*🌹सोच🌹*
🙏🙏🙏
*प्राचीन समय की बात है : एक शहर में दो ब्राह्मण पुत्र रहते थे, एक गरीब था..दूसरा अमीर*
*दोनों पड़ोसी थे. गरीब ब्राम्हण की पत्नी उसे रोज़ ताने देती और झगड़ती*
*एकादशी के दिन गरीब ब्राह्मण पुत्र झगड़ों से तंग आकर जंगल की ओर चल पड़ता है, ये सोच कर कि जंगल में शेर या कोई जंगली जानवर उसे मार कर खा जायेगा, उसका पेट भर जायेगा और मरने से रोज की झिक- झिक से मुक्त हो जायेगा*
*जंगल में पहुंचते ही उसे एक गुफ़ा नज़र आती है; वो उस गुफ़ा की तरफ़ जाता है..गुफ़ा में एक शेर सोया हुआ था और शेर की नींद में ख़लल न पड़े इसके लिये हंस का पहरा था*
*हंस ज़ब दूर से ब्राह्मण पुत्र को आता देखता है तो चिंता में पड़कर सोचता है..ये ब्राह्मण आयेगा, शेर जागेगा और इसे मारकर खा जायेगा..एकादशी के दिन मुझे पाप लगेगा..इसे बचायें कैसे?*
*उसे उपाय सूझता है और वो शेर के भाग्य की तारीफ़ करते हुए कहता है..ओ जंगल के राजा! उठो,जागो आज आपके भाग खुले हैं, एकादशी के दिन खुद विप्र- देव आपके घर पधारे हैं, जल्दी उठें और इन्हें दक्षिणा दें; रवाना करें; आपका मोक्ष हो जायेगा..ये दिन दुबारा आपकी जिंदगी में शायद ही आये, आपको पशु-योनी से छुटकारा मिल जायेगा*
*शेर दहाड़ कर उठता है, हंस की बात उसे सही लगती है और पूर्व में शिकार मनुष्यों के गहने वो ब्राह्मण के पैरों में रखकर शीश नवाता है, जीभ से उनके पैर चाटता है*
*हंस ब्राह्मण को इशारा करता है कि विप्रदेव! ये सब गहने उठाओ और जितना जल्दी हो सके, वापस अपने घर जाओ; ये शेर है; कब मन बदल जाय*
*ब्राह्मण बात समझकर घर लौट जाता है..पड़ोसी अमीर ब्राह्मण की पत्नी को जब सब पता चलता है तो वो भी अपने पति को जबरदस्ती अगली एकादशी को जंगल में उसी शेर की गुफा की ओर भेजती है*
*अब शेर का पहरेदार बदल जाता है..नया पहरेदार होता है ""कौवा""*
*जैसे कौवे की प्रवृति होती है वो सोचता है..बढ़िया है..ब्राह्मण आया है अब शेर को जगाऊं तो शेर की नींद में ख़लल पड़ेगी, गुस्साएगा, ब्राह्मण को मारेगा, तो कुछ मेरे भी हाथ लगेगा, मेरा पेट भर जायेगा*
*(कौवे की सोच)*
*ये सोचकर वो कांव-कांव- कांव चिल्लाता है..एक ओर तो शेर गुस्सा होकर जागता है.. और दूसरी ओर ब्राह्मण पर उसकी नज़र पड़ती है, उसे हंस की बात याद आ जाती है..वो समझ जाता है, कौवा क्यूं कांव- कांव कर रहा है*
*वो अपने पूर्व में हंस के कहने पर किये गये धर्म को खत्म नहीं करना चाहता..पर फिर भी; शेर, शेर होता है जंगल का राजा और दहाड़ कर ब्राह्मण को कहता है..*
*हंस उड़ सरवर गये और*
*अब काग भये प्रधान``*
*थे तो विप्र थांरे घरे जाओ,,*
*मैं किनाइनी जिजमान..*
*अर्थात हंस; जो अच्छी सोच वाले, अच्छी मनोवृत्ति वाले थे उड़कर सरोवर (यानि तालाब) को चले गये हैं और अब कौवा प्रधान पहरे- दार है जो मुझे तुम्हें मारने के लिये उकसा रहा है: मेरी बुद्धि घूमे; उससे पहले ही, हे ब्राह्मण यहां से चले जाओ: शेर किसी का जज मान नहीं हुआ है..वो तो हंस था जिसने मुझ (शेर) से भी पुण्य करवा दिया*
*दूसरी ओर; ब्राह्मण सारी बात समझ जाता है और डर के मारे तुरंत प्राण बचाकर अपने घर की ओर भाग जाता है*
*कहने का मतलब है कि हंस और कौवा कोई और नहीं,,हमारे ही चरित्र हैं*
*कोई किसी का दुख देखकर दुखी होता है औरउसका भला सोचता है; वो हंस है*
*और जो किसी को दु:खी देखना चाहता है,,किसी का सुख जिसे सहन नहीं होता; वो कौवा है...*
*जो आपस में मिल-जुल कर, भाईचारे से रहना चाहते हैं; वे हंस प्रवृत्ति के हैं..*
*जो झगड़े करके एक दूजे को मारने लूटने की प्रवृत्ति रखते हैं वे कौवे की प्रवृति के हैं...*
