MLP
ShareChat
click to see wallet page
@184290003
184290003
MLP
@184290003
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
🌹क्षमा🌹 🙏🙏🙏 एक सेठ जी ने अपने छोटे भाई को तीन लाख रूपये व्यापार के लिये दिये। उसका व्यापार बहुत अच्छा जम गया, लेकिन उसने रूपये बड़े भाई को वापस नहीं लौटाये। आखिर दोनों में झगड़ा हो गया, झगड़ा भी इस सीमा तक बढ़ गया कि दोनों का एक दूसरे के यहाँ आना जाना बिल्कुल बंद हो गया। घृणा व द्वेष का आंतरिक संबंध अत्यंत गहरा हो गया। सेठ जी, हर समय हर संबंधी के सामने अपने छोटे भाई की निंदा-निरादर व आलोचना करने लगे। सेठ जी अच्छे साधक भी थे, लेकिन इस कारण उनकी साधना लड़खड़ाने लगी। भजन पूजन के समय भी उन्हें छोटे भाई का चिंतन होने लगा। मानसिक व्यथा का प्रभाव तन पर भी पड़ने लगा। बेचैनी बढ़ गयी। समाधान नहीं मिल रहा था। आखिर वे एक संत के पास गये और अपनी व्यथा सुनायी। आज की कहानी संतश्री ने कहाः- 'बेटा ! तू चिंता मत कर। ईश्वरकृपा से सब ठीक हो जायेगा। तुम कुछ फल व मिठाइयाँ लेकर छोटे भाई के यहाँ जाना और मिलते ही उससे केवल इतना कहना, 'अनुज ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे "क्षमा" कर दो।' सेठ जी ने कहाः- "महाराज ! मैंने ही उनकी मदद की है और "क्षमा" भी मैं ही माँगू !" संतश्री ने उत्तर दियाः- "परिवार में ऐसा कोई भी संघर्ष नहीं हो सकता, जिसमें दोनों पक्षों की गलती न हो। चाहे एक पक्ष की भूल एक प्रतिशत हो दूसरे पक्ष की निन्यानवे प्रतिशत, पर भूल दोनों तरफ से होगी।" सेठ जी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था। उसने कहाः- "महाराज ! मुझसे क्या भूल हुई ?" "बेटा ! तुमने मन ही मन अपने छोटे भाई को बुरा समझा– यही है तुम्हारी पहली भूल। तुमने उसकी निंदा, आलोचना व तिरस्कार किया– यह है तुम्हारी दूसरी भूल। क्रोध पूर्ण आँखों से उसके दोषों को देखा– यह है तुम्हारी तीसरी भूल। अपने कानों से उसकी निंदा सुनी– यह है तुम्हारी चौथी भूल। तुम्हारे हृदय में छोटे भाई के प्रति क्रोध व घृणा है– यह है तुम्हारी आखिरी भूल। अपनी इन भूलों से तुमने अपने छोटे भाई को दुःख दिया है। तुम्हारा दिया दुःख ही कई गुना हो तुम्हारे पास लौटा है। जाओ, अपनी भूलों के लिए "क्षमा" माँगों। नहीं तो तुम न चैन से जी सकोगे, न चैन से मर सकोगे। क्षमा माँगना बहुत बड़ी साधना है। ओर तुम तो एक बहुत अच्छे साधक हो।" सेठ जी की आँखें खुल गयीं। संतश्री को प्रणाम करके वे छोटे भाई के घर पहुँचे। सब लोग भोजन की तैयारी में थे। उन्होंने दरवाजा खटखटाया। दरवाजा उनके भतीजे ने खोला। सामने ताऊ जी को देखकर वह अवाक् सा रह गया और खुशी से झूमकर जोर-जोर से चिल्लाने लगाः "मम्मी ! पापा !! देखो कौन आये ! ताऊ जी आये हैं, ताऊ जी आये हैं....।" माता-पिता ने दरवाजे की तरफ देखा। सोचा, 'कहीं हम सपना तो नहीं देख रहे !' छोटा भाई हर्ष से पुलकित हो उठा, 'अहा ! पन्द्रह वर्ष के बाद आज बड़े भैया घर पर आये हैं।' प्रेम से गला रूँध गया, कुछ बोल न सका। सेठ जी ने फल व मिठाइयाँ टेबल पर रखीं और दोनों हाथ जोड़कर छोटे भाई को कहाः- "भाई ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे क्षमा करो ।" "क्षमा" शब्द निकलते ही उनके हृदय का प्रेम अश्रु बनकर बहने लगा। छोटा भाई उनके चरणों में गिर गया और अपनी भूल के लिए रो-रोकर क्षमा याचना करने लगा। बड़े भाई के प्रेमाश्रु छोटे भाई की पीठ पर और छोटी भाई के पश्चाताप व प्रेममिश्रित अश्रु बड़े भाई के चरणों में गिरने लगे। क्षमा व प्रेम का अथाह सागर फूट पड़ा। सब शांत, चुप, सबकी आँखों से अविरल अश्रुधारा बहने लगी। छोटा भाई उठ कर गया और रूपये लाकर बडे भाई के सामने रख दिये। बडे भाई ने कहा "भाई! आज मैं इन कौड़ियों को लेने के लिए नहीं आया हूँ। मैं अपनी भूल मिटाने, अपनी साधना को सजीव बनाने और द्वेष का नाश करके प्रेम की गंगा बहाने आया हूँ । मेरा आना सफल हो गया, मेरा दुःख मिट गया। अब मुझे आनंद का एहसास हो रहा है।" छोटे भाई ने कहाः- "भैया ! जब तक आप ये रूपये नहीं लेंगे तब तक मेरे हृदय की तपन नहीं मिटेगी। कृपा करके आप ये रूपये ले लें। सेठ जी ने छोटे भाई से रूपये लिये और अपने इच्छानुसार अनुज बधू , भतीजे व भतीजी में बाँट दिये । सब कार में बैठे, घर पहुँचे। पन्द्रह वर्ष बाद उस अर्धरात्रि में जब पूरे परिवार, का मिलन हुआ तो ऐसा लग रहा था कि मानो साक्षात् प्रेम ही शरीर धारण किये वहाँ पहुँच गया हो। सारा परिवार प्रेम के अथाह सागर में मस्त हो रहा था। "क्षमा" माँगने के बाद उस सेठ जी के दुःख, चिंता, तनाव, भय, निराशारूपी मानसिक रोग जड़ से ही मिट गये और साधना सजीव हो उठी। हमें भी अपने दिल में "क्षमा" रखनी चाहिए अपने सामने छोटा हो या बडा अपनी गलती हो या ना हो क्षमा मांग लेने से सब झगडे समाप्त हो जाते है। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👌 आत्मविश्वास #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👍 डर के आगे जीत👌 #🌸पॉजिटिव मंत्र
👌 आत्मविश्वास - happia, TIc Tej Gr के फैसलों पर टिकाना दूसरों खुशी जीवन की सबसे बड़ी भूल है। जो खुद से खुश रहना सीखता है, वह हर परिस्थिति में जीतता है। happia, TIc Tej Gr के फैसलों पर टिकाना दूसरों खुशी जीवन की सबसे बड़ी भूल है। जो खुद से खुश रहना सीखता है, वह हर परिस्थिति में जीतता है। - ShareChat
🙏 जय श्री हनुमान 🙏 अनंत रूप, असीम शक्ति और अपार भक्ति का प्रतीक जहाँ हनुमान हैं, वहाँ भय नहीं… सिर्फ़ विश्वास और विजय है , पवनपुत्र की कृपा हम सब पर बनी रहे🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ मंगलवार #जय बजरंगबली
