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*🌹अपना कर्ज🌹* 🙏🙏🙏 *कुंतालपुर का राजा बड़ा ही न्याय प्रिय था। वह अपनी प्रजा के दुख-दर्द में बराबर काम आता था।* *प्रजा भी उसका बहुत आदर करती थी।* *एक दिन राजा गुप्त वेष में अपने राज्य में घूमने निकला, तब रास्ते में देखता है कि एक वृद्ध एक छोटा सा पौधा रोप रहा है।* *राजा कौतूहल वश उसके पास गया और बोला,* *यह आप किस चीज का पौधा लगा रहे हैं ?* *वृद्ध ने धीमें स्वर में कहा, ‘‘आम का !’’* *राजा ने हिसाब लगाया कि उसके बड़े होने और उस पर फल आने में कितना समय लगेगा।* *हिसाब लगाकर उसने अचरज से वृद्ध की ओर देखा और कहा,* *सुनो दादा इस पौधै के बड़े होने और उस पर फल आने मे कई साल लग जाएंगे,* *तब तक तुम क्या जीवित रहोगे ?* *वृद्ध ने राजा की ओर देखा।* *वृद्ध ने कहा, “आप सोच रहें होंगे कि मैं पागलपन का काम कर रहा हूँ। जिस चीज से आदमी को फायदा नहीं पहुँचता, उस पर मेहनत करना बेकार है, लेकिन यह भी तो सोचिए कि इस बूढ़े ने दूसरों की मेहनत का कितना फायदा उठाया है ?* *दूसरों के लगाए पेड़ों के कितने फल अपनी जिंदगी में खाए हैं ?* *क्या उस कर्ज को उतारने के लिए मुझे कुछ नहीं करना चाहिए?* *क्या मुझे इस भावना से पेड़ नहीं लगाने चाहिए कि उनके फल दूसरे लोग खा सकें ?* *जो केवल अपने लाभ के लिए ही काम करता है, वह तो स्वार्थी वृत्ति का मनुष्य होता है। *वृद्ध की यह दलील सुनकर राजा प्रसन्न हो गया , आज उसे भी कुछ बड़ा सीखने को मिला था..!!* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👍 डर के आगे जीत👌 #👌 आत्मविश्वास #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
👍मोटिवेशनल कोट्स✌ - { रिश्ते की दिव्यता यदि भक्त और भगवान जैसा दिव्य रिश्ता नर्हीं होता तो इंसान कभी अपनी बृत्तियाँ नहीं छोडता कभी किसी से नहीं माँगता, कभी किसी को धन्यवाद नहीं देता। CC 1 { रिश्ते की दिव्यता यदि भक्त और भगवान जैसा दिव्य रिश्ता नर्हीं होता तो इंसान कभी अपनी बृत्तियाँ नहीं छोडता कभी किसी से नहीं माँगता, कभी किसी को धन्यवाद नहीं देता। CC 1 - ShareChat
कभी मंदिर जाइए तो मांगे सुकून की दवा बाकी सब तो, मेहनत से मिल जाता है.. जय जय श्री राम जय हनुमान जी 🚩🚩🌹🌹🌻🌹🌹🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ मंगलवार #🚩सालासर बालाजी 🙏
🔱हर हर महादेव - शुभ मंगलवार राम राम जी 6066 1111 3 शुथप्रभान बजरंगबली जय 9955 [1[1[1[1 शुभ मंगलवार राम राम जी 6066 1111 3 शुथप्रभान बजरंगबली जय 9955 [1[1[1[1 - ShareChat