*घर, परिवार, स्कूल, संगठन अथवा आफिसों में जो भी किसी साथी कर्मी की गलती को बढ़ा चढ़ाकर बताते हैं, उसपर कार्यवाही करने के लिए उकसाते हैं..वे कौवे जैसे हैं और जो किसी साथी- कर्मी की गलती पर भी बड़ा-मन रख कर मांफ करने को कहते हैं..वे हंस प्रवृत्ति के है*
*अपने आस-पास छुपे बैठे शांतिदूत रूपी कौवौं को पहचानो, उनसे दूर रहो और जो हंस प्रवृत्ति के हैं, उनका साथ दो और सम्मान करो..इसी में सब का कल्याण छुपा है..!!*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम*
🌹🌹🌻🙏🌻🌹🌹 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #🏠घर-परिवार #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #📖जीवन का लक्ष्य🤔
संसार में कोई मित्र ओर शत्रु
नहीं है।
"व्यक्ति"
खुद के व्यवहार से ही इसको
पैदा करता हैं....
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
🪻🌺🌸💐🌻🌼🌹🌷 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु😇
*🌹अधूरा सर्वे🌹*
🙏🙏🙏
*(टिंग-टॉन्ग.... दरवाजे पर घन्टी बजती है। )*
*बहु देखना कौन है? सोफे पर लेटकर टीवी देख रहे ससुर ने कहा।*
*माया किचन से निकलकर दरवाज़ा खोलती है।*
*हां जी, आप कौन?*
*'महिलाओं की स्थिति पर एक सर्वे चल रहा है। उसी की जानकारी के लिए आई हूँ।'* *दरवाज़े पर खड़ी महिला ने जवाब दिया।*
*कौन है बहु? पूछते हुए ससुरजी बाहर आ जाते हैं।*
*महिला- 'बाऊजी सर्वे करने आई हूँ।'*
*घनश्याम जी- 'हां पूछिए'*
*महिला- 'आपकी बहु सर्विस करती हैं या हाउस वाइफ हैं?'*
*माया हाउस वाइफ बोलने ही वाली होती है कि उससे पहले घनश्याम जी बोल पड़ते हैं।*
*घनश्याम जी- 'सर्विस करती है'*
*'किस पद पर हैं और किस कंपनी में काम कर रही हैं?' महिला ने पूछा।*
*घनश्याम जी कहते हैं*
- *वो एक नर्स है, जो मेरा और मेरी पत्नी का बखूबी ध्यान रखती है। हमारे उठने से लेकर रात के सोने तक का हिसाब बहु के पास होता है। ये जो मैं आराम से लेटकर टीवी देख रहा था ना वो माया की बदौलत ही है।*
-*माया बेबीसीटर भी है। बच्चों को नहलाने, खिलाने और स्कूल भेजने का काम भी वही देखती है। रात को रो रहे बच्चे को नींद माँ की थपकी से ही आती है।*
-*मेरी बहु ट्यूटर भी है। बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी इसी के कंधे पर है।*
- *घर का पूरा मैनेजमेंट इसी के हाथों में है। रिश्तेदारी निभाने में इसे महारत हासिल है।*
- *मेरा बेटा एयरकंडीशन्ड ऑफिस में चैन से अपने काम कर पाता है तो इसी की बदौलत। इतना ही नहीं ये मेरे बेटे की एडवाइजर भी है।*
- *ये हमारे घर की इंजन है। जिसके बग़ैर हमारा घर तो क्या इस देश की रफ़्तार ही थम जाएगी।*
*बाऊजी मेरे फॉर्म में इनमें से एक भी कॉलम नहीं है, जो आपकी बहु को वर्किंग कह सके।*
*घनश्याम जी मुस्कुराते हुए कहते हैं, फिर तो आपका ये सर्वे ही अधूरा है।*
*महिला- 'लेकिन बाऊजी इससे इनकम तो नहीं होती है ना।*
*घनश्याम जी कहते हैं, अब आपको क्या समझाएं। इस देश की कोई भी कंपनी ऐसी बहुओं को वो सम्मान, वो सैलरी नहीं दे पाएंगी। बड़ी शान से वो कहते हैं, मेरी हार्ड वर्किंग बहु की इनकम हमारे घर की मुस्कुराहट है*
*मंगलमय प्रभात*
*प्रणाम* #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🏠घर-परिवार #🙏 प्रेरणादायक विचार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👫 हमारी ज़िन्दगी
ॐ गं गणपतये नमः ॐ हनुमते नमः
🪻🌸💐🌻🌼🌹🌷
ज्ञान, शक्ति और सुख का संगम, बप्पा और हनुमान जी करें दूर हर विघ्न! विघ्नहर्ता गणेश जी आपकी हर मुसीबत दूर करें और जीवन में सुख-समृद्धि लाएं।
शुभ प्रभात!