🌞 Good Morning🌞 - उ्य श्री যম बजरंगबली जय मंगलवार सुबह की आप सभी को যস যস তী @ood Moutన उ्य श्री যম बजरंगबली जय मंगलवार सुबह की आप सभी को যস যস তী @ood Moutన - ShareChat
🌹दिव्य मिलन🌹 🙏🙏🙏 यह कथा भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन की महिमा को प्रकट करती है। यह केवल पति-पत्नी के प्रेम की कहानी नहीं, बल्कि तप, धैर्य, समर्पण और सत्य की विजय की कथा भी है। एक बार पर्वतराज हिमालय के गृह में पार्वती का जन्म हुआ। पूर्वजन्म में वे सती थीं, जिन्होंने पिता दक्ष के यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए थे। सती का प्रेम शिव से अविच्छिन्न था, इसलिए वे जन्मों के पार फिर से शिव को पाने आई थीं। बचपन से ही पार्वती के हृदय में शिव के प्रति अगाध भक्ति थी। वे फूल तोड़ते समय, आरती करते समय और खेलते समय भी शिव का नाम जपती रहतीं। हिमालय व मेनका उनकी भक्ति देखकर चकित थे। उधर शिव कैलाश पर समाधिस्थ थे – वीतराग, संसार से विरक्त, पर करुणामय। देवताओं पर अत्याचार बढ़ने लगे, तारकासुर जैसे दैत्य अभिमान में चूर थे। देवताओं को वरदान मिला था कि उनका वध केवल शिव-पुत्र ही कर सकता है। पर शिव तो योग में लीन थे, गृहस्थी से दूर। तब देवताओं ने पार्वती से प्रार्थना की कि वे शिव का हृदय जीतें और संसार का कल्याण करें। पार्वती ने संकल्प लिया – “मैं शिव को तप से ही प्राप्त करूँगी।” घने वन में जाकर कठोर तपस्या आरंभ हुई। धूप-वर्षा, सर्दी-गर्मी, सभी कष्टों को सहते हुए वे केवल शिव के ध्यान में लीन रहीं। पहले उन्होंने पत्तों पर निर्वाह किया, फिर केवल जल पर, और अंत में निष्प्राण-सी होकर केवल नाम-स्मरण पर। उनकी तपस्या से त्रिलोक कम्पित हो उठा। कामदेव को देवताओं ने शिव का तप भंग करने भेजा। उसने वसंत की मधुर बयार बहाई, पुष्पवृष्टि की, मनोहर संगीत गूँजा – और उसने अपना बाण छोड़ दिया। किंतु शिव की आँखें खुलीं तो उनका तीसरा नेत्र प्रज्वलित हो उठा। कामदेव भस्म हो गया। पर यही घटना पार्वती के अटूट संकल्प की परीक्षा बन गई। शिव ने जाना कि जिसने इस विकट परिस्थितियों में भी तप नहीं छोड़ा, उसका प्रेम केवल सांसारिक नहीं हो सकता। शिव ने ब्राह्मण वेश धारण कर पार्वती की परीक्षा ली। वे बोले – “शिव औघड़ हैं, भस्म रमण करते हैं, गले में सर्प धारण करते हैं, ऐसे तपस्वी से विवाह क्यों?” पार्वती मुस्कुराईं और उत्तर दिया – “मेरे लिए शिव ही सत्य हैं। वे भले संसार को कठिन प्रतीत हों, पर वे करुणा और ज्ञान के सागर हैं। मैं उन्हें ही पति रूप में स्वीकार करती हूँ।” शिव का हृदय प्रसन्न हो उठा। उन्होंने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया