🌹जब सब खत्म लगे तभी
शुरू होता है असली साहस🌹 🙏🙏🙏
एक समय की बात है, एक पराक्रमी राजा अपने न्याय और दया के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। एक दिन उसकी सेवा से प्रसन्न होकर एक संत ने उसे एक ताबीज भेंट किया। ताबीज देते हुए संत ने गंभीर स्वर में कहा, “राजन, इसे अपने गले में धारण करो। लेकिन इसे खोलना तभी, जब जीवन में ऐसा समय आए जब तुम्हें लगे कि अब सब समाप्त हो गया है, कोई आशा शेष नहीं है।” राजा ने उस ताबीज को आदरपूर्वक स्वीकार किया और हमेशा अपने पास रखने लगा। समय बीतता गया और राजा अपने कार्यों में व्यस्त हो गया।
एक दिन वह अपने सैनिकों के साथ शिकार पर निकला। जंगल बहुत घना और खतरनाक था। शिकार का पीछा करते-करते राजा अपने साथियों से बिछड़ गया और अनजाने में दुश्मन राज्य की सीमा में प्रवेश कर गया। सांझ ढलने लगी थी, अंधेरा बढ़ रहा था और तभी उसे घोड़ों की टापों की आवाज सुनाई दी। दुश्मन सैनिक उसकी ओर बढ़ रहे थे। घबराकर राजा ने अपने घोड़े को तेजी से दौड़ाया, परंतु थकान और भूख-प्यास के कारण उसकी गति धीमी पड़ने लगी।
भागते-भागते उसे पेड़ों के बीच एक छोटी सी गुफा दिखाई दी। उसने तुरंत वहां शरण ली और खुद को छिपा लिया। उसका दिल तेजी से धड़क रहा था, सांसें थम सी गई थीं। दुश्मन सैनिकों की आवाजें पास आती जा रही थीं। उस क्षण राजा को लगा कि अब उसका अंत निश्चित है। निराशा और भय ने उसे पूरी तरह घेर लिया। उसे अपनी हार और मृत्यु साफ दिखाई देने लगी।
तभी अचानक उसका हाथ अपने गले में पड़े ताबीज पर गया। उसे संत की बात याद आई। कांपते हाथों से उसने ताबीज खोला और उसमें रखा छोटा सा कागज निकाला। जब उसने उसे पढ़ा, तो उस पर लिखा था — “यह भी कट जाएगा।”
इन चार शब्दों ने जैसे उसके भीतर नई ऊर्जा भर दी। उसके मन का भय धीरे-धीरे शांत होने लगा। उसे लगा कि यह कठिन समय भी स्थायी नहीं है, यह भी बीत जाएगा। उसके भीतर एक अद्भुत शांति और विश्वास जाग उठा। वह स्थिर होकर बैठ गया और अपने मन को संभाल लिया। कुछ देर बाद घोड़ों की टापों की आवाज धीरे-धीरे दूर चली गई। दुश्मन सैनिक बिना उसे देखे आगे निकल गए।
रात गहराने के बाद राजा गुफा से बाहर निकला और सावधानीपूर्वक रास्ताv तय करते हुए अपने राज्य लौट आया। इस घटना ने उसके जीवन की सोच को बदल दिया। अब वह हर कठिन परिस्थिति में घबराने के बजाय धैर्य और विश्वास बनाए रखता था।
यह कहानी केवल उस राजा की नहीं, बल्कि हम सभी की है। जीवन में ऐसे पल आते हैं जब समस्याएं हमें चारों ओर से घेर लेती हैं। हमें लगता है कि अब कोई रास्ता नहीं बचा, सब खत्म हो गया है। लेकिन सच यह है कि कोई भी परिस्थिति स्थायी नहीं होती। चाहे दुख हो या सुख, हर दौर गुजर जाता है।
जब भी जीवन में अंधेरा छा जाए, बस कुछ पल ठहरिए, गहरी सांस लीजिए और खुद से कहिए — “यह भी कट जाएगा।” यही विचार आपको अंदर से मजबूत बनाएगा और कठिन समय से बाहर निकलने की शक्ति देगा। याद रखिए, जो आज असंभव लगता है, वही कल आपकी सबसे बड़ी सीख बन सकता है।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #❤️जीवन की सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🌸पॉजिटिव मंत्र #🙏 प्रेरणादायक विचार
