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🌹ज़िंदगी की समझा🌹 🙏🙏🙏 किसी छोटी-सी बात पर पत्नी से तीखी नोकझोंक हो गई। गुस्से में वह बड़बड़ाता हुआ घर से बाहर निकल पड़ा। मन ही मन तय कर लिया—अब इस झगड़ालू औरत से बात नहीं करूँगा। उसे लगता था कि पत्नी हर समय शिकायत करती है, सुकून से जीने ही नहीं देती। ठंडी हवा के बीच वह पास के चाय-स्टॉल पर पहुँचा, चाय मंगाई और सामने रखे स्टूल पर बैठ गया। अचानक पास से आवाज़ आई “इतनी सर्दी में बाहर चाय पी रहे हो?” उसने गर्दन घुमाई। बगल के स्टूल पर एक बुजुर्ग बैठे थे। उसने झुंझलाकर जवाब दिया—“आप भी तो इतनी सर्दी में बाहर हैं।” बुजुर्ग हल्की मुस्कान के साथ बोले—“मैं तो अकेला हूँ बेटा, न कोई गृहस्थी, न कोई साथी। तुम तो शादीशुदा लगते हो।” बस फिर क्या था, उसके दिल का गुबार फूट पड़ा। “पत्नी जीने नहीं देती। हर वक्त चिकचिक। घर में चैन नहीं, इसलिए बाहर भटकना पड़ता है।” गर्म चाय का घूँट भीतर गया और कड़वाहट शब्दों में बाहर आ गई बुजुर्ग की आँखें गहरी हो गईं। वे धीमे स्वर में बोले—“पत्नी जीने नहीं देती? बरखुरदार, ज़िंदगी ही पत्नी से होती है। आठ साल हो गए मेरी पत्नी को गए हुए। जब ज़िंदा थी, उसकी कद्र नहीं की। आज वह चली गई तो हर पल याद आती है। बड़ा घर है, धन-दौलत है, बच्चे अपने-अपने काम में व्यस्त हैं, लेकिन घर सूना है। उसके बिना सब बेजान हो गया। वही मेरे जीवन की धड़कन थी… मेरे घर की भी।” यह कहते-कहते उनकी आँखों में आँसू भर आए। वह आदमी कुछ पल स्तब्ध बैठा रहा। उसने चाय वाले को पैसे दिए, बुजुर्ग को भरपूर नज़र से देखा और बिना एक मिनट गंवाए घर की ओर चल पड़ा। घर के पास पहुँचा तो दूर से ही देखा—पत्नी दरवाज़े पर खड़ी थी, डबडबाई आँखों से रास्ता निहार रही थी। उसे देखते ही बोली—“कहाँ चले गए थे? जैकेट भी नहीं पहनी, ठंड लग जाएगी।” वह मुस्कुराया—“तुम भी तो बिना स्वेटर के खड़ी हो।” उस पल दोनों ने बिना शब्दों के एक-दूसरे का प्यार पढ़ लिया। छोटी-छोटी शिकायतें कहीं खो गईं, और रिश्ते की गर्माहट फिर से लौट आई। शिक्षा : जीवन में जो हमारे पास है, वही सबसे बड़ा धन है। अक्सर हम अपनों की मौजूदगी को हल्के में ले लेते हैं और उनकी कमी का एहसास तब होता है जब वे दूर हो जाते हैं। पति-पत्नी का रिश्ता तकरार से नहीं, समझ और कद्र से मजबूत होता है। जो आज प्राप्त है, वही पर्याप्त मानना सीख लें, क्योंकि संतुष्ट मन के पास ही वास्तव में सब कुछ होता है। मंगलमय प्रभात प्रणाम #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🏠घर-परिवार #💑पति पत्नी का रिश्ता
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - hapgi . TIc Tej Gyn ٩٢ ٩٤ ٩٩ ٤ जिसमें न पाने की चाह, बचने की याचना होती है। 7 होता है तो केवल स्वीकार और समर्पण। hapgi . TIc Tej Gyn ٩٢ ٩٤ ٩٩ ٤ जिसमें न पाने की चाह, बचने की याचना होती है। 7 होता है तो केवल स्वीकार और समर्पण। - ShareChat
🙏ॐ हं हनुमते नम🙏 *सुख,शान्ति और समृद्धि की मंगल कामना के साथ आपका दिन शुभ मंगलमय हो... जय श्री राम जय हनुमान जी 🌷💐🌹🌸 🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ मंगलवार #जय हनुमान
