*🌹कल की चिंता🌹*
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*एक राजा की पुत्री के मन में वैराग्य की भावनायें थीं। जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई तो राजा को उसके विवाह के लिए योग्य वर नहीं मिल पा रहा था।*
*राजा ने पुत्री की भावनाओं को समझते हुए बहुत सोच-विचार करके उसका विवाह एक गरीब संन्यासी से करवा दिया। राजा ने सोचा कि एक संन्यासी ही राजकुमारी की भावनाओं की कद्र कर सकता है।*
*विवाह के बाद राजकुमारी खुशी-खुशी संन्यासी की कुटिया में रहने आ गई। कुटिया की सफाई करते समय राजकुमारी को एक बर्तन में दो सूखी रोटियां दिखाई दीं। उसने अपने संन्यासी पति से पूछा कि रोटियाँ यहाँ क्यों रखी हैं?*
*संन्यासी ने जवाब दिया कि ये रोटियां कल के लिए रखी हैं, अगर कल खाना नहीं मिला तो हम एक-एक रोटी खा लेंगे। संन्यासी का ये जवाब सुनकर राजकुमारी हंस पड़ी। राजकुमारी ने कहा कि मेरे पिता ने मेरा विवाह आपके साथ इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें ये लगता है कि आप भी मेरी ही तरह वैरागी हैं, आप तो केवल भक्ति करते हैं और कल की चिंता करते हैं।*
*सच्चा भक्त वही है जो कल की चिंता नहीं करता और भगवान पर पूरा भरोसा करता है। अगले दिन की चिंता तो जानवर भी नहीं करते हैं, हम तो इंसान हैं।*
*अगर भगवान चाहेगा तो हमें खाना मिल जायेगा और नहीं मिलेगा तो रातभर आनंद से प्रार्थना करेंगे।*
*ये बातें सुनकर संन्यासी की आंखें खुल गई। उसे समझ आ गया कि उसकी पत्नी ही असली संन्यासी है। उसने राजकुमारी से कहा कि आप तो राजा की बेटी हैं, राजमहल छोड़कर मेरी छोटी सी कुटिया में आई हैं, जब कि मैं तो पहले से ही एक फकीर हूं, फिर भी मुझे कल की चिंता सता रही थी।*
*केवल कहने से ही कोई संन्यासी नहीं होता, संन्यास को जीवन में उतारना पड़ता है। आपने मुझे वैराग्य का महत्व समझा दिया।*
*प्रेरणास्पद कथाएं हेतु जुड़े रहे इस व्हाट्सएप से*
*शिक्षा:-*
*अगर हम भगवान की भक्ति करते हैं तो विश्वास भी होना चाहिए कि भगवान हर समय हमारे साथ हैं। उसको (भगवान) हमारी चिंता हमसे ज्यादा रहती हैं।*
*कभी आप बहुत परेशान हों, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा हो तो आप आँखें बंद करके विश्वास के साथ पुकारें, सच मानिये थोड़ी देर में आपकी समस्या का समाधान मिल जायेगा..!!*
*मंगलमय प्रभात*
*प्रणाम* #🌸पॉजिटिव मंत्र #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👫 हमारी ज़िन्दगी #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👍 सफलता के मंत्र ✔️
कर्म पर विश्वास रखें और
ईश्वर में आस्था
कितना भी मुश्किल समय हो
जरूर निकलेगा रास्ता
ॐ नमः शिवाय
🚩🚩🌿🌾🌹🌾🌿🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ सोमवार #🙏चारधाम यात्रा🛕
जैसा कल था,
वैसा आज नहीं है।
और जैसा आज है।।
वैसा कल नहीं रहेगा।।।
Enjoy your life
And smile
ॐ श्री सूर्य देवाय नमः
🚩🚩🌹🌹🌻🌹🌹🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव
