🌹दिव्य मिलन🌹
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यह कथा भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन की महिमा को प्रकट करती है। यह केवल पति-पत्नी के प्रेम की कहानी नहीं, बल्कि तप, धैर्य, समर्पण और सत्य की विजय की कथा भी है।
एक बार पर्वतराज हिमालय के गृह में पार्वती का जन्म हुआ। पूर्वजन्म में वे सती थीं, जिन्होंने पिता दक्ष के यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए थे। सती का प्रेम शिव से अविच्छिन्न था, इसलिए वे जन्मों के पार फिर से शिव को पाने आई थीं। बचपन से ही पार्वती के हृदय में शिव के प्रति अगाध भक्ति थी। वे फूल तोड़ते समय, आरती करते समय और खेलते समय भी शिव का नाम जपती रहतीं। हिमालय व मेनका उनकी भक्ति देखकर चकित थे।
उधर शिव कैलाश पर समाधिस्थ थे – वीतराग, संसार से विरक्त, पर करुणामय। देवताओं पर अत्याचार बढ़ने लगे, तारकासुर जैसे दैत्य अभिमान में चूर थे। देवताओं को वरदान मिला था कि उनका वध केवल शिव-पुत्र ही कर सकता है। पर शिव तो योग में लीन थे, गृहस्थी से दूर। तब देवताओं ने पार्वती से प्रार्थना की कि वे शिव का हृदय जीतें और संसार का कल्याण करें।
पार्वती ने संकल्प लिया – “मैं शिव को तप से ही प्राप्त करूँगी।” घने वन में जाकर कठोर तपस्या आरंभ हुई। धूप-वर्षा, सर्दी-गर्मी, सभी कष्टों को सहते हुए वे केवल शिव के ध्यान में लीन रहीं। पहले उन्होंने पत्तों पर निर्वाह किया, फिर केवल जल पर, और अंत में निष्प्राण-सी होकर केवल नाम-स्मरण पर। उनकी तपस्या से त्रिलोक कम्पित हो उठा।
कामदेव को देवताओं ने शिव का तप भंग करने भेजा। उसने वसंत की मधुर बयार बहाई, पुष्पवृष्टि की, मनोहर संगीत गूँजा – और उसने अपना बाण छोड़ दिया। किंतु शिव की आँखें खुलीं तो उनका तीसरा नेत्र प्रज्वलित हो उठा। कामदेव भस्म हो गया। पर यही घटना पार्वती के अटूट संकल्प की परीक्षा बन गई। शिव ने जाना कि जिसने इस विकट परिस्थितियों में भी तप नहीं छोड़ा, उसका प्रेम केवल सांसारिक नहीं हो सकता।
शिव ने ब्राह्मण वेश धारण कर पार्वती की परीक्षा ली। वे बोले – “शिव औघड़ हैं, भस्म रमण करते हैं, गले में सर्प धारण करते हैं, ऐसे तपस्वी से विवाह क्यों?” पार्वती मुस्कुराईं और उत्तर दिया – “मेरे लिए शिव ही सत्य हैं। वे भले संसार को कठिन प्रतीत हों, पर वे करुणा और ज्ञान के सागर हैं। मैं उन्हें ही पति रूप में स्वीकार करती हूँ।” शिव का हृदय प्रसन्न हो उठा। उन्होंने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया और वरदान दिया – “तुम ही शाश्वत शक्ति हो, तुम बिना मैं शून्य हूँ।”
हिमालय में उत्सव का वातावरण छा गया। देव-ऋषि, गंधर्व, अप्सराएँ सभी एकत्र हुए। भव्य विवाह हुआ – शिव-शक्ति का मिलन, तप और प्रेम का संगम। आगे चलकर उन्हीं के गृह से स्कंद और गणेश का अवतार हुआ, और शिव-पार्वती लोककल्याण के पथप्रदर्शक बने।
यह कथा सिखाती है कि सच्चा प्रेम अधिकार से नहीं, तप-त्याग और धैर्य से प्राप्त होता है। जब दृढ़ निश्चय, संयम और समर्पण साथ हों, तब स्वयं दिव्यता भी मार्ग खोल देती है। शिव-पार्वती का मिलन हमें बताता है कि शिव बिना शक्ति अधूरे हैं और शक्ति बिना शिव – इसलिए जीवन में संतुलन, श्रद्धा और प्रेम ही परम सत्य है।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏 प्रेरणादायक विचार #👌 आत्मविश्वास
हे महादेव!
