*🌹ज़िदगी इक किराये का घर है🌹*..
🙏🙏🙏
मैं कल अपनी पुरानी सोसाइटी, जहां पहले मैं रहता था, में गया था। वहां मैं जब भी जाता हूं, मेरी कोशिश होती है कि अधिक से अधिक लोगों से मेल मुलाकात हो जाए।
जब अपनी पुरानी सोसाइटी में पहुंच कर गार्ड से बात कर रहा था कि तभी मोटरसाइकिल पर एक आदमी आया और उसने मुझे झुक कर प्रणाम किया। “भैया, प्रणाम।”
मैंने पहचानने की कोशिश की। बहुत पहचाना-पहचाना तो लग रहा था। पर नाम याद नहीं आ रहा था। उसी ने कहा-"भैया पहचाने नहीं? हम बाबू हैं, बाबू। उधर वाली आंटीजी के घर काम करते थे।"
मैंने पहचान लिया। अरे ये तो बाबू है। सी ब्लॉक वाली आंटीजी का नौकर।
“अरे बाबू, तुम तो बहुत तंदुरुस्त हो गए हो। आंटी कैसी हैं?”
बाबू हंसा-“आंटी तो गईं।
“गईं ? कहां गईं ? उनका बेटा विदेश में था, वहीं चली गईं क्या? ठीक ही किया, उन्होंने। यहां अकेले रहने का क्या मतलब था ?”
अब बाबू थोड़ा गंभीर हुआ। उसने हंसना रोक कर कहा-“भैया, आंटीजी भगवान जी के पास चली गईं।”
“भगवान जी के पास? ओह! कब ?”
बाबू ने धीरे से कहा-“दो महीने हो गए।”
“क्या हुआ था आंटी को ?”
“कुछ नहीं। बुढ़ापा ही बीमारी थी। उनका बेटा भी बहुत दिनों से नहीं आया था। उसे याद करती थीं। पर अपना घर छोड़ कर वहां नहीं गईं। कहती थीं कि यहां से चली जाऊंगी तो कोई मकान पर कब्जा कर लेगा। बहुत मेहनत से ये मकान बना है।” “हां, वो तो पता ही है। तुमने खूब सेवा की। अब तो वो चली गईं। अब तुम क्या करोगे ?”
अब बाबू फिर हंसा,"मैं क्या करुंगा भैया ? पहले अकेला था। अब गांव से फैमिली को ले आया हूं। दोनों बच्चे और पत्नी अब यहीं रहते हैं।”
“यहीं मतलब उसी मकान में ?" “जी भैया। आंटी के जाने के बाद उनका बेटा आया था। एक हफ्ता रुक कर चले गए। मुझसे कह गए हैं कि घर देखते रहना। चार कमरे का इतना बड़ा फ्लैट है। मैं अकेला कैसे देखता? भैया ने कहा कि तुम यहीं रह कर घर की देखभाल करते रहो। वो वहां से पैसे भी भेजने लगे हैं। और सबसे बड़ी बात ये है कि मेरे बच्चों को यहीं स्कूल में एडमिशन मिल गया है। अब आराम से हूं। कुछ-कुछ काम बाहर भी कर लेता हूं। भैया सारा सामान भी छोड़ गए हैं। कह रहे थे कि दूर देश ले जाने में कोई फायदा नहीं।”
मैं हैरान था। बाबू पहले साइकिल से चलता था। आंटी थीं तो उनकी देखभाल करता था। पर अब जब आंटी चली गईं तो वो चार कमरे के मकान में आराम से रह रहा है।आंटी अपने बेटे के पास नहीं गईं कि कहीं कोई मकान पर कब्जा न कर ले।
बेटा मकान नौकर को दे गया है, ये सोच कर कि वो रहेगा तो मकान बचा रहेगा।
मुझे पता है, मकान बहुत मेहनत से बनते हैं। पर ऐसी मेहनत किस काम की, जिसके आप सिर्फ पहरेदार बन कर रह जाएं?
मकान के लिए आंटी बेटे के पास नहीं गईं। मकान के लिए बेटा मां को पास नहीं बुला पाया।
सच कहें तो हम लोग मकान के पहरेदार ही हैं। जिसने मकान बनाया वो अब दुनिया में ही नहीं है। जो हैं, उसके बारे में तो बाबू भी जानता है कि वो अब यहां कभी नहीं आएंगे।
मैंने बाबू से पूछा कि,"तुमने भैया को बता दिया कि तुम्हारी फैमिली भी यहां आ गई है?"