🌞 Good Morning🌞 - ஈ 8சச~ _ _ __ _ जय श्री हनुमान नासे रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा भगवान हनुमान आपके जीवन में सुख समृद्धि, संपन्नता की वृद्धि करें यही करवल् पार्थना है। iR m 411 ನ3 0 -175177]7 A গ্রামবাস    43 & 4' & E ٤ ٤ ٤ IH ٤ ٤ ٤ == ೯ राम ೯೯ 3 C @ ^ = %  1 % ನ a 0 {9 -_ 4 ம__ ய ৬17 a 4418 பப  ٧  H Uaskv Uaishnac  ஈ 8சச~ _ _ __ _ जय श्री हनुमान नासे रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा भगवान हनुमान आपके जीवन में सुख समृद्धि, संपन्नता की वृद्धि करें यही करवल् पार्थना है। iR m 411 ನ3 0 -175177]7 A গ্রামবাস    43 & 4' & E ٤ ٤ ٤ IH ٤ ٤ ٤ == ೯ राम ೯೯ 3 C @ ^ = %  1 % ನ a 0 {9 -_ 4 ம__ ய ৬17 a 4418 பப  ٧  H Uaskv Uaishnac - ShareChat
🙏हर हर महादेव🙏 भगवान शिव, माता पार्वती, श्री गणेश और कार्तिकेय जी की दिव्य कृपा आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैलाए। भोलेनाथ का आशीर्वाद सदा आपके साथ रहे, 🕉️🕉️🌹🌹💐💐🌷🌷🌸 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ सोमवार #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱
🌸 जय श्री कृष्ण😇 - 3 FR: शिवाय 3 FR: शिवाय - ShareChat
🌹नास्तिक बना आस्तिक🌹 🙏🙏🙏 उदयराम शहर का एक अत्यंत कुशाग्र बुद्धि वाला तर्कशास्त्री था, जिसकी पहचान एक ऐसे कट्टर नास्तिक के रूप में थी जो केवल प्रत्यक्ष प्रमाण और वैज्ञानिक आंकड़ों पर ही विश्वास करता था और अक्सर सभाओं में यह चुनौती देता था कि यदि ईश्वर है तो वह दिखाई क्यों नहीं देता, क्योंकि उसकी दृष्टि में जो अस्तित्वहीन है वही अदृश्य है। वह जीवन को रसायनों और भौतिक क्रियाओं का एक आकस्मिक मेल मात्र मानता था, जिसमें भावना या प्रार्थना का कोई स्थान नहीं था, परंतु उसके इस कठोर तार्किक संसार को एक ऐसी घटना ने झकझोर दिया जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। एक बार अपने शोध कार्य के लिए वह हिमालय की उन दुर्गम और निर्जन पहाड़ियों के भ्रमण पर था जहाँ प्रकृति का सौंदर्य जितना मनमोहक था, उसकी कठोरता उतनी ही जानलेवा थी। एक शाम जब वह एक संकरी ढलान से गुजर रहा था, अचानक तेज़ बारिश और भूस्खलन के कारण उसका पैर फिसला और वह हज़ारों फीट गहरी खाई की ओर लुढ़कने लगा, लेकिन किस्मत से उसकी शर्ट एक मज़बूत झाड़ी के तने में फंस गई और वह हवा में झूलने लगा। नीचे मौत का अंधेरा था और ऊपर बारिश की वजह से फिसलन भरी चट्टानें थीं जिन्हें पकड़ना नामुमकिन था; उदयराम ने कई घंटों तक मदद के लिए चीख-पुकार मचाई, लेकिन उस वीरान घाटी में उसकी आवाज़ केवल प्रतिध्वनि बनकर उसी के पास वापस आ रही थी। जैसे-जैसे रात गहराने लगी और हाड़ कंपाने वाली ठंड ने उसके शरीर को सुन्न करना शुरू किया, उसके मस्तिष्क के सारे तार्किक समीकरण विफल होने लगे और उस क्षण में जब मौत बिल्कुल सामने खड़ी थी, उसके अहंकार की दीवार ढह गई और उसके बंद होठों से अनायास ही एक पुकार निकली, "हे ईश्वर, यदि तुम कहीं भी हो, तो आज मुझे बचा लो, मैं हार चुका हूँ।" ठीक उसी समय जब झाड़ी की जड़ें उखड़ने ही वाली थीं, ऊपर की चट्टान पर एक बूढ़ा चरवाहा हाथ में मशाल और एक लंबी रस्सी लिए प्रकट हुआ, जैसे वह पहले से ही उदयराम की प्रतीक्षा कर रहा हो। उस वृद्ध ने बड़ी कुशलता और अपनी पूरी