संसार के समस्त रोगों की
आप ही एकमात्र औषधि हैं,
सभी को स्वस्थ और दीर्घायु
जीवन प्रदान करने की कृपा
करें ....
हर हर महादेव 🌿
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🌹राधा की मौन आरती🌹
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बरसाने के शांत वन में संध्या उतर रही थी, आकाश के रंग धीरे-धीरे केसरिया से नीले में ढल रहे थे, मंद पवन के साथ गोकुल की ओर से आती बाँसुरी की एक क्षीण-सी धुन वातावरण को भक्तिमय बना रही थी, उसी वन में राधा जी एक शिला पर बैठी थीं, दृष्टि किसी एक दिशा में स्थिर थी, मानो आँखें नहीं बल्कि उनका हृदय देख रहा हो।
सखियों ने कई बार उन्हें पुकारा, पर राधा जैसे किसी और ही लोक में थीं, अंततः एक सखी ने कोमल स्वर में पूछा—“राधे, तुम रोज़ उसी दिशा में क्यों निहारती रहती हो?”
राधा ने हल्की मुस्कान के साथ उत्तर दिया—“क्योंकि वहाँ से अब स्वर नहीं, स्मृति आती है, और स्मृति में कृष्ण स्वयं उतर आते हैं, हर बाँसुरी के स्वर के साथ उनके चरणों की धूल मेरे हृदय में बस जाती है।” सखी ने सरल भाव से कहा—“पर आज तो श्याम आए ही नहीं।” यह सुनकर राधा ने आँखें मूँद लीं, उनके चेहरे पर अद्भुत शांति फैल गई और वे बोलीं—“जब प्रेम शुद्ध हो जाता है, तब मिलन के लिए देह की आवश्यकता नहीं रहती, भाव ही सब कुछ हो जाता है, मैं जिस भाव में उन्हें स्मरण करती हूँ, वे उसी भाव में प्रकट हो जाते हैं—कभी हवा की छुअन बनकर, कभी धूप की किरण बनकर, कभी मन की कंपन बनकर और कभी इस गहन मौन में।”
उसी क्षण पवन ने एक पुष्प को हौले से उड़ाया और वह सीधे राधा के चरणों में आकर ठहर गया, सखियाँ विस्मय से एक-दूसरे को देखने लगीं, पर राधा न झुकीं, न चकित हुईं, वे बस मुस्कुरा उठीं और बोलीं—“देखो सखियों, आज कृष्ण ने शब्दों की नहीं, मौन की आरती भेजी है।”
उस क्षण सखियों को अनुभव हुआ कि भक्ति केवल मंदिरों में घण्टे बजाने से नहीं होती, प्रेम केवल मिलन में नहीं बसता और ईश्वर केवल साकार रूप में नहीं आते।
राधा का प्रेम किसी अपेक्षा से बंधा नहीं था, उसमें शिकायत नहीं, अधिकार नहीं, बस समर्पण था, और वही समर्पण कृष्ण को हर पल उनके पास ले आता था, राधा के लिए कृष्ण कोई दूर बसे देव नहीं थे, वे उनकी हर साँस, हर अनुभूति, हर मौन में बसे थे।
इस कथा की शिक्षा यही है कि जब हृदय निष्कपट प्रेम और सच्ची भक्ति से भर जाता है, तब भगवान को बुलाने के लिए शब्दों, कर्मकाण्डों या दिखावे की आवश्यकता नहीं रहती, वे स्वयं हमारे जीवन में उतर आते हैं—कभी किसी घटना के रूप में, कभी किसी अनुभूति के रूप में और कभी उस मौन शांति के रूप में जो भीतर से हमें पूर्ण कर देती है, ठीक वैसे ही जैसे राधा के हृदय में कृष्ण सदा विद्यमान रहे; सच्ची भक्ति वही है जहाँ अपेक्षा नहीं, और सच्चा प्रेम वही है जहाँ दूरी भी मिलन बन जाए।
मंगलमय प्रभात
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🙏🏻ॐ_सूर्याय_नम:🙏🏻
पूरे जगत को प्रकाशित करने
वाले,सूर्यदेव मेरे अपनों के
जीवन में सदैव प्रकाश बनाये
रखना!