और वरदान दिया – “तुम ही शाश्वत शक्ति हो, तुम बिना मैं शून्य हूँ।” हिमालय में उत्सव का वातावरण छा गया। देव-ऋषि, गंधर्व, अप्सराएँ सभी एकत्र हुए। भव्य विवाह हुआ – शिव-शक्ति का मिलन, तप और प्रेम का संगम। आगे चलकर उन्हीं के गृह से स्कंद और गणेश का अवतार हुआ, और शिव-पार्वती लोककल्याण के पथप्रदर्शक बने। यह कथा सिखाती है कि सच्चा प्रेम अधिकार से नहीं, तप-त्याग और धैर्य से प्राप्त होता है। जब दृढ़ निश्चय, संयम और समर्पण साथ हों, तब स्वयं दिव्यता भी मार्ग खोल देती है। शिव-पार्वती का मिलन हमें बताता है कि शिव बिना शक्ति अधूरे हैं और शक्ति बिना शिव – इसलिए जीवन में संतुलन, श्रद्धा और प्रेम ही परम सत्य है। मंगलमय प्रभात प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏 प्रेरणादायक विचार #👌 आत्मविश्वास
😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख - #7 kappk . TGra ' IHTE कम्फर्ट ज़ोन से बाहर आकर ही अपने सपनों को पूरा किया जा सकता है हैं जहाँ पुरानी क्योंकि नई राहें वहीं खुलती हैं। जो आज की छोड़ता है, सुविधा छूटती आदतें वही कल की सफलता पाता है। #7 kappk . TGra ' IHTE कम्फर्ट ज़ोन से बाहर आकर ही अपने सपनों को पूरा किया जा सकता है हैं जहाँ पुरानी क्योंकि नई राहें वहीं खुलती हैं। जो आज की छोड़ता है, सुविधा छूटती आदतें वही कल की सफलता पाता है। - ShareChat
हे महादेव! संसार के समस्त रोगों की आप ही एकमात्र औषधि हैं, सभी को स्वस्थ और दीर्घायु जीवन प्रदान करने की कृपा करें .... हर हर महादेव 🌿 🚩🚩🌹🌿🪻🌿🌹🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ सोमवार #🛕बाबा केदारनाथ📿
🔱हर हर महादेव - ShareChat
🌹राधा की मौन आरती🌹 🙏🙏🙏 बरसाने के शांत वन में संध्या उतर रही थी, आकाश के रंग धीरे-धीरे केसरिया से नीले में ढल रहे थे, मंद पवन के साथ गोकुल की ओर से आती बाँसुरी की एक क्षीण-सी धुन वातावरण को भक्तिमय बना रही थी, उसी वन में राधा जी एक शिला पर बैठी थीं, दृष्टि किसी एक दिशा में स्थिर थी, मानो आँखें नहीं बल्कि उनका हृदय देख रहा हो। सखियों ने कई बार उन्हें पुकारा, पर राधा जैसे किसी और ही लोक में थीं, अंततः एक सखी ने कोमल स्वर में पूछा—“राधे, तुम रोज़ उसी दिशा में क्यों निहारती रहती हो?” राधा ने हल्की मुस्कान के साथ उत्तर दिया—“क्योंकि वहाँ से अब स्वर नहीं, स्मृति आती है, और स्मृति में कृष्ण स्वयं उतर आते हैं, हर बाँसुरी के स्वर के साथ उनके चरणों की धूल मेरे हृदय में बस जाती है।” सखी ने सरल भाव से कहा—“पर आज तो श्याम आए ही नहीं।” यह सुनकर राधा ने आँखें मूँद लीं, उनके चेहरे पर अद्भुत शांति फैल गई और वे बोलीं—“जब प्रेम शुद्ध हो जाता है, तब मिलन के लिए देह की आवश्यकता नहीं रहती, भाव