ॐ गं गणपतये नमः‼️
🌺🌿🌼🌺🌼🌺🌼
आप खुश रहें स्वस्थ रहें दीर्घायु रहें हमेशा एवं समस्त परिवार धन धान्य से संपन्न और प्रसन्न रहें🙏🏻🌹🙏🏻 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ बुधवार #श्री गणेश
*🌹प्रेम के बोल🌹*
🙏🙏🙏
*एक गाँव में एक मजदुर रहा करता था जिसका नाम हरिराम था | उसके परिवार में कोई नहीं था | दिन भर अकेला मेहनत में लगा रहता था | दिल का बहुत ही दयालु और कर्मो का भी बहुत अच्छा था | मजदुर था इसलिए उसे उसका भोजन उसे मजदूरी के बाद ही मिलता था | आगे पीछे कोई ना था इसलिये वो इस आजीविका से संतुष्ट था |*
*एक बार उसे एक छोटा सा बछड़ा मिल गया | उसने ख़ुशी से उसे पाल लिया उसने सोचा आज तक वो अकेला था अब वो इस बछड़े को अपने बेटे के जैसे पालेगा | हरिराम का दिन उसके बछड़े से ही शुरू होता और उसी पर ख़त्म होता वो रात दिन उसकी सेवा करता और उसी से अपने मन की बात करता | कुछ समय बाद बछड़ा बैल बन गया | उसकी जो सेवा हरिराम ने की थी उससे वो बहुत ही सुंदर और बलशाली बन गया था |*
*गाँव के सभी लोग हरिराम के बैल की ही बाते किया करते थे | किसानों के गाँव में बैल की भरमार थी पर हरिराम का बैल उन सबसे अलग था | दूर-दूर से लोग उसे देखने आते थे |हर कोई हरिराम के बैल के बारे में बाते कर रहा था |*
*हरिराम भी अपने बैल से एक बेटे की तरह ही प्यार करता था भले खुद भूखा सो जाये लेकिन उसे हमेशा भर पेट खिलाता था एक दिन हरिराम के स्वप्न में शिव का नंदी बैल आया उसने उससे कहा कि हरिराम तुम एक निस्वार्थ सेवक हो तुमने खुद की तकलीफ को छोड़ कर अपने बैल की सेवा की हैं इसलिये मैं तुम्हारे बैल को बोलने की शक्ति दे रहा हूँ |*
*इतना सुनते ही हरिराम जाग गया और अपने बैल के पास गया | उसने बैल को सहलाया और मुस्कुराया कि भला एक बैल बोल कैसे सकता हैं तभी अचानक आवाज आई बाबा आपने मेरा ध्यान एक पुत्र की तरह रखा हैं मैं आपका आभारी हूँ और आपके लिए कुछ करना चाहता हूँ यह सुनकर हरिराम घबरा गया उसने खुद को संभाला और तुरंत ही बैल को गले लगाया |*
*उसी समय से वह अपने बैल को नंदी कहकर पुकारने लगा | दिन भर काम करके आता और नंदी से बाते करता |*
*गरीबी की मार बहुत थी नंदी को तो हरिराम भर पेट देता था लेकिन खुद भूखा सो जाता था यह बात नंदी को अच्छी नहीं लगी उसने हरिराम से कहा कि वो नगर के सेठ के पास जाये और शर्त रखे कि उसका बैल नंदी सो गाड़ी खीँच सकता हैं और शर्त के रूप में सेठ से हजार मुहरे ले लेना | हरिराम ने कहा नंदी तू पागल हो गया हैं भला कोई बैल इतना भार वहन कर भी सकता हैं मैं अपने जीवन से खुश हूँ मुझे यह नहीं करना लेकिन नंदी के बार-बार आग्रह करने पर हरिराम को उसकी बात माननी पड़ी |*
*
*एक दिन डरते-डरते हरिराम सेठ दीनदयाल के घर पहुँचा | दीनदयाल ने उससे आने का कारण पूछा तब हरिराम ने शर्त के बारे में कहा |*
