे देख सारे बंदर उसके आस पास जमा होकर देखने लगे, लेकिन कोई कुछ समझ नहीं पा रहा था, कैसे उसे कष्ट से मुक्ति दिलाई जाय। वह बंदर चीखे जा रहा था।। किसी बंदर को कुछ समझ मे नहीं आ रहा था।*
*काफी देर हो गई।। शाम हो गई। दूर शिकारी आता दिखाई दिया।। इतने एक बूढ़ा बंदर जो सब का मुखिया जान पड़ता था, उस बंदर के पास आया और उसके कान के पास मुँह ले जाकर कुछ कहा।*
*और उस बंदर ने वैसा ही किया।। और एक पल मे उसका हाँथ सुराही से बाहर आ गया। जब तक शिकारी वहाँ पहुँचा सभी बंदर भाग गये।।*
*शिकारी हतप्रभ देखता रह गया। आखिर उस श्रेष्ठ और बुजुर्ग बंदर ने उस बंदर के कान मे क्या कहा विचार कीजिए*,
*कहानी का सार व संदेश शिकारी "काल है"।। हमारा मन फँसा हुआ बंदर। सुराही यह संसार और चना माया। और श्रेष्ठ बुजुर्ग बंदर सदगुरू।। सदगुरू रुपी बंदर ने फँसे हुए बंदर से कहा जो चने तूने मुट्ठी में पकड़ रखा है। उसे छोड़ दे और मुक्त हो जा।।*
*इस संसार मे हमसब मनुष्यों का यही हाल है। माया ने हमको नहीं पकडा है, हम ही माया को लोभ और मोह वश पकड़े हुए है।। और स्वयं को माया का बंदी बनाये हुये है। आइये और त्याग पूर्वक जीवन का आनंद लेते हुए काल चक्र से मुक्त हो जाएं।।*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #☝ मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #👉 लोगों के लिए सीख👈
गौरी पुत्र गणेश को प्रथम करो प्रणाम
मनोकामना पूर्ण करें सफल करें हर काम
ॐ गण गणपतए नमो नमः 🌿
🚩🚩🌻🌿🪻🌿🌻🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ बुधवार #श्री गणेश
*🌹स्वप्न कक्ष🌹*
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*एक शहर में एक परिश्रमी, ईमानदार और सदाचारी लड़का रहता था. माता-पिता, भाई-बहन, मित्र, रिश्तेदार सब उसे बहुत प्यार करते थे. सबकी सहायता को तत्पर रहने के कारण पड़ोसी से लेकर सहकर्मी तक उसका सम्मान करते थे. सब कुछ अच्छा था, किंतु जीवन में वह जिस सफ़लता प्राप्ति का सपना देखा करता था, वह उससे कोसों दूर था.*
*वह दिन-रात जी-जान लगाकर मेहनत करता, किंतु असफ़लता ही उसके हाथ लगती. उसका पूरा जीवन ऐसे ही निकल गया और अंत में जीवनचक्र से निकलकर वह कालचक्र में समा गया.*
*चूंकि उसने जीवन में सुकर्म किये थे, इसलिए उसे स्वर्ग की प्राप्ति हुई. देवदूत उसे लेकर स्वर्ग पहुँचे. स्वर्गलोक का अलौकिक सौंदर्य देख वह मंत्रमुग्ध हो गया और देवदूत से बोला, “ये कौन सा स्थान है?”*
*“ये स्वर्गलोक है. तुम्हारे अच्छे कर्म के कारण तुम्हें स्वर्ग में स्थान प्राप्त हुआ है. अब से तुम यहीं रहोगे.” देवदूत ने उत्तर दिया.*
*यह सुनकर लड़का खुश हो गया. देवदूत ने उसे वह घर दिखाया, जहाँ उसके रहने की व्यवस्था की गई थी. वह एक आलीशान घर था. इतना आलीशान घर उसने अपने जीवन में कभी नहीं देखा था.*
*देवदूत उसे घर के भीतर लेकर गया और एक-एक कर सारे कक्ष दिखाने लगा. सभी कक्ष बहुत सुंदर थे. अंत में वह उसे एक ऐसे कक्ष के पास लेकर गया, जिसके सामने “स्वप्न कक्ष” लिखा हुआ था.*