ही सब कुछ हो जाता है, मैं जिस भाव में उन्हें स्मरण करती हूँ, वे उसी भाव में प्रकट हो जाते हैं—कभी हवा की छुअन बनकर, कभी धूप की किरण बनकर, कभी मन की कंपन बनकर और कभी इस गहन मौन में।” उसी क्षण पवन ने एक पुष्प को हौले से उड़ाया और वह सीधे राधा के चरणों में आकर ठहर गया, सखियाँ विस्मय से एक-दूसरे को देखने लगीं, पर राधा न झुकीं, न चकित हुईं, वे बस मुस्कुरा उठीं और बोलीं—“देखो सखियों, आज कृष्ण ने शब्दों की नहीं, मौन की आरती भेजी है।” उस क्षण सखियों को अनुभव हुआ कि भक्ति केवल मंदिरों में घण्टे बजाने से नहीं होती, प्रेम केवल मिलन में नहीं बसता और ईश्वर केवल साकार रूप में नहीं आते। राधा का प्रेम किसी अपेक्षा से बंधा नहीं था, उसमें शिकायत नहीं, अधिकार नहीं, बस समर्पण था, और वही समर्पण कृष्ण को हर पल उनके पास ले आता था, राधा के लिए कृष्ण कोई दूर बसे देव नहीं थे, वे उनकी हर साँस, हर अनुभूति, हर मौन में बसे थे। इस कथा की शिक्षा यही है कि जब हृदय निष्कपट प्रेम और सच्ची भक्ति से भर जाता है, तब भगवान को बुलाने के लिए शब्दों, कर्मकाण्डों या दिखावे की आवश्यकता नहीं रहती, वे स्वयं हमारे जीवन में उतर आते हैं—कभी किसी घटना के रूप में, कभी किसी अनुभूति के रूप में और कभी उस मौन शांति के रूप में जो भीतर से हमें पूर्ण कर देती है, ठीक वैसे ही जैसे राधा के हृदय में कृष्ण सदा विद्यमान रहे; सच्ची भक्ति वही है जहाँ अपेक्षा नहीं, और सच्चा प्रेम वही है जहाँ दूरी भी मिलन बन जाए। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👌 आत्मविश्वास #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🌸पॉजिटिव मंत्र #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
👌 आत्मविश्वास - hoppia, TIcTe Gn प्रज्ञा ( समझ ) वह रोशनी है को नहीं, आपके देखने के तरीके को সুহিক্কলী  57 चुनौतियाँ बोझ नहीं, बदलती है। जब नज़र बदलती है तो सबक और सीढ़ी बन जाती हैं। hoppia, TIcTe Gn प्रज्ञा ( समझ ) वह रोशनी है को नहीं, आपके देखने के तरीके को সুহিক্কলী  57 चुनौतियाँ बोझ नहीं, बदलती है। जब नज़र बदलती है तो सबक और सीढ़ी बन जाती हैं। - ShareChat
🙏🏻ॐ_सूर्याय_नम:🙏🏻 पूरे जगत को प्रकाशित करने वाले,सूर्यदेव मेरे अपनों के जीवन में सदैव प्रकाश बनाये रखना! 🌻ऊं भास्करायनमः🌻 🌹🙏🏻🌹🙏🌹 #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव
🌞 Good Morning🌞 - 63 शं सूर्याय न8 ANITAKAPOOR62 63 शं सूर्याय न8 ANITAKAPOOR62 - ShareChat