🌻ऊं भास्करायनमः🌻
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*🌹विश्वास में शक्ति🌹*
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*किसी गांव में राम नाम का एक नवयुवक रहता था। वह बहुत मेहनती था, पर हमेशा अपने मन में एक शंका लिए रहता कि वो अपने कार्यक्षेत्र में सफल होगा या नहीं!*
*कभी-कभी वो इसी चिंता के कारण आवेश में आ जाता और दूसरों पर क्रोधित भी हो उठता।*
*एक दिन उसके गांव में एक प्रसिद्ध महात्मा जी का आगमन हुआ।*
*खबर मिलते ही राम, महात्मा जी से मिलने पहुंचा और बोला,*
*“महात्मा जी मैं कड़ी मेहनत करता हूँ, सफलता पाने के लिए हर-एक प्रयत्न करता हूँ; पर फिर भी मुझे सफलता नहीं मिलती। कृपया आप ही कुछ उपाय बताएँ।”*
*महात्मा जी ने मुस्कुराते हुए कहा- बेटा, तुम्हारी समस्या का समाधान इस चमत्कारी ताबीज में है, मैंने इसके अन्दर कुछ मन्त्र लिखकर डालें हैं जो तुम्हारी हर बाधा दूर कर देंगे। लेकिन इसे सिद्ध करने के लिए तुम्हे एक रात शमशान में अकेले गुजारनी होगी।”*
*शमशान का नाम सुनते ही राम का चेहरा पीला पड़ गया,*
*“लल्ल..ल…लेकिन मैं रात भर अकेले कैसे रहूँगा…”, राम कांपते हुए बोला।*
*“घबराओ मत यह कोई मामूली ताबीज नहीं है, यह हर संकट से तुम्हे बचाएगा।”, महात्मा जी ने समझाया।*
*राम ने पूरी रात शमशान में बिताई और सुबह होती ही महात्मा जी के पास जा पहुंचा,*
*“हे महात्मन! आप महान हैं, सचमुच ये ताबीज दिव्य है, वर्ना मेरे जैसा डरपोक व्यक्ति रात बिताना तो दूर, शमशान के करीब भी नहीं जा सकता था। निश्चय ही अब मैं सफलता प्राप्त कर सकता हूँ।”*
*इस घटना के बाद राम बिलकुल बदल गया, अब वह जो भी करता उसे विश्वास होता कि ताबीज की शक्ति के कारण वह उसमें सफल होगा, और धीरे-धीरे यही हुआ भी…वह गाँव के सबसे सफल लोगों में गिना जाने लगा।*
*इस वाकये के करीब १ साल बाद फिर वही महात्मा गाँव में पधारे।*
*राम तुरंत उनके दर्शन को गया और उनके दिए चमत्कारी ताबीज का गुणगान करने लगा।
*तब महात्मा जी बोले,- बेटे! जरा अपनी ताबीज निकालकर देना। उन्होंने ताबीज हाथ में लिया, और उसे खोला।*
*उसे खोलते ही राम के होश उड़ गए जब उसने देखा कि ताबीज के अंदर कोई मन्त्र-वंत्र नहीं लिखा हुआ था…वह तो धातु का एक टुकड़ा मात्र था!*
*राम बोला, “ये क्या महात्मा जी, ये तो एक मामूली ताबीज है, फिर इसने मुझे सफलता कैसे दिलाई?”*
*महात्मा जी ने समझाते हुए कहा*-
*"सही कहा तुमने, तुम्हें सफलता इस ताबीज ने नहीं बल्कि तुम्हारे विश्वास की शक्ति ने दिलाई है। पुत्र, हम इंसानों को भगवान ने एक विशेष शक्ति देकर यहाँ भेजा है। वो है, विश्वास की शक्ति। तुम अपने कार्यक्षेत्र में इसलिए सफल नहीं हो पा रहे थे क्योंकि तुम्हें खुद पर यकीन नहीं था…खुद पर विश्वास नहीं था। लेकिन जब इस ताबीज की वजह से तुम्हारे अन्दर वो विश्वास पैदा हो गया तो तुम सफल होते चले गए ! इसलिए जाओ किसी ताबीज पर यकीन करने की बजाय अपने कर्म पर, अपनी सोच पर और अपने लिए निर्णय पर विश्वास करना सीखो, इस बात को समझो कि जो हो रहा है वो अच्छे के लिए हो रहा है और निश्चय ही तुम सफलता के शीर्ष पर पहुँच जाओगे। “*
*मंगलमय प्रभात*
*प्रणाम* #🌸पॉजिटिव मंत्र #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👌 आत्मविश्वास
*हे,शनिदेव जी !