🌹रसोई की दो रानियाँ🌹
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सुमन की शादी को अभी बीस दिन ही हुए थे। विदाई के वक्त उसकी माँ ने समझाया था, "बेटी, ससुराल में अपनी जगह बनानी है तो काम से जी मत चुराना। सास को पूरा आराम देना।" सुमन ने माँ की यह सीख गांठ बांध ली थी।
सुबह के छह बजते ही सुमन बिस्तर छोड़ देती।नहा-धोकर, पूजा करके सीधे रसोई में मोर्चा संभाल लेती। उसकी सास, मनोरमा जी, जो पिछले पैंतीस सालों से इस घर की धुरी थीं, जब सुबह सात बजे अपनी आदत के मुताबिक रसोई की ओर बढ़तीं, तो देखतीं कि चाय की केतली से भाप निकल रही है, नाश्ते की तैयारी पूरी है और रोटियों के लिए आटा लग चुका है।
शुरुआत के दो-चार दिन तो मनोरमा जी को बहुत अच्छा लगा। पड़ोसियों से कहती फिरीं, "मेरी बहू तो हीरा है, मुझे तो रसोई में पैर ही नहीं रखने देती। कहती है—माँ जी, अब आपकी उम्र आराम करने की है।"
लेकिन जैसे- जैसे दिन बीतते गए, वह 'आराम' मनोरमा जी को काटने लगा।
आज की कहानी
आज रविवार था। घर में सबके लिए छोले-भटूरे बनने थे। मनोरमा जी को छोले बनाने का बहुत शौक था। उनके हाथ के 'राजस्थानी छोले' पूरे खानदान में मशहूर थे। वह बड़े उत्साह से रसोई की तरफ बढ़ीं। उन्होंने सोचा कि आज बहू को सिखाएंगी कि मसालों का सही अनुपात क्या होता है।
जैसे ही वह रसोई के दरवाजे पर पहुंचीं, उनके कदम ठिठक गए।
सुमन पहले से वहां मौजूद थी। कड़ाही में तेल गर्म हो रहा था और छोले उबल चुके थे। खुशबू बता रही थी कि तड़का लग चुका है।
अरे बहू," मनोरमा जी ने फीकी मुस्कान के साथ कहा, "तूने छोले बना भी दिए? मैं सोच रही थी कि आज मैं बनाती। सबको मेरे हाथ का स्वाद पसंद है।"
सुमन ने मुस्कुराते हुए, बिना रुके भटूरे बेलते हुए कहा, "माँ जी, आप क्यों तकलीफ करती हैं? मैंने यूट्यूब पर आपकी रेसिपी देख ली थी, कोशिश की है वैसा ही बनाने की। आप बस डाइनिंग टेबल पर बैठिए, मैं गरमा-गरम लाती हूँ।"
मनोरमा जी चुपचाप वहां से हट गईं। वह जाकर अपने कमरे में खिड़की के पास बैठ गईं। बाहर का मौसम सुहाना था, लेकिन उनके अंदर एक अजीब सा तूफ़ान चल रहा था।
उन्हें लगा जैसे उनके हाथों से सिर्फ़ करछुल नहीं छीनी गई है, बल्कि इस घर पर उनकी 'सत्ता' छीन ली गई है। पिछले पैंतीस सालों से, रसोई उनका साम्राज्य था। कौन क्या खाएगा, कब खाएगा, यह सब वह तय करती थीं। इसी बहाने बेटे-पति उनसे जुड़े रहते थे। "माँ, नमक कम है," या "माँ, आज वो बना दो"—ये संवाद ही तो उनकी अहमियत का सुबूत थे।
लेकिन अब?
नाश्ते की मेज पर सबने सुमन के छोलों की तारीफ की। "वाह सुमन! मज़ा आ गया," पति ने कहा।
बिल्कुल माँ के हाथ जैसा स्वाद है," ससुर जी ने भी हामी भरी।
मनोरमा जी चुपचाप खाती रहीं। किसी ने नोटिस नहीं किया कि उनकी थाली में भटूरा वैसे का वैसा रखा था। उन्हें लग रहा था कि वह धीरे-धीरे इस घर के लिए 'अदृश्य' होती जा रही हैं। अगर काम नहीं, तो उनकी ज़रूरत क्या है? क्या वह सिर्फ़ एक पुरानी कुर्सी की तरह घर के कोने में पड़ी रहने के लिए हैं?