ताकत लगाकर उदयराम को ऊपर खींच लिया और उसे अपनी कुटिया में ले जाकर आग के पास बिठाया ताकि वह ठंड से उबर सके। जब उदयराम की चेतना वापस आई, तो उसने कांपते हुए स्वर में पूछा कि वह वृद्ध इस अंधेरी, तूफानी रात में इस खतरनाक ढलान पर क्यों आया था जबकि वहां कोई रास्ता भी नहीं था, तो वृद्ध ने बहुत सहजता से उत्तर दिया कि वह अपने घर में सो रहा था, लेकिन अचानक उसके भीतर एक ऐसी बेचैनी और व्याकुलता उठी जैसे कोई उसे पुकार रहा हो और एक अज्ञात शक्ति ने उसे मजबूर किया कि वह अपनी रस्सी उठाए और बिना कुछ सोचे इस दिशा में चल पड़े। उदयराम यह सुनकर स्तब्ध रह गया क्योंकि गणितीय रूप से उस निर्जन पहाड़ पर, उस सटीक समय पर, एक व्यक्ति का पहुँच जाना केवल 'संयोग' नहीं हो सकता था; उसे पहली बार अहसास हुआ कि ब्रह्मांड में एक ऐसी सूक्ष्म और महान चेतना कार्य कर रही है जो तर्कों की सीमा से बहुत दूर है और जो हमारे मौन को भी सुनती है। वह समझ गया कि विज्ञान भले ही यह समझा दे कि हृदय कैसे धड़कता है, लेकिन यह केवल वह सर्वोच्च सत्ता ही तय करती है कि वह धड़कन कब और क्यों सुरक्षित रहेगी। उस रात उदयराम का नास्तिक अहंकार हिमालय की बर्फ की तरह पिघल गया और उसने स्वीकार किया कि श्रद्धा का मार्ग वहीं से शुरू होता है जहाँ तर्क की सीमा समाप्त हो जाती है, और इस प्रकार वह एक नया उदयराम बनकर लौटा जिसकी आंखों में अब केवल शून्य नहीं, बल्कि एक दिव्य विश्वास की ज्योति थी। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👌 आत्मविश्वास #👫 हमारी ज़िन्दगी #🙏कर्म क्या है❓ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #🌸पॉजिटिव मंत्र
👌 आत्मविश्वास - hangiur; Tle Tej ৬Tan  जब विचार थम जाते हैं इच्छाएँ शांत हो जाती हैं तब चेतना के आकाश में शिव का अनुभव होता है। hangiur; Tle Tej ৬Tan  जब विचार थम जाते हैं इच्छाएँ शांत हो जाती हैं तब चेतना के आकाश में शिव का अनुभव होता है। - ShareChat
*🌹भाव के भूखे🌹* 🙏🙏🙏 *एक पर्वत पर शिवजी का एक सुंदर मन्दिर था। यहाँ बहुत से लोग शिवजी की पूजा के लिए आते थे। उनमें दो भक्त एक ब्राह्मण और दूसरा एक भील, नित्य आने वालों में थे।* *ब्राह्मण प्रतिदिन शिवजी का दूध से अभिषेक करता, उन पर फूल,पत्तियां चढ़ाता, गूगल जलाता और चंदन का लेप करता !* *भील के पास तो ये सब वस्तुएं नही थी, सो वह हाथी के मदजल से शिवजी का अभिषेक करता, उन पर जंगल की फूल पत्तियां चढ़ाता और भक्तिभाव से शिवजी को रिझाने को नृत्य करता !* *एक दिन ब्राह्मण जब मन्दिर गया तो उसने देखा भगवान शिव भील से बात कर रहे हैं !* *ब्राह्मण को यह अच्छा नही लगा और तुरंत भगवान शिव से बोला- भगवन क्या आप मुझसे असंतुष्ट है ?* *मै ऊंचे कुल में पैदा हुआ हूं तथा बहुमूल्य पदार्थो से आपकी पूजा करता हूं। जबकि यह भील नीच कुल से है और अपवित्र पदार्थों से आपकी उपासना करता है !* *शिवजी ने कहा- ब्राह्मण तुम ठीक कहते हो, किन्तु इस भील का जितना स्नेह मुझ पर है उतना तुम्हारा नही !* *एक दिन शिवजी ने अपनी एक आंख गिरा दी। ब्राह्मण नियत समय पर पूजा करने आया। उसने देखा शिवजी की एक आंख नही है। पूजा करके वह अपने घर लौट आया !* *उसके बाद भील आया,उसने देखा भगवान शिव की एक आंख नही है। वो तुरंत अपनी आंख निकालने का प्रयास करने लगा !