*🌹भाव के भूखे🌹*
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*एक पर्वत पर शिवजी का एक सुंदर मन्दिर था। यहाँ बहुत से लोग शिवजी की पूजा के लिए आते थे। उनमें दो भक्त एक ब्राह्मण और दूसरा एक भील, नित्य आने वालों में थे।*
*ब्राह्मण प्रतिदिन शिवजी का दूध से अभिषेक करता, उन पर फूल,पत्तियां चढ़ाता, गूगल जलाता और चंदन का लेप करता !*
*भील के पास तो ये सब वस्तुएं नही थी, सो वह हाथी के मदजल से शिवजी का अभिषेक करता, उन पर जंगल की फूल पत्तियां चढ़ाता और भक्तिभाव से शिवजी को रिझाने को नृत्य करता !*
*एक दिन ब्राह्मण जब मन्दिर गया तो उसने देखा भगवान शिव भील से बात कर रहे हैं !*
*ब्राह्मण को यह अच्छा नही लगा और तुरंत भगवान शिव से बोला- भगवन क्या आप मुझसे असंतुष्ट है ?*
*मै ऊंचे कुल में पैदा हुआ हूं तथा बहुमूल्य पदार्थो से आपकी पूजा करता हूं। जबकि यह भील नीच कुल से है और अपवित्र पदार्थों से आपकी उपासना करता है !*
*शिवजी ने कहा- ब्राह्मण तुम ठीक कहते हो, किन्तु इस भील का जितना स्नेह मुझ पर है उतना तुम्हारा नही !*
*एक दिन शिवजी ने अपनी एक आंख गिरा दी। ब्राह्मण नियत समय पर पूजा करने आया। उसने देखा शिवजी की एक आंख नही है। पूजा करके वह अपने घर लौट आया !*
*उसके बाद भील आया,उसने देखा भगवान शिव की एक आंख नही है। वो तुरंत अपनी आंख निकालने का प्रयास करने लगा !*
*तभी ब्राह्मण मन्दिर में पहुँच गया और भील को ऐसा करते देख तुरंत भगवान शिव के चरणों में लेट गया और भगवान शिव से कहने लगा- प्रभु ! आपका यही सच्चा भक्त हैं इसे रोको, ये नेत्रहीन हो जाएगा !*
*भगवान शिव बोले- तुमने ऐसा सोचा भी नही, इसलिए मैं कहता हूं कि भील ही मेरा सच्चा भक्त हैं !*
*भगवान शिव की कृपा से भील नेत्रहीन होने से भी बच गया और ब्राह्मण के अहंकार के नेत्र भी खुल गए !*
*ईश्वर केवल भावना के भूखे हैं। भावना शुद्ध होगी तो परमात्मा पीछे पीछे आ जाएंगे।*
*ॐ त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम।*🙏
*उर्वारुकमिव वंदना मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।*🙏
*ॐ कर्पूरगौरं कारुणावतारं,*
*संसारसारं भुजगेंद्रहारम्।*
*सदावसन्तं हृदयारविंदे,*
*भवंभवानी साहितं नमामि।।*
*ऐसी ही प्रेरणास्पद कथायें संस्कारित कहानियां पढ़ने के लिये जुड़े रहे*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #👍 डर के आगे जीत👌 #🌸पॉजिटिव मंत्र #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास
🙏हे भोलेनाथ!