*🌹ईश्वर एक विश्वास🌹* 🙏🙏🙏 *एक बार मैं ऑफिस से ऑटो लिया घर जाने को। ऑटो वाले ने मुझे घर से थोड़ी दूर सड़क पर ही मार्केट में उतार दिया। बोला, माफ करना ऑटो का पेट्रोल खत्म हो गया हैं। आप अंदर से कोई रिक्शा कर लो, पास में ही तो आपको जाना हैं* *मैंने उसका किराया दिया, और मार्केट के अंदर चल दीया। मुझे प्रोफेसनल ए में जाना था, मैं वही रहता था ।* *वहां से रिक्शा तो मिल ही जाता हैं, लेकिन ढाई बज रहे थे, तो शायद खाने का टाइम होगा। इसलिए कोई भी रिक्शा नहीं मिला।* *मैने सोचा पास में ही तो घर हैं, १० मिनट में पैदल ही पहुंच जाऊंगा । तो मैं चल दिया पैदल। मार्केट के बीचोबीच ही निकलने की सोचा । उस वक्त लगभग सारे दुकान बंद थे, जैसा की दोपहर में होता हैं। मैं मोड़ पार की तो देखा समोसा वाला दुकान खुला हुआ हैं, और इस वक्त वहां लंच कर रहे बहुत सारे आस पास के फेरी और दुकान वाले हैं।* *वहां एक रिक्शा भी खड़ा था, जिसकी हालत बहुत खराब थी, पुराना सा दिख रहा था, और सीट भी फटी थी। मैं थका तो नही था ज्यादा, लेकिन पता नही क्यों उस रिक्शे पर घर जाने के लिए सवार हो गया । इतने में एक बूढ़ा दुबला लंबा सा व्यक्ति मेरी तरफ आया। वो रिक्शे का मालिक था।* *आते ही उसने पूछा, कहां जाना हैं, मैने बताया। तो उसने कहा, " क्या आप मुझे किराया पहले दे सकते हैं मैं सुबह से भूखा हूं। उसकी बात सुनकर बहुत दुख हुआ। मैने किराए के १५ रुपए उसे दिए, और जाकर अलग से एक थाली खाना भी खरीद दिया।* *उसने जल्दबाजी में सारा खाना खा लिया। फिर रिक्शा से मुझे लेकर चल दिए। रास्ते में मैंने ही पूछा की आज कमाई नहीं हुई थी क्या? तो उन्होंने कहा, मेरी रिक्शा की हालत देखकर कोई सवारी नहीं मिलती, इसे ठीक करना मेरे बस में नहीं। पैसे की तंगी हैं, और अकेला मैं ही कमाने वाला, जल्दी निकला क्योंकि रात से कुछ खाया नहीं था, पत्नी ने बोला था,देखना आज जरूर तुम्हे खाना और किराया मिलेगा। पर दिन भर कोई सवारी नहीं मिली, सब मेरे रिक्शे की हालत देखकर छोड़ देते।* *समोसे की दुकान के पास ये सोचकर खड़ा था की शायद किसी को सवारी की जरूरत हो। लेकिन गर्मागर्म खाने की खुशबू से मन में लालच आ रहा था, सोच रहा था काश खा पाता प्रभु। और देखो मेरे भगवान ने मेरी सुन ली। ना जाने कब से इस होटल के खाने को तरसता था, मगर खा नही पाता था।* *उसकी बाते सुनकर यही लगा की शायद ईश्वर ने मुझे इसलिए ही उसके पास भेजा हो ताकि उसका भोजन का प्रबंध हो सके। उसकी लीला वो ही जाने। उस दिन पहली बार ईश्वर को बहुत पास महसूस किया।* *ईश्वर एक विश्वास है, अंतरात्मा की ज्योति है, सत्य है। ईश्वर हर एक में हैं, और हर एक की सुनता भी हैं। बस हम सिर्फ उन्हें महसूस कर सकते हैं।* *मुझे नहीं पता ये आपके सवाल का उपयुक्त जवाब हैं या नहीं। लेकिन ये सच हैं की उस दिन मैंने ईश्वर की शक्ति को महसूस किया।* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👫 हमारी ज़िन्दगी #🏡मेरी जीवन शैली
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - happy | Uhoughtr' TIc Tej Gr दूरदृष्टि विकसित सोच + गहरी वैश्विक रूपांतरण | 5 अर्थात जब नज़र और नज़रिया का सही तालमेल होता है तब इतिहास रचा जाता है। happy | Uhoughtr' TIc Tej Gr दूरदृष्टि विकसित सोच + गहरी वैश्विक रूपांतरण | 5 अर्थात जब नज़र और नज़रिया का सही तालमेल होता है तब इतिहास रचा जाता है। - ShareChat