🙏🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ बुधवार #श्री गणेश
🌹असीमित पुण्य🌹
🙏🙏🙏
गुजरात की एक प्रसिद्ध रियासत में राजमाता मीलण देवी रहती थीं। वह भगवान के प्रति अत्यंत श्रद्धालु थीं और धर्म-कर्म में उनका विशेष विश्वास था। एक दिन उन्होंने निश्चय किया कि वह भगवान सोमनाथ जी का भव्य अभिषेक और पूजन करेंगी। पूरे विधि-विधान के साथ उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने सोने का तुलादान कराया—अपने वजन के बराबर सोना तुला पर रखकर भगवान को अर्पित कर दिया। मंदिर में उपस्थित सभी लोग राजमाता की भक्ति और दान देखकर उनकी प्रशंसा करने लगे।
इतना बड़ा दान करने के बाद धीरे-धीरे राजमाता के मन में अहंकार आने लगा। वह मन ही मन सोचने लगीं कि आज तक किसी ने इतना बड़ा तुलादान नहीं किया होगा और उन्होंने बहुत बड़ा पुण्य कमा लिया है। इस विचार के साथ वह अपने महल लौट आईं और रात को विश्राम करने लगीं।
रात में उन्हें एक अद्भुत स्वप्न आया। उन्होंने देखा कि स्वयं भगवान सोमनाथ उनके सामने खड़े हैं। भगवान ने शांत स्वर में कहा, “राजमाता, मेरे मंदिर में एक गरीब महिला दर्शन के लिए आई है। उसके पास असीमित पुण्य संचित हैं। तुम उससे कुछ पुण्य सोने की मुद्राएं देकर खरीद लो, क्योंकि वही तुम्हारे परलोक में काम आएंगे।”
इतना कहकर भगवान अदृश्य हो गए। राजमाता की नींद खुल गई और वह बेचैन हो उठीं। सुबह होते ही उन्होंने अपने सेवकों को आदेश दिया कि मंदिर में जो गरीब महिला आई है, उसे तुरंत राजभवन लाया जाए।
सेवक मंदिर पहुंचे और खोजबीन करके उस गरीब महिला को राजमहल ले आए। वह महिला अत्यंत गरीब थी और साधारण कपड़े पहने हुए थी। राजमहल का वैभव देखकर वह डर से कांपने लगी। राजमाता ने उसे प्रेमपूर्वक अपने पास बैठाया और कहा, “मुझे अपने संचित पुण्य दे दो, बदले में मैं तुम्हें बहुत सारी सोने की मुद्राएं दूंगी।”
राजमाता की बात सुनकर गरीब महिला आश्चर्य में पड़ गई। वह विनम्रता से बोली, “महारानी जी, मैं तो एक गरीब भिखारिन हूं। मुझसे भला कौन-से पुण्य कार्य हो सकते हैं? मैं तो दर-दर भीख मांगकर अपना पेट भरती हूं। कल मुझे भीख में एक मुट्ठी सत्तू मिले थे। मंदिर में दर्शन करने से पहले मैंने उनमें से आधे सत्तू भगवान को भोग लगा दिए और बाकी आधे एक भूखे भिखारी को खिला दिए। जब मैं भगवान को ठीक से प्रसाद भी नहीं चढ़ा पाई, तो मुझे पुण्य कहां से मिलेगा?”