अनेकों सुगंधित पुष्पों के साथ
महाशिवरात्रि पर्व पर आपके
आगमन की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।🙏🙏
हर हर महादेव
🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️
🙏🌹🌷💐🌸 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ रविवार
🌹कवच🌹
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रीवा की टिकट जिस स्लीपर कोच में थी, उसमें पुरुष यात्रियों की संख्या असहज करने वाली थी। दो–तीन बुज़ुर्ग औरतों के अलावा कोई परिचित चेहरा नहीं दिखा। वह खिड़की के पास सिमट कर बैठ गई। यह उसका पहला अकेला सफ़र था—दिल तेज़ धड़क रहा था, हथेलियाँ पसीने से भीग चुकी थीं।
स्टेशन छूटते ही डिब्बे में बैठे कुछ युवक तेज़ आवाज़ में हँसने लगे। कोई गाना गुनगुना रहा था, कोई मोबाइल पर वीडियो चला रहा था। रीवा का मन बार-बार अनहोनी की आशंका से भर उठता। उसने किताब खोल ली, पर अक्षर आँखों के सामने तैर रहे थे।
रात गहराने लगी। ट्रेन की खटर-पटर के बीच उसका डर और गाढ़ा हो गया। तभी सामने की सीट से धीमी, संयत आवाज़ आई—
“बहन जी, अगर बुरा न लगे तो पूछूँ, आप अकेली सफर कर रही है?,"
रीवा चौंकी। सिर उठाकर देखा—सामने एक साधारण-सा युवक बैठा था। आँखों में शरारत नहीं, बल्कि अपनापन था।
“जी… हाँ,” उसने संक्षेप में उत्तर दिया।
“घबराइए मत,” वह मुस्कुराया, “मैं आदित्य हूँ। अगर किसी तरह की मदद चाहिए हो तो बेझिझक कहिए।”
इतना कहकर वह फिर अपने मोबाइल में लग गया। न कोई अतिरिक्त प्रश्न, न घूरती नज़र। रीवा को पहली बार लगा कि उसका डर थोड़ा ढीला पड़ा है।
कुछ देर बाद टीटी आया। आदित्य उठा, रीवा की टिकट भी दिखा दी। फिर बोला—“आप चाहें तो ऊपरी बर्थ पर सो जाइए। नीचे बैठे रहना रात में असुविधाजनक होता है।”
“पर आपकी सीट…?”
“चिंता मत कीजिए, मुझे आदत है।”
रीवा ने पहली बार खुलकर मुस्कुराया।
रात के बीच एक अजीब-सा सुकून उतर आया। जब-तब आदित्य पूछ लेता—“सब ठीक है न?”
किसी प्रहरी की तरह, बिना जताए।
सुबह की हल्की रोशनी के साथ स्टेशन आने लगा। रीवा नीचे उतरी। मन में कृतज्ञता उमड़ पड़ी।
“आपका बहुत धन्यवाद,” उसने कहा, “अगर आप न होते तो यह सफ़र शायद इतना आसान न होता।”
आदित्य हल्का-सा हँसा।
“धन्यवाद की क्या बात है, बहन। हम सब किसी के बेटे, किसी के भाई हैं। अगर हम ही डर बन जाएँ, तो भरोसा बचेगा कहाँ?”
रीवा ने झिझकते हुए कहा—
“कम से कम अपना नंबर तो दे दीजिए… कभी ज़रूरत पड़े तो—”
आदित्य ने सिर हिलाकर मना कर दिया। “ज़रूरत तब पड़े, जब इंसानियत कम हो। कोशिश कीजिए कि किसी और को भी आज सुरक्षित महसूस करा सकें।”
इतना कहकर वह ट्रेन से उतर गया।
रीवा देर तक खड़ी रही। भीड़ में वह कब ओझल हो गया, पता ही नहीं चला। उसकी आँखें नम थीं, पर दिल आशा से भरा हुआ।
उस दिन रीवा ने समझा—
रक्षक हमेशा वर्दी में नहीं होते।
कभी वे साधारण कपड़ों में, बिना नाम-पते के, बस भरोसे की ढाल बनकर मिल जाते हैं।
काश… यह देश ऐसे ही कवचों से भर जाए—
जहाँ बेटियाँ डर नहीं, विश्वास लेकर सफ़र करें।
जहाँ पुरुष शक्ति नहीं, संवेदना से पहचाने जाएँ।
और जहाँ सुरक्षा किसी उपकार की तरह नहीं,
सामान्य मानवीय कर्तव्य की तरह निभाई जाए।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #👫 हमारी ज़िन्दगी #✍️ जीवन में बदलाव #👌 आत्मविश्वास #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #☝अनमोल ज्ञान
कर्म करें किस्मत बने
जीवन का यह मर्म
प्राणी तेरे हाथ में
तेरा अपना कर्म
ॐ श्री शनिदेवाय नमः जय हनुमान जी महाराज
🚩🚩🌹🌹🪻🌹🌹🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ शनिवार #✋भगवान भैरव🌸
🌹अधूरी चिट्ठी और वो आखिरी कल🌹
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शहर के सबसे बड़े अस्पताल के कमरा नंबर 402 में सन्नाटा पसरा था। वहां लेटे 70 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर दीनानाथ जी की नजरें दीवार पर टिकी घड़ी की सुइयों को देख रही थीं। वे सुइयां नहीं थीं, मानो उनके जीवन की शेष बची सांसें थीं जो धीरे-धीरे खिसक रही थीं।
दीनानाथ जी ने पूरी उम्र 'कल' के भरोसे जी थी। जब बच्चे छोटे थे, तो उन्होंने सोचा—"कल बच्चों के साथ पार्क जाऊंगा, आज ऑफिस में काम ज्यादा है।" जब पत्नी ने साथ बैठने की जिद की, तो कहा—"कल फुर्सत से बातें करेंगे, आज थक गया हूँ।" जब बूढ़े माता-पिता ने याद किया, तो मन बनाया—"अगले महीने गांव जाऊंगा।"
पर वह 'कल' कभी नहीं आया। बच्चे बड़े होकर विदेश चले गए, पत्नी का साथ बीमारी ने छीन लिया और माता-पिता यादों में सिमट गए। आज जब मृत्यु उनके सिरहाने बैठी थी, तो उन्हें अपनी सारी डिग्रियां, बैंक बैलेंस और बड़ा बंगला मिट्टी के ढेर जैसा लग रहा था।
तभी नर्स अंदर आई और पूछा, "सर, क्या आप किसी को बुलाना चाहते हैं?"
दीनानाथ जी की आँखों में आंसू भर आए। उन्होंने कांपते हाथों से एक कागज मांगा और एक 'अधूरी चिट्ठी' लिखनी शुरू की। उन्होंने लिखा:
"मेरे प्रिय बेटे, आज जब मैं जीवन की आखिरी दहलीज पर खड़ा हूँ, तो मुझे समझ आ रहा है कि जिसे मैं अपनी 'उपलब्धियां' समझता था, वे सिर्फ दिखावा थीं। असली पूंजी तो वो हंसी थी जो मैंने काम के चक्कर में दबा दी। असली कमाई तो वो रिश्ते थे जिन्हें मैंने 'कल' पर टाल दिया। काश! मैंने 'मैं' के बजाय 'हम' को चुना होता। काश! मैंने उस दिन क्षमा मांग ली होती जब मेरा अहंकार बड़ा था और रिश्ता छोटा।"
उन्होंने महसूस किया कि मृत्यु के करीब पहुंचकर इंसान की नजर धुंधली नहीं, बल्कि और भी साफ हो जाती है। उन्हें याद आया कि उनके छोटे भाई से दस साल पहले एक जमीन के टुकड़े के लिए झगड़ा हुआ था। तब उन्होंने सोचा था—"कल उसे फोन करूँगा।" पर वो फोन कभी नहीं हुआ।
दीनानाथ जी ने नर्स से अपना फोन मांगा और अपने भाई का नंबर मिलाया। जैसे ही भाई ने फोन उठाया, दीनानाथ जी सिर्फ इतना कह पाए— "मुझे माफ कर देना भाई..." उधर से भाई की सिसकियां सुनाई दीं। दस साल की कड़वाहट एक पल के 'वर्तमान' में बह गई।
उस शाम दीनानाथ जी चले गए, लेकिन उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। वे समझ गए थे कि जीवन को 'कल' के लिए बचाकर रखना ही सबसे बड़ी भूल है।
शिक्षा...