* *तभी ब्राह्मण मन्दिर में पहुँच गया और भील को ऐसा करते देख तुरंत भगवान शिव के चरणों में लेट गया और भगवान शिव से कहने लगा- प्रभु ! आपका यही सच्चा भक्त हैं इसे रोको, ये नेत्रहीन हो जाएगा !* *भगवान शिव बोले- तुमने ऐसा सोचा भी नही, इसलिए मैं कहता हूं कि भील ही मेरा सच्चा भक्त हैं !* *भगवान शिव की कृपा से भील नेत्रहीन होने से भी बच गया और ब्राह्मण के अहंकार के नेत्र भी खुल गए !* *ईश्वर केवल भावना के भूखे हैं। भावना शुद्ध होगी तो परमात्मा पीछे पीछे आ जाएंगे।* *ॐ त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम।*🙏 *उर्वारुकमिव वंदना मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।*🙏 *ॐ कर्पूरगौरं कारुणावतारं,* *संसारसारं भुजगेंद्रहारम्।* *सदावसन्तं हृदयारविंदे,* *भवंभवानी साहितं नमामि।।* *ऐसी ही प्रेरणास्पद कथायें संस्कारित कहानियां पढ़ने के लिये जुड़े रहे* *मंगलमय प्रभात* *स्नेह वंदन* *प्रणाम* #👍 डर के आगे जीत👌 #🌸पॉजिटिव मंत्र #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास
👍 डर के आगे जीत👌 - 25 happy| Choughes ThTaa 2024    510R WISDOM दिव्य भक्ति की परिभाषा अहंकाररहित (दिव्य) भक्त विश्व में क्रांति लाकर, विश्व की चेतना बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। fg उनके भक्ति एक ऐसा महासागर है, जिसमें के बाद, उन्हें की हर बात दुनिया ভুননী छोटी लगने लगती है। 25 happy| Choughes ThTaa 2024    510R WISDOM दिव्य भक्ति की परिभाषा अहंकाररहित (दिव्य) भक्त विश्व में क्रांति लाकर, विश्व की चेतना बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। fg उनके भक्ति एक ऐसा महासागर है, जिसमें के बाद, उन्हें की हर बात दुनिया ভুননী छोटी लगने लगती है। - ShareChat
🙏हे भोलेनाथ! अनेकों सुगंधित पुष्पों के साथ महाशिवरात्रि पर्व पर आपके आगमन की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।🙏🙏 हर हर महादेव 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🙏🌹🌷💐🌸 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ रविवार
🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 - शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं शिव पूरे ब्रह्मांड का अस्तित्व है ঊননা ক ফপ ম शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं शिव पूरे ब्रह्मांड का अस्तित्व है ঊননা ক ফপ ম - ShareChat
🌹कवच🌹 🙏🙏🙏 रीवा की टिकट जिस स्लीपर कोच में थी, उसमें पुरुष यात्रियों की संख्या असहज करने वाली थी। दो–तीन बुज़ुर्ग औरतों के अलावा कोई परिचित चेहरा नहीं दिखा। वह खिड़की के पास सिमट कर बैठ गई। यह उसका पहला अकेला सफ़र था—दिल तेज़ धड़क रहा था, हथेलियाँ पसीने से भीग चुकी थीं। स्टेशन छूटते ही डिब्बे में बैठे कुछ युवक तेज़ आवाज़ में हँसने लगे। कोई गाना गुनगुना रहा था, कोई मोबाइल पर वीडियो चला रहा था। रीवा का मन बार-बार अनहोनी की आशंका से भर उठता। उसने किताब खोल ली, पर अक्षर आँखों के सामने तैर रहे थे। रात गहराने लगी। ट्रेन की खटर-पटर के बीच उसका डर और गाढ़ा हो गया। तभी सामने की सीट से धीमी, संयत आवाज़ आई— “बहन जी, अगर बुरा न लगे तो पूछूँ, आप