दोपहर को सुमन जब काम निपटाकर अपने कमरे में आराम करने गई, तो उसे प्यास लगी। वह पानी लेने रसोई में आई। वहां का नज़ारा देख वह हैरान रह गई।
मनोरमा जी रसोई के स्लैब के पास खड़ी थीं। वह मसालों के डिब्बे (मसालेदानी) को खोलकर एक-एक कटोरी को छू रही थीं। हल्दी, जीरा, धनिया... जैसे कोई माँ अपने बच्चों को सहला रही हो। उनकी आँखों से आंसू टपक रहे थे और मसालों के डिब्बे में गिर रहे थे।
सुमन दरवाज़े पर ही जम गई। उसे अपनी माँ की कही बात याद आई—"सास को आराम देना।" लेकिन उसे यह नहीं बताया गया था कि एक गृहिणी के लिए उसका काम सिर्फ़ 'काम' नहीं, उसकी 'पहचान' होता है। उसे छीन लेना, उसकी पहचान को मिटा देने जैसा है।
सुमन दबे पाँव वापस मुड़ी। वह अपने कमरे में गई और कुछ देर सोचती रही। उसे अपनी गलती का अहसास हो चुका था। वह 'आदर्श बहू' बनने की होड़ में यह भूल गई थी कि मनोरमा जी अभी 'रिटायर' होने के लिए तैयार नहीं हैं।
शाम की चाय का वक्त हुआ।
रोज की तरह सुमन ने चाय नहीं बनाई। वह अपने कमरे में बैठी रही। साढ़े पांच बज गए। बाहर ससुर जी की आवाज़ आई, "अरे भाई, आज चाय मिलेगी या नहीं?"
मनोरमा जी ने घड़ी देखी। बहू अभी तक नहीं उठी? कहीं तबीयत तो खराब नहीं?
वह चिंतित होकर सुमन के कमरे में गईं। "सुमन? बेटा, तबीयत ठीक है?"
सुमन बिस्तर पर लेटी मोबाइल देख रही थी। उसने उठकर कहा, "हाँ माँ जी, सब ठीक है। बस... आज मेरा चाय बनाने का बिल्कुल मन नहीं है। क्या आप बना देंगी? और हां, वो अदरक वाली। मेरे हाथ से वो स्वाद ही नहीं आता जो आपके हाथ में है। सुबह छोले भी फीके ही लगे मुझे तो।"
मनोरमा जी का चेहरा, जो सुबह से बुझा हुआ था, अचानक से बल्ब की तरह जल उठा। उनकी आँखों में वही पुरानी चमक लौट आई।
"अरे पगली, बस इतनी सी बात? मुझे लगा पता नहीं क्या हो गया। तू लेट, मैं अभी बनाती हूँ। और सुन, शाम के लिए पकौड़े भी तल दूँ? मौसम अच्छा है।"
प्रेरणास्पद कथाएं
"बिल्कुल माँ जी!" सुमन ने उत्साह से कहा। "मुझे भी आपके हाथ के आलू-प्याज़ के पकौड़े खाने हैं।"
मनोरमा जी पल्लू कसते हुए, एक नई ऊर्जा के साथ रसोई की तरफ भागीं। खट-खट, छन-छन की आवाज़ें आने लगीं। वह शोर नहीं था, वह मनोरमा जी के ज़िंदा होने का संगीत था।
सुमन ने छिपकर दरवाजे से देखा। मनोरमा जी गैस के सामने ऐसे खड़ी थीं जैसे कोई महारानी अपने सिंहासन पर खड़ी हो। वह हुक्म चला रही थीं—"अरे सुरेश (नौकर), ज़रा बेसन का डिब्बा तो उतार।"
उस रात खाने के बाद, सुमन धीरे से मनोरमा जी के पास गई।
"माँ जी, एक बात कहूँ?"