गरीब महिला की यह सरल और निष्कपट बात सुनकर राजमाता स्तब्ध रह गईं। उसी क्षण उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने समझ लिया कि भगवान को दिखावे या बड़े दान से नहीं, बल्कि सच्चे मन और नि:स्वार्थ भावना से प्रसन्न किया जा सकता है। उस गरीब महिला ने जो थोड़ा-सा अन्न भगवान और एक भूखे व्यक्ति को दिया, वही सच्ची भक्ति थी, और उसी से उसे असीमित पुण्य प्राप्त हुआ।
राजमाता का अहंकार पूरी तरह समाप्त हो गया। उन्होंने उसी समय प्रण लिया कि अब वह अहंकार को त्यागकर मानव सेवा को ही अपना सबसे बड़ा धर्म बनाएंगी। इसके बाद उन्होंने गरीबों, भूखों और जरूरतमंदों की सेवा करना शुरू कर दिया और सच्चे मन से समाज के कल्याण में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
सीख:
सच्चा पुण्य धन-दौलत से नहीं, बल्कि नि:स्वार्थ भावना, दया और सेवा से प्राप्त होता है। जो मन से संतुष्ट और दूसरों की सहायता करने वाला होता है, वही वास्तव में सबसे अधिक धनी और पुण्यवान होता है।
मंगल प्रभात
प्रणाम #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #👫 हमारी ज़िन्दगी #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
🙏बजरंगबली की कृपा से
सभी के जीवन में सुख, शांति
और समृद्धि बनी रहे...।🙏🙏
जय बजरंगबली
💐🌷🌹🌼🌻🌺 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ मंगलवार #जय हनुमान
*🌹सोच का अंतर🌹*
🙏🙏🙏
*एक बार एक पिता और उसका पुत्र जलमार्ग से कहीं यात्रा कर रहे थे और तभी अचानक दोनों रास्ता भटक गये। फिर उनकी नौका भी उन्हें ऐसी जगह ले गई, जहाँ दो टापू आस-पास थे और फिर वहाँ पहुंच कर उनकी नौका टूट गई।*
*पिता ने पुत्र नवनीत से कहा, "अब लगता है, हम दोनों का अंतिम समय आ गया है, दूर-दूर तक कोई सहारा नहीं दिख रहा है।"*
*अचानक पिता को एक उपाय सूझा, अपने पुत्र से कहा कि "वैसे भी हमारा अंतिम समय नज़दीक है, तो क्यों न हम ईश्वर की प्रार्थना करें।"*
*उन्होने दोनों टापू आपस में बाँट लिए।*
*एक पर पिता और एक पर पुत्र, और दोनों अलग-अलग टापू पर ईश्वर की प्रार्थना करने लगे।*
*पुत्र ने ईश्वर से कहा, 'हे भगवन, इस टापू पर पेड़-पौधे उग जाए जिसके फल-फूल से हम अपनी भूख मिटा सकें।'*
*ईश्वर ने प्रार्थना सुनी गयी, तत्काल पेड़-पौधे उग गये और उसमें फल-फूल भी आ गये। उसने कहा ये तो चमत्कार हो गया।*
*फिर उसने प्रार्थना की, एक सुंदर स्त्री आ जाए जिससे हम यहाँ उसके साथ रहकर अपना परिवार बसाएँ।*
*तत्काल एक सुंदर स्त्री प्रकट हो गयी।*
*अब उसने सोचा कि मेरी हर प्रार्थना सुनी जा रही है, तो क्यों न मैं ईश्वर से यहाँ से बाहर निकलने का रास्ता माँगे लूँ ?*
*उसने ऐसा ही किया।*
*उसने प्रार्थना की, एक नई नाव आ जाए जिसमें सवार होकर मैं यहाँ से बाहर निकल सकूँ।*
*तत्काल नाव प्रकट हुई और पुत्र उसमें सवार होकर बाहर निकलने लगा।*
*तभी एक आकाशवाणी हुई, बेटा तुम अकेले जा रहे हो? अपने पिता को साथ नहीं लोगे ?*
*
*पुत्र ने कहा, उनको छोड़ो, प्रार्थना तो उन्होंने भी की, लेकिन आपने उनकी एक भी नहीं सुनी। शायद उनका मन पवित्र नहीं है, तो उन्हें इसका फल भोगने दो ना ?*
*
*आकाशवाणी ने कहा, 'क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारे पिता ने क्या प्रार्थना की ?*
*पुत्र बोला, नहीं।*
*आकाशवाणी बोली तो सुनो, 'तुम्हारे पिता ने एक ही प्रार्थना की..." हे भगवन! मेरा पुत्र आपसे जो भी माँगे, उसे दे देना क्योंकि मैं उसे दुःख में हरगिज़ नहीं देख सकता औऱ अगर मरने की बारी आए तो मेरी मौत पहले हो " और जो कुछ तुम्हें मिल रहा है उन्हीं की प्रार्थना का परिणाम है।'*