जीवन की सबसे बड़ी पूँजी प्रेम, क्षमा और वर्तमान है। जो करना है, आज और अभी करें, क्योंकि 'कल' महज एक भ्रम है जो कभी हकीकत नहीं बनता।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👌 आत्मविश्वास #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 डर के आगे जीत👌
🙏*हे महादेव !
इस लोक में याद की गयी
विद्या और अपने पास संग्रह
किया गया धन ही सच्चा मित्र
है*॥
*प्रभु !
मेरी प्रार्थना महालक्ष्मीजी को
समर्पित कर दीजिए*🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ शुक्रवार #🙏 माँ वैष्णो देवी
🌹दो हीरे🌹
🙏🙏🙏
एक सौदागर को बाज़ार में घूमते हुए एक उम्दा नस्ल का ऊंट दिखाई पड़ा!
सौदागर और ऊंट बेचने वाले के बीच काफी लंबी सौदेबाजी हुई और आखिर में सौदागर ऊंट खरीद कर घर ले आया!
घर पहुंचने पर सौदागर ने अपने नौकर को ऊंट का कजावा ( काठी) निकालने के लिए बुलाया..!
कजावे के नीचे नौकर को एक छोटी सी मखमल की थैली मिली जिसे खोलने पर उसे कीमती हीरे जवाहरात भरे होने का पता चला..!
नौकर चिल्लाया,"मालिक आपने ऊंट खरीदा, लेकिन देखो, इसके साथ क्या मुफ्त में आया है!"
सौदागर भी हैरान था, उसने अपने नौकर के हाथों में हीरे देखे जो कि चमचमा रहे थे और सूरज की रोशनी में और भी टिम टिमा रहे थे!
सौदागर बोला: " मैंने ऊंट ख़रीदा है, न कि हीरे, मुझे उसे फौरन वापस करना चाहिए!"
नौकर मन में सोच रहा था कि मेरा मालिक कितना बेवकूफ है...!
बोला: "मालिक किसी को पता नहीं चलेगा!" पर, सौदागर ने एक न सुनी और वह फौरन बाज़ार पहुंचा और दुकानदार को मख़मली थैली वापिस दे दी!
ऊंट बेचने वाला बहुत ख़ुश था, बोला, "मैं भूल ही गया था कि अपने कीमती पत्थर मैंने कजावे के नीचे छुपा के रख दिए थे!
अब आप इनाम के तौर पर कोई भी एक हीरा चुन लीजिए!
"सौदागर बोला," मैंने ऊंट के लिए सही कीमत चुकाई है इसलिए मुझे किसी शुक्राने और ईनाम की जरूरत नहीं है!
" जितना सौदागर मना करता जा रहा था, ऊंट बेचने वाला उतना ही ज़ोर दे रहा था!
आख़िर में सौदागर ने मुस्कुराते हुए कहा: असलियत में जब मैंने थैली वापस लाने का फैसला किया तो मैंने पहले से ही दो सबसे कीमती हीरे इसमें से अपने पास रख लिए थे!
इस कबूलनामें के बाद ऊंट बेचने वाला भड़क गया उसने अपने हीरे जवाहरात गिनने के लिए थैली को फ़ौरन खाली कर लिया!
पर वह था बड़ी पशोपेश में बोला,"मेरे सारे हीरे तो यही है, तो सबसे कीमती दो कौन से थे जो आपने रख़ लिए?"