"हाँ बोल बहू।"
"हम एक सौदा कर लें?" सुमन ने मुस्कुराते हुए कहा। "सुबह की भागदौड़ वाली रसोई मेरी, क्योंकि उसमें सिर्फ़ पेट भरना होता है। लेकिन शाम की और छुट्टी वाली रसोई आपकी, क्योंकि उसमें 'स्वाद' और 'प्यार' चाहिए होता है। मुझसे यह भारी काम अकेले नहीं होता। मुझे आपकी मदद चाहिए। मैं आपकी असिस्टेंट बनूँगी, सब्जियां काट दूँगी, आटा लगा दूँगी... लेकिन 'हेड शेफ' आप ही रहेंगी।"
मनोरमा जी ने सुमन को गले लगा लिया। उनकी आँखों में फिर आंसू थे, लेकिन इस बार ये खुशी के थे। उन्हें समझ आ गया था कि बहू ने कामचोरी के लिए नहीं, बल्कि उनका मान रखने के लिए यह कहा है।
"चल पगली," मनोरमा जी ने हंसते हुए कहा। "मक्खन लगाना तो कोई तुझसे सीखे। ठीक है, मंजूर है सौदा।"
उस दिन सुमन ने जाना कि घर की ज़िम्मेदारी लेने का मतलब सिर्फ़ 'काम करना' नहीं होता, बल्कि घर के हर सदस्य को यह महसूस कराना होता है कि वे 'ज़रूरी' हैं। उसने अपनी सास को आराम नहीं, बल्कि उनका खोया हुआ 'वजूद' लौटा दिया था।
अब उस घर की रसोई में दो रानियों का राज था। एक के पास जोश था, और दूसरे के पास तजुर्बा। और जिस घर में ये दोनों मिल जाएं, वहां का खाना कभी बेस्वाद नहीं हो सकता।
मंगलमय प्रभात
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🌹"एक रोटी, हज़ार रिश्ते"🌹
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एक बार मैं अपने दोस्त के साथ पासपोर्ट ऑफिस गया। उसे तत्काल कैटेगरी में अपना पासपोर्ट अर्जेंट चाहिए था।
हम लंबी लाइनों में खड़े रहे।फॉर्म भरे।
घंटों इंतज़ार किया। जब आखिरकार फीस जमा करने की हमारी बारी आई, तो क्लर्क ने खिड़की बंद कर दी और साफ-साफ कहा, “टाइम खत्म हो गया। कल आना।”मैंने उनसे नरमी से रिक्वेस्ट की।“हम पूरे दिन से यहीं हैं। प्लीज़, बस फीस ही तो है।”वह चिढ़ गया।
“इसमें मेरी गलती नहीं है कि तुमने पूरे दिन इंतज़ार किया। सरकार से कहो कि और स्टाफ रखे। मैं सुबह से काम कर रहा हूँ।”मेरा दोस्त निराश हो गया और बोला,“चलो चलते हैं। कल आएंगे।”
लेकिन मेरे अंदर से किसी ने कहा, रुको।क्लर्क ने अपना बैग उठाया और चला गया। मैं चुपचाप उसके पीछे गया। वह कैंटीन में अकेला बैठा था, उसने अपना लंचबॉक्स खोला और खाना खाने लगा।
मैं उसके सामने वाली बेंच पर बैठ गया।मैं मुस्कुराया और धीरे से पूछा,
“आप रोज़ाना बहुत से ज़रूरी लोगों से मिलते होंगे, है ना?” उसने सिर हिलाया। “हाँ। IAS ऑफिसर, IPS ऑफिसर, MLA… बहुत से लोग मेरी कुर्सी के सामने इंतज़ार करते हैं।”
मैं थोड़ा रुका और फिर कुछ ऐसा पूछा जिसकी उम्मीद नहीं थी।
“क्या मैं आपकी प्लेट से एक रोटी ले सकता हूँ?”
वह हैरान होकर देखने लगा… फिर बोला,“हाँ, ज़रूर।” मैंने एक रोटी ली, उसे सब्ज़ी के साथ खाया और ईमानदारी से कहा,“आपकी पत्नी बहुत अच्छा खाना बनाती हैं।”
फिर मैंने धीरे से कहा,“आप एक ज़रूरी कुर्सी पर बैठते हैं। बहुत से ताकतवर लोग आपके पास आते हैं।
लेकिन.. ! "क्या आप अपनी पोस्ट की इज़्ज़त करते हैं..!”