हम जैसे भी हैं तुम्हारे ही है महादेव! और अपने गुणों अवगुणों सहित, तुम्हारे चरणों में समर्पित है.. जय जय श्री त्र्यंबकेश्वर महादेव 🚩🚩🌿🌿🪷🌿🌿🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ सोमवार #🙏चारधाम यात्रा🛕
🌞 Good Morning🌞 - ShareChat
*🌹सुख-दुख सपने🌹* 🙏🙏🙏 तुम्हारी वास्तविकता उस सांस से बड़ी नहीं है, जो तुम्हारे अंदर और बाहर आती-जाती रहती है। यह तुम्हारी गति है और यही तुम्हारे लिए सबसे अधिक मूल्यवान है। तुम्हें इसे स्वीकार करना है, समझना है। केवल यही चीज है जो तुम्हें जीवित रखती है। इस भव्य आशीर्वाद के चले जाने से तुम्हारे लिए हर चीज बेकार हो जाएगी, एकदम बेकार। एक धोबी अपने गधे से बहुत प्रेम करता था क्योंकि उसी से उसकी रोजी-रोटी चलती थी। प्रेम से उसने उसका नाम ‘किशन’ रख दिया। एक दिन वह एक स्कूल के पास से गुजर रहा था। स्कूल के अंदर से आवाज सुनाई दी। मास्टर जी अपने विद्यार्थी को मारते हुए कह रहे थे, ‘तू गधा है, मार-मार कर तुझे मनुष्य बना दूंगा।’ जब धोबी ने सुना कि मास्टरजी गधे से मनुष्य बना देते हैं, तो उसने सोचा, मेरा कोई पुत्र भी नहीं है। अगर किशन मनुष्य बन गया तो कितना अच्छा होगा। वह मास्टर जी के पास गया और कहने लगा, ‘मास्टरजी, एक गधा और है, इसको भी मनुष्य बना दो।’ मास्टर जी मजाकिया किस्म के थे। उन्होंने कहा, ‘ठीक है छोड़ जा यहां, पेड़ के पास बांध दे।’ धोबी ने गधे को पेड़ के पास बांध दिया। मास्टर जी ने कहा, ‘तीन दिन बाद आना।’ तीन दिन बाद मास्टरजी ने गधे को पेड़ से खोल कर पीछे बांध दिया और गधे की जगह उस विद्यार्थी को खड़ा कर दिया। मास्टरजी भी वहीं थे। उसने कहा, ‘मास्टर जी, मेरा गधा मनुष्य बन गया?’ मास्टर जी ने कहा, 'बिल्कुल बन गया।’ धोबी ने देखा, किशन बढ़िया धोती, बंडी और टोपी पहने हुए अकड़ कर खड़ा है। उसको अच्छा लगा कि मेरा किशन मनुष्य बन गया। धोबी ने हरी-हरी घास जमीन से खींची और पास गया और कहा ‘ले किशन, ले घास ले, तू भूखा होगा।’ विद्यार्थी ने कहा, ‘चल भाग यहां से। क्या कह रहा है?' धोबी बोला, ‘किशन, तू मुझे क्यों नहीं पहचान रहा है? मैं ही तेरा धोबी हूं। मैं ही तेरा बाप हूं।’ जब धोबी ने तीन-चार यह बात कही तो विद्यार्थी ने उसको लात मार दी। धोबी ने कहा, ‘ठीक है। तेरी लात मारने की आदत अभी नहीं गई है। तू वही का वही है।’ हर मनुष्य की यही कहानी है। अपनी धारणाओं, कल्पनाओं में बह कर वह पता नहीं क्या-क्या विश्वास करने लगता है। अपने उस सपने में, वह अपने आपको भी भूल जाता है कि मैं कौन हूं, मैं यहां क्या कर रहा हूं, क्यों मुझे यह मनुष्य शरीर मिला? वह जो देख रहा है उसे एक तमाशे की तरह सब कुछ दिख रहा है। अमीरी की तरफ देखता है, गरीबी की तरफ देखता है। जब मनुष्य पूछता है, गरीब क्यों है? अमीर क्यों है? तो मनुष्य ही समझाता