सौदागर बोला:... " मेरी ईमानदारी और मेरी खुद्दारी।
हमें अपने अन्दर झांकना होगा कि हम में से किस किस के पास यह 2 हीरे है।
जिन जिन के पास यह 2 हीरे है वह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम. #🌸पॉजिटिव मंत्र #👍 डर के आगे जीत👌 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 सफलता के मंत्र ✔️
श्री विष्णु भगवान की कृपा
आप के जीवन में सुख, शांति
और समृद्धि लाएं......
और सकारात्मक ऊर्जा से मन
को भर दें। हर संकट दूर हो,
मन शांत रहे और जीवन
खुशियों से भर जाए!
ॐ विष्णुओंयः नमः
🙏🏻🙏🏻🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇
🌹हृदय परिवर्तन🌹
🙏🙏🙏
चिड़ियाघर में अपने तीन वर्ष के बच्चे के साथ एक ग्राम्य, सादगीभरी नवयुवती घूम रही थी। वह बच्चे को कभी गोद में लेकर, तो कभी उसकी उँगली थामे, विभिन्न जानवर दिखा रही थी।
पास ही खड़े पाँच-सात आवारा कॉलेज के लड़के उस साधारण परंतु सुंदर युवती को देखकर फब्तियाँ कस रहे थे और उसका पीछा कर रहे थे।
वे फिल्मी गीत गा-गा कर जोर-जोर से ठहाका लगाते हुए उसे चिढ़ा रहे थे, किंतु युवती ने उनकी बातों पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया और अपने बच्चे के आनंद में मग्न रही।
जब वह शेर के बाड़े के पास पहुँची, तभी उनमें से एक लड़का अतिउत्साह में ग्रिल पर चढ़ गया और अनियंत्रित होकर बाड़े के भीतर गिर पड़ा।
शेर धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ने लगा। चारों ओर अफरा-तफरी मच गई; उसके साथी भयभीत होकर केवल चिल्ला रहे थे। तभी उस ग्रामीण युवती ने बिना किसी हिचक के अपनी साड़ी उतारकर बाड़े में लटका दी।
गिरा हुआ लड़का साड़ी को मजबूती से पकड़कर ऊपर चढ़ आया और लोगों की सहायता से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
गार्ड ने सहमे हुए युवक से कहा—“पहले तुम्हारी माँ ने तुम्हें जन्म दिया था, आज इस युवती ने तुम्हें दुबारा जन्म दिया है।”
केवल ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी वह अर्धवस्त्रा युवती उन सबको उसी क्षण माँ-सी प्रतीत होने लगी; जिन आँखों में उपहास था, वहाँ अब लज्जा और कृतज्ञता थी। यही क्षण था—हृदय परिवर्तन का।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि स्त्री का सम्मान करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है; उसका उपहास नहीं, आदर होना चाहिए। साहस, करुणा और मानवीयता किसी भी बाहरी रूप या गाँव-शहर के भेद पर निर्भर नहीं होती। दूसरों की अस्मिता का अपमान करने वाले क्षणभर में ही परिस्थितियों के सामने असहाय हो सकते हैं, जबकि जिसे वे तुच्छ समझते हैं वही संकट में उनके प्राणों की रक्षक बन सकती है। अतः हमें अपने आचरण में शालीनता, संवेदनशीलता और स्त्री-सम्मान को सदैव प्रथम स्थान देना चाहिए—यही सच्चा हृदय परिवर्तन है।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #🙏गीता ज्ञान🛕 #😠कभी गुस्सा कभी प्यार🥰 #🏠घर-परिवार #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #✍️ जीवन में बदलाव
विघ्नहर्ता, बुद्धि और सफलता
के दाता श्री गणेश जी की दिव्य ऊर्जा आपके जीवन से सभी विघ्न दूर करे और आपको बुद्धि, समृद्धि और नई शुरुआत का आशीर्वाद दे।
।।ॐ_गं_गणपतये_नमः।।
🚩🚩🙏🙏🌹🌹 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ बुधवार #श्री गणेश