वह कन्फ्यूज्ड होकर देखने लगा।
“तुम्हारा क्या मतलब है?”मैंने शांति से जवाब दिया,“अगर आप अपनी दी गई ज़िम्मेदारी की इज़्ज़त करते, तो आप लोगों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं करते।”
मैंने बिना गुस्से के, सिर्फ सच कहा।
“आप अकेले खाते हैं। आप अकेले बैठते हैं।आप लोगों की मदद करने के बजाय उन्हें वापस भेज देते हैं।
लोग दूर-दूर से थके-हारे और बेबस होकर आते हैं, और आपका जवाब होता है कि सरकार से कहो कि और स्टाफ रखे।
लेकिन एक पल के लिए सोचिए…
अगर और लोग रखे जाएंगे, तो क्या आपकी अहमियत कम नहीं हो जाएगी?” वह चुप हो गया। मैंने कहा,
“भगवान ने तुम्हें सिर्फ़ पैसे कमाने का नहीं, बल्कि रिश्ते बनाने का मौका दिया है। लेकिन इसका इस्तेमाल करने के बजाय, तुम उन्हें खो रहे हो।”
मैंने धीरे से कहा,“तुम बहुत सारा पैसा कमा सकते हो, लेकिन अगर तुम रिश्ते नहीं कमाते, तो उस पैसे का क्या करोगे?अगर बर्ताव सही नहीं है, तो परिवार भी खुश नहीं रहता।”उसकी आँखों में आँसू आ गए।
उसने फुसफुसाकर कहा,“आप सही कह रहे हैं, सर…मेरी पत्नी झगड़े के बाद चली गई। मेरे बच्चे मुझे ज़्यादा पसंद नहीं करते। मेरी माँ मुझसे मुश्किल से बात करती है।वह सुबह कुछ रोटियाँ बनाती है, और मैं उन्हें यहाँ अकेले खाता हूँ।मुझे घर जाने का मन भी नहीं करता।मुझे नहीं पता कि मुझसे कहाँ गलती हुई।”मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा और धीरे से कहा,
लोगों से जुड़ो। अगर तुम किसी की मदद कर सकते हो, तो करो।
"मैं यहाँ अपने लिए नहीं आया था, मेरे पास पहले से पासपोर्ट है, बल्कि अपने दोस्त के लिए आया था। बिना किसी स्वार्थ के। इसीलिए मेरे दोस्त हैं… और तुम अकेला महसूस करते हो।”वह खड़ा हुआ, अपनी आँखें पोंछीं, और कहा,“कृपया खिड़की पर आइए। मैं आज फॉर्म ले लूँगा।”उसने काम कर दिया।जाने से पहले, उसने मेरा फ़ोन नंबर माँगा।
साल बीत गए। रक्षा बंधन पर, मुझे एक कॉल आया।“रवींद्र कुमार चौधरी बोल रहा हूँ, सर। कई साल पहले, आप पासपोर्ट ऑफिस आए थे… और आपने मेरे साथ रोटी खाई थी।” मेरा दिल थम गया।
मुझे सब कुछ याद आ गया। उसने खुशी से कहा,“सर, उस दिन के बाद, मैं सोचता रहा। बहुत से लोग पैसे देते हैं लेकिन कोई भी बैठकर आपके साथ खाना नहीं खाता।”उसने अपनी बात जारी रखी, आवाज़ भावनाओं से भरी हुई थी: “अगले ही दिन, मैं अपनी पत्नी के मायके गया।वह वापस आने को तैयार नहीं थी।तो मैंने उसकी थाली से एक रोटी उठाई और पूछा, ‘क्या तुम मुझे खिलाओगी?’ वह फूट-फूटकर रोने लगी।“वह मेरे साथ घर आ गई। मेरे बच्चे भी आ गए।अब, सर, मैं पैसे नहीं कमाता। *मैं रिश्ते कमाता हूँ। जो भी मेरे पास आता है, मैं उसका काम खुशी-खुशी करता हूँ।” फिर उसने धीरे से कहा, “मैंने तुम्हें आज हैप्पी रक्षा बंधन विश करने के लिए बुलाया था।
तुमने मुझे रिश्ते बनाना सिखाया।”
“मेरी बेटी की शादी अगले महीने है।
तुम ज़रूर आना और उसे आशीर्वाद देना।
तुमने एक रिश्ता बनाया है।”
मैंने सुना... चुपचाप... बहुत भावुक होकर।मैंने कभी सोचा नहीं था कि एक रोटी शेयर करने से पूरी ज़िंदगी बदल सकती है।
सीख:-
लोगों को नियमों, ताकत या पैसे से नहीं जीता जाता। उन्हें दया, इज़्ज़त और जुड़ाव से जीता जाता है।
मंगलमय प्रभात
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सकारात्मक सोच रखिए
हर चुनौती में एक अवसर
छिपा होता है
ॐ श्री शनिदेवाय नमः जय हनुमान जी
🚩🚩🌹🌹🌻🌹🌹🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ शनिवार #🙏शुभ शनिवार 🌹
छोटी सी चाल, बड़ा सा पुण्य
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सुबह की हल्की धूप में सड़क किनारे एक बूढ़ी माँ, अपनी पुरानी सी डलिया में संतरे सजाए बैठी रहती थी। चेहरे पर झुर्रियाँ थीं, पर आँखों में अजीब सा सुकून।
उसी राह से रोज़ एक युवा अपनी पत्नी के साथ गुज़रता। वह अक्सर उसी बूढ़ी माँ से संतरे खरीदता।
हर बार वही दृश्य दोहराया जाता—
युवा एक संतरा उठाता, उसकी एक फाँक तोड़कर चखता और माथा सिकोड़ते हुए कहता,“अरे माँ, ये तो कुछ कम मीठा लग रहा है!”