है कि यह पिछले जन्म के कर्मों का फल है। ये सब समाज के बनाए हुए दायरे हैं और इन्हीं दायरों में फंस कर मनुष्य दुखी होता है। इस दुख का आरोप वह भगवान पर लगाता है। देखा है, लोग पहाड़ों पर जा रहे हैं। भगवान के पास जा रहे हैं। क्या यह सच है? पहाड़ी के ऊपर स्थित मंदिर में भगवान से मिलना चाहते है, तो शौक से जाये। पर अपने अंदर स्थित भगवान को मत भूले। तुम्हारा असली भगवान तुम्हारे अंदर है। कल्पनाओं के दायरे से बाहर निकले और हकीकत को पहचाने, समझे और उसका अनुभव करे! मंगलमय प्रभात प्रणाम #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👍 डर के आगे जीत👌 #👌 आत्मविश्वास #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - happ4 Choughcr T6 Gvan  शिकायत करने से पहले देखें हमारे ही अंदर तो नहीं है। S जब अंदर शांति महसूस होगी तो बाहर की परेशानियाँ खुद-ब-खुद कम होती चली जाएँगी। happ4 Choughcr T6 Gvan  शिकायत करने से पहले देखें हमारे ही अंदर तो नहीं है। S जब अंदर शांति महसूस होगी तो बाहर की परेशानियाँ खुद-ब-खुद कम होती चली जाएँगी। - ShareChat
अंतरात्मा के अंधकार को प्रकाश के सम्मुख करने वाले हे सूर्योदय आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम 🚩🚩🌹🌹🌻🌹🌹🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव
🔱हर हर महादेव - ShareChat
सत्य और धर्म के मार्ग पर चला व्यक्ति कभी नहीं हारता... ॐ श्री शनिदेवाय नमः जय हनुमान जी महाराज 🚩🚩🌹🌹🪻🌹🌹🙏🙏 #🚩सालासर बालाजी 🙏 #🙏🏻शनिदेव भजन #🌞सुप्रभात सन्देश #🙏प्रातः वंदन
🚩सालासर बालाजी 🙏 - ShareChat
🌹मन का दर्पण🌹 🙏🙏🙏 एक गुरुकुल के आचार्य अपने शिष्य की सेवा से बहुत प्रभावित हुए । विद्या पूरी होने के बाद जब शिष्य विदा होने लगा तो गुरू ने उसे आशीर्वाद के रूप में एक दर्पण दिया । वह साधारण दर्पण नहीं था । उस दिव्य दर्पण में किसी भी व्यक्ति के मन के भाव को दर्शाने की क्षमता थी । शिष्य, गुरू के इस आशीर्वाद से बड़ा प्रसन्न था । उसने सोचा कि चलने से पहले क्यों न दर्पण की क्षमता की जांच कर ली जाए । परीक्षा लेने की जल्दबाजी में उसने दर्पण का मुंह सबसे पहले गुरुजी के सामने कर दिया । शिष्य को तो सदमा लग गया । दर्पण यह दर्शा रहा था कि गुरुजी के हृदय में मोह, अहंकार, क्रोध आदि दुर्गुण स्पष्ट नजर आ रहे है । मेरे आदर्श, मेरे गुरूजी इतने अवगुणों से भरे है ! यह सोचकर वह बहुत दुखी हुआ. दुखी मन से वह दर्पण लेकर गुरुकुल से रवाना हो गया तो हो गया लेकिन रास्ते भर मन में एक ही बात चलती रही. जिन गुरुजी को समस्त दुर्गुणों से रहित एक आदर्श पुरूष समझता था लेकिन दर्पण ने तो कुछ और ही बता दिया । उसके हाथ में दूसरों को परखने का यंत्र आ गया था । इसलिए उसे जो मिलता उसकी परीक्षा ले लेता । उसने अपने कई इष्ट मित्रों तथा अन्य परिचितों के सामने दर्पण रखकर उनकी परीक्षा ली । सब के हृदय में कोई न कोई दुर्गुण अवश्य