*जब वे उस कक्ष के अंदर पहुँचे, तो लड़का यह देखकर दंग रह गया कि वहाँ बहुत सारी वस्तुओं के छोटे-छोटे प्रतिरूप रखे हुए थे. ये वही वस्तुयें थीं, जिन्हें पाने के लिए उसने आजीवन मेहनत की थी, किंतु हासिल नहीं कर पाया था. आलीशान घर, कार, उच्चाधिकारी का पद और ऐसी ही बहुत सी चीज़ें, जो उसके सपनों में ही रह गए थे.*
*वह सोचने लगा कि इन चीज़ों को पाने के सपने मैंने धरती लोक में देखे थे, किंतु वहाँ तो ये मुझे मिले नहीं. अब यहाँ इनके छोटे प्रतिरूप इस तरह क्यों रखे हुए हैं? वह अपनी जिज्ञासा पर नियंत्रण नहीं रख पाया और पूछ बैठा, “ये सब…यहाँ…इस तरह…इसके पीछे क्या कारण है?”*
*देवदूत ने उसे बताया, “मनुष्य अपने जीवन में बहुत से सपने देखता है और उनके पूरा हो जाने की कामना करता है. किंतु कुछ ही सपनों के प्रति वह गंभीर होता है और उन्हें पूरा करने का प्रयास करता है. ईश्वर और ब्रह्माण्ड मनुष्य के हर सपने पूरा करने की तैयारी करते है. लेकिन कई बार असफ़लता प्राप्ति से हताश होकर और कई बार दृढ़ निश्चय की कमी के कारण मनुष्य उस क्षण प्रयास करना छोड़ देता है, जब उसके सपने पूरे होने वाले ही होते हैं. उसके वही अधूरे सपने यहाँ प्रतिरूप के रूप में रखे हुए है. तुम्हारे सपने भी यहाँ प्रतिरूप के रूप में रखे है. तुमने अंत समय तक हार न मानी होती, तो उसे अपने जीवन में प्राप्त कर चुके होते.”*
*लड़के को अपने जीवन काल में की गई गलती समझ आ गई. किंतु मृत्यु पश्चात् अब वह कुछ नहीं कर सकता था.*
*शिक्षा:-*
*मित्रों! किसी भी सपने को पूर्ण करने की दिशा में काम करने के पूर्व यह दृढ़ निश्चय कर लें कि चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आये? चाहे कितनी बार भी असफ़लता का सामना क्यों न करना पड़े? अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में तब तक प्रयास करते रहेंगे, जब तब वे पूरे नहीं हो जाते,अन्यथा समय निकल जाने के बाद यह मलाल रह जाएगा कि काश मैंने थोड़ा प्रयास और किया होता. अपने सपनों को अधूरा मत रहने दीजिये, दृढ़ निश्चय और अथक प्रयास से उन्हें हकीक़त में तब्दील करके ही दम लीजिये..!!*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #👫 हमारी ज़िन्दगी #🏠घर-परिवार #☝ मेरे विचार #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #🙏कर्म क्या है❓
*💐शुभ मंगलवार💐*
*संसार को जीतने से ज्यादा जरूरी है,खुद के मन को जीतना।*
*जिसने मन को जीत लिया,*
*उसे दुनिया जीतने की जरूरत ही नहीं है।*
*शुभ प्रभात *
*आपका जीवन मंगलमय हो*
🪷🌸🌺🌷💐🌹🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ मंगलवार #जय हनुमान
🌹पाप की गठरी🌹
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एक बार की बात है..... किसी राजा ने यह फैसला लिया के वह प्रतिदिन 100 अंधे लोगों को खीर खिलाया करेगा।
एक दिन खीर वाले दूध में सांप ने मुंह डाला और दूध में विष डाल दी । ज़हरीली खीर को खाकर 100 के 100 अंधे व्यक्ति मर गए।
राजा बहुत परेशान हुआ कि मुझे 100 आदमियों की हत्या का पाप लगेगा।
राजा परेशानी की हालत में अपने राज्य को छोड़कर जंगलों में भक्ति करने के लिए चल पड़ा, ताकि इस पाप की माफी मिल सके।
रास्ते में एक गांव आया। राजा ने चौपाल में बैठे लोगों से पूछा कि क्या इस गांव में कोई भक्ति भाव वाला परिवार है ताकि उसके घर रात काटी जा सके?