अकेली सफर कर रही है?," रीवा चौंकी। सिर उठाकर देखा—सामने एक साधारण-सा युवक बैठा था। आँखों में शरारत नहीं, बल्कि अपनापन था। “जी… हाँ,” उसने संक्षेप में उत्तर दिया। “घबराइए मत,” वह मुस्कुराया, “मैं आदित्य हूँ। अगर किसी तरह की मदद चाहिए हो तो बेझिझक कहिए।” इतना कहकर वह फिर अपने मोबाइल में लग गया। न कोई अतिरिक्त प्रश्न, न घूरती नज़र। रीवा को पहली बार लगा कि उसका डर थोड़ा ढीला पड़ा है। कुछ देर बाद टीटी आया। आदित्य उठा, रीवा की टिकट भी दिखा दी। फिर बोला—“आप चाहें तो ऊपरी बर्थ पर सो जाइए। नीचे बैठे रहना रात में असुविधाजनक होता है।” “पर आपकी सीट…?” “चिंता मत कीजिए, मुझे आदत है।” रीवा ने पहली बार खुलकर मुस्कुराया। रात के बीच एक अजीब-सा सुकून उतर आया। जब-तब आदित्य पूछ लेता—“सब ठीक है न?” किसी प्रहरी की तरह, बिना जताए। सुबह की हल्की रोशनी के साथ स्टेशन आने लगा। रीवा नीचे उतरी। मन में कृतज्ञता उमड़ पड़ी। “आपका बहुत धन्यवाद,” उसने कहा, “अगर आप न होते तो यह सफ़र शायद इतना आसान न होता।” आदित्य हल्का-सा हँसा। “धन्यवाद की क्या बात है, बहन। हम सब किसी के बेटे, किसी के भाई हैं। अगर हम ही डर बन जाएँ, तो भरोसा बचेगा कहाँ?” रीवा ने झिझकते हुए कहा— “कम से कम अपना नंबर तो दे दीजिए… कभी ज़रूरत पड़े तो—” आदित्य ने सिर हिलाकर मना कर दिया। “ज़रूरत तब पड़े, जब इंसानियत कम हो। कोशिश कीजिए कि किसी और को भी आज सुरक्षित महसूस करा सकें।” इतना कहकर वह ट्रेन से उतर गया। रीवा देर तक खड़ी रही। भीड़ में वह कब ओझल हो गया, पता ही नहीं चला। उसकी आँखें नम थीं, पर दिल आशा से भरा हुआ। उस दिन रीवा ने समझा— रक्षक हमेशा वर्दी में नहीं होते। कभी वे साधारण कपड़ों में, बिना नाम-पते के, बस भरोसे की ढाल बनकर मिल जाते हैं। काश… यह देश ऐसे ही कवचों से भर जाए— जहाँ बेटियाँ डर नहीं, विश्वास लेकर सफ़र करें। जहाँ पुरुष शक्ति नहीं, संवेदना से पहचाने जाएँ। और जहाँ सुरक्षा किसी उपकार की तरह नहीं, सामान्य मानवीय कर्तव्य की तरह निभाई जाए। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👫 हमारी ज़िन्दगी #✍️ जीवन में बदलाव #👌 आत्मविश्वास #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #☝अनमोल ज्ञान
👫 हमारी ज़िन्दगी - hapgi . The Tப 0 चंचल मन नहीं ठहरा हुआ, स्थिर मन जीवन को ऊँचाई देता है। जहाँ धीरज टिकता है, वहीं कुदरत अपने रहस्य खोलती है। hapgi . The Tப 0 चंचल मन नहीं ठहरा हुआ, स्थिर मन जीवन को ऊँचाई देता है। जहाँ धीरज टिकता है, वहीं कुदरत अपने रहस्य खोलती है। - ShareChat
कर्म करें किस्मत बने जीवन का यह मर्म प्राणी तेरे हाथ में तेरा अपना कर्म ॐ श्री शनिदेवाय नमः जय हनुमान जी महाराज 🚩🚩🌹🌹🪻🌹🌹🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ शनिवार #✋भगवान भैरव🌸
🔱हर हर महादेव - जय शनिदेव महाराज जय शनिदेव महाराज - ShareChat