शरीर में शक्ति,मन में साहस
और भुजाओं में पर्याप्त बल
प्रदान कीजिए*
*सुप्रभातम्*
🚩🚩🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ शनिवार #🙏जय श्री शनिदेव महाराज 🙏🌺🌸
🌹बंधन🌹
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एक बड़ी घनी अंधेरी रात में एक काफिला एक रेगिस्तानी सराय में जाकर ठहरा।
उस काफिले के पास सौ ऊंट थे। उन्होंने ऊंट बांधे, खूंटियां गड़ाईं, लेकिन आखिर में पाया कि एक ऊंट अनबंधा रह गया है। उनकी एक खूंटी और एक रस्सी कहीं खो गई थी। आधी रात, बाजार बंद हो गए थे।
अब वे कहां खूंटी लेने जाएं, कहां रस्सी! तो उन्होंने सराय के मालिक को उठाया और उससे कहा कि बड़ी कृपा होगी, एक खूंटी और एक रस्सी हमें चाहिए, हमारी खो गई है। निन्यानबे ऊंट बंध गए, सौवां अनबंधा है–अंधेरी रात है, वह कहीं भटक सकता है। उस बूढ़े आदमी ने कहाः घबड़ाओ मत। मेरे पास न तो रस्सी है, और न खूंटी। लेकिन तुम बड़े पागल आदमी हो।
इतने दिन ऊंटों के साथ रहते हो गए, तुम्हें कुछ भी समझ न आई। जाओ और खूंटी गाड़ दो और रस्सी बांध दो और ऊंट को कह दो–सो जाए।
उन्होंने कहाः पागल हम हैं कि तुम? अगर खूंटी हमारे पास होती तो हम तुम्हारे पास आते क्यों?
कौन सी खूंटी गाड़ दें? उस बूढ़े आदमी ने कहाः बड़े नासमझ हो, ऐसी खूंटियां भी गाड़ी जा सकती हैं जो न हों, और ऐसी रस्सियां भी बांधी जा सकती हैं जिनका कोई अस्तित्व न हो। तुम जाओ, सिर्फ खूंटी ठोकने का उपक्रम करो। अंधेरी रात है, आदमी धोखा खा जाता है, ऊंट का क्या विश्वास? ऊंट का क्या हिसाब? जाओ ऐसा ठोको, जैसे खूंटी ठोकी जा रही है। गले पर रस्सी बांधों, जैसे कि रस्सी बांधी जाती है। और ऊंट से कहो कि सो जाओ। ऊंट सो जाएगा। अक्सर यहां मेहमान उतरते हैं, उनकी रस्सियां खो जाती हैं। और मैं इसलिए तो रस्सियां-खूंटियां रखता नहीं, उनके बिना ही काम चल जाता है। मजबूरी थी, उसकी बात पर विश्वास तो नहीं पड़ता था। लेकिन वे गए, उन्होंने गड्ढा खोदा, खूंटी ठोकी–जो नहीं थी। सिर्फ आवाज हुई ठोकने की, ऊंट बैठ गया। खूंटी ठोकी जा रही थी। उसके गले में उन्होंने हाथ डाला, रस्सी बांधी। रस्सी खूंटी से बांध दी गई–रस्सी, जो नहीं थी। ऊंट सो गया। वे बड़े हैरान हुए!