*सेठ जोर जोर से हँसने लगा बोला हरिराम बैल के साथ रहकर क्या तुम्हारी मति भी बैल जैसी हो गई हैं अगर शर्त हार गये तो हजार मुहर के लिये तुम्हे अपनी झोपड़ी तक बैचनी पड़ेगी |यह सुनकर हरिराम और अधिक डर गया लेकिन मुँह से निकली बात पर मुकर भी नहीं सकता था|*
*शर्त का दिन तय किया गया और सेठ दीनदयाल ने पुरे गाँव में ढोल पिटवाकर इस प्रतियोगिता के बारे गाँव वालो को खबर दी और सभी को यह अद्भुत नजारा देखने बुलाया | सभी खबर सुनने के बाद हरिराम का मजाक उड़ाने लगे और कहने लगे कि यह शर्त तो हरिराम ही हारेगा | यह सब सुन सुनकर हरिराम को और अधिक दर लगने लगा और उससे नंदी से घृणा होने लगी वो उसे कौसने लगा बार बार उसे दोष देता और कहता कि कहाँ मैंने इस बैल को पाल लिया मेरी अच्छी भली कट रही थी इसके कारण सर की छत से भी जाऊँगा और लोगो की थू थू होगी वो अलग | अब हरिराम को नंदी बिलकुल भी रास नहीं आ रहा था |*
*वह दिन आ गया जिस दिन प्रतियोगिता होनी थी | सौ माल से भरी गाड़ियों के आगे नंदी को जोता गया और गाड़ी पर खुद हरिराम बैठा | सभी गाँव वाले यह नजारा देख हँस रहे थे और हरिराम को बुरा भला कह रहे थे | हरिराम ने नंदी से कहा देख तेरे कारण मुझे कितना सुनना पड़ रहा हैं मैंने तुझे बेटे जैसे पाला था और तूने मुझे सड़क पर लाने का काम किया | हरिराम के ऐसे घृणित शब्दों के कारण नंदी को गुस्सा आगया और उसने ठान ली कि वो एक कदम भी आगे नहीं बढ़ायेगा और इस तरह हरिराम शर्त हार गया सभी ने उसका मजाक उड़ाया और उसे अपनी झोपड़ी सेठ को देनी पड़ी |
*अब हरिराम नंदी के साथ मंदिर के बाहर पड़ा हुआ था और नंदी के सामने रो रोकर उसे कोस रहा था उसकी बाते सुन नंदी को सहा नहीं गया और उसने कहा बाबा हरिराम यह सब तुम्हारे कारण हुआ | यह सुन हरिराम चौंक गया उसने गुस्से में पूछा कि क्या किया मैंने ? तुमने भांग खा रखी हैं क्या ? तब नंदी ने कहा कि तुम्हारे प्रेम के बोल के कारण ही भगवान ने मुझे बोलने की शक्ति दी | और मैंने तुम्हारे लिये यह सब करने की सोची लेकिन तुम उल्टा मुझे ही कोसने लगे और मुझे बुरा भला कहने लगे तब मैंने ठानी मैं तुम्हारे लिये कुछ नहीं करूँगा लेकिन अब मैं तुमसे फिर से कहता हूँ कि मैं सो गाड़ियाँ खींच सकता*
*हूँ तुम जाकर फिर से शर्त लगाओ और इस बार अपनी झोपड़ी और एक हजार मुहरे की शर्त लगाना |*
*हरिराम वही करता हैं और फिर से शर्त के अनुसार सो गाड़ियाँ तैयार कर उस पर नंदी को जोता जाता हैं और फिर से उस पर हरिराम बैठता हैं और प्यार से सहलाकर उसे गाड़ियाँ खीचने कहता हैं और इस बार नंदी यह कर दिखाता हैं जिसे देख सब स्तब्ध रह जाते हैं और हरिराम शर्त जीत जाता हैं | सेठ दीनदयाल उसे उसकी झोपड़ी और हजार मुहरे देता हैं |*
*प्रेरणास्पद कथाएं पढ़ने के लिए मेरे साथ जुड़े रहे इस व्हाट्सएप ग्रुपमें*
*शिक्षा*
*जीवन में प्रेम से ही किसी को जीता जा सकता हैं | कहते हैं प्रेम के सामने ईश्वर भी झुक जाता हैं इसलिये सभी को प्रेम के बोल ही बोलना चाहिये।*
*मंगलमय प्रभात*
*प्रणाम* #❤️जीवन की सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #🙏 प्रेरणादायक विचार #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास
ॐ हनुमते नमः!