*🌹विश्वास में शक्ति🌹* 🙏🙏🙏 *किसी गांव में राम नाम का एक नवयुवक रहता था। वह बहुत मेहनती था, पर हमेशा अपने मन में एक शंका लिए रहता कि वो अपने कार्यक्षेत्र में सफल होगा या नहीं!* *कभी-कभी वो इसी चिंता के कारण आवेश में आ जाता और दूसरों पर क्रोधित भी हो उठता।* *एक दिन उसके गांव में एक प्रसिद्ध महात्मा जी का आगमन हुआ।* *खबर मिलते ही राम, महात्मा जी से मिलने पहुंचा और बोला,* *“महात्मा जी मैं कड़ी मेहनत करता हूँ, सफलता पाने के लिए हर-एक प्रयत्न करता हूँ; पर फिर भी मुझे सफलता नहीं मिलती। कृपया आप ही कुछ उपाय बताएँ।”* *महात्मा जी ने मुस्कुराते हुए कहा- बेटा, तुम्हारी समस्या का समाधान इस चमत्कारी ताबीज में है, मैंने इसके अन्दर कुछ मन्त्र लिखकर डालें हैं जो तुम्हारी हर बाधा दूर कर देंगे। लेकिन इसे सिद्ध करने के लिए तुम्हे एक रात शमशान में अकेले गुजारनी होगी।”* *शमशान का नाम सुनते ही राम का चेहरा पीला पड़ गया,* *“लल्ल..ल…लेकिन मैं रात भर अकेले कैसे रहूँगा…”, राम कांपते हुए बोला।* *“घबराओ मत यह कोई मामूली ताबीज नहीं है, यह हर संकट से तुम्हे बचाएगा।”, महात्मा जी ने समझाया।* *राम ने पूरी रात शमशान में बिताई और सुबह होती ही महात्मा जी के पास जा पहुंचा,* *“हे महात्मन! आप महान हैं, सचमुच ये ताबीज दिव्य है, वर्ना मेरे जैसा डरपोक व्यक्ति रात बिताना तो दूर, शमशान के करीब भी नहीं जा सकता था। निश्चय ही अब मैं सफलता प्राप्त कर सकता हूँ।”* *इस घटना के बाद राम बिलकुल बदल गया, अब वह जो भी करता उसे विश्वास होता कि ताबीज की शक्ति के कारण वह उसमें सफल होगा, और धीरे-धीरे यही हुआ भी…वह गाँव के सबसे सफल लोगों में गिना जाने लगा।* *इस वाकये के करीब १ साल बाद फिर वही महात्मा गाँव में पधारे।* *राम तुरंत उनके दर्शन को गया और उनके दिए चमत्कारी ताबीज का गुणगान करने लगा। *तब महात्मा जी बोले,- बेटे! जरा अपनी ताबीज निकालकर देना। उन्होंने ताबीज हाथ में लिया, और उसे खोला।* *उसे खोलते ही राम के होश उड़ गए जब उसने देखा कि ताबीज के अंदर कोई मन्त्र-वंत्र नहीं लिखा हुआ था…वह तो धातु का एक टुकड़ा मात्र था!* *राम बोला, “ये क्या महात्मा जी, ये तो एक मामूली ताबीज है, फिर इसने मुझे सफलता कैसे दिलाई?”* *महात्मा जी ने समझाते हुए कहा*- *"सही कहा तुमने, तुम्हें सफलता इस ताबीज ने नहीं बल्कि तुम्हारे विश्वास की शक्ति ने दिलाई है। पुत्र, हम इंसानों को भगवान ने एक विशेष शक्ति देकर यहाँ भेजा है। वो है, विश्वास की शक्ति। तुम अपने कार्यक्षेत्र में इसलिए सफल नहीं हो पा रहे थे क्योंकि तुम्हें खुद पर यकीन नहीं था…खुद पर विश्वास नहीं था। लेकिन जब इस ताबीज की वजह से तुम्हारे अन्दर वो विश्वास पैदा हो गया तो तुम सफल होते चले गए ! इसलिए जाओ किसी ताबीज पर यकीन करने की बजाय अपने कर्म पर, अपनी सोच पर और अपने लिए निर्णय पर विश्वास करना सीखो, इस बात को समझो कि जो हो रहा है वो अच्छे के लिए हो रहा है और निश्चय ही तुम सफलता के शीर्ष पर पहुँच जाओगे। “* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #🌸पॉजिटिव मंत्र #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👌 आत्मविश्वास