एक बड़ी अदभुत बात उनके हाथ लग गई। सभी सो गए। सुबह उठे, सुबह जल्दी ही काफिला आगे बढ़ना था। उन्होंने निन्यानबें ऊंटों की रस्सियां निकालीं, खूंटियां निकालीं–वे ऊंट खड़े हो गए। और सौ वें की तो कोई खूंटी थी नहीं जिसे निकालते। उन्होंने उसकी खूंटी न निकाली। उसको धक्के दिए। वह उठता न था, वह नहीं उठा। उन्होंने कहाः हद हो गई, रात धोखा खाया था सो ठीक था, अब दिन के उजाले में भी! इस मूढ़ को खूंटी नहीं दिखाई पड़ती कि नहीं है?
वे उसे धक्के दिए चले गए, लेकिन ऊंट ने उठने से इनकार कर दिया। ऊंट बड़ा धार्मिक रहा होगा। वे अंदर गए, उन्होंने उस बूढ़े आदमी को कहा कि कोई जादू कर दिया क्या?
क्या कर दिया तुमने, ऊंट उठता नहीं। उसने कहाः बड़े पागल हो तुम, जाओ पहले खूंटी निकालो। पहले रस्सी खोलो। उन्होंने कहाः लेकिन रस्सी हो तब…। उन्होंने कहाः रात कैसे बांधी थी? वैसे ही खोलो। गए मजबूरी थी। जाकर उन्होंने खूंटी उखाड़ी, आवाज की, खूंटी निकली, ऊंट उठ कर खड़ा हो गया। रस्सी खोली, ऊंट चलने के लिए तत्पर हो गया। उन्होंने उस बूढ़े आदमी को धन्यवाद दिया और कहाः बड़े अदभुत हैं आप, ऊंटों के बाबत आपकी जानकारी बहुत है। उन्होंने कहा कि नहीं, यह ऊंटों की जानकारी से सूत्र नहीं निकला, यह सूत्र आदमियों की जानकारी से निकला है।
आदमी ऐसी खूटियों में बंधा होता है जो कहीं भी नहीं हैं। और ऐसी रस्सियों में जिनका कोई अस्तित्व नहीं है। और जीवन भर बंधा रहता है। और चिल्लाता हैः मैं कैसे मुक्त हो जाऊं ?
कैसे परमात्मा को पा लूं, कैसे आत्मा को पा लूं?
मुझे मुक्ति चाहिए, मोक्ष चाहिए–चिल्लाता है। और हिलता नहीं अपनी जगह से, क्योंकि खूंटियां उसे बांधे हैं। वे खुंटिया है क्रोध मान माया लोभ राग द्वेष आदी यह जानते हुये भी इन्हे छोड़े बिना मुक्ति नहीं फिर भी वह कहता हैः कैसे खोलूं इन खूटियों को ?