🌷💐🌹🌸
ज्येष्ठ माह के प्रथम मंगलवार 'बड़ा मंगल' की श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं!
संकटमोचक महाबली श्री हनुमान जी से प्रार्थना है कि सबको बल, बुद्धि, विद्या तथा आरोग्यता प्रदान करें।
🙏🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ मंगलवार #जय हनुमान
*🌹सम्यक दृष्टि🌹*
🙏🙏🙏
*एक राजा था, बहुत प्रभावशाली, बुद्धि और वैभव से संपन्न। आस-पास के राजा भी समय-समय पर उससे परामर्श लिया करते थे। एक दिन राजा अपनी शैया पर लेेटे-लेटे सोचने लगा, मैं कितना भाग्यशाली हूं। कितना विशाल है मेरा परिवार, कितना समृद्ध है मेरा अंत:पुर, कितनी मजबूत है मेरी सेना, कितना बड़ा है मेरा राजकोष। ओह! मेरे खजाने के सामने कुबेर के खजाने की क्या बिसात? मेरे राजनिवास की शोभा को देखकर अप्सराएं भी ईर्ष्या करती होंगी। मेरा हर वचन आदेश होता है। राजा कवि हृदय था और संस्कृृत का विद्वान था।*
*अपने भावों को उसने शब्दों में पिरोना शुरू किया। तीन चरण बन गए, चौथी लाइन पूरी नहीं हो रही थी। जब तक पूरा श्लोक नहीं बन जाता, तब तक कोई भी रचनाकार उसे बार-बार दोहराता है। राजा भी अपनी वे तीन लाइनें बार-बार गुनगुना रहा था* -
*चेतोहरा: युवतय: स्वजनाऽनुकूला: सद्बान्धवा: प्रणयगर्भगिरश्च भृत्या: गर्जन्ति दन्तिनिवहास्विरलास्तुरंगा:* *-मेरी चित्ताकर्षक रानियां हैं, अनुकूल स्वजन वर्ग है, श्रेष्ठ कुटुंबी जन हैं। कर्मकार विनम्र और आज्ञापालक हैं, हाथी, घोड़ों के रूप में विशाल सेना है.*
*लेकिन बार-बार गुनगुनाने पर भी चौथा-चरण बन नहीं रहा था। संयोग की बात है कि उसी रात एक चोर राजमहल में चोरी करने के लिए आया था। मौका पाकर वह राजा के शयनकक्ष में घुस गया और पलंग के नीचे दुबक कर कर बैठ गया। चोर भी संस्कृत भाषा का विज्ञ और आशु कवि था। समस्यापूर्ति का उसे अभ्यास था। राजा द्वारा गुनगुनाए जाते श्लोक के तीन चरण चोर ने सुन लिए। राजा के दिमाग में चौथी लाइन नहीं बन रही है , यह भी वह जान गया लेकिन तीन लाइनें सुन कर उस चोर का कवि मन भी उसे पूरा करने के लिए मचलने लगा। वह भूल गया कि वह चोर है और राजा के कक्ष में चोरी करने घुसा है। अगली बार राजा ने जैसे ही वे तीन लाइनें पूरी कीं , चोर के मुंह से चौथी लाइन निकल पड़ी ,*
*सम्मीलने नयनयोर्नहि किंचिदस्ति॥*
. *राज्य , वैभव आदि सब तभी तक है , जब तक आंख खुली है। आंख बंद होने के बाद कुछ नहीं है। अत : किस पर गर्व कर रहे हो ?*