🌸पॉजिटिव मंत्र - happu Choughcr The Te] ৬van  होश और विवेक के साथ लिए गए निर्णयों से कार्यों की गुणवत्ता है। साथ ही समय का सदुपयोग और बढ़ती निर्माण होता है। गुणों का 7 happu Choughcr The Te] ৬van  होश और विवेक के साथ लिए गए निर्णयों से कार्यों की गुणवत्ता है। साथ ही समय का सदुपयोग और बढ़ती निर्माण होता है। गुणों का 7 - ShareChat
*हे,शनिदेव जी ! शरीर में शक्ति,मन में साहस और भुजाओं में पर्याप्त बल प्रदान कीजिए* *सुप्रभातम्* 🚩🚩🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ शनिवार #🙏जय श्री शनिदेव महाराज 🙏🌺🌸
🔱हर हर महादेव - आज सुबह के श्री शनि दर्शन शनि शिंगणपुर से ऊं श्रीं शनिश्चराय नमः आज सुबह के श्री शनि दर्शन शनि शिंगणपुर से ऊं श्रीं शनिश्चराय नमः - ShareChat
🌹बंधन🌹 🙏🙏🙏 एक बड़ी घनी अंधेरी रात में एक काफिला एक रेगिस्तानी सराय में जाकर ठहरा। उस काफिले के पास सौ ऊंट थे। उन्होंने ऊंट बांधे, खूंटियां गड़ाईं, लेकिन आखिर में पाया कि एक ऊंट अनबंधा रह गया है। उनकी एक खूंटी और एक रस्सी कहीं खो गई थी। आधी रात, बाजार बंद हो गए थे। अब वे कहां खूंटी लेने जाएं, कहां रस्सी! तो उन्होंने सराय के मालिक को उठाया और उससे कहा कि बड़ी कृपा होगी, एक खूंटी और एक रस्सी हमें चाहिए, हमारी खो गई है। निन्यानबे ऊंट बंध गए, सौवां अनबंधा है–अंधेरी रात है, वह कहीं भटक सकता है। उस बूढ़े आदमी ने कहाः घबड़ाओ मत। मेरे पास न तो रस्सी है, और न खूंटी। लेकिन तुम बड़े पागल आदमी हो। इतने दिन ऊंटों के साथ रहते हो गए, तुम्हें कुछ भी समझ न आई। जाओ और खूंटी गाड़ दो और रस्सी बांध दो और ऊंट को कह दो–सो जाए। उन्होंने कहाः पागल हम हैं कि तुम? अगर खूंटी हमारे पास होती तो हम तुम्हारे पास आते क्यों? कौन सी खूंटी गाड़ दें? उस बूढ़े आदमी ने कहाः बड़े नासमझ हो, ऐसी खूंटियां भी गाड़ी जा सकती हैं जो न हों, और ऐसी रस्सियां भी बांधी जा सकती हैं जिनका कोई अस्तित्व न हो। तुम जाओ, सिर्फ खूंटी ठोकने का उपक्रम करो। अंधेरी रात है, आदमी धोखा खा जाता है, ऊंट का क्या विश्वास? ऊंट का क्या हिसाब? जाओ ऐसा ठोको, जैसे खूंटी ठोकी जा रही है। गले पर रस्सी बांधों, जैसे कि रस्सी बांधी जाती है। और ऊंट से कहो कि सो जाओ। ऊंट सो जाएगा। अक्सर यहां मेहमान उतरते हैं, उनकी रस्सियां खो जाती हैं। और मैं इसलिए तो रस्सियां-खूंटियां रखता नहीं, उनके बिना ही काम चल जाता है। मजबूरी थी, उसकी बात पर विश्वास तो नहीं पड़ता था। लेकिन वे गए, उन्होंने गड्ढा खोदा, खूंटी ठोकी–जो नहीं थी। सिर्फ आवाज हुई ठोकने की, ऊंट बैठ गया। खूंटी ठोकी जा रही