🌹अधूरी चिट्ठी और वो आखिरी कल🌹 🙏🙏🙏 शहर के सबसे बड़े अस्पताल के कमरा नंबर 402 में सन्नाटा पसरा था। वहां लेटे 70 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर दीनानाथ जी की नजरें दीवार पर टिकी घड़ी की सुइयों को देख रही थीं। वे सुइयां नहीं थीं, मानो उनके जीवन की शेष बची सांसें थीं जो धीरे-धीरे खिसक रही थीं। दीनानाथ जी ने पूरी उम्र 'कल' के भरोसे जी थी। जब बच्चे छोटे थे, तो उन्होंने सोचा—"कल बच्चों के साथ पार्क जाऊंगा, आज ऑफिस में काम ज्यादा है।" जब पत्नी ने साथ बैठने की जिद की, तो कहा—"कल फुर्सत से बातें करेंगे, आज थक गया हूँ।" जब बूढ़े माता-पिता ने याद किया, तो मन बनाया—"अगले महीने गांव जाऊंगा।" पर वह 'कल' कभी नहीं आया। बच्चे बड़े होकर विदेश चले गए, पत्नी का साथ बीमारी ने छीन लिया और माता-पिता यादों में सिमट गए। आज जब मृत्यु उनके सिरहाने बैठी थी, तो उन्हें अपनी सारी डिग्रियां, बैंक बैलेंस और बड़ा बंगला मिट्टी के ढेर जैसा लग रहा था। तभी नर्स अंदर आई और पूछा, "सर, क्या आप किसी को बुलाना चाहते हैं?" दीनानाथ जी की आँखों में आंसू भर आए। उन्होंने कांपते हाथों से एक कागज मांगा और एक 'अधूरी चिट्ठी' लिखनी शुरू की। उन्होंने लिखा: "मेरे प्रिय बेटे, आज जब मैं जीवन की आखिरी दहलीज पर खड़ा हूँ, तो मुझे समझ आ रहा है कि जिसे मैं अपनी 'उपलब्धियां' समझता था, वे सिर्फ दिखावा थीं। असली पूंजी तो वो हंसी थी जो मैंने काम के चक्कर में दबा दी। असली कमाई तो वो रिश्ते थे जिन्हें मैंने 'कल' पर टाल दिया। काश! मैंने 'मैं' के बजाय 'हम' को चुना होता। काश! मैंने उस दिन क्षमा मांग ली होती जब मेरा अहंकार बड़ा था और रिश्ता छोटा।" उन्होंने महसूस किया कि मृत्यु के करीब पहुंचकर इंसान की नजर धुंधली नहीं, बल्कि और भी साफ हो जाती है। उन्हें याद आया कि उनके छोटे भाई से दस साल पहले एक जमीन के टुकड़े के लिए झगड़ा हुआ था। तब उन्होंने सोचा था—"कल उसे फोन करूँगा।" पर वो फोन कभी नहीं हुआ। दीनानाथ जी ने नर्स से अपना फोन मांगा और अपने भाई का नंबर मिलाया। जैसे ही भाई ने फोन उठाया, दीनानाथ जी सिर्फ इतना कह पाए— "मुझे माफ कर देना भाई..." उधर से भाई की सिसकियां सुनाई दीं। दस साल की कड़वाहट एक पल के 'वर्तमान' में बह गई। उस शाम दीनानाथ जी चले गए, लेकिन उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। वे समझ गए थे कि जीवन को 'कल' के लिए बचाकर रखना ही सबसे बड़ी भूल है। शिक्षा... जीवन की सबसे बड़ी पूँजी प्रेम, क्षमा और वर्तमान है। जो करना है, आज और अभी करें, क्योंकि 'कल' महज एक भ्रम है जो कभी हकीकत नहीं बनता। मंगलमय प्रभात प्रणाम #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👌 आत्मविश्वास #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 डर के आगे जीत👌
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - hoppia, TIc Te Grn परिस्थितियों से लड़ना छोड़कर, जब उन्हें समझना शुरू करते हैं तभी मन का बोझ उतरने लगता है। जिससे जीवन सरल ही नहीं, सहज और सार्थक बन जाता है। hoppia, TIc Te Grn परिस्थितियों से लड़ना छोड़कर, जब उन्हें समझना शुरू करते हैं तभी मन का बोझ उतरने लगता है। जिससे जीवन सरल ही नहीं, सहज और सार्थक बन जाता है। - ShareChat
🙏*हे महादेव ! इस लोक में याद की गयी विद्या और अपने पास संग्रह किया गया धन ही सच्चा मित्र है*॥ *प्रभु ! मेरी प्रार्थना महालक्ष्मीजी को समर्पित कर दीजिए*🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ शुक्रवार #🙏 माँ वैष्णो देवी
🌞 Good Morning🌞 - WALLSNAPY WALLSNAPY - ShareChat