बूढ़ी माँ भी संतरा चखती, मुस्कुराकर जवाब देती—“ना बाबू… मीठा तो है।”
युवा हल्की सी गर्दन झटकता, वही संतरा छोड़ देता और बाकी संतरे लेकर आगे बढ़ जाता।
यह सिलसिला रोज़ का था।
एक दिन पत्नी से रहा नहीं गया। उसने पूछा—“तुम रोज़ यही नौटंकी क्यों करते हो? संतरे तो सच में मीठे होते हैं!”
युवा ने मुस्कुराते हुए कहा—“वो माँ संतरे बहुत मीठे बेचती है… लेकिन खुद कभी नहीं खाती। मेरे पास उसे सीधे खिलाने का हक़ नहीं,तो मैं बहाने से उसे संतरा खिला देता हूँ।”
कुछ दिन बाद पास में सब्ज़ी बेचने वाली औरत ने बूढ़ी माँ से कहा—
“वो लड़का तो अजीब है, हर बार चखता है…पर मैंने देखा है, तुम हर बार उसकी चख-चख में पलड़े में ज़्यादा संतरे डाल देती हो।”
बूढ़ी माँ की आँखें भर आईं।
वह बोली—“वो संतरे नहीं चखता बेटी… वो मेरा अकेलापन चखता है।
वो समझता है मैं उसकी चाल नहीं समझती,पर मैं उसकी नीयत पढ़ लेती हूँ।इसीलिए पलड़े पर संतरे अपने आप बढ़ जाते हैं।”
फिर आसमान की ओर देखते हुए बोली—“मेरी हैसियत से ज़्यादा मेरी थाली में परोसने वाले…तू लाख मुश्किलें भी दे दे मालिक,मुझे तुझ पर भरोसा है।”
और सच ही तो है—छीनकर खाने वालों का पेट कभी नहीं भरता,और बाँटकर खाने वाला कभी भूखा नहीं मरता।
शिक्षा / संदेश
सच्ची सेवा दिखावे से नहीं, नीयत से होती है।जो मिला है, वही पर्याप्त मानना सीखो। जिसका मन संतुष्ट है, उसके पास सब कुछ है। जो बाँटना सीख गया,वो जीवन की सबसे बड़ी कमाई पा गया।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👌 आत्मविश्वास #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #💔पुराना प्यार 💔 #😎 Attitude कोट्स ✍
जो पॉजिटीव सोचता है
उसे कोई जहर नहीं मार सकता है
और जो नेगेटिव सोचता है उसे कोई दवाई नहीं बचा सकती है
एक खूबसूरत सोच ही
एक खूबसूरत जिन्दगी को जन्म देती है
जय महा लक्ष्मी माता सदा ही सहाय
🚩🚩🌹🌹🪷🌹🌹🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ शुक्रवार #🙏 माँ वैष्णो देवी
नेकियां करते रहिए क्योंकि ये हमारे जीवन की सुरक्षा निधि है
हमारे जीवन में जब कभी भी तूफान आएगा तो यही नेकियां हमारे लिए कश्ती का काम करेंगी
जय श्री लक्ष्मी नारायण
🚩🚩🌻🌻🪷🌻🌻🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇
*मान्यवर !*
*भारत वर्ष के प्रमुख पर्व होली और रंगोत्सव के साथ आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ*॥
*भगवान श्री रामचंद्र की जय !
आप सभी का कल्याण करिए*॥
*नमन वंदन🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #होली #शुभ बुधवार