दिखाई दिया । जो भी अनुभव रहा सब दुखी करने वाला वह सोचता जा रहा था कि संसार में सब इतने बुरे क्यों हो गए है । सब दोहरी मानसिकता वाले लोग है । जो दिखते हैं दरअसल वे हैं नहीं । इन्हीं निराशा से भरे विचारों में डूबा दुखी मन से वह किसी तरह घर तक पहुंच गया । उसे अपने माता-पिता का ध्यान आया । उसके पिता की तो समाज में बड़ी प्रतिष्ठा है । उसकी माता को तो लोग साक्षात देवतुल्य ही कहते है । इनकी परीक्षा की जाए । उसने उस दर्पण से माता-पिता की भी परीक्षा कर ली । उनके हृदय में भी कोई न कोई दुर्गुण देखा । ये भी दुर्गुणों से पूरी तरह मुक्त नहीं है । संसार सारा मिथ्या पर चल रहा है । अब उस शिष्यों के मन की बेचैनी सहन के बाहर हो चुकी थी । उसने दर्पण उठाया और चल दिया गुरुकुल की ओर । शीघ्रता से पहुंचा और सीधा जाकर अपने गुरूजी के सामने खड़ा हो गया । गुरुजी उसके मन की बेचैनी देखकर सारी बात का अंदाजा लगा चुके थे । चेले ने गुरुजी से विनम्रतापूर्वक कहा- गुरुदेव, मैंने आपके दिए दर्पण की मदद से देखा कि सबके दिलों में तरह-तरह के दोष है । कोई भी दोषरहित सज्जन मुझे अभी तक क्यों नहीं दिखा ? क्षमा के साथ कहता हूं कि स्वयं आपमें और अपने माता-पिता में मैंने दोषों का भंडार देखा । इससे मेरा मन बड़ा व्याकुल है । तब गुरुजी हंसे और उन्होंने दर्पण का रुख शिष्य की ओर कर दिया । शिष्य दंग रह गया । उसके मन के प्रत्येक कोने में राग-द्वेष, अहंकार, क्रोध जैसे दुर्गुण भरे पड़े थे । ऐसा कोई कोना ही न था जो निर्मल हो । गुरुजी बोले- बेटा यह दर्पण मैंने तुम्हें अपने दुर्गुण देखकर जीवन में सुधार लाने के लिए दिया था न कि दूसरों के दुर्गुण खोजने के लिए । जितना समय तुमने दूसरों के दुर्गुण देखने में लगाया उतना समय यदि तुमने स्वयं को सुधारने में लगाया होता तो अब तक तुम्हारा व्यक्तित्व बदल चुका होता । मंगलमय प्रभात प्रणाम #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🌸पॉजिटिव मंत्र #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
🙏गुरु महिमा😇 - ೧ haopte Thட1ப Grams बनती है पहले पात्रता परिणाम बाद में आता है। समय के साथ जो खुद को तैयार करता है, वही इतिहास रचता है। ೧ haopte Thட1ப Grams बनती है पहले पात्रता परिणाम बाद में आता है। समय के साथ जो खुद को तैयार करता है, वही इतिहास रचता है। - ShareChat
🙏 जय शनिदेव 🙏 न्याय के देव, कर्मों के स्वामी, शनिदेव महाराज की कृपा आपके जीवन से हर कष्ट हर ले... 🖤 जय शनिदेव महाराज 🖤 🏴🏴🏴🏴 #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ शनिवार #✋भगवान भैरव🌸
