जरा रूपं हरति धैर्यमाशा
मृत्यु: प्रणान् धर्मचर्यामसूया ।
कामो ह्रियं वृत्तमनार्यसेवा
क्रोधः श्रियं सर्वमेवाभिमान: ॥
[ महाभारत , उद्योग पर्व ३७/८ ]
अर्थात 👉🏻 वृद्धावस्था रूप का , आशा धैर्य का , मृत्यु प्राणों का , दूसरों में दोष दृष्टि धर्माचरण का , काम लज्जा का , नीच पुरुषों की सेवा सदाचार का , क्रोध लक्ष्मी का तथा अभिमान सर्वस्व का ही नाश कर देता है ।
🌄🌄 प्रभातवंदन 🌄🌄
#ॐ नमः शिवाय 🙏🌺 #ॐ नमः शिवाय