थी। उसके गले में उन्होंने हाथ डाला, रस्सी बांधी। रस्सी खूंटी से बांध दी गई–रस्सी, जो नहीं थी। ऊंट सो गया। वे बड़े हैरान हुए! एक बड़ी अदभुत बात उनके हाथ लग गई। सभी सो गए। सुबह उठे, सुबह जल्दी ही काफिला आगे बढ़ना था। उन्होंने निन्यानबें ऊंटों की रस्सियां निकालीं, खूंटियां निकालीं–वे ऊंट खड़े हो गए। और सौ वें की तो कोई खूंटी थी नहीं जिसे निकालते। उन्होंने उसकी खूंटी न निकाली। उसको धक्के दिए। वह उठता न था, वह नहीं उठा। उन्होंने कहाः हद हो गई, रात धोखा खाया था सो ठीक था, अब दिन के उजाले में भी! इस मूढ़ को खूंटी नहीं दिखाई पड़ती कि नहीं है? वे उसे धक्के दिए चले गए, लेकिन ऊंट ने उठने से इनकार कर दिया। ऊंट बड़ा धार्मिक रहा होगा। वे अंदर गए, उन्होंने उस बूढ़े आदमी को कहा कि कोई जादू कर दिया क्या? क्या कर दिया तुमने, ऊंट उठता नहीं। उसने कहाः बड़े पागल हो तुम, जाओ पहले खूंटी निकालो। पहले रस्सी खोलो। उन्होंने कहाः लेकिन रस्सी हो तब…। उन्होंने कहाः रात कैसे बांधी थी? वैसे ही खोलो। गए मजबूरी थी। जाकर उन्होंने खूंटी उखाड़ी, आवाज की, खूंटी निकली, ऊंट उठ कर खड़ा हो गया। रस्सी खोली, ऊंट चलने के लिए तत्पर हो गया। उन्होंने उस बूढ़े आदमी को धन्यवाद दिया और कहाः बड़े अदभुत हैं आप, ऊंटों के बाबत आपकी जानकारी बहुत है। उन्होंने कहा कि नहीं, यह ऊंटों की जानकारी से सूत्र नहीं निकला, यह सूत्र आदमियों की जानकारी से निकला है। आदमी ऐसी खूटियों में बंधा होता है जो कहीं भी नहीं हैं। और ऐसी रस्सियों में जिनका कोई अस्तित्व नहीं है। और जीवन भर बंधा रहता है। और चिल्लाता हैः मैं कैसे मुक्त हो जाऊं ? कैसे परमात्मा को पा लूं, कैसे आत्मा को पा लूं? मुझे मुक्ति चाहिए, मोक्ष चाहिए–चिल्लाता है। और हिलता नहीं अपनी जगह से, क्योंकि खूंटियां उसे बांधे हैं। वे खुंटिया है क्रोध मान माया लोभ राग द्वेष आदी यह जानते हुये भी इन्हे छोड़े बिना मुक्ति नहीं फिर भी वह कहता हैः कैसे खोलूं इन खूटियों को ? मंगलमय प्रभात प्रणाम #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #👫 हमारी ज़िन्दगी #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 59 hppಟ; though The Te ৬van  * 1 TN ٢ जो इंसान समस्याओं को अवसर समझता है, वह अपने अंदर स्थिरता लाता है। जो प्रबल व्यक्तित्व की पहचान है। 59 hppಟ; though The Te ৬van  * 1 TN ٢ जो इंसान समस्याओं को अवसर समझता है, वह अपने अंदर स्थिरता लाता है। जो प्रबल व्यक्तित्व की पहचान है। - ShareChat
*ऋण रोग और दरिद्रता को दूर करने वाली माता महालक्ष्मी जी के शरणागत हूं*🙏 *आपका दिन शुभ और मंगलमय हो*🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ शुक्रवार #🙏 देवी दर्शन🌸
🌞 Good Morning🌞 - ShareChat