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #👫 हमारी ज़िन्दगी #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
*ऋण रोग और दरिद्रता को दूर
करने वाली माता महालक्ष्मी
जी के शरणागत हूं*🙏
*आपका दिन शुभ और
मंगलमय हो*🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ शुक्रवार #🙏 देवी दर्शन🌸
🌹बदलाव की शुरुआत एक से🌹
🙏🙏🙏
एक लड़का रोज़ सुबह तालाब के किनारे दौड़ने जाया करता था। आते-जाते वह देखता कि एक बूढ़ी महिला हर दिन तालाब के किनारे बैठे छोटे-छोटे कछुओं की पीठ को ध्यान से साफ़ कर रही होती है। यह दृश्य वह कई दिनों तक देखता रहा, लेकिन एक दिन उससे रहा नहीं गया। उसने पास जाकर आदर से नमस्ते किया और पूछा—“आंटी जी, मैं आपको रोज़ कछुओं की पीठ साफ़ करते देखता हूँ, आप ऐसा क्यों करती हैं?” बूढ़ी महिला ने स्नेह से उसकी ओर देखा और बोली—“बेटा, इन कछुओं की पीठ पर एक कठोर कवच होता है, जिस पर समय के साथ कचरा जम जाता है।
इससे उनकी गर्मी ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है, तैरने में परेशानी होती है और यदि लंबे समय तक यह गंदगी साफ़ न की जाए तो उनका कवच कमजोर हो जाता है, जिससे उनकी ज़िंदगी खतरे में पड़ जाती है। मैं हर रविवार यहाँ आकर इन्हें साफ़ करती हूँ, इससे मुझे भीतर से शांति और सुकून मिलता है।” यह सुनकर लड़का बोला—“आप बहुत अच्छा काम कर रही हैं, लेकिन यहाँ तो सैकड़ों कछुए हैं, आप सबकी मदद नहीं कर सकतीं, फिर आपके इस प्रयास से कोई बड़ा बदलाव कैसे आएगा?” बूढ़ी महिला मुस्कुराईं, पास में बैठे एक कछुए को तालाब में छोड़ते हुए बोलीं—“हो सकता है मेरी इस कोशिश से दुनिया न बदले, लेकिन इस एक कछुए की पूरी दुनिया तो बदल गई ना।
यही सोचकर मुझे खुशी मिलती है कि मैं पूरी दुनिया नहीं, पर किसी एक की दुनिया बदल पाई।” यह सुनकर लड़के की आँखों में चमक आ गई और वह समझ गया कि बदलाव की शुरुआत हमेशा छोटे कदम से ही होती है।
शिक्षा ...
यह कहानी हमें सिखाती है कि यह सोचकर अच्छे काम से पीछे नहीं हटना चाहिए कि हमारे प्रयास से दुनिया नहीं बदलेगी, क्योंकि संभव है कि उसी छोटे से प्रयास से किसी एक की पूरी ज़िंदगी बदल जाए। जैसे बूंद-बूंद से समुद्र बनता है, वैसे ही छोटे-छोटे अच्छे कार्य मिलकर समाज में बड़ा बदलाव लाते हैं। इसलिए हमें अपनी क्षमता के अनुसार अच्छाई करते रहना चाहिए, क्योंकि सच्चा सुकून उसी में है कि हम किसी एक के जीवन में उम्मीद, सहारा और मुस्कान बन सकें।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👍 डर के आगे जीत👌 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
किसी को गीता में ज्ञान न मिला
किसी को कुरान में ईमान न मिला
उस इंसान को आसमान में रब क्या मिलेगा
जिसे इंसान में इंसान ना मिला..
ॐ नमः भगवते वासुदेवाय नमः
🚩🚩🌻🌻🌹🌻🌻🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇








![🌸पॉजिटिव मंत्र - happu Choughcr The Te] ৬van होश और विवेक के साथ लिए गए निर्णयों से कार्यों की गुणवत्ता है। साथ ही समय का सदुपयोग और बढ़ती निर्माण होता है। गुणों का 7 happu Choughcr The Te] ৬van होश और विवेक के साथ लिए गए निर्णयों से कार्यों की गुणवत्ता है। साथ ही समय का सदुपयोग और बढ़ती निर्माण होता है। गुणों का 7 - ShareChat 🌸पॉजिटिव मंत्र - happu Choughcr The Te] ৬van होश और विवेक के साथ लिए गए निर्णयों से कार्यों की गुणवत्ता है। साथ ही समय का सदुपयोग और बढ़ती निर्माण होता है। गुणों का 7 happu Choughcr The Te] ৬van होश और विवेक के साथ लिए गए निर्णयों से कार्यों की गुणवत्ता है। साथ ही समय का सदुपयोग और बढ़ती निर्माण होता है। गुणों का 7 - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_987755_3524b9cb_1770444986302_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=302_sc.jpg)