चौपाल में बैठे लोगों ने बताया कि इस गांव में दो बहन भाई रहते हैं जो खूब पूजा करते हैं। राजा उनके घर रात में ठहर गया।
सुबह जब राजा उठा तो लड़की पूजा पर बैठी हुई थी । इससे पहले लड़की का रूटीन था कि वह दिन निकलने से पहले ही पूजा से उठ जाती थी और नाश्ता तैयार करती थी।
लेकिन उस दिन वह लड़की बहुत देर तक पूजा पर बैठी रही। जब लड़की उठी तो उसके भाई ने कहा कि बहन तू इतनी देर से उठी है ।अपने घर मुसाफिर आया हुआ है और उसे नाश्ता करके दूर जाना है।
लड़की ने जवाब दिया कि भैया ऊपर एक मामला उलझा हुआ था। धर्मराज को किसी उलझन भरी स्थिति पर कोई फैसला लेना था और मैं वह फैसला सुनने के लिए रुक गयी थी। इसलिए देर तक ध्यान करती रही
तो उसके भाई ने पूछा ऐसी क्या बात थी? तो लड़की ने बताया कि फलां राज्य का राजा अंधे व्यक्तियों को खीर खिलाया करता था। लेकिन सांप के दूध में विष डालने से 100 अंधे व्यक्ति मर गए। अब धर्मराज को समझ नहीं आ रहा कि अंधे व्यक्तियों की मौत का पाप राजा को लगे , सांप को लगे या दूध बिना ढके छोड़ने वाले रसोइये को लगे
राजा भी सुन रहा था। राजा को अपने से संबंधित बात सुन कर दिलचस्पी हो गई और उसने लड़की से पूछा कि फिर क्या फैसला हुआ ?
लड़की ने बताया कि अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया था । तो राजा ने पूछा कि क्या मैं आपके घर एक रात के लिए और रुक सकता हूं ? दोनों बहन भाइयों ने खुशी से उसको हां कर दी।
राजा अगले दिन के लिए रुक गया, लेकिन चौपाल में बैठे लोग दिन भर यही चर्चा करते रहे कि कल जो व्यक्ति हमारे गांव में एक रात रुकने के लिए आया था और कोई भक्ति भाव वाला घर पूछ रहा था, उसकी भक्ति का नाटक तो सामने आ गया है। रात काटने के बाद वह इसलिए नहीं गया क्योंकि जवान लड़की को देखकर उस व्यक्ति की नियत खोटी हो गई। इसलिए वह उस सुन्दर और जवान लड़की के घर पक्के तौर पर ही ठहरेगा या फिर लड़की को लेकर भागेगा। दिनभर चौपाल में उस राजा की निंदा होती रही।
अगली सुबह लड़की फिर ध्यान पर बैठी और रूटीन के टाइम अनुसार उठ गई। तो राजा ने पूछा- "बेटी अंधे व्यक्तियों की हत्या का पाप किसको लगा ?"
तो लड़की ने बताया कि- "वह पाप तो हमारे गांव के चौपाल में बैठने वाले लोग बांट के ले गए।"
शिक्षा
निंदा करना कितना घाटे का सौदा है? निंदक हमेशा दूसरों के पाप अपने सर पर ढोता रहता है। और दूसरों द्वारा किये गए उन पाप-कर्मों के फल को भी भोगता है। अतः हमें सदैव निंदा से बचना चाहिए।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #👌 आत्मविश्वास #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #☝ मेरे विचार