*चोर की इस एक पंक्ति ने राजा की आंखें खोल दीं। उसे सम्यक् दृष्टि मिल गई। वह चारों ओर विस्फारित नेत्रों से देखने लगा - ऐसी ज्ञान की बात किसने कही ? कैसे कही ?*
*उसने आवाज दी , पलंग के नीचे जो भी है , वह मेरे सामने उपस्थित हो। चोर सामने आ कर खड़ा हुआ। फिर हाथ जोड़ कर राजा से बोला ,*
*हे राजन ! मैं आया तो चोरी करने था , पर आप के द्वारा पढ़ा जा रहा श्लोक सुनकर यह भूल गया कि मैं चोर हूं। मेरा काव्य प्रेम उमड़ पड़ा और मैं चौथे चरण की पूर्ति करने का दुस्साहस कर बैठा। हे राजन ! मैं अपराधी हूं। मुझे क्षमा कर दें। राजा ने कहा , तुम अपने जीवन में चाहे जो कुछ भी करते हो , इस क्षण तो तुम मेरे गुरु हो। तुमने मुझे जीवन के यथार्थ का परिचय कराया है। आंख बंद होने के बाद कुछ भी नहीं रहता - यह कह कर तुमने मेरा सत्य से साक्षात्कार करवा दिया। गुरु होने के कारण तुम मुझसे जो चाहो मांग सकते हो। चोर की समझ में कुछ नहीं आया लेकिन राजा ने आगे कहा -- आज मेरे ज्ञान की आंखें खुल गईं। इसलिए शुभस्य शीघ्रम् - इस सूक्त को आत्मसात करते हुए मैं शीघ्र ही संन्यास लेना चाहता हूं। राज्य अब तृण के समान प्रतीत हो रहा है। तुम यदि मेरा राज्य चाहो तो मैं उसे सहर्ष देने के लिए तैयार हूं।*
*चोर बोला , राजन ! आपको जैसे इस वाक्य से बोध पाठ मिला है , वैसे ही मेरा मन भी बदल गया है। मैं भी संन्यास स्वीकार करना चाहता हूं। राजा और चोर दोनों संन्यासी बन गए।*
*एक ही पंक्ति ने दोनों को स्पंदित कर दिया। यह है सम्यक द्रष्टि का परिणाम। जब तक राजा की दृष्टि सम्यक् नहीं थी , वह धन - वैभव , भोग - विलास को ही सब कुछ समझ रहा था। ज्यों ही आंखों से रंगीन चश्मा उतरा , दृष्टि सम्यक् बनी कि पदार्थ पदार्थ हो गया और आत्मा-आत्मा...।*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👌 आत्मविश्वास #👫 हमारी ज़िन्दगी #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
श्री महादेवाय नमः 🌿
हे भोलेनाथ!
मैं समर्पित भाव से तीनों जन्मों
के पाप के संहार के लिए अति
कोमल तीन पत्तों से युक्त
बिल्व पत्र आपको समर्पित करता हूं ..
मेरी पूजा स्वीकार कीजिए
ॐ नमः शिवाय जय माता पार्वती
🚩🚩🌿🌹🪻🌹🌿🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ सोमवार #🛕बाबा केदारनाथ📿
*🌹ज़िदगी इक किराये का घर है🌹*..
