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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - जेते बदन सृसटि सभा धरैए आप्रु आपनी बूझ उचारैएा तुम सभही ते रहत निरालख्चा] भैद जानत बेद BR 81741 HoT हे भाई! सृष्टि में जितने भी जीव जंतु या मनुष्य शरीर धारण किए गए हैं, वे सब अपनी अपनी बुद्धि और समझ के अनुसार परमात्मा के स्वरूप का वर्णन करते हैं। यानी हर कोई अपनी क्षमता और लगे ज्ञान के दायरे में रहकर परमात्मा को समझने और पुकारने की कोशिश करता है। जैसे हर कोई अपनी बूझ समझ के अनुसार ईश्वर को पुकारता है, तो इसका मतलब है कि किसी का भी पूर्ण dా ज्ञान नहीं है। परमात्मा सबकी परिभाषाओं से बहुत बड़ा है। लेकिन वास्तविकता यह है कि परमात्मा  इन सबसे निरालम अलग हैंl वह किसी बंधन में नहीं हैं। वेदों के रहस्य को जानने वाले विद्वान और दुनिया के बड़़े ्बड़े ज्ञानी भी यही मानते हैं कि परमात्मा का भाणा कोई अंत पाना असंभव है, परमात्मा सबके भीतर होकर भी सबसे न्यारे हैं। वह हम सबके बहुत करीब है, हमारे हर कर्म को जानता है, विकारों या माया के बंधनों से अछूता है। जैसे सूर्य लेकिन वह ' हमारे  की रोशनी कीचड़ पर भी पड़ती है, पर कीचड़ सूर्य को गंदा नहीं कर सकता | जेते बदन सृसटि सभा धरैए आप्रु आपनी बूझ उचारैएा तुम सभही ते रहत निरालख्चा] भैद जानत बेद BR 81741 HoT हे भाई! सृष्टि में जितने भी जीव जंतु या मनुष्य शरीर धारण किए गए हैं, वे सब अपनी अपनी बुद्धि और समझ के अनुसार परमात्मा के स्वरूप का वर्णन करते हैं। यानी हर कोई अपनी क्षमता और लगे ज्ञान के दायरे में रहकर परमात्मा को समझने और पुकारने की कोशिश करता है। जैसे हर कोई अपनी बूझ समझ के अनुसार ईश्वर को पुकारता है, तो इसका मतलब है कि किसी का भी पूर्ण dా ज्ञान नहीं है। परमात्मा सबकी परिभाषाओं से बहुत बड़ा है। लेकिन वास्तविकता यह है कि परमात्मा  इन सबसे निरालम अलग हैंl वह किसी बंधन में नहीं हैं। वेदों के रहस्य को जानने वाले विद्वान और दुनिया के बड़़े ्बड़े ज्ञानी भी यही मानते हैं कि परमात्मा का भाणा कोई अंत पाना असंभव है, परमात्मा सबके भीतर होकर भी सबसे न्यारे हैं। वह हम सबके बहुत करीब है, हमारे हर कर्म को जानता है, विकारों या माया के बंधनों से अछूता है। जैसे सूर्य लेकिन वह ' हमारे  की रोशनी कीचड़ पर भी पड़ती है, पर कीचड़ सूर्य को गंदा नहीं कर सकता | - ShareChat