“इसमें बताने वाली क्या बात है भैया? वो अब कौन यहां आने वाले हैं? और मैं अकेला यहां क्या करता? जब आएंगे तो देखेंगे। पर जब मां थीं तो आए नहीं, उनके बाद क्या आना? मकान की चिंता है, तो वो मैं कहीं लेकर जा नहीं रहा। मैं तो देखभाल ही कर रहा हूं।” बाबू फिर हंसा।
बाबू से मैंने हाथ मिलाया। मैं समझ रहा था कि बाबू अब नौकर नहीं रहा। वो मकान मालिक हो गया है।
हंसते-हंसते मैंने बाबू से कहा “भाई, जिसने ये बात कही है कि मूर्ख आदमी मकान बनवाता है, बुद्धिमान आदमी उसमें रहता है, उसे ज़िंदगी का कितना गहरा तज़ुर्बा रहा होगा।
बाबू ने धीरे से कहा,“साहब, सब किस्मत की बात है।” मैं वहां से चल पड़ा था ये सोचते हुए कि सचमुच सब किस्मत की ही बात है।
लौटते हुए मेरे कानों में बाबू की हंसी गूंज रही थी...“मैं मकान लेकर कहीं जाऊंगा थोड़े ही?मैं तो देखभाल ही कर रहा हूं।”
मैं सोच रहा था, मकान लेकर कौन जाता है ? सब देखभाल ही तो करते हैं।
आज यह किस्सा पढ़कर लगा कि हम सभी क्या कर रहे है .... जिन्दगी के चार दिन है मिल जुल कर हँसतें हँसाते गुजार ले ...क्या पता कब बुलावा आ जाए.... क्योकि इस धरा का, इस धरा पर, सब यहीं धरा रह जायेगा....
यही जीवन की सच्चाई हैं ...
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #👍 डर के आगे जीत👌 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🙏 प्रेरणादायक विचार #👌 आत्मविश्वास
मुझे नहीं पता पाप और पुण्य क्या होते हैं..
बस इतना पता है जिस कार्य
से किसी का दिल दुखे वो पाप
और किसी के चेहरे पर खुशी
आए वो पुण्य ..
ॐ श्री सूर्य देवाय नमः
🚩🚩🌹🌹🌻🌹🌹🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव
*🌹शुक्राना🌹*
🙏🙏🙏
एक पक्षी था जो रेगिस्तान में रहता था, बहुत बीमार, कोई पंख नहीं, खाने-पीने के लिए कुछ नहीं, रहने के लिए कोई आश्रय नहीं था।
एक दिन एक कबूतर उधर से गुजर रहा था, उस बीमार और दुःखी पक्षी ने कबूतर को रोका और पूछा- "तुम कहाँ जा रहे हो?
उसने उत्तर दिया- "मैं स्वर्ग जा रहा हूँ"
बीमार पक्षी ने कहा- "कृपया मेरे लिए पता करें, मेरी पीड़ा कब तक समाप्त हो जाएगी?" कबूतर ने कहा-"निश्चित ही मैं पता करूँगा।"
कबूतर ने इतना कह कर बीमार पक्षी से विदा ली। कबूतर स्वर्ग पहुंचा और प्रवेश द्वार पर देवदूत को बीमार पक्षी का संदेश दिया।
देवदूत ने कहा- "पक्षी के जीवन में अगले सात वर्ष तक इसी तरह कष्ट लिखा हुआ है उसे ऐसे ही सात वर्ष तक कष्ट भोगना पड़ेगा, तब तक उसके जीवन में कोई खुशी नहीं है।
कबूतर ने कहा- "जब बीमार पक्षी यह सुनेगा तो वह निराश हो जाएगा क्या आप इसके लिए कोई उपाय बता सकते हैं।
देवदूत ने उत्तर दिया-"उससे कहो कि इस वाक्य को हमेशा बोलता रहे...
"इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्रगुजर हुँ "।
वापसी पर जब वह बीमार पक्षी कबूतर से फिर मिला तो कबूतर ने उस स्वर्गदूत का संदेश दिया
सात-आठ दिनों के बाद कबूतर जब फिर उधर से गुजर रहा था, तब उसने देखा कि पक्षी बहुत खुश था उसके शरीर पर पंख उग आए थे। उस रेगिस्तानी इलाके में एक छोटा सा पौधा लगा हुआ था, वहां पानी का एक छोटा सा तालाब भी बना हुआ था पक्षी खुश होकर नाच रहा था कबूतर चकित था देवदूत ने कहा था कि अगले सात वर्षों तक पक्षी के लिए कोई खुशी नहीं होगी इस सवाल को ध्यान में रखते हुए कबूतर स्वर्ग के द्वार पर यू देवदूत से मिलने पहुंच गया।
कबूतर ने देवदूत से अपने मन में उठते हुए सवालों का समाधान पूछा तो देवदूत ने उत्तर दिया- "हाँ..!! यह सच है कि पक्षी की जिन्दगी में सात साल तक कोई खुशी नहीं लिखी थी लेकिन क्योंकि पक्षी हर स्थिति में "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्रिया ।" बोल रहा था और भगवान का नामस्मरण कर रहा था, इस कारण उसका जीवन बदल गया
जब पक्षी गर्म रेत पर गिर गया तो उसने कहा- "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है।"जब यह उड़ नहीं सकता था तो उसने कहा-"इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है।"
जब उसे प्यास लगी और आसपास पानी नहीं था, तो उसने कहा- "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है।"
जो भी स्थिति हो, पक्षी दोहराता रहा- "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है।" और इसलिए सात साल सात दिनों में समाप्त हो गए
जब मैंने यह कहानी सुनी तो मैंने अपने जीवन को महसूस करने सोचने स्वीका करने और देखने के तरीके में एक जबरदस्त बदलाव महसूस किया..
मैंने अपने जीवन में इस को अपना लिया "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है। "इसने मुझे मेरे विचार को, मेरे जीवन में शिफ्ट करने में मदद की, जो मेरे पास नहीं है।
प्रेरणास्पद कथाएं हेतु जुड़े
अगर मेरा सिर दर्द करता है, तो मुझे लगता है कि मेरा बाकी शरीर पूरी तरह से ठीक और स्वस्थ है और मैं कहता हूं- "इन सब के लिए भगवान तेरा शुक्र है" और मुझे लगता है कि सिरदर्द मुझे बिल्कुल परेशान नहीं करता।
उसी तरह मैंने अपने रिश्तों
(चाहे परिवार, दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी) के
वित्त, सामाजिक जीवन, व्यवसाय और हर उस चीज का उपयोग करना शुरू कर दिया, जिसके साथ मैं संबंधित हो सकता हूं। जिसके साथ भी मैं संपर्क में आया, मैंने इस कहानी को सबके साथ साझा किया और इस कहानी से उनके व्यवहार में भी एक बड़ा बदलाव आया!
इस भगवान के शुक्राने का मेरे जीवन पर वास्तव में गहरा प्रभाव पड़ा, मुझे लगने लगा कि मैं कितना धन्य हूँ, मैं कितना खुश हूँ, जीवन कितना अच्छा है।
इस संदेश को साझा करने का उद्देश्य हम सभी को इस बारे में अवगत कराना है कि--
ATTITUDE OF GRATITUDE
( कृतज्ञता का मनोभाव होना चाहिए)
कितना शक्तिशाली है यह हमारे जीवन को नया रूप दे सकता है इसलिए आभारी रहें और अपने दृष्टिकोण में बदलाव देखें।
हमेशा हर-चीज और हर-पल अपने मालिक,अपने गुरुदेव का कृतज्ञ होना चाहिए।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास
वक्त भी सिखाता है और
टीचर भी
बस फर्क इतना है कि
टीचर सिखाकर इम्तिहान लेता है और वक्त
इम्तियाज लेकर सिखाता है
ॐ नमः शिवाय श्री शनिदेवाय
नमः जय हनुमान जी महाराज
🚩🚩🌹🌹🪻🌹🌹🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ शनिवार #शनिदेव
बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ
🌼🌼🌼🌼
🙏हमेशा शांत मन, निर्मल विचार और खुशहाल जीवन की ओर बढ़ते रहें।🙏🙏
🌿🌻🪻🌹🌷💐🌼 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏 नमो बुद्धाय 🙏 #🧘♂️मेडिटेशन मंत्र #🙏बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं 🌸 #✨ बुद्ध के स्टेटस 📝
ॐ विष्णुप्रियायै नमो नमः
🙏🙏🙏
परिस्थितियां हमें भीतर से मजबूत बना देती है,,, जीवन का सत्य यही है,,, ये बदलती रहती हैं,,,और मन भी स्थायी नहीं है,,,इसलिए जब मन भारी हो,,,,तो उसे दबाने के बजाय उसे स्वीकार करें,,,! क्योंकि हर पीड़ा अपने साथ एक गहरी समझ लेकर आती है,,,जो समय के साथ मन को स्थिर और शांत बना देती है,,,!
ॐ विश्वजनन्यै नमो नमः
🪷🌸💐🌷🌹🌻🌼🪻 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ शुक्रवार #🙏माँ लक्ष्मी महामंत्र🌺
*🌹सबसे कीमती उपहार🌹* 🙏🙏🙏
*राजा महेन्द्रनाथ हर वर्ष अपने राज्य में एक प्रतियोगिता का आयोजन करते थे, जिसमें हजारों की संख्या में प्रतियोगी भाग लिया करते थे और विजेता को पुरुस्कार से सम्मानित किया जाता है।*
*एक दिन राजा ने सोचा कि प्रजा की सेवा को बढ़ाने के लिए उन्हें एक राजपुरूष की आवश्यकता है जो बुद्धिमान हो और समाज के कार्य में अपना योगदान दे सके। उन्होंने राजपुरूष की नियुक्ति के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित करने का निर्णय लिया।*
*दूर-दूर से इस बार लाखों की संख्या में प्रतियोगी आये हुए थे।*
*राजा ने इस प्रतियोगिता के लिए एक बड़ा-सा उद्यान बनवाया था, जिसमें राज-दरबार की सभी कीमती वस्तुएं थीं, हर प्रकार की सामग्री उपस्थित थी, लेकिन किसी भी वस्तु के सामने उसका मूल्य निश्चित नहीं किया गया था।*
*राजा ने प्रतियोगिता आरम्भ करने से पहले एक घोषणा की, जिसके अनुसार जो भी व्यक्ति इस उद्यान से सबसे कीमती वस्तु लेकर राजा के सामने उपस्थित होगा उसे ही राजपुरूष के लिए स्वीकार किया जाएगा। प्रतियोगिता आरम्भ हुई।*
*सभी उद्यान में सबसे अमूल्य वस्तु तलाशने में लग गए, कई हीरे-जवाहरात लाते, कई सोने-चांदी, कई लोग पुस्तकें, तो कोई भगवान की मूर्ति, और जो बहुत गरीब थे वे रोटी, क्योंकि उनके लिए वही सबसे अमूल्य वस्तु थी।*
*सब अपनी क्षमता के अनुसार मूल्य को सबसे ऊपर आंकते हुए राजा के सामने उसे प्रस्तुत करने में लगे हुए थे। तभी एक नौजवान राजा के सामने खाली हाथ उपस्थित हुआ।*
*राजा ने सबसे प्रश्न करने के उपरान्त उस नौजवान से प्रश्न किया- अरे! नौजवान, क्या तुम्हें उस उद्यान में कोई भी वस्तु अमूल्य नजर नहीं आई? तुम खाली हाथ कैसे आये हो?*
*“राजन! मैं खाली हाथ कहाँ आया हूँ, मैं तो सबसे अमूल्य धन उस उद्यान से लाया हूँ।”* – *‘नौजवान बोला।*
*“तुम क्या लाये हो?”- राजा ने पूछा।*
*“मैं संतोष लेकर आया हूँ महाराज!”- नौजवान ने कहा।*
*क्या, “संतोष”, इनके द्वारा लाये गए इन अमूल्य वस्तुओं से भी मूलयवान है?- राजा ने पुनः प्रश्न किया।*
*जी हाँ राजन! इस उद्यान में अनेकों अमूल्य वस्तुएं हैं पर वे सभी मनुष्य को क्षण भर के लिए सुख की अनुभूति प्रदान कर सकती हैं। इन वस्तुओं को प्राप्त कर लेने के बाद मनुष्य कुछ और ज्यादा पाने की इच्छा मन में उत्पन्न कर लेता है अर्थात इन सबको प्राप्त करने के बाद इंसान को ख़ुशी तो होगी लेकिन वह क्षण भर के लिए ही होगी। लेकिन जिसके पास संतोष का धन है, संतोष के हीरे-जवाहरात हैं वही मनुष्य अपनी असल जिंदगी में सच्चे सुख की अनुभूति और अपने सभी भौतिक इच्छाओं पर नियंत्रण कर सकेगा।” – नौजवान ने शांत स्वर में उत्तर देते हुए कहा।*
*नौजवान को लाखों लोगों में चुना गया और उसे राजपुरूष के लिए सम्मानित किया गया....*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #👫 हमारी ज़िन्दगी #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #☝ मेरे विचार #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
*ॐ नमो भगवते वासुदेवाय*
🙏🌹💐🌷🌸🌺🪷
*हे प्रभु!*
जो पूर्व जन्म के कर्मानुसार आज मुझे दिया है, वही पर्याप्त है*॥
🙏*जय हो महाप्रभुजी*🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु😇
*🌹प्रोफेसर की सीख🌹*
🙏🙏🙏
*प्रोफ़ेसर साहब बड़े दिनों बाद आज शाम को घर लौटते वक़्त अपने दोस्त नवीन से मिलने उसकी दुकान पर गए।*
*इतने दिनों बाद मिल रहे दोस्तों का उत्साह देखने लायक था…दोनों ने एक दुसरे को गले लगाया और बैठ कर गप्पें मारने लगे।*
*चाय-वाय पीने के कुछ देर बाद प्रोफ़ेसर बोले, “यार एक बात बता, पहले मैं जब भी आता था तो तेरी दुकान में ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी और हम बड़ी मुश्किल से बात कर पाते थे। लेकिन आज बस इक्का-दुक्का ग्राहक ही दिख रहे हैं और तेरा स्टाफ भी पहले से कम हो गया है…”*
*दोस्त मजाकिया लहजे में बोला, “अरे कुछ नहीं, हम इस मार्केट के पुराने खिलाड़ी हैं…आज धंधा ढीला है…कल फिर जोर पकड़ लेगा!”*
*इस पर प्रोफ़ेसर साहब कुछ गंभीर होते हुए बोले, “देख भाई, चीजों को इतना हलके में मत ले…मैं देख रहा हूँ कि इसी रोड पर कपड़े की तीन-चार और दुकाने खुल गयी हैं, कम्पटीशन बहुत बढ़ गया है…और ऊपर से…”*
*प्रोफ़ेसर साहब अपनी बात पूरी करते उससे पहले ही, दोस्त उनकी बात काटते हुए बोला, “अरे ये दुकाने आती-जाती रहती हैं, इनसे कुछ फरक नहीं पड़ता।”*
*प्रोफ़ेसर साहब कॉलेज टाइम से ही अपने दोस्त को जानते थे और वो समझ गए कि ऐसे समझाने पर वो उनकी बात नहीं समझेगा।*
*इसके बाद उन्होंने अगले रविवार, बंदी के दिन; दोस्त को चाय पे बुलाया।*
*दोस्त, तय समय पर उनके घर पहुँच गया।*
*कुछ गपशप के बाद प्रोफ़ेसर साहब उसे अपने घर में बनी एक प्राइवेट लैब में ले गए और बोले, “देख यार! आज मैं तुझे एक बड़ा ही इंटरस्टिंग एक्सपेरिमेंट दिखता हूँ..”*
*प्रोफ़ेसर साहब ने एक जार में गरम पानी लिया और उसमे एक मेंढक डाल दिया। पानी से सम्पर्क में आते ही मेंढक खतरा भांप गया और कूद कर बाहर भाग गया।*
*इसके बाद प्रोफ़ेसर साहब ने जार से गरम पानी फेंक कर उसमे ठंडा पानी भर दिया, और एक बार फिर मेंढक को उसमे डाल दिया। इस बार मेंढक आराम से उसमे तैरने लगा।*
*तभी प्रोफ़ेसर साहब ने एक अजीब सा काम किया, उन्होंने जार उठा कर एक गैस बर्नर पर रख दिया और बड़ी ही धीमी आंच पर पानी गरम करने लगे।*
*कुछ ही देर में पानी गरम होने लगा। मेंढक को ये बात कुछ अजीब लगी पर उसने खुद को इस तापमान के हिसाब से एडजस्ट कर लिया…इस बीच बर्नर जलता रहा और पानी और भी गरम होता गया….पर हर बार मेढक पानी के टेम्परेचर के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर लेता और आराम से पड़ा रहता….लेकिन उसकी भी सहने की एक क्षमता थी! जब पानी काफी गरम हो गया और खौलने को आया तब मेंढक को अपनी जान पर मंडराते खतरे का आभास हुआ…और उसने पूरी ताकत से बाहर छलांग लगाने की कोशिष की….पर बार-बार खुद को बदलते तापमान में ढालने में उसकी काफी उर्जा लग चुकी थी और अब खुद को बचाने के लिए न ही उसके पास शक्ति थी और न ही समय…देखते-देखते पानी उबलने लगा और मेंढक की मौत हो गयी।*
*एक्सपेरिमेंट देखने के बाद दोस्त बोला-*
*यार तूने तो मेंढक की जान ही ले ली…खैर, ये सब तू मुझे क्यों दिखा रहा है?*
*प्रोफ़ेसर बोले, “ मेंढक की जान मैंने नहीं ली…उसने खुद अपनी जान ली है। अगर वो बिगड़ते हुए माहौल में बार-बार खुद को एडजस्ट नहीं करता बल्कि उससे बचने का कुछ उपाय सोचता तो वो आसानी से अपनी जान बचा सकता था। और ये सब मैं तुझे इसलिए दिखा रहा हूँ क्योंकि कहीं न कहीं तू भी इस मेढक की तरह व्यवहार कर रहा है।*
*तेरा अच्छा-ख़ासा बिजनेस है पर तू चेंज हो रही मार्केट कंडीशनस की तरफ ध्यान नहीं दे रहा, और बस ये सोच कर एडजस्ट करता जा रहा है कि आगे सब अपने आप ठीक हो जाएगा…पर याद रख अगर तू आज ही हो रहे बदलाव के ऐकौर्डिंग खुद को नहीं चेंज करेगा तो हो सकता है इस मेंढक की तरह कल को संभलने के लिए तेरे पास ना एनर्जी हो और ना ही समय!”*
*प्रोफ़ेसर की सीख ने दोस्त की आँखें खोल दीं, उसने प्रोफ़ेसर साहब को गले लगा लिया और वादा किया कि एक बार फिर वो मार्केट लीडर बन कर दिखायेगा।
*शिक्षा*
*दोस्तों, प्रोफ़ेसर साहब के उस दोस्त की तरह बहुत से लोग अपने आस-पास हो रहे बदलाव की तरफ ध्यान नहीं देते। लोग जिन skills के कारण नोकरी के लिए चुने जाते हैं बस उसी पर अटके रहते हैं खुद को update नहीं करते…और जब company में layoffs होते हैं तो उन्हें ही सबसे पहले निकाला जाता है…लोग जिस ढर्रे पर 10 साल पहले व्यवसाय कर रहे होते हैं बस उसी को पकड़कर बैठे रहते हैं और देखते-देखते नए खिलाड़ी सारा बाजार कवर कर लेते हैं!*
*यदि आप भी खुद को ऐसे लोगों से सम्बंधित कर पा रहे हैं तो संभल जाइए और इस कहानी से सीख लेते हुए मजबूत बनिए और आस-पास हो रहे बदलावों के प्रति सतर्क रहिये, ताकि बदलाव की बड़ी से बड़ी आंधी भी आपकी जड़ों की हिला न पाएं!*
*बिलकुल सही समय के साथ बदलाव बहुत जरूरी है, समय के साथ न बदलने का क्या नुक्सान हो सकता है इसका सबसे बड़ा Example आपके सामने Yahoo ही है, ये एक समय Google से भी आगे था लेकिन समय के साथ न बदलने के कारण आज उसकी दसा आप सब के सामने है*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #☝ मेरे विचार #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
कोई कितनी भी चाले क्यों न चल ले,अंत में परिणाम उसी के हाथ में होता है,जिसकी मर्जी से यह संसार चलता है,योजना आप बनाते है,पर निर्णय सदैव श्री बप्पा का ही होता है...
ॐ श्री गणेशायः नमः
🪷🌸🌺💐🌷🌹🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ बुधवार #श्री गणेश