*पुत्र बहुत शर्मिंदा हो गया।*
*सज्जनों! हमें जो भी सुख, प्रसिद्धि, मान, यश, धन, संपत्ति और सुविधाएं मिल रही है उसके पीछे किसी अपने की प्रार्थना और शक्ति जरूर होती है लेकिन हम नादान रहकर अपने अभिमान वश इस सबको अपनी उपलब्धि मानने की भूल करते रहते हैं और जब ज्ञान होता है तो असलियत का पता लगने पर सिर्फ़ पछताना पड़ता है।हम चाह कर भी अपने माता पिता का ऋण नहीं चुका सकते हैं। एक पिता ही ऐसा होता है जो अपने पुत्र को उच्चाईयो पर पहुँचाना चाहता है। पर पुत्र मां बाप को बोझ समझते है। इसलिए आप हमेशा जरुरतमंदों की सहायता करते रहो जिससे प्रभु भी आप का ख्याल रखेंगे ।*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #👫 हमारी ज़िन्दगी #🏠घर-परिवार #👌 आत्मविश्वास #👍 डर के आगे जीत👌 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
*ॐ नमः शिवाय*
💐🌼🌷🌹🌸🪻
भक्ति की शक्ति*
"तांडव करते शिव जब रौद्र
रूप धरते हैं,पापी कांप उठते,
भक्त निडर रहते हैं,नटराज का
ये रूप सिखाता है -
जीवन एक नृत्य है, बस ताल न बिगड़ने पाए।
हर हर महादेव "
🙏🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ सोमवार #🙏चारधाम यात्रा🛕
*🌹ईश्वर🌹*
🙏🙏🙏
अहंकार का भार और गुरु का ज्ञान:--
एक राजा अपनी वीरता और सुशासन के लिए प्रसिद्ध था। एक बार वो अपने गुरु के साथ भ्रमण कर रहा था, राज्य की समृद्धि और खुशहाली देखकर उसके भीतर घमंड के भाव आने लगे, और वो मन ही मन सोचने लगे, “सचमुच, मैं एक महान राजा हूँ, मैं कितने अच्छे से अपने प्रजा देखभाल करता हूँ !”
गुरु सर्वज्ञानी थे, वे तुरंत ही अपने शिष्य के भावों को समझ गए और तत्काल उसे सुधारने का निर्णय लिया।
रास्ते में ही एक बड़ा सा पत्थर पड़ा था, गुरु जी ने सैनिकों को उसे तोड़ने का निर्देश दिया।
जैसे ही सैनिकों ने पत्थर के दो टुकड़े किये एक अविश्वश्नीय दृश्य दिखा, पत्थर के बीचो-बीच कुछ पानी जमा था और उसमे एक छोटा सा मेंढक रह रहा था। पत्थर टूटते ही वो अपनी कैद से निकल कर भागा। सब अचरज में थे की आखिर वो इस तरह कैसे कैद हो गया और इस स्थिति में भी वो अब तक जीवित कैसे था ?
अब गुरु जी राजा की तरफ पलटे और पुछा, “अगर आप ऐसा सोचते हैं कि आप इस राज्य में हर किसी का ध्यान रख रहे हैं, सबको पाल-पोष रहे हैं, तो बताइये पत्थरों के बीच फंसे उस मेंढक का ध्यान कौन रख रहा था.. बताइये कौन है इस मेंढक का रखवाला ?”
राजा को अपनी गलती का एहसास हो चुका था, उसने अपने अभिमान पर पछतावा होने लगा, गुरु की कृपा से वे जान चुका था कि वो ईश्वर ही है जिसने हर एक जीव को बनाया है और वही है जो सबका ध्यान रखता है।
शिक्षा:-
मित्रों, कई बार अच्छा काम करने पर मिलने वाले यश और प्रसिद्धि से लोगों के मन में अहंकार घर कर जाता है और अंततः यही उनके अपयश और दुर्गति का कारण बनता है। अतः हमें ध्यान रखना चाहिए कि हम चाहे इस जीवन में किसी भी मुकाम पर पहुँच जाएं कभी घमंड न करें और सदा अपने अर्थपूर्ण जीवन के लिए उस सर्वशक्तिमान ईश्वर के कृतज्ञ रहें।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #🏠घर-परिवार #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
मैं सोया और स्वप्न देखा कि जीवन आनंद है
मैं जागा और देखा कि जीवन सेवा है
मैने सेवा की और देखा कि सेवा ही आनंद है ....
ॐ श्री सूर्य देवाय नमः
🚩🚩🌹🌹🌻🌹🌹🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव