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🌹कर्ज वाली लक्ष्मी🌹 🙏🙏🙏 एक साधारण से घर में रहने वाला पंद्रह साल का बेटा जब अपने पिता दीनदयाल जी के पास आकर उत्साह और घबराहट भरे स्वर में बोला कि पापा, दीदी के होने वाले ससुर-सास कल आ रहे हैं और जीजाजी का फोन आया था कि दहेज को लेकर कुछ ज़रूरी बात करनी है, तो पहले से ही चिंतित दीनदयाल जी का चेहरा और बुझ गया; कुछ दिन पहले ही उनकी बड़ी बेटी की सगाई एक अच्छे, सुसंस्कृत परिवार में तय हुई थी, पर दहेज का डर उनके मन में लगातार घर करता जा रहा था। उन्होंने भारी मन से कहा कि बेटा, उनका फोन आया था कि दहेज की बात करने आ रहे हैं और यह सोचकर ही मेरा कलेजा काँप रहा है कि कहीं उनकी मांग इतनी ज़्यादा न हो जाए जिसे मैं पूरा न कर पाऊँ, कहते-कहते उनकी आँखें भर आईं और यह उदासी पूरे घर में फैल गई, माँ चुपचाप आँचल से आँखें पोंछने लगी और बेटी भी अपने कमरे में जाकर उदास हो गई। अगले दिन समधी-समधिन आए, पूरे सम्मान और सादगी से उनका स्वागत किया गया, चाय-नाश्ते के बाद जब वातावरण थोड़ा शांत हुआ तो लड़के के पिता ने कहा कि दीनदयाल जी, अब ज़रा काम की बात हो जाए, यह सुनते ही दीनदयाल जी की धड़कन तेज़ हो गई, वे हाँ-हाँ करते हुए हाथ जोड़कर बैठ गए। लड़के के पिता ने अपनी कुर्सी पास खिसकाई और धीरे से उनके कान में कहा कि मुझे दहेज के बारे में बात करनी है, दीनदयाल जी की आँखों से आँसू छलक पड़े और उन्होंने काँपते स्वर में कहा कि समधी जी, जो आपको उचित लगे बताइए, मैं पूरी कोशिश करूँगा, तब लड़के के पिता ने उनका हाथ अपने हाथ में लेकर बड़े स्नेह से कहा कि दीनदयाल जी, आप कन्यादान में कुछ भी दें या कुछ भी न दें, थोड़ा दें या ज़्यादा दें, मुझे सब स्वीकार है, लेकिन एक शर्त है कि कर्ज लेकर आप एक रुपया भी दहेज मत दीजिए, क्योंकि जो बेटी अपने पिता को कर्ज में डुबो दे, वैसी कर्ज वाली लक्ष्मी मुझे स्वीकार नहीं, मुझे ऐसी बहू चाहिए जो बिना कर्ज के मेरे घर आए और अपने संस्कार, समझदारी और परिश्रम से मेरी संपत्ति और सुख को दोगुना कर दे। यह सुनकर दीनदयाल जी स्तब्ध रह गए, उनकी आँखों से खुशी के आँसू बह निकले, उन्होंने समधी जी को गले लगाकर कहा कि आपने आज मेरी आत्मा से बोझ उतार दिया और बिल्कुल ऐसा ही होगा, उस दिन घर में जो सुकून और सम्मान का भाव फैला, उसने सबको यह एहसास करा दिया कि असली धन दहेज नहीं बल्कि सोच की समृद्धि होती है। शिक्षा... बेटी बोझ नहीं, सम्मान है; दहेज कर्ज का कारण बनकर लक्ष्मी को अपवित्र करता है, इसलिए कर्ज वाली लक्ष्मी न कोई विदा करे और न कोई स्वीकार करे, क्योंकि सच्ची समृद्धि कर्ज में नहीं, संतोष, सद्बुद्धि और सही सोच में होती है। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👍 डर के आगे जीत👌 #👌 आत्मविश्वास #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👍 सफलता के मंत्र ✔️
👍 डर के आगे जीत👌 - haopte The Te] ৬van  महत्त्व जीवन की लंबाई में नहीं बल्कि उसकी गुणवत्ता और के जीवन पर छोड़े गए प्रेम प्रभाव में है। दूसरों haopte The Te] ৬van  महत्त्व जीवन की लंबाई में नहीं बल्कि उसकी गुणवत्ता और के जीवन पर छोड़े गए प्रेम प्रभाव में है। दूसरों - ShareChat