🙏🙏🙏
मैं कल अपनी पुरानी सोसाइटी, जहां पहले मैं रहता था, में गया था। वहां मैं जब भी जाता हूं, मेरी कोशिश होती है कि अधिक से अधिक लोगों से मेल मुलाकात हो जाए।
जब अपनी पुरानी सोसाइटी में पहुंच कर गार्ड से बात कर रहा था कि तभी मोटरसाइकिल पर एक आदमी आया और उसने मुझे झुक कर प्रणाम किया। “भैया, प्रणाम।”
मैंने पहचानने की कोशिश की। बहुत पहचाना-पहचाना तो लग रहा था। पर नाम याद नहीं आ रहा था। उसी ने कहा-"भैया पहचाने नहीं? हम बाबू हैं, बाबू। उधर वाली आंटीजी के घर काम करते थे।"
मैंने पहचान लिया। अरे ये तो बाबू है। सी ब्लॉक वाली आंटीजी का नौकर।
“अरे बाबू, तुम तो बहुत तंदुरुस्त हो गए हो। आंटी कैसी हैं?”
बाबू हंसा-“आंटी तो गईं।
“गईं ? कहां गईं ? उनका बेटा विदेश में था, वहीं चली गईं क्या? ठीक ही किया, उन्होंने। यहां अकेले रहने का क्या मतलब था ?”
अब बाबू थोड़ा गंभीर हुआ। उसने हंसना रोक कर कहा-“भैया, आंटीजी भगवान जी के पास चली गईं।”
“भगवान जी के पास? ओह! कब ?”
बाबू ने धीरे से कहा-“दो महीने हो गए।”
“क्या हुआ था आंटी को ?”
“कुछ नहीं। बुढ़ापा ही बीमारी थी। उनका बेटा भी बहुत दिनों से नहीं आया था। उसे याद करती थीं। पर अपना घर छोड़ कर वहां नहीं गईं। कहती थीं कि यहां से चली जाऊंगी तो कोई मकान पर कब्जा कर लेगा। बहुत मेहनत से ये मकान बना है।” “हां, वो तो पता ही है। तुमने खूब सेवा की। अब तो वो चली गईं। अब तुम क्या करोगे ?”
अब बाबू फिर हंसा,"मैं क्या करुंगा भैया ? पहले अकेला था। अब गांव से फैमिली को ले आया हूं। दोनों बच्चे और पत्नी अब यहीं रहते हैं।”
“यहीं मतलब उसी मकान में ?" “जी भैया। आंटी के जाने के बाद उनका बेटा आया था। एक हफ्ता रुक कर चले गए। मुझसे कह गए हैं कि घर देखते रहना। चार कमरे का इतना बड़ा फ्लैट है। मैं अकेला कैसे देखता? भैया ने कहा कि तुम यहीं रह कर घर की देखभाल करते रहो। वो वहां से पैसे भी भेजने लगे हैं। और सबसे बड़ी बात ये है कि मेरे बच्चों को यहीं स्कूल में एडमिशन मिल गया है। अब आराम से हूं। कुछ-कुछ काम बाहर भी कर लेता हूं। भैया सारा सामान भी छोड़ गए हैं। कह रहे थे कि दूर देश ले जाने में कोई फायदा नहीं।”
मैं हैरान था। बाबू पहले साइकिल से चलता था। आंटी थीं तो उनकी देखभाल करता था। पर अब जब आंटी चली गईं तो वो चार कमरे के मकान में आराम से रह रहा है।आंटी अपने बेटे के पास नहीं गईं कि कहीं कोई मकान पर कब्जा न कर ले।
बेटा मकान नौकर को दे गया है, ये सोच कर कि वो रहेगा तो मकान बचा रहेगा।
मुझे पता है, मकान बहुत मेहनत से बनते हैं। पर ऐसी मेहनत किस काम की, जिसके आप सिर्फ पहरेदार बन कर रह जाएं?
मकान के लिए आंटी बेटे के पास नहीं गईं। मकान के लिए बेटा मां को पास नहीं बुला पाया।
सच कहें तो हम लोग मकान के पहरेदार ही हैं। जिसने मकान बनाया वो अब दुनिया में ही नहीं है। जो हैं, उसके बारे में तो बाबू भी जानता है कि वो अब यहां कभी नहीं आएंगे।
मैंने बाबू से पूछा कि,"तुमने भैया को बता दिया कि तुम्हारी फैमिली भी यहां आ गई है?"
“इसमें बताने वाली क्या बात है भैया? वो अब कौन यहां आने वाले हैं? और मैं अकेला यहां क्या करता? जब आएंगे तो देखेंगे। पर जब मां थीं तो आए नहीं, उनके बाद क्या आना? मकान की चिंता है, तो वो मैं कहीं लेकर जा नहीं रहा। मैं तो देखभाल ही कर रहा हूं।” बाबू फिर हंसा।
बाबू से मैंने हाथ मिलाया। मैं समझ रहा था कि बाबू अब नौकर नहीं रहा। वो मकान मालिक हो गया है।
हंसते-हंसते मैंने बाबू से कहा “भाई, जिसने ये बात कही है कि मूर्ख आदमी मकान बनवाता है, बुद्धिमान आदमी उसमें रहता है, उसे ज़िंदगी का कितना गहरा तज़ुर्बा रहा होगा।
बाबू ने धीरे से कहा,“साहब, सब किस्मत की बात है।” मैं वहां से चल पड़ा था ये सोचते हुए कि सचमुच सब किस्मत की ही बात है।
लौटते हुए मेरे कानों में बाबू की हंसी गूंज रही थी...“मैं मकान लेकर कहीं जाऊंगा थोड़े ही?मैं तो देखभाल ही कर रहा हूं।”
मैं सोच रहा था, मकान लेकर कौन जाता है ? सब देखभाल ही तो करते हैं।
आज यह किस्सा पढ़कर लगा कि हम सभी क्या कर रहे है .... जिन्दगी के चार दिन है मिल जुल कर हँसतें हँसाते गुजार ले ...क्या पता कब बुलावा आ जाए.... क्योकि इस धरा का, इस धरा पर, सब यहीं धरा रह जायेगा....
यही जीवन की सच्चाई हैं ...
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #👍 डर के आगे जीत👌 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🙏 प्रेरणादायक विचार #👌 आत्मविश्वास
मुझे नहीं पता पाप और पुण्य क्या होते हैं..
बस इतना पता है जिस कार्य
से किसी का दिल दुखे वो पाप
और किसी के चेहरे पर खुशी
आए वो पुण्य ..
ॐ श्री सूर्य देवाय नमः
🚩🚩🌹🌹🌻🌹🌹🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव
*🌹शुक्राना🌹*
🙏🙏🙏
एक पक्षी था जो रेगिस्तान में रहता था, बहुत बीमार, कोई पंख नहीं, खाने-पीने के लिए कुछ नहीं, रहने के लिए कोई आश्रय नहीं था।
एक दिन एक कबूतर उधर से गुजर रहा था, उस बीमार और दुःखी पक्षी ने कबूतर को रोका और पूछा- "तुम कहाँ जा रहे हो?
उसने उत्तर दिया- "मैं स्वर्ग जा रहा हूँ"
बीमार पक्षी ने कहा- "कृपया मेरे लिए पता करें, मेरी पीड़ा कब तक समाप्त हो जाएगी?" कबूतर ने कहा-"निश्चित ही मैं पता करूँगा।"
कबूतर ने इतना कह कर बीमार पक्षी से विदा ली। कबूतर स्वर्ग पहुंचा और प्रवेश द्वार पर देवदूत को बीमार पक्षी का संदेश दिया।
देवदूत ने कहा- "पक्षी के जीवन में अगले सात वर्ष तक इसी तरह कष्ट लिखा हुआ है उसे ऐसे ही सात वर्ष तक कष्ट भोगना पड़ेगा, तब तक उसके जीवन में कोई खुशी नहीं है।
कबूतर ने कहा- "जब बीमार पक्षी यह सुनेगा तो वह निराश हो जाएगा क्या आप इसके लिए कोई उपाय बता सकते हैं।
देवदूत ने उत्तर दिया-"उससे कहो कि इस वाक्य को हमेशा बोलता रहे...
"इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्रगुजर हुँ "।
वापसी पर जब वह बीमार पक्षी कबूतर से फिर मिला तो कबूतर ने उस स्वर्गदूत का संदेश दिया
सात-आठ दिनों के बाद कबूतर जब फिर उधर से गुजर रहा था, तब उसने देखा कि पक्षी बहुत खुश था उसके शरीर पर पंख उग आए थे। उस रेगिस्तानी इलाके में एक छोटा सा पौधा लगा हुआ था, वहां पानी का एक छोटा सा तालाब भी बना हुआ था पक्षी खुश होकर नाच रहा था कबूतर चकित था देवदूत ने कहा था कि अगले सात वर्षों तक पक्षी के लिए कोई खुशी नहीं होगी इस सवाल को ध्यान में रखते हुए कबूतर स्वर्ग के द्वार पर यू देवदूत से मिलने पहुंच गया।
कबूतर ने देवदूत से अपने मन में उठते हुए सवालों का समाधान पूछा तो देवदूत ने उत्तर दिया- "हाँ..!! यह सच है कि पक्षी की जिन्दगी में सात साल तक कोई खुशी नहीं लिखी थी लेकिन क्योंकि पक्षी हर स्थिति में "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्रिया ।" बोल रहा था और भगवान का नामस्मरण कर रहा था, इस कारण उसका जीवन बदल गया
जब पक्षी गर्म रेत पर गिर गया तो उसने कहा- "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है।"जब यह उड़ नहीं सकता था तो उसने कहा-"इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है।"
जब उसे प्यास लगी और आसपास पानी नहीं था, तो उसने कहा- "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है।"
जो भी स्थिति हो, पक्षी दोहराता रहा- "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है।" और इसलिए सात साल सात दिनों में समाप्त हो गए
जब मैंने यह कहानी सुनी तो मैंने अपने जीवन को महसूस करने सोचने स्वीका करने और देखने के तरीके में एक जबरदस्त बदलाव महसूस किया..
मैंने अपने जीवन में इस को अपना लिया "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है। "इसने मुझे मेरे विचार को, मेरे जीवन में शिफ्ट करने में मदद की, जो मेरे पास नहीं है।
प्रेरणास्पद कथाएं हेतु जुड़े
अगर मेरा सिर दर्द करता है, तो मुझे लगता है कि मेरा बाकी शरीर पूरी तरह से ठीक और स्वस्थ है और मैं कहता हूं- "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है" और मुझे लगता है कि सिरदर्द मुझे बिल्कुल परेशान नहीं करता।
उसी तरह मैंने अपने रिश्तों
(चाहे परिवार, दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी) के
वित्त, सामाजिक जीवन, व्यवसाय और हर उस चीज का उपयोग करना शुरू कर दिया, जिसके साथ मैं संबंधित हो सकता हूं। जिसके साथ भी मैं संपर्क में आया, मैंने इस कहानी को सबके साथ साझा किया और इस कहानी से उनके व्यवहार में भी एक बड़ा बदलाव आया!
इस भगवान के शुक्राने का मेरे जीवन पर वास्तव में गहरा प्रभाव पड़ा, मुझे लगने लगा कि मैं कितना धन्य हूँ, मैं कितना खुश हूँ, जीवन कितना अच्छा है।
इस संदेश को साझा करने का उद्देश्य हम सभी को इस बारे में अवगत कराना है कि--
ATTITUDE OF GRATITUDE
( कृतज्ञता का मनोभाव होना चाहिए)
कितना शक्तिशाली है यह हमारे जीवन को नया रूप दे सकता है इसलिए आभारी रहें और अपने दृष्टिकोण में बदलाव देखें।
हमेशा हर-चीज और हर-पल अपने मालिक,अपने गुरुदेव का कृतज्ञ होना चाहिए।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास
वक्त भी सिखाता है और
टीचर भी
बस फर्क इतना है कि
टीचर सिखाकर इम्तिहान लेता है और वक्त
इम्तियाज लेकर सिखाता है
ॐ नमः शिवाय श्री शनिदेवाय
नमः जय हनुमान जी महाराज
🚩🚩🌹🌹🪻🌹🌹🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ शनिवार #शनिदेव













